# नागौर में मूंछों वाले नाचते बालाजी से लेकर एक आंख वाली प्रतिमा तक, जानिए इन प्रसिद्ध धामों का इतिहास

> राजस्थान के नागौर जिले में भगवान हनुमान के कई प्राचीन और अनोखे मंदिर स्थित हैं, जहां मूंछों वाले नाचते बालाजी और एक आंख वाली प्रतिमा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/nagaur-men-munchhon-vale-nachate-balaji-se-lekara-eka-ankha-vali-pratima-taka-janie-ina-prasiddha-dhamon-ka-itihasa-52669 · **Language:** Hindi
**Tags:** नागौर, हनुमान मंदिर, राजस्थान पर्यटन, सावंतगढ़, मेड़ता सिटी, धार्मिक स्थल

राजस्थान की पावन धरा अपनी ऐतिहासिक विरासतों के साथ-साथ अद्भुत आस्था केंद्रों के लिए भी पूरे देश में जानी जाती है। नागौर जिले में भगवान हनुमान के कई ऐसे धाम हैं, जिनकी मूर्तियां और उनसे जुड़ी मान्यताएं देश भर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। यहां कहीं मूंछों वाले नाचते स्वरूप की पूजा की जाती है, तो कहीं वीर राजाओं द्वारा स्थापित अनोखी प्रतिमाएं भक्तों की आस्था का केंद्र बनी हुई हैं।

## सावंतगढ़ में मूंछों वाले नाचते बालाजी
नागौर, नावां और कुचामन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव सावंतगढ़ में पवनपुत्र हनुमान का बेहद दुर्लभ मंदिर स्थित है। इस पावन स्थल पर स्थापित मूर्ति में भगवान हनुमान मूंछों के साथ नृत्य की मुद्रा में नजर आते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस दरबार में आकर बालाजी महाराज को नारियल भेंट करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। अपने तरह के इस अनोखे स्वरूप के दर्शन करने के लिए न केवल राजस्थान के विभिन्न इलाकों से, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

## राजा अमरसिंह राठौड़ द्वारा निर्मित एक आंख वाले हनुमान
नागौर शहर में बजरंगबली का एक अन्य प्रसिद्ध और विशिष्ट मंदिर स्थित है। इस तीर्थ स्थल का सबसे प्रमुख आकर्षण भगवान हनुमान की एक आंख वाली विशेष प्रतिमा है, जो सामान्य स्वरूपों से काफी भिन्न दिखाई देती है। जनश्रुतियों और क्षेत्रीय मान्यताओं के मुताबिक, इस मंदिर की स्थापना नागौर के पराक्रमी शासक राजा अमरसिंह राठौड़ ने करवाई थी। सदियों पुराने इस मंदिर में आज भी रोजाना भक्त संकटमोचन के दर्शन कर शीश नवाते हैं।

## डेह धाम में वीर हनुमान का आस्था केंद्र
नागौर जिले के डेह गांव में स्थित वीर हनुमान मंदिर को इलाके में श्रद्धापूर्वक डेह धाम के नाम से पुकारा जाता है। यह स्थल आसपास के समूचे क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र है। भक्त परिवार में खुशहाली, सुख-समृद्धि और विभिन्न कार्यों में सफलता की अरदास लेकर इस धाम में हाजिरी लगाते हैं। मंदिर से जुड़ी कई चमत्कारी कथाएं और जनश्रुतियां स्थानीय लोगों के बीच पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनी और सुनाई जाती हैं।

## मेड़ता सिटी में 500 वर्ष पुराना इमली वाले बालाजी मंदिर
मीरा नगरी के रूप में प्रसिद्ध मेड़ता सिटी में मीरा महल के समीप इमली वाले बालाजी का मंदिर अवस्थित है। स्थानीय निवासी श्याम बोराणा के अनुसार, इस पवित्र स्थल की नींव लगभग 500 वर्ष पूर्व एक सिद्ध संत ने रखी थी। मंदिर के निर्माण को लेकर एक रहस्यमयी घटना का उल्लेख भी मिलता है, जिसने जनमानस में इसके प्रति आस्था को और गहरा कर दिया है। विष्णु सागर सरोवर के किनारे स्थित होने की वजह से यह मंदिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से बड़ा महत्व रखता है।

## श्यामगढ़ की शिव बगीची में दक्षिण मुखी हनुमान
नागौर और कुचामन जिले के सीमांत क्षेत्र पर स्थित श्यामगढ़ की शिव बगीची में लगभग 45 साल पुरानी दक्षिण मुखी हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति अपने आकर्षक स्वरूप और चमत्कारी प्रभाव के लिए जानी जाती है। आश्रम के मुख्य पुजारी सर्वेश्वरदास महाराज पिछले कई सालों से शिव बगीची का प्रबंधन और संचालन कर रहे हैं। यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और प्रार्थना करते हैं।

## इसका आप पर असर
नागौर के इन प्रमुख धार्मिक स्थलों की जानकारी से राजस्थान जाने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा योजना बनाने में सीधी मदद मिलती है।

- **राजस्थान में:** राज्य के इन ऐतिहासिक व अनोखे मंदिरों के बारे में जानकर स्थानीय लोग और आस-पास के जिलों के श्रद्धालु दर्शन का कार्यक्रम बना सकते हैं। सावंतगढ़, मेड़ता और नागौर शहर के इन मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना के विशेष नियम और परंपराएं जानने को मिलती हैं।
- **भारत में:** देश भर से राजस्थान भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों और भक्तों को अपनी तीर्थ यात्रा में इन विशिष्ट मंदिरों को शामिल करने का अवसर मिलता है। अलग-अलग प्रतिमा स्वरूपों और 500 साल पुरानी विरासतों को देखने के इच्छुक यात्री सीधे इन स्थानों तक पहुंच सकते हैं।
- **स्थानीय अर्थव्यवस्था पर:** सावंतगढ़ और डेह जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आमद बढ़ने से स्थानीय छोटे व्यापारियों, फूल-नारियल विक्रेताओं और परिवहन साधनों को सहारा मिलता है। इससे ग्रामीण पर्यटन और क्षेत्रीय गतिविधियों को लगातार बढ़ावा मिलता है।
- **सांस्कृतिक जागरूकता:** नई पीढ़ी को राजा अमरसिंह राठौड़ और संत परंपराओं से जुड़े 500 वर्ष पुराने इतिहास के बारे में जानने का मौका मिलता है। इससे प्राचीन मूर्तिकला और लोक मान्यताओं के संरक्षण में मदद मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
नागौर और उसके आसपास के अंचलों में सदियों से चली आ रही भक्ति परंपराओं, क्षेत्रीय शासकों के संरक्षण और संतों के प्रवास के कारण इन अनूठे मंदिरों का निर्माण और विस्तार हुआ।

- **ऐतिहासिक संरक्षण और राजसी निर्माण:** नागौर के वीर शासक राजा अमरसिंह राठौड़ ने शहर में एक आंख वाले हनुमान मंदिर का निर्माण कराकर क्षेत्र में भक्ति और वीरता के संगम को स्थापित किया। ऐसे निर्माणों ने स्थानीय समुदाय को संगठित पूजा का प्रमुख केंद्र दिया।
- **संत परंपरा और रहस्यमयी घटनाएं:** मेड़ता सिटी में स्थित इमली वाले बालाजी मंदिर की स्थापना करीब 500 वर्ष पूर्व एक तपस्वी संत ने एक रहस्यमयी घटना के उपरांत की थी। विष्णु सागर के तट पर बना यह मंदिर धार्मिक चेतना का केंद्र बन गया।
- **विशिष्ट लोक मान्यताएं और मन्नतें:** सावंतगढ़ में मूंछ वाले नृत्य करते हनुमान जी के आगे नारियल अर्पित करने और डेह धाम में परिवार की सुख-शांति मांगने की परंपराएं स्थानीय अनुभवों से जुड़ी हैं। इन चमत्कारों और जनश्रुतियों ने इन स्थलों की ख्याति दूर-दूर तक पहुंचाई।
- **आश्रम संस्कृति और आध्यात्मिक केंद्र:** श्यामगढ़ की शिव बगीची में स्थापित दक्षिण मुखी हनुमान मूर्ति की सेवा मुख्य पुजारी सर्वेश्वरदास महाराज द्वारा लगातार की जा रही है। ऐसे आश्रमों के निरंतर संचालन से कई दशकों पुरानी प्रतिमाओं का आकर्षण बना रहता है।

## सवाल-जवाब

### 1. मूंछों वाले नाचते हनुमान जी का मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के नागौर-नावां-कुचामन क्षेत्र में स्थित सावंतगढ़ गांव में मौजूद है।

### 2. सावंतगढ़ मंदिर में मनोकामना पूरी करने के लिए क्या चढ़ाया जाता है?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सावंतगढ़ में बालाजी महाराज को नारियल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

### 3. नागौर शहर के एक आंख वाले हनुमान मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
इस मंदिर का निर्माण नागौर के प्रसिद्ध शासक राजा अमरसिंह राठौड़ द्वारा करवाया गया था।

### 4. डेह धाम किस जिले में स्थित है और इसका क्या महत्व है?
डेह धाम नागौर जिले के डेह गांव में स्थित वीर हनुमान मंदिर है, जहां लोग पारिवारिक सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करने आते हैं।

### 5. मेड़ता सिटी का इमली वाले बालाजी मंदिर कितना पुराना है?
स्थानीय निवासी श्याम बोराणा के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना लगभग 500 वर्ष पूर्व एक संत द्वारा की गई थी।

### 6. श्यामगढ़ की शिव बगीची में स्थित हनुमान जी की मूर्ति की क्या खासियत है?
श्यामगढ़ की शिव बगीची में 45 साल पुरानी दक्षिण मुखी हनुमान जी की मूर्ति स्थित है, जिसका संचालन मुख्य पुजारी सर्वेश्वरदास महाराज करते हैं।

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