# निफ्ट जोधपुर में खादी सेवा संकल्प महोत्सव, बाड़मेर के बुनकर ने दिखाया चरखा चलाने का हुनर

> नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी जोधपुर में खादी सेवा संकल्प महोत्सव-2026 का आयोजन हुआ, जिसमें बाड़मेर के बुनकरों ने छात्रों को चरखे से सूत कातने की कला सिखाई।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/nift-jodhpur-men-khadi-seva-sankalp-mahotsav-barmer-ke-bunakara-ne-dikhaya-charakha-chalane-ka-hunara-48071 · **Language:** Hindi
**Tags:** निफ्ट जोधपुर, खादी महोत्सव, बाड़मेर बुनकर, फैशन डिजाइनिंग, स्वदेशी वस्त्र

देश की गौरवशाली वस्त्र परंपरा और स्वदेशी कारीगरी से युवा पीढ़ी का परिचय कराने के उद्देश्य से जोधपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी में एक विशेष कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य केंद्र पारंपरिक हथकरघा संस्कृति और आधुनिक फैशन के बीच की दूरी को पाटना था, ताकि छात्र जमीनी स्तर पर कारीगरों के अनुभवों से सीख सकें। इस अवसर पर देश के दस्तकारों की मेहनत को नजदीक से जानने का मौका मिला और आधुनिक दौर में स्वदेशी वस्त्रों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।

## बाड़मेर के बुनकर का लाइव प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान सबसे खास पल तब आया जब बाड़मेर से पहुंचे मंझे हुए बुनकर भुराराम ने मंच पर लाइव चरखा चलाकर दिखाया। उन्होंने कच्चे सूत से मजबूत धागा तैयार करने की पूरी तकनीक को बेहद बारीकी से समझाया। आधुनिक मशीनों की चकाचौंध से दूर युवा विद्यार्थियों के लिए हाथ से धागा बनाने की यह पारंपरिक प्रक्रिया किसी अछूते अनुभव से कम नहीं थी। इस जीवंत प्रदर्शन के जरिए छात्र यह समझ पाए कि एक अदद खादी वस्त्र के पीछे कितनी मेहनत, एकाग्रता और पीढ़ियों का हुनर छिपा होता है।

## युवा डिजाइनरों के लिए प्रेरणा
निफ्ट जोधपुर के निदेशक प्रोफेसर जीएचएस प्रसाद ने इस संबंध में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ऐसे रचनात्मक आयोजनों से छात्रों को तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ भी मिलती है। उन्होंने बताया कि जब युवा डिजाइनर धागा बनने से लेकर कपड़ा तैयार होने तक की प्रक्रिया को अपनी आंखों से देखते हैं, तो वे इसके प्राकृतिक गुणों को बेहतर ढंग से पहचान पाते हैं। इस तरह के आयोजनों से फैशन और टेक्सटाइल के छात्र भविष्य के प्रोजेक्ट्स में खादी को नए और आकर्षक रूप में ढालने के लिए प्रेरित होते हैं।

## प्रतियोगिताओं और सम्मान का दौर
इस महोत्सव के तहत केवल प्रदर्शन तक ही चीजें सीमित नहीं रहीं, बल्कि स्वदेशी उत्पादों और खादी के प्रचार को लेकर कई रोचक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया था। इनमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया ताकि उनमें भारतीय पारंपरिक कला के प्रति रुझान बढ़े। इस पूरे आयोजन का अंततः उद्देश्य यही था कि स्थानीय कारीगरों के कौशल को सहेजा जाए और आधुनिक फैशन जगत में खादी को उसकी असली पहचान दिलाई जा सके।

## इसका आप पर असर
खादी से जुड़े ऐसे आयोजनों का स्थानीय स्तर पर वस्त्र उद्योग और कारीगरों के रोजगार पर सीधा सकारात्मक असर पड़ता है।

- **देशभर में:** इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजनों से देश के युवा डिजाइनरों के बीच स्वदेशी वस्त्रों और पारंपरिक कला के प्रति रुझान बढ़ता है।
- **जोधपुर में:** स्थानीय स्तर पर निफ्ट के छात्रों और क्षेत्रीय बुनकरों के बीच संवाद बढ़ने से पारंपरिक कला को नया बाजार और पहचान मिलने में मदद मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
आधुनिक समय में पारंपरिक हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को देश की समृद्ध विरासत से जोड़ने की जरूरत के कारण ऐसे महोत्सव आयोजित किए जाते हैं। मशीनीकरण के इस दौर में पारंपरिक कारीगरों के कौशल को संरक्षित करना एक बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

- **पारंपरिक विरासत से जुड़ाव:** नई पीढ़ी को वस्त्र निर्माण की बुनियादी तकनीकों से रूबरू कराना आवश्यक माना जाता है ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
- **व्यावहारिक शिक्षा:** किताबी ज्ञान के अलावा प्रत्यक्ष प्रदर्शन से छात्रों को सामग्री की समझ और उसकी उपयोगिता बेहतर ढंग से समझ आती है।
- **कारीगरों का प्रोत्साहन:** इस तरह के मंच स्थानीय दस्तकारों को सम्मान और उनके हुनर को उचित सराहना दिलाने में मददगार साबित होते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. खादी सेवा संकल्प महोत्सव का आयोजन कहां किया गया?
इस महोत्सव का आयोजन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी यानी निफ्ट जोधपुर में किया गया।

### 2. कार्यक्रम के दौरान लाइव प्रदर्शन किसने किया?
बाड़मेर से आए कुशल बुनकर भुराराम ने छात्रों के सामने चरखा चलाने का लाइव प्रदर्शन किया।

### 3. निफ्ट जोधपुर के निदेशक कौन हैं?
प्रोफेसर जीएचएस प्रसाद निफ्ट जोधपुर के निदेशक हैं।

### 4. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारतीय पारंपरिक वस्त्रों और स्थानीय कारीगरों के हुनर से जोड़ना था।

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