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  "type": "article",
  "title": "पाली के 900 साल पुराने महालक्ष्मी मंदिर में दिवाली पर मिलता है सिद्ध सिक्के का प्रसाद",
  "summary": "राजस्थान के पाली में स्थित एक प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली पर भक्तों को मिठाई के बजाय अभिमंत्रित सिद्ध सिक्का प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इस नौ सदी पुराने मंदिर की मान्यता है कि इस सिक्के को तिजोरी में रखने से घर में हमेशा बरकत बनी रहती है।",
  "content": "राजस्थान के पाली शहर में एक ऐसा अनूठा प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर मौजूद है जहाँ दीपावली के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं को पारंपरिक मिठाइयों या मेवे के स्थान पर एक विशेष अभिमंत्रित सिक्का प्रसाद के रूप में प्रदान किया जाता है। सोमनाथ रोड पर स्थित बड़ी ब्रह्मपुरी के इस दिव्य धाम की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है और यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु की मन्नतें पूरी होने की मान्यता है।\n\nनौ सदी पुराना ऐतिहासिक और चमत्कारी धाम\nयह मंदिर लगभग 900 साल पुराना है और इसके गर्भगृह में माता महालक्ष्मी की बेहद मनमोहक तथा आकर्षक प्रतिमा स्थापित है। अपनी चमत्कारिक मूर्ति और अनूठी परंपराओं के चलते यह पावन स्थल पूरे इलाके में गहरी श्रद्धा और आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है। दीपावली के खास मौके पर इस मंदिर में माता लक्ष्मी की विशेष महाआरती का आयोजन किया जाता है, जिसके बाद श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है।\n\nअभिमंत्रित सिक्के का अनोखा और रहस्यमयी प्रसाद\nइस पावन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता और परंपरा यहाँ मिलने वाला वह सिद्ध सिक्का है जिसे विशेष विधि-विधान से अभिमंत्रित किया जाता है। मुख्य पूजन और दीपावली की पूर्व संध्या पर मंदिर के विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इन सिक्कों को पूरी तरह सिद्ध किया जाता है। धनतेरस की रात को इन सिक्कों की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई थी, जिसके बाद अब दीपावली के अवसर पर इन्हें भक्तों में वितरित किया जा रहा है। राजस्थान भर में यह अपने तरह का इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ ऐसा अनूठा प्रसाद श्रद्धालुओं को मिलता है।\n\nतिजोरी में रखने से होती है धन-धान्य की वृद्धि\nमान्यता यह है कि इस सिद्ध सिक्के को घर की तिजोरी, दुकान के गल्ले या धन रखने के अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थापित करने से पूरे साल बरकत बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस चमत्कारी सिक्के को पाने और माता के दर्शन करने के लिए पाली शहर के अलावा आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु सुबह तड़के से ही लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं। महाआरती के दौरान गूंजने वाले ढोल-नगाड़ों और शंखनाद से पूरा इलाका पूरी तरह भक्तिमय माहौल में रंग जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nपाली और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह परंपरा धन और समृद्धि की सांस्कृतिक आस्था से जुड़ी है।\n\n• स्थानीय प्रभाव: पाली शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं को महाआरती के बाद यह विशेष सिद्ध सिक्का प्राप्त होता है।\n• आर्थिक विश्वास: इस अभिमंत्रित सिक्के को घरों की तिजोरियों में रखने से आर्थिक समृद्धि बनी रहने की स्थानीय मान्यता है।\n• दर्शन व्यवस्था: दिवाली के दिन मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ने के कारण श्रद्धालुओं को सुबह तड़के से लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है।\n• सांस्कृतिक महत्व: यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ मिठाई की जगह सिक्का प्रसाद के रूप में दिया जाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइस प्राचीन मंदिर में सिक्के बांटने की परंपरा सदियों पुरानी वैदिक मान्यताओं और स्थानीय धार्मिक रीति-रिवाजों पर आधारित है।\n\n• वैदिक अनुष्ठान: मंदिर के विद्वान आचार्य धनतेरस की रात से ही विशेष मंत्रोच्चार के जरिए इन सिक्कों को पूरी तरह सिद्ध और अभिमंत्रित करते हैं।\n• ऐतिहासिक मान्यता: यह मंदिर लगभग नौ सौ वर्ष पुराना है और इसकी चमत्कारी परंपराओं के कारण यहाँ विशेष प्रसाद का प्रचलन सदियों से चला आ रहा है।\n• आस्था का आधार: दीपावली के पावन अवसर पर माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष तांत्रिक और वैदिक विधि-विधान का पालन किया जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पाली का यह महालक्ष्मी मंदिर कहाँ स्थित है?\nयह मंदिर राजस्थान के पाली शहर में बड़ी ब्रह्मपुरी, सोमनाथ रोड पर स्थित है।\n\n2. इस मंदिर में प्रसाद के रूप में क्या दिया जाता है?\nयहाँ मिठाई या मेवे के स्थान पर एक विशेष अभिमंत्रित सिद्ध सिक्का प्रसाद के रूप में दिया जाता है।\n\n3. यह मंदिर कितना पुराना है?\nयह दिव्य मंदिर लगभग 900 साल पुराना है।\n\n4. इस सिद्ध सिक्के का क्या महत्व है?\nमान्यता है कि इस सिक्के को घर की तिजोरी में रखने से कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और बरकत बनी रहती है।\n\n5. इन सिक्कों की पूजा कब की जाती है?\nइन सिक्कों की पूजा धनतेरस की रात को की जाती है और इन्हें दीपावली पर भक्तों में वितरित किया जाता है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-11-07",
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    "पाली",
    "महालक्ष्मी मंदिर",
    "दिवाली प्रसाद",
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