# पाली के ऐतिहासिक नाडोल में गहराया संकट, गवई तालाब में सैकड़ों मछलियों की मौत और बदबू से मचा हड़कंप

> पाली जिले के रानी क्षेत्र स्थित नाडोल कस्बे के गवई तालाब में सैकड़ों मछलियों की मौत से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पानी का काला पड़ना और तेज बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, जिससे स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/pali-ke-aitihasik-nadol-mein-gahraya-sankat-gavai-talab-mein-sankhdron-machliyon-ki-maut-48690 · **Language:** Hindi
**Tags:** पाली न्यूज, नाडोल तालाब, मछलियों की मौत, पर्यावरण संकट, राजस्थान समाचार

पाली जिले के रानी उपखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक नाडोल कस्बे से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां के प्रसिद्ध गवई, जिसे मलोप तालाब भी कहा जाता है, उसमें पिछले कुछ दिनों से लगातार सैकड़ों मछलियों की मौत हो रही है। जलीय जीवों के इस तरह बड़ी संख्या में दम तोड़ने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।

## तालाब का बदलता रंग और असहनीय दुर्गंध
गवई तालाब का पानी लगातार काला पड़ता जा रहा है और उससे उठने वाली तेज और असहनीय दुर्गंध ने आसपास की घनी आबादी के साथ-साथ वहां से गुजरने वाले राहगीरों का भी जीना मुहाल कर दिया है। इस भयानक बदबू के कारण स्थानीय निवासियों का घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। पशु-पक्षियों के जीवनदाता और इस पूरे इलाके के भूजल स्तर को बनाए रखने वाले मुख्य आधार स्तंभ की ऐसी बदहाली ने सबको झकझोर कर रख दिया है।

## जहरीले रसायन की आशंका और ऑक्सीजन का संकट
स्थानीय निवासी मीठालाल डाबी सहित क्षेत्र के कई अन्य लोगों ने तालाब के पानी में किसी जहरीले रसायन या केमिकल के मिलने की गंभीर आशंका जताई है। इसके साथ ही, कुछ जानकारों का मानना है कि इस भीषण गर्मी और गंदगी के अत्यधिक जमाव के कारण पानी के भीतर घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर अचानक काफी नीचे गिर गया होगा, जो इस भारी तबाही की एक बड़ी वजह बन गया है। इसके अलावा, लंबे अरसे से इस तालाब के घाटों पर बेरोक-टोक चल रही गाड़ियों और कपड़ों की धुलाई ने इसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर दिया है। हालांकि, इन सब के बावजूद मछलियों की इस सामूहिक मौत के पीछे की असल और आधिकारिक वजह अभी तक सामने नहीं आ सकी है.

## मवेशियों और भूजल का मुख्य सहारा
यह ऐतिहासिक गवई तालाब केवल एक जलाशय नहीं है, बल्कि यह नाडोल क्षेत्र के बेजुबान पशु-पक्षियों और मवेशियों की प्यास बुझाने का इकलौता साधन है। इसके साथ ही, यह जलस्रोत कस्बे के भूजल स्तर को रिचार्ज करने और आसपास के तमाम कुओं में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। ऐसे में इस जलस्रोत का इस तरह दूषित हो जाना सीधे तौर पर पर्यावरण और आम जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

## प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की पुरजोर मांग
बढ़ते हुए इस पर्यावरणीय संकट को भांपते हुए गुस्से में आए ग्रामीणों ने उपखंड प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों ने मांग की है कि तालाब के पानी के नमूने लेकर उनकी फौरन वैज्ञानिक जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि मछलियों की मौत के असली कारणों का पता लगाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और तालाब को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जल्द से जल्द पुख्ता कदम उठाए जाएं ताकि किसी बड़े खतरे को टाला जा सके।

## इसका आप पर असर
नाडोल के गवई तालाब में फैली इस भयंकर गंदगी और मछलियों की मौत से स्थानीय स्तर पर जनजीवन और पर्यावरण पर सीधा असर पड़ा है।

- **नाडोल और रानी क्षेत्र में:** तालाब के पानी से उठ रही असहनीय दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों का रहना मुश्किल हो गया है और मवेशियों के लिए पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है।
- **भूजल स्तर पर:** तालाब के दूषित होने से क्षेत्र के कुओं और भूजल रिचार्ज प्रक्रिया पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है, जिससे भविष्य में जल संकट गहरा सकता है।
- **सार्वजनिक स्वास्थ्य पर:** पानी में फैले प्रदूषण और सड़ती हुई मछलियों के कारण आसपास के इलाकों में संक्रामक बीमारियों फैलने का खतरा बढ़ गया है।
- **प्रशासनिक कार्रवाई:** ग्रामीणों के आक्रोश के बाद अब स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर पानी की तत्काल जांच करने का भारी दबाव बन गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
नाडोल के गवई तालाब में हुई इस बड़ी दुर्घटना के पीछे कई पर्यावरणीय और मानवीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं, जिनकी पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच की मांग की जा रही है।

- **रासायनिक संदूषण की आशंका:** स्थानीय निवासियों ने तालाब के पानी में जहरीले केमिकल या अपशिष्ट मिलने की आशंका जताई है, जिससे जलीय जीवों की अचानक मौत हुई।
- **ऑक्सीजन स्तर में गिरावट:** भीषण गर्मी और पानी में भारी गंदगी जमा होने के कारण घुलित ऑक्सीजन का स्तर अचानक बहुत कम हो गया, जिससे मछलियों का दम घुटने लगा।
- **मानवीय गतिविधियां:** लंबे समय से तालाब के घाटों पर बेरोकटोक वाहनों और कपड़ों की धुलाई ने इस प्राकृतिक जलस्रोत के पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
- **जांच का अभाव:** मछलियों की सामूहिक मौत के वास्तविक कारणों का अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. नाडोल के किस तालाब में मछलियों की मौत हुई है?
पाली जिले के रानी क्षेत्र के ऐतिहासिक नाडोल कस्बे के गवई (मलोप) तालाब में सैकड़ों मछलियों की मौत हुई है।

### 2. मछलियों की मौत का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
ग्रामीणों ने पानी में जहरीले केमिकल मिलने की आशंका जताई है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी और गंदगी से ऑक्सीजन स्तर गिरना भी इसकी वजह हो सकता है।

### 3. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
ग्रामीणों ने उपखंड प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तालाब के पानी के नमूने लेकर वैज्ञानिक जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

### 4. यह तालाब क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह ऐतिहासिक तालाब मवेशियों के पीने के पानी का मुख्य साधन है और कस्बे के भूजल स्तर को रिचार्ज करने में रीढ़ की हड्डी माना जाता है।

### 5. इस घटना से इलाके में क्या स्थिति बनी हुई है?
तालाब के पानी के काले पड़ने और तेज दुर्गंध से आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया है और प्रशासन की अनदेखी को लेकर भारी आक्रोश है।

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