नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ के हमले से महिला सफाईकर्मी की मौत, पिंजरे का गेट खुलने पर उठे सुरक्षा सवाल जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ के हमले में महिला कर्मचारी सुगना देवी की जान चली गई। बाड़े का दरवाजा खुला रहने और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर परिजनों ने हंगामा किया। जयपुर के प्रसिद्ध आमेर किले के समीप स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ बाघ के अचानक हमले में सफाईकर्मी सुगना देवी की मौके पर ही मौत हो गई। इस भयानक घटना के बाद पार्क परिसर में हड़कंप मच गया और वन्यजीव प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर संगीन सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के आक्रोशित परिजनों ने पार्क प्रशासन और केयरटेकर पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए शव लेने से साफ इनकार कर दिया है। पीड़ित परिवार के लोग पार्क के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने पर्यटकों और कर्मचारियों की जानमाल की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता गहरी कर दी है। बाघ के हमले का घटनाक्रम और जान बचाने की मशक्कत हादसे के समय पार्क के बाड़े वाले हिस्से में कुल छह महिला सफाईकर्मी नियमित साफ-सफाई के काम में जुटी हुई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों और वहां मौजूद सहकर्मियों के अनुसार, इसी दौरान वहां तैनात एक महिला गार्ड ने बाघ के पिंजरे का मुख्य गेट खोल दिया। जैसे ही दरवाजा खुला, बाघ अचानक बाहर निकल आया और सफाई में जुटी महिलाओं की तरफ झपटा। अवांछित स्थिति में बाघ को सामने देखकर वहां अफरा-तफरी मच गई और सभी कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हमले के दौरान खुद को बचाने के लिए सुगना देवी समेत पांच महिलाओं ने फौरन पास में स्थित एक पेड़ पर चढ़ने का प्रयास किया। चार महिलाएं तो किसी तरह पेड़ की ऊंची डालियों पर चढ़कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहीं, लेकिन सुगना देवी बाघ के चंगुल में आ गईं। बाघ ने उन पर सीधा हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनकी जान चली गई। सहकर्मियों का कहना है कि यदि महिलाएं समय रहते पेड़ पर न चढ़तीं, तो यह हादसा और भी भीषण हो सकता था। सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर उठे गंभीर सवाल इस हादसे के बाद सबसे बुनियादी सवाल बाघ के पिंजरे के गेट को खोले जाने की प्रक्रिया पर उठ रहे हैं। नियम के मुताबिक जब भी बाड़े के भीतर या आसपास सफाईकर्मी काम कर रहे होते हैं, तब खूंखार वन्यजीवों को सुरक्षित रूप से बंद रखना अनिवार्य होता है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि कर्मचारियों की मौजूदगी के दौरान पिंजरे का गेट किस परिस्थिति में और किसके आदेश पर खोला गया। क्या गेट खोलने से पहले परिसर में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया था और सभी कर्मियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था? सुगना देवी के पति और बेटों का सीधा आरोप है कि यह महज एक इत्तेफाक या अनजाने में हुई चूक नहीं है, बल्कि पिंजरे का गेट जानबूझकर खोला गया था। परिजनों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों और लापरवाह केयरटेकर के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक दोषियों को चिन्हित कर सजा नहीं दी जाती, वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह हादसा पूरी तरह से मानवीय लापरवाही का नतीजा था या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी वजह थी। राजस्थान में पहले भी हो चुके हैं बाघों के जानलेवा हमले राजस्थान के विभिन्न संरक्षित वन क्षेत्रों और उनसे सटे रिहायशी इलाकों में बाघों के हमले की घटनाएं पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं। जून 2025 में सवाई माधोपुर स्थित प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व के ऐतिहासिक रणथंभौर किले के समीप वन रक्षक राधेश्याम माली पर एक बाघ ने हमला कर दिया था, जिसमें उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इससे ठीक एक महीने पहले, मई 2025 में रणथंभौर के ज़ोन-3 में ड्यूटी पर तैनात रेंजर देवेंद्र चौधरी पर भी बाघ ने अचानक हमला किया था और इस हादसे में भी अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसी तरह अलवर-खैरथल तिजारा जिले के सरिस्का क्षेत्र में अगस्त 2024 के दौरान बाघ ST-2303 अपने निर्धारित रिजर्व क्षेत्र से बाहर निकल आया था। इसके बाद उसने हरियाणा और राजस्थान की सीमा से जुड़े कई गांवों में चहलकदमी करते हुए अनेक लोगों पर हमले किए थे, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। इसके पूर्व जनवरी 2024 में भिवाड़ी के पास खेत में काम कर रहे एक बुजुर्ग किसान को बाघ ने लहूलुहान कर दिया था। वहीं नवंबर 2024 में रणथंभौर से सटे उलियाना गांव में बाघ के हमले से एक स्थानीय ग्रामीण की मौत हो गई थी। उस दौरान भड़के ग्रामीणों के उग्र विरोध और आपसी संघर्ष के बीच हमलावर बाघ की भी जान चली गई थी। पर्यटकों की सुरक्षा और पार्क प्रबंधन की जवाबदेही नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में देश और दुनिया भर से हर साल लाखों पर्यटक वन्यजीवों को देखने के लिए पहुंचते हैं। यह स्थल आमेर किले के काफी करीब होने के कारण पर्यटन के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर यदि कर्मचारियों के काम करने के क्षेत्र में बाघ का गेट खुल जाता है, तो यह आम पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले हादसों के बाद भी यदि सुरक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव नहीं किए गए, तो यह बेहद गंभीर विषय है। क्या पूर्व में हुए बाघ हमलों के बाद चिड़ियाघर और पार्क प्रशासन ने अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की थी? क्या कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का उचित प्रशिक्षण दिया गया था? इन तमाम सवालों के पारदर्शी जवाब सामने आना बेहद जरूरी है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीमें मामले की निष्पक्ष जांच की बात कह रही हैं, ताकि सुगना देवी की मौत की सटीक वजहों का खुलासा किया जा सके। इसका आप पर असर नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हुई इस दुखद घटना का आम जनता और पर्यटकों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है। • भारत में: देशभर के जैविक उद्यानों और चिड़ियाघरों में कर्मचारियों एवं आगंतुकों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा और नए मानक लागू किए जा सकते हैं। इससे वन्यजीव पार्कों में घूमने जाने वाले लोगों के लिए सुरक्षा नियम और सख्त होंगे। • जयपुर में: नाहरगढ़ पार्क और आमेर किले के आसपास जाने वाले घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की सुरक्षा जांच कड़ी की जाएगी। पार्क प्रबंधन द्वारा बाड़ों की निगरानी और आपातकालीन रिस्पॉन्स व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाएगा। सवाल-जवाब 1. नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में क्या घटना हुई? नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ के पिंजरे का गेट खुलने से बाघ ने हमला कर दिया, जिसमें महिला सफाईकर्मी सुगना देवी की मौत हो गई। 2. घटना के समय पिंजरे के पास कितने कर्मचारी मौजूद थे? घटना के समय छह महिला सफाईकर्मी पार्क में सफाई के काम में जुटी हुई थीं। 3. अन्य महिला कर्मचारियों ने अपनी जान कैसे बचाई? अन्य पांच महिला कर्मचारियों ने दौड़कर पास स्थित पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई। 4. मृतका के परिवार वाले क्या मांग कर रहे हैं? परिवार वाले पार्क प्रशासन और केयरटेकर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और विरोध स्वरूप पार्क के गेट पर धरने पर बैठे हैं। 5. क्या राजस्थान में पहले भी बाघों के हमले की घटनाएं हुई हैं? हां, रणथंभौर और सरिस्का क्षेत्रों में जून 2025 में वन रक्षक राधेश्याम माली और मई 2025 में रेंजर देवेंद्र चौधरी समेत कई लोगों पर बाघों के जानलेवा हमले हो चुके हैं। https://trendkia.com/rajasthan/nahargarh-biological-park-men-bagha-ke-hamale-se-mahila-saphaikarmi-ki-mauta-pinjare-ka-geta-khulane-para-uthe-suraksha-savala-26741 TrendKia — Har trend, sabse pehle.