# नागौर में खाद, बीज और डीजल के बढ़ते खर्चों के बीच किसानों का सहारा बनी सम्मान निधि

> खेती की बढ़ती लागत के बीच नागौर के काश्तकार सम्मान निधि की किस्त से जुताई, बीज, खाद और डीजल के खर्चे पूरे कर रहे हैं, साथ ही योजना की राशि बढ़ाने की मांग भी उठा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/nagaura-men-khada-bija-aura-dijala-ke-barhate-kharchon-ke-bicha-kisanon-ka-sahara-bani-sammana-nidhi-55802 · **Language:** Hindi
**Tags:** पीएम किसान सम्मान निधि, नागौर किसान, खेती की लागत, कृषि समाचार, खाद बीज डीजल, किसान योजना

खेती के बदलते दौर में फसलों की तैयारी से लेकर कटाई तक का सफर लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे दौर में राजस्थान के नागौर जिले में काश्तकारों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक अहम संबल बनकर सामने आई है। जुताई, बुवाई, उन्नत बीज, रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं के बढ़ते दामों ने खेती का बजट काफी बढ़ा दिया है। इस स्थिति में बैंक खातों में समय पर आने वाली सरकारी किस्त से स्थानीय किसानों को नकदी की किल्लत से फौरी तौर पर राहत मिल रही है और वे बुवाई के नाजुक मौकों पर जरूरी संसाधन जुटा पा रहे हैं।

## जुताई, बुवाई और ट्रैक्टर के ईंधन पर खर्च हो रही किस्त की रकम
नागौर क्षेत्र के काश्तकारों का स्पष्ट कहना है कि फसल चक्र की शुरुआत से ही पैसों की निरंतर दरकार बनी रहती है। खेत की पहली हकाई-जुताई से लेकर अंतिम सिंचाई तक नकद भुगतान की जरूरत पड़ती है। योजना से मिलने वाला पैसा हालांकि खेती के कुल खर्चों को अकेले वहन करने के लिए नाकाफी है, लेकिन यह ऐन वक्त पर बाजार से जरूरी कृषि इनपुट खरीदने में बेहद मददगार साबित होता है।

स्थानीय काश्तकार शंकर लाल यादव ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सम्मान निधि की रकम उनके लिए बुवाई के समय बड़ी मददगार बन जाती है। शंकर लाल यादव के अनुसार, वे इस राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से ट्रैक्टर में डीजल डलवाने, खेत की जुताई करवाने और बीज की व्यवस्था करने में करते हैं। उन्होंने साफ किया कि बुवाई के सीजन में नकद राशि हाथ में होना अनिवार्य होता है, क्योंकि ट्रैक्टर मालिक या ईंधन पंप पर उधारी चलना कठिन होता है। ऐसे महत्वपूर्ण मौकों पर यह सरकारी सहायता सीधे काम आ जाती है।

## बढ़ती महंगाई के बीच सम्मान निधि की राशि में इजाफे की उठ रही आवाज
शंकर लाल यादव का यह भी मानना है कि बीते कुछ समय में खेती की लागत बहुत तेजी से बढ़ी है। डीजल, बीज, खाद और कीटनाशक दवाओं की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी होने से साधारण किसानों पर आर्थिक दबाव कई गुना बढ़ गया है। उनका कहना है कि इस भारी महंगाई को देखते हुए सरकार को किसान सम्मान निधि की मौजूदा राशि में इजाफा करना चाहिए, ताकि अन्नदाता को खेती के बाकी जरूरी दायित्वों को समय पर पूरा करने में और ठोस संबल मिल सके।

## खेती की अनिवार्यताओं के साथ बची रकम से घरेलू जरूरतें भी पूरी
नागौर के एक अन्य काश्तकार मांगीलाल ने बताया कि योजना से मिलने वाले पैसों से वे अपनी जमीन के लिए खाद और प्रमाणित बीज का इंतजाम करते हैं। मांगीलाल के अनुसार, यदि खेती से संबंधित बुनियादी सामान जुटाने के बाद कुछ पैसे बच जाते हैं, तो उसका उपयोग वे परिवार की जरूरी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में कर लेते हैं।

मांगीलाल ने रेखांकित किया कि ग्रामीण परिवारों पर खेती की लागत संभालने के साथ-साथ परिवार का गुजारा चलाने की दोहरी जिम्मेदारी हमेशा बनी रहती है। दोनों मोर्चों पर लगातार नकद पूंजी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में यह सरकारी सहायता एक साथ खेती के बुनियादी इनपुट्स और घर के जरूरी घरेलू कामकाज दोनों में मददगार साबित होती है।

## बजट संतुलन के लिए किसानों ने रखी आर्थिक मदद बढ़ाने की बात
क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि आज के वक्त में खेती-किसानी करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा खर्चीला हो चुका है। फसल सुरक्षा के लिए रसायनों के स्प्रे, प्रमाणित बीजों के भाव, यूरिया-डीएपी की खरीद और सिंचाई के लिए डीजल का उपभोग लागत को तेजी से ऊपर ले जा रहा है। यही वजह है कि नागौर के काश्तकार एक सुर में सम्मान निधि की मौजूदा किस्त राशि को बढ़ाने की आवश्यकता जता रहे हैं, जिससे खेती के चक्र को बिना किसी आर्थिक अड़चन के समय पर पूरा किया जा सके।

## इसका आप पर असर
पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त से खेती की बढ़ती लागत के बीच किसानों को नकदी की तात्कालिक राहत मिल रही है।

- **भारत में:** देशभर के लाभार्थी किसानों को बुवाई के दौरान खाद, बीज और कीटनाशक खरीदने के लिए बैंक खाते में सीधी नकद सहायता मिल रही है। इससे उन्हें साहूकारों से महंगे ब्याज पर कर्ज लेने की मजबूरी से आंशिक राहत मिलती है।
- **नागौर में:** जिले के स्थानीय काश्तकार इस राशि का बड़ा हिस्सा ट्रैक्टर में डीजल भरवाने और खेत की जुताई के नकद भुगतान में लगा रहे हैं। इससे ऐन बुवाई के समय जुताई और खेत तैयार करने का काम बिना रुकावट पूरा हो पा रहा है।
- **घरेलू बजट पर:** खेती के सामान खरीदने के बाद बचने वाली राशि ग्रामीण परिवारों की जरूरी घरेलू खरीदारी में इस्तेमाल हो रही है। इससे किसान परिवारों को दैनिक खर्चों के संतुलन में अतिरिक्त मदद मिल जाती है।
- **नीतिगत मांग पर:** डीजल और कृषि इनपुट्स के दाम बढ़ने के कारण काश्तकार योजना की राशि में बढ़ोतरी की मांग उठा रहे हैं। यदि सरकार इस पर विचार करती है तो भविष्य में किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
खेती के संचालन में उपयोग होने वाले डीजल, खाद, बीज और कीटनाशकों की बढ़ती बाजार कीमतों के कारण किसानों की निर्भरता सरकारी सहायता पर बढ़ रही है।

- **लागत में भारी इजाफा:** ट्रैक्टर ईंधन, प्रमाणित बीजों और कृषि रसायनों की कीमतें लगातार बढ़ने से प्रति बीघा खेती का खर्च बढ़ गया है। नकदी की कमी के चलते बुवाई के सीजन में किसानों को तुरंत पैसे की दरकार रहती है।
- **नकद भुगतान की अनिवार्यता:** खेत की हकाई, जुताई और डीजल खरीद जैसे कार्यों में उधारी नहीं चलती और तत्काल नकद देना पड़ता है। सम्मान निधि की किस्त ठीक इसी समय किसानों को जरूरी कैश लिक्विडिटी उपलब्ध कराती है।
- **दोहरे खर्चों का दबाव:** ग्रामीण परिवारों को एक ही समय में खेत की तैयारी के साथ-साथ घर-परिवार की मूलभूत जरूरतें भी पूरी करनी होती हैं। इस दोहरे आर्थिक दबाव के चलते किसान इस राशि का उपयोग दोनों मोर्चों पर कर रहे हैं और योजना की रकम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. नागौर के किसान सम्मान निधि की राशि का मुख्य रूप से किस काम में उपयोग कर रहे हैं?
नागौर के किसान इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से खेत की जुताई करवाने, ट्रैक्टर में डीजल भरवाने, बीज, खाद और कीटनाशक दवाइयां खरीदने में कर रहे हैं।

### 2. किसान शंकर लाल यादव ने सम्मान निधि के खर्च को लेकर क्या बताया?
शंकर लाल यादव ने बताया कि वे इस पैसे का इस्तेमाल खेत की जुताई, ट्रैक्टर के डीजल और बुवाई के लिए बीज खरीदने में करते हैं।

### 3. किसान मांगीलाल सम्मान निधि की बची हुई राशि का क्या करते हैं?
मांगीलाल ने बताया कि खेत के लिए खाद-बीज खरीदने के बाद जो पैसे बचते हैं, उनका उपयोग वे घर के जरूरी कामकाज और घरेलू जरूरतों में करते हैं।

### 4. किसानों ने सरकार से सम्मान निधि को लेकर क्या मांग रखी है?
डीजल, खाद, बीज और कृषि दवाओं की बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों ने सरकार से सम्मान निधि की राशि में बढ़ोतरी करने की मांग की है।

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