# पाली के नया गांव मोक्षधाम में घुटनों तक भरा पानी, अंतिम विदाई के वक्त कीचड़ से जूझ रहे परिजन

> पाली के नया गांव स्थित श्मशान घाट में लगातार जलभराव और सीपेज के चलते अंतिम संस्कार तथा बच्चों को दफनाने में भारी परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम से पक्के नाले और भराव की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/pali-ke-naya-gaon-mokshadhama-men-ghutanon-taka-bhara-pani-antima-vidai-ke-vakta-kichara-se-jujha-rahe-parijana-47688 · **Language:** Hindi
**Tags:** पाली, नया गांव, मोक्षधाम, श्मशान घाट, जलभराव, नगर निगम, राजस्थान

जीवन की अंतिम यात्रा को हर समाज में सम्मान और शांति का प्रतीक माना जाता है, मगर राजस्थान के पाली स्थित नया गांव का मोक्षधाम इस समय भारी बदहाली के दौर से गुजर रहा है। यहां अपने दिवंगत परिजनों को अंतिम विदाई देने पहुंचने वाले लोगों को घुटनों तक भरे पानी और गहरे कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार के लिए मुखाग्नि देने से लेकर छोटे बच्चों को दफनाने तक, हर चरण में परिवारों को भारी मानसिक और शारीरिक यातना झेलनी पड़ रही है। उचित देखरेख के अभाव में यह पवित्र स्थल एक बड़े जलभराव केंद्र में तब्दील हो चुका है।

## नाड़ी का रिसाव और सीवरेज का गंदा पानी बना मुसीबत
इस श्मशान घाट के अधिकांश भूभाग पर पूरे बारह महीने पानी जमा रहता है, जबकि बारिश के दिनों में यह पूरा इलाका किसी गहरे तालाब जैसा दिखने लगता है। आसपास के इलाके में रहने वाले सम्पतराम बावरी के मुताबिक, मोक्षधाम के ठीक पास में एक प्राकृतिक नाड़ी मौजूद है और उसी रास्ते से जलदाय विभाग का प्रमुख नाला भी गुजरता है। इन दोनों जलस्रोतों से लगातार हो रहे रिसाव के कारण श्मशान घाट की जमीन हमेशा दलदली बनी रहती है। इतना ही नहीं, समीपवर्ती बस्तियों से निकलने वाला गंदा पानी भी बहकर सीधे इसी परिसर में इकट्ठा हो रहा है। नगर निगम के अधिकारियों को इस विकट स्थिति के बारे में बार-बार सूचना दी गई, परंतु प्रशासन की ओर से केवल खोखले आश्वासनों के अलावा कोई जमीनी कदम नहीं उठाया गया।

## पांच सालों से उपेक्षा का शिकार, फिसलकर चोटिल हो रहे लोग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह गंभीर संकट पिछले पांच-छह सालों से लगातार बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है। लिखित और मौखिक स्तर पर अनगिनत शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका। मानसून के समय तो यहां के हालात इतने विकट हो जाते हैं कि शव को अंदर तक ले जाना जान जोखिम में डालने जैसा साबित होता है।

स्थानीय निवासी छोगाराम देवासी ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा, “पानी भरा रहने के कारण यहां आने वाले लोग अक्सर फिसलकर गिर जाते हैं और चोटिल होते हैं।” अंतिम विदाई के अत्यंत संवेदनशील क्षणों में शोकग्रस्त परिवारों को इस प्रकार की अमानवीय परिस्थितियों से जूझना पड़ रहा है, जो नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है।

## मासूमों को दफनाने वाली जमीन पर भी पानी का पहरा
इस पूरे मामले का सबसे दुखद और हृदयविदारक पहलू वह स्थान है, जहां रीति-रिवाज के अनुसार छोटे बच्चों को दफनाया जाता है। उस हिस्से में भी लगातार दूषित पानी भरा रहता है, जिसके चलते अपने मासूमों को खो चुके माता-पिता और परिजनों को दफनाने की प्रक्रिया पूरी करने में अत्यधिक पीड़ा और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शोक के आंसुओं के बीच परिजनों को पानी के बीच गड्ढा खोदने की विवशता झेलनी पड़ रही है।

## पक्के नाले के निर्माण और भराव की मांग, आंदोलन की चेतावनी
लगातार बढ़ रही इस समस्या से त्रस्त होकर स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और जिला प्रशासन के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि श्मशान परिसर में जमा पानी की निकासी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल एक मजबूत पक्के नाले का निर्माण करवाया जाए। दूसरी मांग के तौर पर लोगों ने कहा है कि जिन निचले हिस्सों में पानी भरता है, वहां पर्याप्त मिट्टी डलवाकर जमीन के स्तर को ऊंचा उठाया जाए ताकि दोबारा जलभराव की नौबत न आए। स्थानीय बाशिंदों और ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस गंभीर मसले का समाधान नहीं किया, तो उन्हें मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ेगा और व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करना होगा।

## इसका आप पर असर
नया गांव मोक्षधाम में लंबे समय से व्याप्त जलभराव के चलते शोक संतप्त नागरिकों को अंतिम संस्कार के दौरान गंभीर दिक्कतों और स्वास्थ्य खतरों का सामना करना पड़ रहा है।

- **पाली के स्थानीय निवासियों के लिए:** श्मशान घाट परिसर में जाने वाले लोगों को कीचड़ और गहरे पानी से गुजरना पड़ता है, जिससे फिसलकर चोट लगने का खतरा बना रहता है। अंतिम विदाई देने आ रहे परिवारों को शव ले जाने और क्रियाकर्म संपन्न कराने में भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।
- **शोक संतप्त परिवारों पर असर:** छोटे बच्चों को दफनाने के लिए आरक्षित जमीन में पानी भरे रहने से परिजनों को मर्यादापूर्ण अंतिम क्रिया पूरी करने में कठिनाई हो रही है। इस अमानवीय स्थिति के कारण लोगों में स्थानीय निकाय के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
- **आसपास की आबादी के लिए:** गंदे पानी और रिसाव के लगातार जमाव से क्षेत्र में दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। यदि जल्द पक्का नाला नहीं बना, तो गंदा पानी आसपास की बस्तियों में और अधिक फैल सकता है।
- **नागरिक आंदोलन की संभावना:** प्रशासन द्वारा मांगें पूरी न किए जाने पर स्थानीय बाशिंदों ने विरोध प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है। इसके चलते इलाके में आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्यों और यातायात पर असर पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पाली के नया गांव स्थित मोक्षधाम में जलभराव की मुख्य वजह पास स्थित नाड़ी तथा जलदाय विभाग के नाले से लगातार होने वाला रिसाव और आसपास की बस्तियों का सीवरेज है।

- **नाड़ी और पाइपलाइन से रिसाव:** श्मशान घाट के बिल्कुल पास एक प्राकृतिक नाड़ी है और वहीं से जलदाय विभाग का मुख्य नाला भी गुजरता है। दोनों संरचनाओं से अनवरत पानी का रिसाव होने के कारण मोक्षधाम की मिट्टी सालभर गीली और दलदली बनी रहती है।
- **बस्तियों के गंदे पानी की आवक:** पास की रिहायशी बस्तियों से निकलने वाले दूषित पानी की निकासी का कोई सुगम प्रबंध नहीं है, जिससे यह गंदा पानी सीधे श्मशान के निचले भूभाग में जमा हो जाता है। पक्के नाले की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है।
- **जमीन का निचला स्तर:** श्मशान घाट की जमीन आसपास के इलाके से निचली है और वहां भराव न होने के कारण बारिश का पानी जमा होकर तालाब का रूप ले लेता है। पांच-छह वर्षों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद नगर निगम द्वारा जल निकासी या भराव कार्य नहीं कराया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. पाली के नया गांव श्मशान घाट में क्या समस्या है?
श्मशान घाट में सालभर घुटनों तक गंदा पानी और कीचड़ जमा रहता है, जिससे अंतिम संस्कार करने और शव ले जाने में लोगों को भारी परेशानी होती है।

### 2. मोक्षधाम में पानी जमा होने का मुख्य कारण क्या है?
पास स्थित नाड़ी और जलदाय विभाग के नाले से लगातार होने वाला रिसाव तथा आसपास की बस्तियों का गंदा पानी यहां जमा होता है।

### 3. यह जलभराव की समस्या कितने समय से बनी हुई है?
स्थानीय निवासियों के अनुसार यह समस्या पिछले पांच से छह वर्षों से लगातार बनी हुई है।

### 4. मासूम बच्चों को दफनाने वाली जगह पर क्या स्थिति है?
बच्चों को दफनाने के लिए तय हिस्से में भी लगातार पानी भरा रहता है, जिससे शोक संतप्त परिजनों को दफनाने में भारी मुश्किलें आ रही हैं।

### 5. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से क्या मांगें की हैं?
नागरिकों ने पानी की सुगम निकासी के लिए पक्के नाले का निर्माण कराने और परिसर में मिट्टी डलवाकर जमीन का स्तर ऊंचा उठाने की मांग की है।

### 6. यदि प्रशासन ने समाधान नहीं किया तो ग्रामीणों ने क्या चेतावनी दी है?
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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