# निराश्रितों की सेवा का दायरा बढ़ा, बिहार के चार जिलों में खुले अपना घर आश्रम

> भरतपुर से शुरू हुई मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन की मुहिम अब 80 आश्रमों तक पहुंची, बिहार के बाद जम्मू और पंजाब में भी जल्द खुलेंगे नए केंद्र।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/nirashriton-ki-seva-ka-dayara-barha-bihar-ke-chara-jilon-men-khule-apna-ghar-ashram-35575 · **Language:** Hindi
**Tags:** अपना घर आश्रम, बिहार, भरतपुर, बी एन भारद्वाज, निराश्रित सेवा, सामाजिक कार्य

सड़कों पर लावारिस, बीमार और असहाय अवस्था में जीवन बिताने वाले प्रभुजनों की सेवा का संकल्प अब देशभर में तेजी से फैल रहा है। राजस्थान के भरतपुर से शुरू हुई मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन अपना घर की कल्याणकारी यात्रा ने सेवा कार्यों का दायरा बढ़ाते हुए पूर्वी भारत में बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में बिहार के चार प्रमुख शहरों में नए आश्रमों का विधिवत संचालन शुरू कर दिया गया है, जिससे बेसहारा और उपेक्षित लोगों को स्थानीय स्तर पर फौरी राहत और छत मिल सकेगी।

## बिहार के चार शहरों में छत और चिकित्सा की व्यवस्था
संस्था के नए विस्तार अभियान के अंतर्गत बिहार के पटना, गया, रोहतास और भागलपुर में चार समर्पित आश्रम स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों की स्थापना से अब क्षेत्रीय स्तर पर ही जरूरतमंदों को सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक भोजन, बुनियादी स्वास्थ्य जांच, नियमित दवाइयां और मानवीय देखभाल उपलब्ध कराई जाएगी। अपना घर संस्था लंबे समय से ऐसे बीमार और निराश्रित प्रभुजनों को सम्मान देने में जुटी है, जिन्हें उनके परिवार त्याग चुके हैं या समाज की मुख्यधारा से कोई मदद नहीं मिल पाती।

## जम्मू और पंजाब में भी जल्द खुलेंगे सेवा केंद्र
आगामी विस्तार योजनाओं को साझा करते हुए अपना घर आश्रम के संस्थापक बी एन भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि सेवा कार्यों की पहुंच को देश के उत्तरी हिस्सों में और मजबूत किया जा रहा है। आने वाले महीने में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू में संस्था का पहला आश्रम शुरू होगा, जबकि पंजाब में दूसरा केंद्र खोला जाएगा। इन दोनों केंद्रों के चालू होते ही अपना घर का सीधा सेवा नेटवर्क देश के 14 राज्यों तक विस्तृत हो जाएगा। प्रयास यही है कि कोई भी लाचार व्यक्ति खुले आसमान के नीचे बिना इलाज और भोजन के दम न तोड़े।

## 80 आश्रमों तक पहुंचा मानवीय सेवा का विशाल नेटवर्क
भरतपुर की धरती से प्रज्वलित हुई यह सेवा ज्योति अब पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज करा चुकी है। बिहार में नए आश्रम जुड़ने के साथ ही इस सेवा श्रृंखला में केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 80 तक पहुंच गई है। संगठन का मूल ध्येय समाज के अंतिम पायदान पर खड़े उन बेसहारा लोगों को गरिमापूर्ण जीवन, पारिवारिक अपनत्व, सुरक्षा और समुचित देखभाल सुनिश्चित कराना है जो शारीरिक या मानसिक व्याधियों के चलते असहाय हो गए हैं। इस निरंतर फैलाव को सामाजिक कल्याण और मानवता की दिशा में एक प्रभावी प्रयास माना जा रहा है।

## इसका आप पर असर
इस विस्तार से बेसहारा और बीमार लोगों को स्थानीय स्तर पर त्वरित आश्रय, भोजन और निःशुल्क उपचार मिल सकेगा।

- **बिहार में:** पटना, गया, रोहतास और भागलपुर में चार नए आश्रम खुलने से सड़कों पर भटकने वाले निराश्रितों को तुरंत आश्रय और चिकित्सा सहायता मिलेगी। स्थानीय नागरिक और प्रशासन अब लावारिस मरीजों को सीधे इन केंद्रों में पुनर्वास के लिए भेज सकते हैं।
- **भारत में:** आगामी माह जम्मू और पंजाब में नए केंद्र खुलने से संगठन का दायरा 14 राज्यों तक पहुंच जाएगा। पूरे देश में 80 आश्रम सक्रिय होने से लावारिस और बीमार लोगों के संरक्षण के लिए एक बड़ा सामाजिक सुरक्षा ढांचा तैयार हो रहा है।
- **नागरिकों के लिए:** यदि किसी भी शहर में कोई बीमार, वृद्ध या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति लावारिस स्थिति में मिले, तो उसे इन केंद्रों में सहारा दिलाया जा सकता है। इससे आम लोगों को जरूरतमंदों की मदद के लिए एक विश्वसनीय और निःशुल्क संस्थागत माध्यम मिलता है।
- **स्वास्थ्य सेवाओं पर:** अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर उपेक्षित पड़े गंभीर मरीजों को नियमित नर्सिंग और दवा की सुविधा मिलेगी। इससे स्थानीय सरकारी अस्पतालों पर लावारिस मरीजों की देखभाल का अतिरिक्त बोझ भी घटेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
सड़कों पर लावारिस और गंभीर रूप से अस्वस्थ पड़े लोगों की बढ़ती तादाद और उनके लिए स्थानीय स्तर पर आश्रय की कमी के कारण संस्था ने अंतरराज्यीय विस्तार का फैसला लिया।

- **स्थानीय स्तर पर आश्रय की कमी:** बड़े शहरों के बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों के आसपास अक्सर बीमार निराश्रित असहाय अवस्था में छूट जाते हैं। राजस्थान के भरतपुर तक हर मरीज को पहुंचाना व्यावहारिक नहीं था, इसलिए बिहार के चार प्रमुख शहरों में स्थानीय केंद्र शुरू किए गए।
- **भरतपुर मॉडल की सफलता:** मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन ने भरतपुर में निराश्रितों के इलाज और पुनर्वास का एक सफल तंत्र विकसित किया था। इसी कार्यप्रणाली के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अन्य राज्यों में भी समान आश्रम खोलने की मांग और योजना आगे बढ़ी।
- **राष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्क विस्तार:** संगठन का लक्ष्य प्रत्येक जरूरतमंद तक पहुंच बनाना है, जिसके तहत अगले चरण में जम्मू और पंजाब को जोड़कर 14 राज्यों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। आश्रमों की कुल संख्या 80 तक पहुंचना इसी निरंतर मानवीय विस्तार नीति का परिणाम है।

## सवाल-जवाब

### 1. बिहार के किन शहरों में नए अपना घर आश्रम शुरू किए गए हैं?
बिहार के चार शहरों—पटना, गया, रोहतास और भागलपुर में नए अपना घर आश्रम शुरू किए गए हैं।

### 2. अपना घर आश्रम की शुरुआत कहां से हुई थी?
इस सेवा श्रृंखला की शुरुआत राजस्थान के भरतपुर में स्थित मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन से हुई थी।

### 3. आगामी माह में किन राज्यों या क्षेत्रों में नए आश्रम खोले जाएंगे?
संस्था के संस्थापक बी एन भारद्वाज के अनुसार, अगले महीने जम्मू में पहला और पंजाब में दूसरा आश्रम खोला जाएगा।

### 4. देशभर में अब अपना घर आश्रमों की कुल संख्या कितनी हो गई है?
बिहार के चार नए आश्रमों के जुड़ने के साथ ही इस सेवा श्रृंखला में आश्रमों की कुल संख्या 80 पहुंच गई है।

### 5. नए केंद्र शुरू होने के बाद संस्था का दायरा कितने राज्यों तक पहुंचेगा?
जम्मू और पंजाब में आश्रमों की शुरुआत के साथ अपना घर की सेवा यात्रा कुल 14 राज्यों तक पहुंच जाएगी।

### 6. इन आश्रमों में निराश्रित लोगों को कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं?
इन आश्रमों में जरूरतमंद और असहाय लोगों को सुरक्षित आश्रय, पौष्टिक भोजन, चिकित्सा सुविधाएं और सम्मानजनक सेवा देखभाल उपलब्ध कराई जाती है।

## प्रेरणा और सबक
निरास्वार्थ सेवा, संगठित प्रयास और एक छोटे कस्बे से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर पर 80 आश्रमों का नेटवर्क खड़ा करने की यह यात्रा सामाजिक नेतृत्व की मिसाल है।

- **दृढ़ संकल्प से बड़ा बदलाव:** भरतपुर जैसे छोटे शहर से शुरू हुआ एक मानवीय प्रयास आज 14 राज्यों और 80 आश्रमों के विशाल तंत्र में बदल चुका है। जब ध्येय निस्वार्थ हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर असरदार कार्य खड़ा किया जा सकता है।
- **उपेक्षितों को गरिमा देना:** समाज जिन बेसहारा और बीमार लोगों को लावारिस मानकर छोड़ देता है, उन्हें 'प्रभुजन' मानकर सम्मानजनक जीवन और चिकित्सा देना सच्ची संवेदनशीलता सिखाता है। सेवा का उद्देश्य केवल भोजन देना नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा बहाल करना है।
- **निरंतर विस्तार की प्रेरणा:** एक राज्य में सफल होने के बाद रुकने के बजाय बिहार, पंजाब और जम्मू तक दायरा बढ़ाना यह सिखाता है कि सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास और आगे की योजना जरूरी है।

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