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  "type": "article",
  "title": "पाली में गहराया जल संकट, जूना मालारी बांध सूखा और वन्यजीवों पर मंडराया खतरा",
  "summary": "पाली जिले के गोडवाड़ अंचल और देसूरी क्षेत्र में कम बारिश के कारण जूना मालारी बांध पूरी तरह सूख चुका है। इससे पेयजल संकट गहराने के साथ-साथ कुंभलगढ़ अभयारण्य के वन्यजीवों के गांवों की ओर रुख करने का खतरा बढ़ गया है।",
  "content": "सावन का महीना बीत चुका है लेकिन पाली जिले के गोडवाड़ अंचल में इस बार मानसून की बेरुखी ने स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में हुई भारी बारिश की कमी के कारण अब कृषि कार्यों, पेयजल आपूर्ति और कुंभलगढ़ अभयारण्य के वन्यजीवों के सामने एक विकट स्थिति पैदा हो गई है। गोडवाड़ अंचल में इस बार मानसून सीजन के दौरान बारिश का आंकड़ा काफी कम दर्ज किया गया है, जिसके चलते प्राकृतिक जलस्रोतों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है और भविष्य को लेकर आशंकाएं गहराने लगी हैं।\n\nदेसूरी और गोडवाड़ अंचल में बारिश की स्थिति\nक्षेत्रीय आंकड़ों पर नजर डालें तो देसूरी क्षेत्र में अब तक लगभग 277 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि पूरे गोडवाड़ अंचल में यह आंकड़ा 277 से 295 मिलीमीटर के बीच ही सिमट कर रह गया है। इतनी कम मानसूनी गतिविधि के कारण स्थानीय नदी-नालों में पानी की पर्याप्त आवक नहीं हो पाई है। इसके परिणामस्वरूप, क्षेत्र के तमाम बांधों और प्राकृतिक जलस्रोतों का जलस्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति के और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।\n\nजूना मालारी बांध सूखा और पेयजल का संकट\nइस जल संकट का सबसे बड़ा उदाहरण उपखंड का जूना मालारी बांध है, जो अब पूरी तरह सूख चुका है। इसके अलावा कई अन्य छोटे प्राकृतिक जलस्रोत भी सूखने के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं और कुछ स्थानों पर तो पानी जमीन की सतह तक भी नहीं पहुंच पा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि पिछले साल के बचे हुए जल भंडार का बेहद सावधानीपूर्वक और संयमित उपयोग किया जाए, तो आगामी जनवरी या फरवरी महीने तक ही पेयजल की आपूर्ति संभव हो पाएगी। इसके बाद आने वाली गर्मियों के मौसम में भयंकर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।\n\nकुंभलगढ़ अभयारण्य में वन्यजीवों की मुश्किलें\nबारिश की भारी कमी का सीधा असर कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादड़ी और देसूरी रेंज पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अभयारण्य के भीतर बने प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों प्रकार के वाटरहोल में पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है और कई महत्वपूर्ण जलस्रोत सूख चुके हैं। ऐसी स्थिति में वन्यजीवों के सामने अपनी प्यास बुझाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भीषण गर्मी के इस दौर में और कम बारिश के बीच वन विभाग के सामने अभयारण्य के भीतर रहने वाले सभी वन्यजीवों के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।\n\nमानव और वन्यजीव संघर्ष का बढ़ता खतरा\nजंगल में पानी और प्राकृतिक जलस्रोतों की इस भारी कमी के कारण अब वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों और बस्तियों की तरफ आने का जोखिम काफी बढ़ गया है। पानी और भोजन की तलाश में जंगली जानवर अपने प्राकृतिक आवास को छोड़कर बाहर निकल सकते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ने की पूरी आशंका है। मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता यह संघर्ष एक तरफ जहां स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए खतरा है, वहीं दूसरी तरफ यह वन्यजीवों के संरक्षण के रास्ते में भी एक गंभीर बाधा बनकर सामने आ रहा है। विशेषज्ञ इस पूरी स्थिति को एक बड़े खतरे की आहट मान रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nपाली जिले और विशेषकर गोडवाड़ अंचल में गहराते जल संकट का सीधा असर आम जनजीवन, कृषि और स्थानीय पशुधन पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: देश के विभिन्न हिस्सों में मानसूनी असमानता से भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में जल प्रबंधन और सिंचाई नीतियों पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है।\n• पाली में: पाली जिले और देसूरी क्षेत्र के रहवासियों को आने वाले महीनों में गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए पानी का अभी से बेहद किफायत से उपयोग करना होगा।\n• ग्रामीण क्षेत्रों में: जूना मालारी बांध के सूखने और कुंभलगढ़ अभयारण्य के आसपास के गांवों में वन्यजीवों के भटकने की आशंका से किसानों और ग्रामीणों की सुरक्षा का जोखिम बढ़ गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पाली जिले के गोडवाड़ अंचल में इस बार कितनी बारिश दर्ज की गई है?\nगोडवाड़ अंचल में इस सीजन में औसतन 277 से 295 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।\n\n2. देसूरी क्षेत्र में इस साल बारिश का आंकड़ा कितना रहा है?\nदेसूरी क्षेत्र में इस मानसूनी सीजन में लगभग 277 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।\n\n3. कौन सा प्रमुख बांध पूरी तरह सूख चुका है?\nउपखंड का जूना मालारी बांध पूरी तरह से सूख चुका है।\n\n4. बचा हुआ पानी कब तक पेयजल आपूर्ति के लिए चल सकता है?\nजानकारों के अनुसार, यदि सावधानी बरती जाए तो पिछले साल का बचा पानी जनवरी या फरवरी तक चल सकता है।\n\n5. किस वन्यजीव अभयारण्य के जलस्रोतों पर संकट आया है?\nकुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादड़ी और देसूरी रेंज के जलस्रोतों पर संकट गहराया है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-08-31",
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    "पाली जल संकट",
    "गोडवाड़ अंचल",
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    "राजस्थान सूखा"
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