# पाली के बीजापुर में 500 साल पुराना हर हर गंगे धाम, गौमुख के पवित्र जल और तीन पीठों के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

> पाली जिले के बाली उपखंड में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित बीजापुर का हर हर गंगे तीर्थ मिनी हरिद्वार के नाम से प्रसिद्ध है, जहां नवरात्रि पर दर्शन और पवित्र स्नान के लिए भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/pali-ke-bijapur-men-500-sala-purana-har-har-gange-dhama-gaumukh-ke-pavitra-jala-aura-tina-pithon-ke-darshana-ko-umare-shraddhalu-44744 · **Language:** Hindi
**Tags:** पाली, बाली उपखंड, हर हर गंगे कुंड, मिनी हरिद्वार, बीजापुर, अरावली पर्वत, नवरात्रि, हिंगलाज माता मंदिर

राजस्थान के पाली जिले में अरावली पर्वतमाला की सुरम्य वादियों के बीच स्थित बाली उपखंड का बीजापुर क्षेत्र इन दिनों आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर है। जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर बसा हर हर गंगे तीर्थ स्थल स्थानीय श्रद्धालुओं और सैलानियों के बीच मिनी हरिद्वार के रूप में विख्यात हो चुका है। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान इस ऐतिहासिक स्थल पर मां गंगा के स्वरूप के दर्शन करने और पवित्र कुंड में आस्था की डुबकी लगाने के लिए भक्तों का भारी तांता लग रहा है। करीब पांच सदी पुराने इस तीर्थ स्थल का वातावरण प्राकृतिक सौंदर्य, ट्रैकिंग के रोमांच और गहरी धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

## गौमुख से अविरल बहती है निर्मल जलधारा
इस पवित्र धाम का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर परिसर में मां गंगे के विग्रह के ठीक नीचे एक प्राचीन गौमुख स्थापित है, जिससे वर्ष के 12 महीने और चौबीसों घंटे प्राकृतिक जलधारा निरंतर बहती रहती है। मंदिर के पुजारी बाबूलाल गर्ग के अनुसार, उनके परिवार की पांच पीढ़ियां लगातार इस पावन स्थल पर पूजा-अर्चना और सेवा कार्य संभालती आ रही हैं। उनका कहना है कि इस प्राकृतिक जलस्रोत की पवित्रता और विशेषताएं हरिद्वार के गंगाजल के समान मानी जाती हैं, क्योंकि इस पानी को लंबे समय तक रखने पर भी इसमें कभी कीड़े नहीं पड़ते। इसी विश्वास के चलते यहां आने वाले श्रद्धालु इस जल को बोतलों व बरतनों में भरकर अपने घरों को ले जाते हैं।

## अस्थि विसर्जन और पूर्वजों के तर्पण की परंपरा
हरिद्वार की ही तरह इस पावन कुंड की धार्मिक मान्यता बेहद व्यापक है। स्थानीय देवासी समाज के साथ-साथ राजस्थान और आसपास के कई अन्य समाजों के लोग भी अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां पहुंचते हैं। मान्यता के अनुसार, परिजन अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन इसी हर हर गंगे कुंड में करते हैं। नवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहां आने वाले लोग न केवल पूजा-अर्चना करते हैं बल्कि अपने कुल की सुख-समृद्धि की कामना भी करते हैं। अरावली की घाटियों में अवस्थित होने के कारण यहां का वातावरण शांति और आध्यात्मिक एकाग्रता प्रदान करता है।

## एक ही यात्रा में तीन सिद्ध पीठों के दर्शन
इस धार्मिक यात्रा का मार्ग प्रकृति प्रेमियों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए बेहद खास है। मुख्य पार्किंग स्थल से पैदल यात्रा शुरू करने पर श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में तीन प्रमुख सिद्ध पीठों के दर्शन का अवसर मिलता है

- **नागेश्वर महादेव मंदिर:** पैदल यात्रा का सबसे पहला पड़ाव नागेश्वर महादेव मंदिर है। यहां यात्री देवाधिदेव महादेव के दर्शन कर अपनी आगे की चढ़ाई के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
- **हर हर गंगे मां मंदिर:** लगभग 40 मिनट की पैदल चढ़ाई तय करने के बाद श्रद्धालु दूसरे मुख्य पड़ाव हर हर गंगे मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर परिसर के बाहर ठंडे और स्वच्छ पानी के दो बड़े कुंड बने हुए हैं। अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं से रिसकर आने वाले इस शीतल जल में स्नान करते ही भक्तों की घंटों की थकान पूरी तरह मिट जाती है।
- **प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर:** कुंड में पवित्र स्नान और दर्शन के पश्चात श्रद्धालु लगभग 1.5 किलोमीटर की सीधी व बेहद खड़ी पहाड़ी चढ़ाई पार करते हैं। चोटी पर स्थित मां हिंगलाज के प्राचीन मंदिर में शीश नवाकर यह पावन यात्रा पूर्ण होती है।

## ट्रैकिंग, प्रकृति और भक्ति का अनूठा संगम
नवरात्रि के पावन दिनों में इस समूचे अरावली परिक्षेत्र की छटा देखते ही बनती है। पहाड़ियों पर कल-कल बहते प्राकृतिक झरने, ठंडी पहाड़ी हवाएं, पेड़ों की शाखाओं पर अठखेलियां करते बंदर और चारों ओर हरियाली की चादर इस स्थल को दर्शनीय बनाती है। जो लोग दूरस्थ तीर्थ स्थलों की लंबी यात्रा पर नहीं जा पाते, उनके लिए बीजापुर का यह मिनी हरिद्वार आस्था और प्रकृति भ्रमण का एक संपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

## इसका आप पर असर
पाली और आसपास के श्रद्धालुओं के लिए यह तीर्थ स्थल कम दूरी में धार्मिक स्नान, तर्पण और ट्रैकिंग का बेहतरीन विकल्प प्रदान करता है।

- **भारत में:** दूरदराज के तीर्थ स्थलों जैसे हरिद्वार जाने में असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए यह एक सुलभ और पवित्र आध्यात्मिक विकल्प उपलब्ध कराता है। इस तीर्थ पर जाकर लोग गंगा स्नान और पूर्वजों के श्राद्ध तर्पण जैसी धार्मिक परंपराएं पूरी कर सकते हैं।
- **पाली और राजस्थान में:** स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को नवरात्रि के दौरान आध्यात्मिक शांति के साथ अरावली की वादियों में ट्रैकिंग का अवसर मिलता है। पाली जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर की यात्रा कर श्रद्धालु एक ही दिन में तीन प्रमुख मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं।
- **आस्था और परंपरा:** देवासी समाज और अन्य समुदायों के लिए पूर्वजों की अस्थि विसर्जन के लिए यह सबसे प्रमुख स्थानीय केंद्र है। श्रद्धालु यहां से गौमुख का पवित्र जल अपनी बोतलों में भरकर वर्षभर के धार्मिक अनुष्ठानों के लिए घर ले जा सकते हैं।
- **प्रकृति प्रेमियों के लिए:** यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ रोमांचक पर्वतीय चढ़ाई और प्राकृतिक झरनों का आनंद लेने का मौका देता है। 1.5 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई शारीरिक स्वास्थ्य और ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए उपयुक्त अनुभव साबित होती है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस तीर्थ स्थल की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसका 500 वर्ष पुराना इतिहास, प्राकृतिक गौमुख से अविरल बहने वाला शुद्ध जल और एक ही मार्ग पर स्थित तीन सिद्ध मंदिरों का आध्यात्मिक महत्व है।

- **प्राकृतिक जलस्रोत की अनवरत धारा:** अरावली पर्वत शृंखलाओं के भीतर स्थित प्राकृतिक जल प्रणाली के कारण गौमुख से साल के 12 महीने और 24 घंटे लगातार स्वच्छ पानी बहता रहता है। इस जल की शुद्धता लंबे समय तक सुरक्षित रहने के कारण लोग इसे गंगाजल की तरह पूजनीय मानते हैं।
- **पुजारियों की पीढ़ियों की सेवा:** पुजारी बाबूलाल गर्ग के परिवार की पांच पीढ़ियों द्वारा यहां लगातार सेवा और पूजा-अर्चना करने से इस मंदिर की ऐतिहासिक निरंतरता और प्रमाणिकता बनी रही है। इस दीर्घकालिक सेवा ने स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था स्थापित की है।
- **तीन सिद्ध पीठों का एकीकरण:** मुख्य पार्किंग से शुरू होकर नागेश्वर महादेव, हर हर गंगे और फिर हिंगलाज माता तक का क्रमबद्ध मार्ग श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में संपूर्ण धार्मिक अनुभव प्रदान करता है। इसी बहुआयामी धार्मिक स्वरूप के कारण नवरात्रि में यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

## सवाल-जवाब

### 1. हर हर गंगे तीर्थ स्थल पाली जिला मुख्यालय से कितनी दूरी पर स्थित है?
यह पावन तीर्थ स्थल पाली जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर बाली उपखंड के बीजापुर के पास स्थित है।

### 2. इस धाम को स्थानीय स्तर पर मिनी हरिद्वार क्यों कहा जाता है?
यहां गौमुख से वर्ष के 12 महीने अविरल पवित्र जल बहता है और लोग हरिद्वार की तरह यहां पूर्वजों की अस्थियां विसर्जित करने आते हैं, इसलिए इसे मिनी हरिद्वार कहा जाता है।

### 3. इस तीर्थ यात्रा में कौन-कौन से तीन प्रमुख मंदिर आते हैं?
इस यात्रा में पहले नागेश्वर महादेव मंदिर, फिर हर हर गंगे मां मंदिर और अंत में पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर आता है।

### 4. हर हर गंगे मंदिर तक पहुंचने में पैदल कितना समय लगता है?
मुख्य पार्किंग स्थल से शुरू करने के बाद लगभग 40 मिनट की पैदल चढ़ाई करके श्रद्धालु हर हर गंगे मंदिर पहुंचते हैं।

### 5. हिंगलाज माता मंदिर पहुंचने के लिए कितनी चढ़ाई करनी पड़ती है?
कुंड में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं को पहाड़ी की चोटी पर स्थित हिंगलाज माता मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 1.5 किलोमीटर की सीधी और खड़ी चढ़ाई चढ़नी होती है।

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