नागपुर की दो सगी बहनों ने छोड़ा भौतिक सुख, करौली में आध्यात्मिक मार्ग पर बढ़ाया कदम महाराष्ट्र के नागपुर की दो सगी बहनों, कविता और प्रिया ने सुख-सुविधाओं से भरे परिवार से होने के बावजूद सांसारिक मोहमाया त्यागकर आध्यात्मिकता का मार्ग चुन लिया है। अब दोनों बहनें राजस्थान के करौली में ब्रह्माकुमारी बनकर लोगों को राजयोग और ईश्वरीय ज्ञान का संदेश दे रही हैं। जिस पड़ाव पर युवा अपने करियर, बेहतर नौकरी, व्यक्तिगत रिश्तों और उज्ज्वल भविष्य के ताने-बाने बुनते हैं, ठीक उसी दौर में महाराष्ट्र के नागपुर से ताल्लुक रखने वाली दो सगी बहनों ने भौतिक दुनिया की चमक-दमक से किनारा कर लिया। तमाम सुख-सुविधाओं से लैस परिवार में पली-बढ़ीं कविता और प्रिया ने अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद अपना पूरा अस्तित्व ईश्वरीय सेवा की तरफ मोड़ दिया है। ब्रह्मकुमारी के रूप में करौली में दे रहीं ज्ञान वर्तमान समय में ये दोनों बहनें ब्रह्माकुमारी बहनों की भूमिका निभाते हुए राजस्थान के करौली जिले में सक्रिय हैं। यहाँ वे आमजन को आत्मा और परमात्मा के अटूट बंधन से परिचित करा रही हैं, साथ ही राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक शिक्षा का प्रसार कर रही हैं। दोनों का स्पष्ट तौर पर यही कहना है कि अब उनके पास कोई निजी या व्यक्तिगत महत्वकांक्षा शेष नहीं बची है। उनके जीवन का इकलौता संकल्प सर्वशक्तिमान का पावन संदेश ज्यादा से ज्यादा मानव आत्माओं तक प्रसारित करना और अशांत मन को शांति का अनुभव कराना है। पढ़ाई के बाद चुनी सांसारिक जीवन से अलग राह आज की पीढ़ी में शिक्षा समाप्त होते ही युवाओं का मुख्य लक्ष्य किसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी पाना, उच्च करियर बनाना और भौतिक सफलता की सीढ़ियां चढ़ना होता है। इसके विपरीत, कविता और प्रिया ने अपने जीवन के लिए एक बिल्कुल अनूठा और अलग रास्ता चुना। दोनों ने अपनी पढ़ाई मुकम्मल की और बिना किसी संकोच के आध्यात्मिक ज्ञान के मार्ग पर पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया। परिवार के संस्कारों से मिला प्रेरणा का आधार छोटी बहन प्रिया बताती हैं कि उनके माता-पिता पहले से ही इस आध्यात्मिक मार्ग से गहराई से जुड़े हुए थे। बचपन से ही घर-परिवार के भीतर का वातावरण ऐसा था कि उन्हें आध्यात्मिकता को बेहद करीब से जानने और समझने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। इसके अलावा उनकी बड़ी बहन कविता पहले से ही इस निःस्वार्थ सेवा में पूरी तरह समर्पित हो चुकी थीं। बड़ी बहन के जीवन और आचरण को देखकर प्रिया के भीतर भी इस मार्ग की गहराइयों को समझने और अपनाने की तीव्र जिज्ञासा जागी। जैसे-जैसे उन्होंने इस दिव्य ज्ञान का अध्ययन किया और इसे महसूस किया, वैसे-वैसे अध्यात्म के प्रति उनका झुकाव निरंतर प्रगाढ़ होता चला गया। मात्र 21 वर्ष की उम्र में लिया बड़ा फैसला अपनी अकादमिक पढ़ाई पूरी होते ही प्रिया ने महज 21 वर्ष की कम उम्र में ईश्वरीय सेवा का यह पवित्र मार्ग अपना लिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई बीएससी और आईटी विषय में पूरी की है। प्रिया का मानना है कि उनकी प्रबल इच्छा यही है कि दुनिया के कोने-कोने में भटक रही और तनाव, चिंता तथा विभिन्न मानसिक परेशानियों से जूझ रही आत्माओं तक परमात्मा का संदेश पहुंचे, जिससे उन्हें मन की शांति हासिल करने का मार्ग मिल सके। बड़ी बहन कविता का आध्यात्मिक सफर बड़ी बहन कविता की जीवन यात्रा भी किसी प्रेरणादायक आख्यान से कम नहीं है। कविता साझा करती हैं कि उनके बचपन के दिनों में उनकी दादी इस आध्यात्मिक मार्ग से जुड़ी हुई थीं। अपनी दादी को देखकर ही उनके मन में आध्यात्मिक जीवन के मूल स्वरूप को समझने की ललक पैदा हुई। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस ज्ञान को अपने दैनिक जीवन में उतारा और इसका व्यावहारिक अनुभव किया, तो उन्हें भीतर से एक अद्भुत और गहरी सकारात्मक ऊर्जा महसूस हुई। इसके बाद धीरे-धीरे यह पावन मार्ग उनके जीवन का अभिन्न और स्थाई हिस्सा बन गया। तीन बहनों और माता-पिता का भरा-पूरा परिवार कविता यह भी बताती हैं कि उनके परिवार में माता-पिता के अलावा कुल तीन बहनें हैं और उनका कोई भाई नहीं है। पूरे परिवार की ओर से उन्हें हमेशा इस बात की प्रेरणा मिली कि वे आध्यात्मिक ज्ञान को समझें और उसे अपने आचरण में उतारें। तीनों बहनों में सबसे पहले कविता ने ही इस आध्यात्मिक मार्ग पर कदम रखा। बड़ी बहन को इस सेवा भाव के साथ जीते देखकर छोटी बहन प्रिया खासी प्रभावित हुईं और उन्होंने भी ईश्वरीय सेवा का कठिन रास्ता चुन लिया। वहीं, परिवार की तीसरी बहन ने विवाह के बंधन में बंधने के बाद अपना सामान्य गृहस्थ जीवन अपना लिया है। सुखी-संपन्न पृष्ठभूमि को छोड़कर चुनी संन्यासी राह यह दोनों सगी बहनें नागपुर के एक बेहद सुखी और आर्थिक रूप से संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता कोयला क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी डब्ल्यूसीएल में एक उच्च अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनकी माता एक कुशल गृहिणी हैं। घर-परिवार में भौतिक सुख-सुविधाओं की किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होने के बावजूद इन दोनों बहनों ने व्यक्तिगत ऐशो-आराम और भौतिकतावादी जीवन शैली को छोड़कर आध्यात्मिकता को ही अपने जीवन की असली नींव बनाया। अब उनका पूरा वक्त और जीवन समाज के लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करने, राजयोग का प्रशिक्षण देने और दुनिया भर में शांति का संदेश प्रसारित करने के लिए समर्पित हो चुका है। इसका आप पर असर यह एक व्यक्तिगत और आध्यात्मिक निर्णय से जुड़ी खबर है, जिसका आम जनता की अर्थव्यवस्था, कीमतों या प्रशासनिक नियमों पर कोई प्रत्यक्ष व्यावहारिक प्रभाव नहीं पड़ता है। - राजस्थान में: करौली के स्थानीय निवासी और आध्यात्मिक जिज्ञासु इन ब्रह्माकुमारी बहनों के माध्यम से राजयोग मेडिटेशन और तनाव प्रबंधन के सत्रों का लाभ उठा सकते हैं। - मानसिक स्वास्थ्य: आधुनिक जीवनशैली के तनाव और चिंताओं से जूझ रहे लोग आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मानसिक शांति पाने के तरीकों से प्रेरणा ले सकते हैं। - पारिवारिक प्रेरणा: यह प्रसंग उन परिवारों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है जो अपनी संतानों को उच्च शिक्षा के बाद व्यक्तिगत और नैतिक मूल्यों के साथ जीने की स्वतंत्रता देते हैं। - सार्वजनिक प्रभाव: इस घटना का व्यापक अर्थव्यवस्था या कर प्रणाली पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता है, क्योंकि यह पूरी तरह से व्यक्तिगत आस्था और संन्यास के चयन से जुड़ा मामला है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक करियर और उच्च शिक्षा के विकल्प होने के बावजूद इन दो बहनों का आध्यात्मिकता की ओर मुड़ना उनके पारिवारिक संस्कारों और व्यक्तिगत अनुभवों का परिणाम है। उनके जीवन के इस मार्ग को चुनने के पीछे स्पष्ट पारिवारिक पृष्ठभूमि और आंतरिक प्रेरणा रही है। - पारिवारिक पृष्ठभूमि: दोनों बहनों के माता-पिता पहले से ही इस आध्यात्मिक मार्ग से जुड़े हुए थे, जिससे घर का माहौल शुरू से ही आध्यात्मिक रहा। - बड़ी बहन का प्रभाव: बड़ी बहन कविता के इस मार्ग को अपनाने और उसके सकारात्मक परिणामों को देखकर छोटी बहन प्रिया भी अत्यधिक प्रभावित हुईं। - पारिवारिक विरासत: उनकी दादी भी अपने समय में इसी आध्यात्मिक मार्ग से जुड़ी थीं, जिससे कविता के मन में बचपन से ही जिज्ञासा उत्पन्न हुई थी। - व्यक्तिगत अनुभव: दोनों ने जब इस ज्ञान को अपने दैनिक जीवन में उतारकर व्यावहारिक रूप से अनुभव किया, तो उन्हें आंतरिक शांति और सकारात्मकता महसूस हुई। सवाल-जवाब 1. कविता और प्रिया मूल रूप से किस शहर की रहने वाली हैं? कविता और प्रिया मूल रूप से महाराष्ट्र के नागपुर शहर की रहने वाली हैं। 2. वर्तमान में दोनों बहनें कहां और क्या सेवा कर रही हैं? वर्तमान में दोनों बहनें राजस्थान के करौली में ब्रह्माकुमारी बनकर राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दे रही हैं। 3. प्रिया ने कितनी उम्र में इस मार्ग को चुना और उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है? प्रिया ने 21 वर्ष की उम्र में इस मार्ग को चुना और उन्होंने बीएससी तथा आईटी की पढ़ाई की है। 4. दोनों बहनों के पिता का पेशा क्या था? उनके पिता कोयला क्षेत्र की कंपनी डब्ल्यूसीएल में अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। 5. परिवार में कुल कितनी बहनें हैं? परिवार में माता-पिता के अलावा कुल तीन बहनें हैं, जिनमें से दो ने आध्यात्मिकता चुनी और तीसरी ने विवाह के बाद गृहस्थ जीवन अपनाया। प्रेरणा और सबक नागपुर की इन दो सगी बहनों का जीवन और उनका यह बड़ा निर्णय युवाओं के लिए भौतिकता से परे जाकर आत्मिक शांति और सेवा का मार्ग चुनने की एक अनूठी मिसाल पेश करता है। उनके सफर से कई प्रेरणादायक बातें सीखी जा सकती हैं। - उच्च शिक्षा का सदुपयोग: बीएससी और आईटी जैसी आधुनिक तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अपने ज्ञान का उपयोग समाज की भलाई और मानसिक शांति फैलाने में किया जा सकता है। - पारिवारिक संस्कारों का प्रभाव: माता-पिता और बुजुर्गों द्वारा दिए जाने वाले अच्छे संस्कार बच्चों को जीवन में सही और सार्थक निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करते हैं। - भौतिक सुखों से परे दृष्टिकोण: जीवन में अपार सुख-सुविधाएं और धन होने के बावजूद व्यक्तिगत संतोष और मानसिक शांति के लिए उच्च आदर्शों को अपनाया जा सकता है। - निसंकोच संकल्प: किसी भी बड़े और लीक से हटकर फैसले को लेने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और स्पष्ट संकल्प का होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। https://trendkia.com/rajasthan/nagpur-ki-do-sagi-bahanon-ne-chhora-bhautika-sukha-karauli-men-adhyatmika-marga-para-barhaya-kadama-48107 TrendKia — Har trend, sabse pehle.