पाली में बना दुनिया का पहला 3D ओम आकार का मंदिर, आसमान से ऐसा दिखता है अनोखा नजारा राजस्थान के पाली जिले के जाडन गांव में दुनिया का पहला 3D ओम आकार का मंदिर बनकर तैयार हुआ है। यह विशाल परिसर 30 साल की लंबी मेहनत और 250 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है। ब्रह्मांड की सबसे पवित्र ध्वनि माने जाने वाले 'ओम' के प्रतीक को अब जमीन पर एक भव्य आकार मिल चुका है। राजस्थान के पाली जिले के जाडन गांव में स्थित यह अनोखा मंदिर दुनिया का इकलौता ऐसा ढांचा है जो ऊपर से देखने पर पूरी तरह 'ओम' जैसा नजर आता है। इसकी इस खूबी को जमीन पर खड़े होकर नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके लिए आसमान की ऊंचाई से ही इसका असली स्वरूप नजर आता है। जाडन आश्रम के नाम से जाने जाने वाले इस स्थान पर देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आसमान से नजर आता है दिव्य स्वरूप जब कोई इस मंदिर को जमीन के तल से देखता है, तो उसे केवल सामान्य इमारतें, गुंबद और सुंदर नक्काशी ही दिखाई देती है। हालांकि, ड्रोन या उपग्रह चित्रों के जरिए जब इसे आसमान से देखा जाता है, तो इसकी असली भव्यता सामने आती है। इस पूरी संरचना में ओम के घुमावदार हिस्से बड़े गलियारों और कमरों के रूप में बनाए गए हैं। इसके ऊपरी चंद्र भाग में एक बड़ा जलाशय तैयार किया गया है, जबकि सबसे ऊपर स्थित बिंदु के स्थान पर 135 फीट ऊंचा मुख्य शिखर खड़ा किया गया है। तीन दशकों की लंबी मेहनत और वास्तुकला की चुनौती इस अद्भुत परियोजना की शुरुआत आज से तीन दशक पहले वर्ष 1995 में स्वामी महेश्वरानंद पुरी महाराज के मार्गदर्शन में हुई थी। बंजर और वीरान इलाके में फैली 250 एकड़ से अधिक जमीन पर इस तरह के जटिल डिजाइन को उतारना आसान काम नहीं था। चूंकि ओम के नक्शे में कोई भी रेखा सीधी नहीं होती, इसलिए इंजीनियरों और कारीगरों के लिए बिना सीधी दीवारों के इतनी बड़ी बहुमंजिला इमारत खड़ी करना एक बड़ी चुनौती थी। बंशी पहाड़पुर के खास पत्थरों और हजारों कारीगरों के दशकों के परिश्रम के बाद यह संरचना अब पूरी हुई है। शिव प्रतिमाओं और ज्योतिर्लिंगों का अनूठा संगम इस चार मंजिला विशाल परिसर के भीतर अध्यात्म का अनूठा संसार बसा हुआ है। इस परिसर में कुल 1008 अलग-अलग कक्ष और भगवान शिव की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इसके अलावा यहां देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी एक ही स्थान पर हो जाते हैं। पूरे भवन में लगभग 2000 खंभे बनाए गए हैं जिन पर पारंपरिक नक्काशी की गई है। यहां ध्यान और योग के लिए बड़े हॉल बनाए गए हैं तथा गुरुदेव की समाधि भी इसी परिसर में स्थित है। इसका आप पर असर यह अनोखा मंदिर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगा। • क्षेत्रीय विकास: पाली जिले में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय व्यवसाय और आतिथ्य क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। • रोजगार के अवसर: धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्धि मिलने से क्षेत्र में पर्यटन आधारित नई नौकरियां पैदा होंगी। • सांस्कृतिक महत्व: देश और दुनिया भर के श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर सभी प्रमुख धार्मिक दर्शन का लाभ मिलेगा। • बुनियादी ढांचा: तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए क्षेत्र में सड़क और परिवहन सुविधाओं में सुधार होगा। ऐसा क्यों हुआ इस विशाल वास्तुकला को वास्तविकता में बदलने के लिए तीन दशकों की लंबी योजना और आध्यात्मिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पड़ी। • आध्यात्मिक दृष्टिकोण: स्वामी महेश्वरानंद पुरी महाराज ने ब्रह्मांडीय प्रतीक को एक भौतिक शिक्षण और ध्यान केंद्र का रूप देने की कल्पना की थी। • जटिल डिजाइन: ओम के प्रतीक में कोई सीधी रेखा न होने के कारण निर्माण कार्य में सामान्य इमारतों की तुलना में अधिक समय और तकनीकी विशेषज्ञता लगी। • विशाल संसाधन: 250 एकड़ भूमि पर बंशी पहाड़पुर के पत्थरों का उपयोग करने और हजारों कारीगरों के समन्वय के लिए दशकों का समय लगा। सवाल-जवाब 1. दुनिया का पहला 3D ओम मंदिर कहां स्थित है? यह मंदिर राजस्थान के पाली जिले के जाडन गांव में स्थित है। 2. इस मंदिर की आधारशिला कब रखी गई थी? इस मंदिर की नींव वर्ष 1995 में रखी गई थी। 3. इस मंदिर का निर्माण किसने कराया है? इस मंदिर की परिकल्पना और निर्माण स्वामी महेश्वरानंद पुरी महाराज के मार्गदर्शन में हुआ है। 4. मंदिर का मुख्य शिखर कितना ऊंचा है? मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 135 फीट है। https://trendkia.com/rajasthan/pali-men-bana-duniya-ka-pahala-3d-om-akara-ka-mndira-33178 TrendKia — Har trend, sabse pehle.