पाली में जल संकट से निपटने की बड़ी तैयारी, 7 करोड़ से अधिक खर्च कर सुधारे जाएंगे चार बांध और नहरें पाली जिले में पानी की बर्बादी रोकने के लिए जल संसाधन विभाग ने चार प्रमुख बांधों और उनसे जुड़ी नहरों के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है। इस परियोजना पर करीब 7.03 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे सिंचाई और पेयजल व्यवस्था मजबूत होगी। राजस्थान के पाली जिले में पानी की हर बूंद को बचाने और जल संसाधन के नुकसान पर लगाम लगाने के लिए एक अहम पहल शुरू की गई है। इसके तहत जिले के चार प्रमुख बांधों और उनके नहर तंत्र का कायाकल्प किया जाएगा। जल संसाधन विभाग इस पूरी परियोजना पर 702.69 लाख रुपये यानी लगभग 7.03 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने जा रहा है। इस योजना का मुख्य मकसद रिसाव और सीपेज की वजह से बर्बाद होने वाले पानी को बचाना, जल संरचनाओं की उम्र बढ़ाना और उपलब्ध पानी का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। इस पूरे विकास अभियान के दौरान कच्ची नहरों को सीमेंटेड और पक्का किया जाएगा, और जिन इलाकों में पानी रिसने की समस्या ज्यादा है, वहां विशेष जल निकासी प्रणालियां विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही बांधों की दीवारों और किनारों को मजबूत करने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन सुधारों से न केवल भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी अधिक सुचारू हो जाएगी। बांधों की पाल और संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण इस मेगा योजना के तहत तखतगढ़ बांध और सिंदरू बांध की पाल की चौड़ाई को मौजूदा 3 मीटर से बढ़ाकर 4.5 मीटर किया जाएगा। इन दोनों स्थानों पर पाल पर मजबूत पत्थरों की पिचिंग भी करवाई जाएगी, जिससे भारी पानी के दबाव को झेलने की उनकी क्षमता में इजाफा होगा। इन तमाम इंजीनियरिग कार्यों के अलावा नहरों की आवश्यक मरम्मत भी की जाएगी, ताकि पानी का प्रवाह बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके और अंतिम छोर के इलाकों तक आसानी से पहुंच सके। हेमावास और बाणियावास बांध में विशेष कार्य हेमावास बांध के मामले में, जो पाली शहर के बेहद करीब स्थित है, उसकी 3 किलोमीटर लंबी गुलाबपुरा माइनर को पूरी तरह पक्का किया जाएगा जो अभी तक कच्ची है। इस बदलाव से मिट्टी द्वारा पानी के सोखे जाने की प्रक्रिया रुकेगी और कृषि कार्यों के लिए पानी की बचत होगी। वहीं बाणियावास बांध पर सीपेज की गंभीर समस्या से निपटने के लिए 3 किलोमीटर लंबी टो-ड्रेन बनाई जाएगी। इसके अलावा ओवरफ्लो स्लूस गेट की मरम्मत का काम और मिट्टी की पाल को ठीक करने का काम भी इस परियोजना का हिस्सा है, जिससे आसपास के गांवों को जलभराव से राहत मिलेगी। टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों का रुख जल संसाधन विभाग ने हेमावास और बाणियावास समेत अन्य स्थानों पर होने वाले इन सुधार कार्यों के लिए आधिकारिक तौर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग के पाली स्थित कार्यालय के अधिशासी अभियंता शंकरलाल राठौड़ ने जानकारी दी कि इन सभी प्रयासों का मूल केंद्र बिंदु सीपेज और रिसाव के कारण होने वाले जल नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाना है। अधिकारियों का विश्वास है कि इन संरचनाओं के मजबूत होने से आने वाले दिनों में क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति और सिंचाई प्रणालियों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। इसका आप पर असर पाली जिले में चार बांधों और नहरों के जीर्णोद्धार का स्थानीय निवासियों और किसानों पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। • भारत में: जल संरक्षण की ऐसी परियोजनाएं देश भर के कृषि क्षेत्रों में भूजल स्तर को गिरने से रोकने का एक बेहतर मॉडल पेश करती हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को दीर्घकालिक मजबूती मिलती है। • पाली में: जिले के किसानों को अब अपनी फसलों की सिंचाई के लिए नहर के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इसके अलावा आसपास के गांवों में रिसाव और जलभराव की पुरानी समस्या से स्थानीय लोगों को स्थायी रूप से निजात मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ पाली जिले के इन बांधों और नहरों के जीर्णोद्धार का निर्णय बुनियादी ढांचे की पुरानी पड़ चुकी प्रणालियों और पानी की भारी बर्बादी को रोकने की आवश्यकता के कारण लिया गया है। जल रिसाव के कारण न केवल जल संसाधन नष्ट हो रहे थे, बल्कि किसानों को सिंचाई का पूरा लाभ भी नहीं मिल पा रहा था। • पानी का रिसाव: कच्ची नहरों और पुरानी संरचनाओं के कारण सीपेज की समस्या लगातार बढ़ रही थी, जिससे लाखों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता था। • किसानों की समस्याएं: नहरों के अंतिम छोर तक पानी न पहुंच पाने के कारण कृषि कार्यों में भारी बाधा आ रही थी, जिसकी शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। • बुनियादी ढांचे की कमजोरी: कई बांधों की पाल और सुरक्षा दीवारें कमजोर हो चुकी थीं, जिन्हें मजबूत करने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता थी। सवाल-जवाब 1. पाली में कितने बांधों का जीर्णोद्धार किया जाएगा? पाली जिले में कुल चार बांधों का जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिनके नाम हेमावास, बाणियावास, तखतगढ़ और सिंदरू हैं। 2. इस पूरी परियोजना पर कुल कितना खर्च आएगा? जल संसाधन विभाग की ओर से इन सुधार कार्यों पर 702.69 लाख रुपये यानी लगभग 7.03 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 3. हेमावास बांध की किस माइनर को पक्का किया जाएगा? हेमावास बांध की 3 किलोमीटर लंबी गुलाबपुरा माइनर को पूरी तरह पक्का किया जाएगा। 4. तखतगढ़ और सिंदरू बांध की पाल की चौड़ाई कितनी की जाएगी? तखतगढ़ और सिंदरू बांध की पाल की चौड़ाई 3 मीटर से बढ़ाकर 4.5 मीटर की जाएगी। 5. बाणियावास बांध के पास क्या विशेष निर्माण होगा? बाणियावास बांध के पास सीपेज की समस्या दूर करने के लिए 3 किलोमीटर लंबी टो-ड्रेन का निर्माण किया जाएगा। 6. इस परियोजना के कार्यों के लिए किसने जानकारी दी है? इन कार्यों के संबंध में जानकारी जल संसाधन विभाग पाली के अधिशासी अभियंता शंकरलाल राठौड़ ने दी है। https://trendkia.com/rajasthan/pali-me-jal-sankat-se-nipatane-ki-badi-taiyari-7-crore-se-adhik-kharch-kar-sudhare-jayenge-char-bandh-aur-nahare-48662 TrendKia — Har trend, sabse pehle.