{
  "type": "article",
  "title": "निजी जेब से सुधारी चौमूं के बगवाड़ा स्कूल की छत, प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह ने दिया सुरक्षा का तोहफा",
  "summary": "जयपुर ग्रामीण के चौमूं स्थित बगवाड़ा सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल के प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने अपने निजी फंड से 7,000 वर्ग फीट छत की मरम्मत और वॉटरप्रूफिंग कराई है। इससे पहले भी उन्होंने असुरक्षित घोषित कमरों की जगह 200 बच्चों के बैठने के लिए टीन शेड बनवाया था।",
  "content": "जयपुर ग्रामीण के चौमूं इलाके में स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बगवाड़ा की जर्जर इमारत और टपकती छत लंबे समय से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक बड़ा संकट बनी हुई थी। हर बारिश के मौसम में पुराने कमरों में सीलन फैल जाती थी और छत से पानी टपकने लगता था, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं का लंबा इंतजार करने के बजाय खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने अपनी निजी जेब से पूरे स्कूल भवन की छत की मरम्मत और जलरोधक कार्य कराने का निर्णय लिया, ताकि बच्चे किसी भी खतरे के बिना अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।\n\n7 हजार वर्ग फीट छत का वॉटरप्रूफिंग कार्य\nमानसून के दौरान स्कूल की पुरानी इमारत में जगह-जगह सीलन और पानी के रिसाव से पठन-पाठन का माहौल बुरी तरह प्रभावित होता था। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने करीब 7 हजार वर्ग फीट के विशाल छत क्षेत्र पर वॉटरप्रूफिंग कराने का जिम्मा उठाया। उन्होंने अपने खुद के खर्च से लगभग 15 दिनों तक लगातार काम करवाकर छत की सीलन और रिसाव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला। इस व्यापक मरम्मत के बाद अब बारिश के मौसम में भी कक्षाएं सुरक्षित रहेंगी और विद्यार्थियों को बिना किसी डर के सूखा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।\n\n200 विद्यार्थियों की पढ़ाई बचाने के लिए टीन शेड की पहल\nप्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया द्वारा अपने व्यक्तिगत कोष से सहायता देने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष जब इलाके में भारी बारिश हुई थी, तब शिक्षा विभाग ने सुरक्षा कारणों से विद्यालय के कई कमरों को असुरक्षित घोषित कर दिया था और उनमें बच्चों को बैठाने पर रोक लगा दी थी। उस कठिन समय में भी प्रधानाचार्य ने हार नहीं मानी और स्थिति को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने तुरंत अपनी निजी धनराशि खर्च करके विद्यालय के प्रार्थना स्थल पर एक बड़ा टीन शेड तैयार करवा दिया। इस शेड की बदौलत लगभग 200 बच्चों की पढ़ाई बारिश के बावजूद एक भी दिन बाधित नहीं हुई।\n\nभामाशाहों और समाज के सहयोग से नए कमरों का निर्माण\nस्कूल के विकास के लिए प्रधानाचार्य ने केवल अपने पैसों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज को भी इस बदलाव की प्रक्रिया से जोड़ा। उन्होंने स्थानीय भामाशाहों और दानदाताओं को प्रेरित किया, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। उनके प्रयासों से प्रभावित होकर दो भामाशाहों ने आगे आकर परिसर में दो नए अत्याधुनिक कक्षा-कक्षों का निर्माण कराया। इसके अलावा, विद्यालय के शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने भी मिलकर आवश्यक सामग्री और अन्य संसाधन जुटाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे छात्रों को आधुनिक और बेहतर सुविधाएं मिलने लगीं।\n\nहरियाली और स्वच्छ वातावरण का निर्माण\nभवन सुधार के साथ-साथ परिसर को हरा-भरा और सुंदर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यालय परिसर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया गया है। प्रधानाचार्य और स्टाफ की देखरेख में लगाए गए पौधे अब बड़े हो चुके हैं, जिससे पूरा परिसर हरा-भरा नजर आता है। यह स्वच्छ और प्राकृतिक माहौल न केवल स्कूल की सुंदरता बढ़ा रहा है, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा कर रहा है।\n\nसुरक्षित शिक्षा और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश\nअपने इस कदम पर बात करते हुए प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने कहा, \"विद्यार्थी और यहां काम करने वाले स्टाफ एक सुरक्षित माहौल के हकदार हैं।\" उनका मानना है कि यदि भवन की कमियां लंबे समय तक बनी रहते, तो इससे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों पर बुरा असर पड़ता। स्थानीय लोग और अभिभावक प्रधानाचार्य की इस जनहितैषी पहल की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। प्रधानाचार्य का मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि सामूहिक सहयोग और व्यक्तिगत इच्छाशक्ति हो, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल दर्शाती है कि व्यक्तिगत प्रतिबद्धता और सामुदायिक सहयोग से सरकारी स्कूलों की बुनियादी ढांचागत समस्याओं का त्वरित समाधान कैसे संभव है।\n\n• भारत में: ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक बजट के भरोसे बैठे रहने के बजाय स्थानीय समाज और अधिकारियों द्वारा पहल करने की प्रेरणा मिलती है। इससे सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन और सुरक्षा पर सकारात्मक असर पड़ता है।\n• चौमूं / बगवाड़ा में: बगवाड़ा विद्यालय के 200 से अधिक छात्र अब बारिश के मौसम में भी बिना किसी खतरे के सूखी और सुरक्षित कक्षाओं में पढ़ाई कर सकेंगे। नए कमरों और हरियाली से स्थानीय बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह मामला किस स्कूल और क्षेत्र का है?\nयह मामला जयपुर ग्रामीण के चौमूं क्षेत्र में स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बगवाड़ा का है।\n\n2. प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह कविया ने अपने निजी खर्च से क्या कार्य करवाया है?\nउन्होंने विद्यालय भवन की 7,000 वर्ग फीट छत की मरम्मत और वॉटरप्रूफिंग का काम अपने निजी कोष से करवाया है।\n\n3. पिछले साल बारिश के समय प्रधानाचार्य ने क्या कदम उठाया था?\nकमरों को असुरक्षित घोषित किए जाने पर उन्होंने अपने खर्चे से प्रार्थना स्थल पर टीन शेड बनवाया, जिससे 200 बच्चों की पढ़ाई जारी रही।\n\n4. विद्यालय में भामाशाहों का क्या सहयोग रहा है?\nप्रधानाचार्य के प्रयासों से दो भामाशाहों ने आगे आकर स्कूल परिसर में दो नए कक्षा-कक्षों का निर्माण कराया।\n\nप्रेरणा और सबक\nविजेंद्र सिंह कविया की पहल से यह साबित होता है कि एक सच्चा नेतृत्वकर्ता संसाधनों की कमी का रोना रोने के बजाय समाधान निकालने पर ध्यान देता है।\n\n• कर्तव्य से आगे बढ़कर जिम्मेदारी: केवल नौकरी करने के बजाय अपने संस्थान और छात्रों की सुरक्षा को अपनी निजी प्राथमिकता बनाना ही असली नेतृत्व है।\n• सामूहिक भागीदारी और भामाशाह संस्कृति: समाज और दानदाताओं को जनहित के कार्यों से जोड़कर बड़े से बड़े बुनियादी ढांचे को तैयार किया जा सकता है।\n• आपदा में अवसर और नवाचार: जब कमरे असुरक्षित हुए तो प्रार्थना स्थल पर टीन शेड बनाकर बच्चों की पढ़ाई को एक भी दिन रुकने नहीं दिया।\n• पर्यावरण के प्रति सजगता: इमारत सुधारने के साथ-साथ परिसर में पौधारोपण कर एक स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण निर्मित करना।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/niji-jeba-se-sudhari-chomu-ke-bagwada-skula-ki-chhata-pradhanacharya-vijendra-singh-ne-diya-suraksha-ka-tohapha-28092",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-05",
  "tags": [
    "चौमूं",
    "जयपुर ग्रामीण",
    "विजेंद्र सिंह कविया",
    "महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय",
    "बगवाड़ा",
    "शिक्षा व्यवस्था",
    "भामाशाह"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}