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  "title": "नरसिंहपुरा कचरा प्लांट विवाद: हनुमान बेनीवाल के हाईवे जाम के बाद प्रशासन ने मांगा 45 दिन का वक्त",
  "summary": "श्रीगंगानगर के नरसिंहपुरा में कचरा निस्तारण प्लांट के विरोध में सांसद हनुमान बेनीवाल ने एनएच 62 पर धरना दिया, जिसके बाद प्रशासन ने कमेटी गठन कर 45 दिनों में समाधान निकालने का भरोसा दिलाया।",
  "content": "राजस्थान के श्रीगंगानगर में प्रस्तावित कचरा निस्तारण संयंत्र को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव गहरा गया है। जिले के नरसिंहपुरा बारानी इलाके में स्थापित किए जाने वाले इस प्लांट के खिलाफ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के राष्ट्रीय संयोजक और सांसद हनुमान बेनीवाल ने मोर्चा संभालते हुए आंदोलन तेज कर दिया है। बुधवार के दिन एक बड़ी महापंचायत का आयोजन किया गया, जो देर रात होते-होते नेशनल हाईवे पर एक व्यापक घेराव में बदल गई। सांसद बेनीवाल की अगुवाई में हजारों ग्रामीणों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने गणेशगढ़ टोल प्लाजा पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।\n\nहाईवे पर लगा लंबा जाम, छावनी में बदला टोल प्लाजा\nगणेशगढ़ टोल प्लाजा पर शुरू हुए इस आंदोलन का सीधा असर श्रीगंगानगर से निकलने वाले प्रमुख नेशनल हाईवे 62 पर देखने को मिला। भारी तादाद में लोगों के जुटने की वजह से इस मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह से रुक गया। करीब डेढ़ घंटे तक दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहीं और मुसाफिर फंसे रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर धरने की ताजा स्थिति साझा की और सरकार व जिला प्रशासन के रवैये की कड़ी आलोचना की। राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मौके पर 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया, जिससे समूचा इलाका पुलिस छावनी जैसा नजर आने लगा।\n\nमैराथन वार्ता और ग्रामीणों का सख्त रुख\nसड़क पर बढ़ते जनदबाव और यातायात संकट को हल करने के लिए जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी देर रात खुद आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इसके बाद प्रशासनिक दल और हनुमान बेनीवाल के बीच कई दौर की बातचीत चली। बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि नरसिंहपुरा की जमीन पर किसी भी सूरत में कचरा निस्तारण प्लांट नहीं बनने दिया जाएगा। ग्रामीणों का तर्क था कि इस प्लांट से इलाके का पर्यावरण पूरी तरह खराब हो जाएगा और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। सांसद ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि जब तक समस्या का कोई ठोस और संतोषजनक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक टोल प्लाजा खाली नहीं किया जाएगा।\n\nकमेटी गठन का वादा और 45 दिन की मोहलत\nघंटों तक चली लंबी खींचतान और बढ़ते जनदबाव के बीच आखिरकार प्रशासनिक अधिकारियों को बैकफुट पर आना पड़ा। प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और संयंत्र के लिए कोई दूसरा मुफीद स्थान तलाशने के मकसद से डेढ़ महीने यानी 45 दिन का समय मांगा। इस दौरान एक विशेष जांच समिति बनाने का फैसला लिया गया, जिसमें ग्रामीणों के प्रतिनिधियों को भी जगह दी जाएगी। प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद हनुमान बेनीवाल ने टोल प्लाजा पर जारी धरना समाप्त करने का ऐलान किया। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि तय 45 दिनों के भीतर इस कचरा प्लांट को कहीं और स्थानांतरित करने का आदेश नहीं दिया गया, तो ग्रामीण फिर से इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nश्रीगंगानगर में कचरा निस्तारण प्लांट के विरोध में हुए इस आंदोलन और प्रशासनिक समझौते से आम जनता और मुसाफिरों पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय राजमार्ग 62 से गुजरने वाले अंतरराज्यीय मालवाहक वाहनों और यात्रियों को जाम के चलते डेढ़ घंटे तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। भविष्य में ऐसे सड़क अवरोधों की आशंका को देखते हुए लंबी दूरी के मुसाफिरों को यात्रा से पहले स्थानीय ट्रैफिक अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।\n• राजस्थान में: नरसिंहपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रस्तावित प्लांट के खिलाफ स्थानीय लोगों को फिलहाल 45 दिनों की राहत मिली है। यदि प्रशासन तय मियाद में इस प्रोजेक्ट का दूसरा विकल्प नहीं खोजता है, तो राज्य में दोबारा बड़े चक्काजाम का सामना करना पड़ सकता है।\n• यात्रियों के लिए: गणेशगढ़ टोल प्लाजा पर धरना समाप्त होने के बाद अब हाईवे पर आवागमन पूरी तरह सामान्य हो गया है। आने-जाने वाले वाहन चालक अब बिना किसी रुकावट के सामान्य रूप से यात्रा कर सकते हैं।\n• स्थानीय प्रशासन के लिए: जिला प्रशासन को अब 45 दिनों की तय समयसीमा के भीतर एक कमेटी गठित कर रिपोर्ट पेश करनी होगी। इस समिति में ग्रामीणों के प्रतिनिधियों को भी शामिल करना अनिवार्य किया गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nश्रीगंगानगर के नरसिंहपुरा बारानी में कचरा निस्तारण संयंत्र स्थापित करने के सरकारी प्रस्ताव ने स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष पैदा कर दिया, जिसके चलते यह टकराव देखने को मिला।\n\n• सीधा कारण: ग्रामीणों को आशंका है कि आबादी और खेतों के नजदीक बड़ा कचरा निस्तारण प्लांट लगने से समूचे क्षेत्र का पर्यावरण दूषित होगा। इसी डर से स्वास्थ्य और स्वच्छता पर खतरे को देखते हुए लोगों ने प्लांट को पूरी तरह खारिज करने की मांग उठाई।\n• आंदोलन का विस्तार: बुधवार को आयोजित महापंचायत के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिला, जिससे यह मामला अचानक हाईवे चक्काजाम में बदल गया। टोल प्लाजा पर हजारों लोगों के जमा होने से प्रशासन पर तुरंत कदम उठाने का भारी दबाव बना।\n• प्रशासनिक पहल: हाईवे पर लंबा जाम लगने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के जोखिम को देखते हुए अधिकारियों ने वार्ता की राह चुनी। प्रशासन ने गतिरोध दूर करने के लिए ग्रामीणों की भागीदारी वाली एक समिति गठित करने और 45 दिनों में दूसरा विकल्प तलाशने का लिखित वादा किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हनुमान बेनीवाल ने किस मुद्दे को लेकर धरना दिया था?\nहनुमान बेनीवाल ने श्रीगंगानगर जिले के नरसिंहपुरा बारानी क्षेत्र में प्रस्तावित कचरा निस्तारण प्लांट के विरोध में धरना दिया था।\n\n2. यह चक्काजाम किस स्थान पर और कितनी देर तक चला?\nयह चक्काजाम नेशनल हाईवे 62 पर स्थित गणेशगढ़ टोल प्लाजा पर हुआ, जिससे करीब डेढ़ घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रही।\n\n3. प्रशासन ने आंदोलनकारियों से कितना समय मांगा है?\nप्रशासन ने मामले की जांच करने और प्लांट के लिए दूसरा विकल्प तलाशने हेतु 45 दिन यानी डेढ़ महीने का समय मांगा है।\n\n4. धरने को समाप्त करने के लिए प्रशासन ने क्या आश्वासन दिया?\nप्रशासन ने ग्रामीणों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक विशेष कमेटी के गठन और वैकल्पिक जगह की तलाश का लिखित आश्वासन दिया।\n\n5. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर कितने पुलिसकर्मी पहुंचे थे?\nस्थिति को नियंत्रित रखने और सुरक्षा के मद्देनजर घटनास्थल पर 500 से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया था।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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