# नवलगढ़ की पोदार हवेली में आज भी जीवंत हैं 1902 के मां दुर्गा के नौ रूप, दीवारों पर उकेरी गई है अद्भुत कला

> झुंझुनूं के नवलगढ़ स्थित ऐतिहासिक पोदार हवेली में वर्ष 1902 के प्राचीन भित्ति चित्र आज भी मां दुर्गा के नौ रूपों की गाथा बयां कर रहे हैं। इन कलाकृतियों में शक्ति, साधना और नारी सम्मान का अनूठा संदेश छिपा है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/navalagarha-ki-podar-haveli-men-aja-bhi-jivnta-hain-1902-ke-maa-durga-ke-nau-rupa-57798 · **Language:** Hindi
**Tags:** नवलगढ़, पोदार हवेली, शेखावाटी कला, मां दुर्गा, भित्ति चित्र, झुंझुनूं, राजस्थान विरासत

झुंझुनूं जिले का शेखावाटी क्षेत्र अपनी अनूठी भव्यता, कलात्मक झरोखों और समृद्ध वास्तुकला के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी एक खास पहचान रखता है। यहां की पुरानी हवेलियां केवल ईंट और पत्थरों का ढांचा नहीं हैं, बल्कि इनकी दीवारों पर उकेरी गई सजीव कलाकृतियां सदियों पुराना इतिहास और संस्कृति खुद में समेटे हुए हैं। नवलगढ़ की प्रसिद्ध पोदार हवेली म्यूजियम में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के प्राचीन और मनमोहक भित्ति चित्र इसी ऐतिहासिक विरासत की एक बेजोड़ मिसाल पेश करते हैं। इन ऐतिहासिक चित्रों में देवी की आराधना के साथ-साथ शक्ति, शौर्य, तपस्या, वात्सल्य और नारी के प्रति सम्मान का गहरा संदेश आज भी स्पष्ट रूप से नजर आता है।

## वर्ष 1902 में हुआ था इस भव्य हवेली का निर्माण
नवलगढ़ में साल 1902 में तैयार की गई पोदार हवेली शेखावाटी की पुरानी धरोहर का एक बेहद अहम हिस्सा है। इस शानदार इमारत की पेंटिंग उस दौर की याद दिलाती है, जब भवनों के खड़े होने के साथ ही उनकी दीवारों को धार्मिक और कलात्मक रंग देने का चलन हुआ करता था। उस वक्त जब आज की तरह मनोरंजन और संवाद के साधन नहीं थे, तब चित्रकला ही धार्मिक कथाओं, पुराणों और समाज को जरूरी संदेश देने का सबसे बड़ा माध्यम हुआ करती थी। इन हवेलियों की दीवारें किसी खुली किताब की तरह थीं, जिनके रंग और आकार पीढ़ियों तक अपनी गौरवशाली गाथा कहते रहते थे।

## भित्ति चित्रों में झलकती है आस्था और साधना की अनूठी छटा
पोदार हवेली म्यूजियम में मां आदिशक्ति के नौ अलग-अलग रूपों की कलाकृतियां शेखावाटी की पेंटिंग कला की उत्कृष्टता को भली-भांति दर्शाती हैं। इन सभी रूपों की अपनी अलग विशेषता, पहचान और भावभंगिमा है जो देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है। चित्रों में कहीं मां के शांत और तपस्वी रूप के दर्शन होते हैं, जो आंतरिक ऊर्जा और गहरी साधना का प्रतीक माने जाते हैं। वहीं अन्य रूपों में देवी के पराक्रम, बुरे तत्वों के नाश और अपने भक्तों की रक्षा करने वाले साहसी स्वरूप को रंगों के जरिए बेहद खूबसूरती से सजाया गया है। इन ऐतिहासिक कलाकृतियों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनमें देवी की पूजा के साथ उस समय के स्थानीय कलाकारों की बारीक समझ और उनकी अटूट धार्मिक आस्था साफ दिखाई देती है।

## नारी शक्ति और सम्मान का गहरा संदेश देते हैं देवी के नौ रूप
नवरात्र और दीपोत्सव जैसे पवित्र त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि ये साहस, शक्ति और नारी सम्मान के भाव को अपने भीतर उतारने का बेहतरीन मौका होते हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें जीवन की हर मुश्किल परिस्थिति का डटकर मुकाबला करने, संयम रखने, ज्ञान हासिल करने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की सीख देते हैं। देवी के ये विविध रूप हमें यह भी समझाते हैं कि नारी शक्ति का कोई एक रूप नहीं होता, बल्कि समय और हालात के हिसाब से उसके अनगिनत आयाम सामने आते रहते हैं। आज के इस आधुनिक युग में जब महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन, व्यापार और सामाजिक सेवा के हर मैदान में अपनी काबिलियत के झंडे गाड़ रही हैं, तब मां दुर्गा के नौ रूपों की यह सीख और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

## ऐतिहासिक धरोहरों को संजोना और बचाना है बेहद जरूरी
शेखावाटी की ये पुरानी हवेलियां आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास, कला और संस्कृति का एक जीवंत विद्यालय जैसी हैं। इनकी दीवारों पर उकेरे गए चित्र हमें यह बात सिखाते हैं कि हमारे पूर्वजों ने कला के जरिए जीवन के मूल्यों, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक संदेशों को किस तरह संभालकर रखा था। पोदार हवेली म्यूजियम में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की यह पुरानी चित्रकारी हमें अपनी उस गौरवशाली विरासत को संभालने और सुरक्षित रखने की प्रेरणा देती है। इन अमूल्य धरोहरों का संरक्षण करना हम सबका कर्तव्य है ताकि आने वाले समय में भी लोग हमारी समृद्ध संस्कृति से रूबरू हो सकें।

## इसका आप पर असर
यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समाचार पाठकों को अपनी प्राचीन कला और विरासत से जुड़ने का संदेश देता है।

- **भारत में:** शेखावाटी क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक हवेलियों के प्रति देश भर के पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों की रुचि बढ़ती है।
- **नवलगढ़ में:** स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता मजबूत होती है।

## ऐसा क्यों हुआ
ऐतिहासिक हवेलियों में भित्ति चित्रों के निर्माण की यह परंपरा उस दौर की सांस्कृतिक और धार्मिक आवश्यकताओं से जुड़ी थी।

- **पारंपरिक संचार:** आधुनिक माध्यमों के अभाव में चित्रकला ही धार्मिक कथाओं और सामाजिक संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का मुख्य जरिया थी।
- **सांस्कृतिक परंपरा:** शेखावाटी के व्यापारी और सेठ अपनी हवेलियों को कलात्मक रूप देकर अपनी आस्था और समृद्धि प्रदर्शित करते थे।
- **स्थानीय कला कौशल:** उस समय के स्थानीय कलाकारों की सूक्ष्म दृष्टि और धार्मिक निष्ठा ने इन दीवारों पर अमिट कलाकृतियां गढ़ीं।

## सवाल-जवाब

### 1. पोदार हवेली कहां स्थित है?
पोदार हवेली राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ में स्थित है।

### 2. पोदार हवेली का निर्माण किस वर्ष हुआ था?
पोदार हवेली का निर्माण वर्ष 1902 में किया गया था।

### 3. हवेली की दीवारों पर मुख्य रूप से क्या चित्रित है?
हवेली की दीवारों पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के प्राचीन और मनमोहक भित्ति चित्र उकेरे गए हैं।

### 4. शेखावाटी की हवेलियां किस कला के लिए प्रसिद्ध हैं?
शेखावाटी की हवेलियां अपनी बेजोड़ भव्यता, कलात्मक झरोखों और समृद्ध भित्ति चित्रकला के लिए पूरे देश में जानी जाती हैं।

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