पाली में जब डॉक्टर और इंजीनियर भूल गए करोड़ों का पैकेज, स्कूल के मैदान में दौड़ते दिखे पुराने दोस्त पाली के एमएस कंवर स्कूल में जीतो पाली यूथ द्वारा आयोजित बैक टू स्कूल कार्यक्रम में देश भर से आए सफल पेशेवरों ने बचपन के खेल और यादें ताजा कीं। जिंदगी की तेज रफ्तार और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच अक्सर लोग उन दिनों को याद करते हैं जब स्कूल का बस्ता और दोस्तों के साथ बिताए पल ही सबसे बड़ी दुनिया हुआ करते थे। राजस्थान के पाली स्थित एमएस कंवर स्कूल के मैदान पर हाल ही में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहां औपचारिकताएं और पेशेवर उपलब्धियां पीछे छूट गईं। जीतो पाली यूथ की ओर से आयोजित 'बैक टू स्कूल' थीम वाले एक विशेष समागम में कभी एक साथ बेंच साझा करने वाले सहपाठी वर्षों बाद फिर उसी मैदान पर इकट्ठे हुए। सफल पदों और पैकेज के दायरे से बाहर निकले युवा इस अनूठे आयोजन में शामिल होने वाले लोगों में कोई नामी डॉक्टर था, तो कोई नामचीन कंपनियों में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर। कई प्रतिभागी सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट और बड़े कारोबारी थे, जो आज लाखों और करोड़ों रुपये के सालाना पैकेज संभाल रहे हैं। जैसे ही इन युवाओं ने अपने पुराने विद्यालय के प्रांगण में कदम रखा, उनके पद, डिग्रियां और कॉर्पोरेट ओहदे पूरी तरह गौण हो गए। सब एक समान बनकर केवल अपने पुराने स्कूली दिनों को याद करने लगे। कार्यक्रम में मंच संचालन की जिम्मेदारी राजस्थान के सुप्रसिद्ध उद्घोषक शैलेश भुरानी ने संभाली, जिन्होंने अपनी शानदार एंकरिंग से प्रतिभागियों में भरपूर ऊर्जा और उत्साह भर दिया। सीटी बजते ही ट्रैक पर नजर आई पुरानी मस्ती कार्यक्रम के दौरान जब रेसिंग ट्रैक पर दौड़ शुरू करने के लिए सीटी बजी, तो कोट और औपचारिक पोशाक की औपचारिकताएं पूरी तरह गायब हो गईं। कल तक बोर्डरूम बैठकों और अस्पतालों के केबिन में गंभीर दिखने वाले ये पेशेवर बच्चों की तरह ट्रैक पर पूरी ताकत से दौड़ लगाते दिखे। मैदान की उड़ती धूल, साथियों की हुड़दंग और खिलखिलाहट के बीच ऐसा लगा मानो वक्त कई साल पीछे मुड़ गया हो। खेल प्रतियोगिताओं में दौड़ के अलावा अन्य गतिविधियां भी रखी गई थीं, लेकिन रेस के दौरान मैदान में सबसे ज्यादा जोश और रोमांच नजर आया। सभी प्रतिभागियों ने इस बात को स्वीकार किया कि तनावपूर्ण दिनचर्या के बीच पुराने साथियों के साथ बिताए ये चंद घंटे उनके जीवन की सबसे कीमती पूंजी बन गए। विभिन्न राज्यों से अपनी जड़ों की ओर लौटे साथी इस समागम की खासियत यह रही कि इसमें भाग लेने के लिए पूर्व विद्यार्थी केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों और शहरों से विशेष रूप से पाली पहुंचे। जीतो पाली यूथ की सदस्य सेजल ने इस आयोजन पर अपनी प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने बताया, "इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि विभिन्न क्षेत्रों से लोग आए और बिना झिझक के बच्चे बनकर मैदान में उतरे।" उन्होंने आगे कहा कि स्कूल के दिनों की वह मार्च पास्ट, रेस और आपस की नोकझोंक को दोबारा जीना वाकई अविस्मरणीय रहा, जिसे पाली यूथ विंग की टीम ने अपनी मेहनत से साकार कर दिखाया। बचपन के जुड़ाव की अमिट छाप मैदान में उतरे इन युवाओं का कहना था कि जिंदगी में सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए इंसान चाहे कितना भी व्यस्त क्यों न हो जाए, स्कूल के दिनों की निश्छल मित्रता की जगह कोई दूसरी चीज नहीं ले सकती। आधुनिक जीवनशैली में जहां लोग अपनों से दूर होते जा रहे हैं, वहां इस तरह के आयोजनों से मानसिक शांति और नई ताजगी मिलती है। पाली के इस मैदान पर सजी महफिल ने यह संदेश दिया कि व्यस्तताओं के बावजूद अपने अतीत और बचपन की सादगी को दिल में संजोकर रखना कितना जरूरी है। इसका आप पर असर यह आयोजन दिखाता है कि व्यस्त पेशेवर जीवन के बीच मानसिक स्वास्थ्य और जड़ों से जुड़ने के लिए अल्युमनाई समागम कितने प्रभावी साबित हो सकते हैं। • भारत में: देश भर के कामकाजी पेशेवरों के लिए यह प्रेरणा है कि वे नियमित अंतराल पर अपनी स्कूल और कॉलेज की मित्रता को पुनर्जीवित करें। पुरानी यादों से जुड़ने से कॉर्पोरेट तनाव कम होता है और मानसिक संतुलन बेहतर रहता है। • पाली में: स्थानीय युवाओं और सामाजिक संस्थाओं को इस तरह के नवाचारों से प्रेरणा मिलती है। पाली के इस सफल आयोजन से अन्य शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों में भी ऐसे रचनात्मक मिलन समारोह आयोजित करने का रुझान बढ़ेगा। • पेशेवरों के लिए: ऊंचे पदों और पैकेजों के दबाव के बीच काम से समय निकालकर सहपाठियों से मिलना नई ऊर्जा का संचार करता है। यह बिना किसी औपचारिक झिझक के खुलकर जीने का अवसर प्रदान करता है। • समुदाय और नेटवर्किंग: ऐसे सम्मेलनों से न केवल व्यक्तिगत संबंध प्रगाढ़ होते हैं, बल्कि अपने गृह नगर और समाज के विकास के लिए साझा मंच भी तैयार होता है। ऐसा क्यों हुआ यह आयोजन सफल पेशेवरों की व्यस्त दिनचर्या और तनाव भरी आधुनिक जीवनशैली से कुछ समय निकालकर बचपन के सादे पलों को फिर से जीने की सामूहिक इच्छा के चलते संभव हुआ। जीतो पाली यूथ ने अपने पुराने सदस्यों को एक मंच पर लाने के लिए इस अनोखी रूपरेखा को तैयार किया। • बचपन को जीने की चाह: कॉर्पोरेट और पेशेवर व्यस्तताओं के कारण लोग अक्सर अपने पुराने मित्रों से दूर हो जाते हैं, जिसे देखते हुए इस तरह के मिलन की योजना बनाई गई। • जीतो पाली यूथ की पहल: संस्था की युवा शाखा ने 'बैक टू स्कूल' थीम का खाका खींचा ताकि लोग बिना किसी औपचारिक औदे के पूरी तरह सहज महसूस कर सकें। • पारस्परिक जुड़ाव का महत्व: विभिन्न शहरों में बस चुके पुराने छात्रों को अपनी जन्मभूमि और शुरुआती स्कूल के मैदान से दोबारा जोड़ने के उद्देश्य से इसका आयोजन किया गया। सवाल-जवाब 1. यह अनोखा आयोजन कहां और किस स्कूल में हुआ? यह आयोजन राजस्थान के पाली शहर स्थित एमएस कंवर स्कूल के मैदान पर हुआ। 2. इस कार्यक्रम का आयोजन किस संस्था ने किया था? इस कार्यक्रम का आयोजन जीतो पाली यूथ विंग की ओर से 'बैक टू स्कूल' थीम के तहत किया गया। 3. आयोजन में किस तरह के पेशेवरों ने हिस्सा लिया? इसमें देश भर से आए डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और बड़े कारोबारी शामिल हुए। 4. कार्यक्रम में मुख्य रूप से कौन सी खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं? मैदान पर विभिन्न खेल हुए, जिनमें रेसिंग प्रतियोगिता सबसे ज्यादा रोमांचक और ऊर्जावान रही। 5. इस इवेंट में मंच संचालन की जिम्मेदारी किसने निभाई? राजस्थान के जाने-माने एंकर शैलेश भुरानी ने पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। प्रेरणा और सबक यह कहानी हमें याद दिलाती है कि भौतिक सफलता और सामाजिक पद चाहे कितने भी ऊंचे हों, सच्ची खुशी सादगी और पुराने रिश्तों में ही मिलती है। • ओहदों को किनारे रखना: अपनी उपलब्धियों और पैकेज के अहंकार को छोड़कर सामान्य इंसान की तरह जुड़ना ही असली बड़प्पन है। • जीवन में ठहराव जरूरी: करियर की अंधी दौड़ के बीच अपने मानसिक स्वास्थ्य और पुराने दोस्तों के लिए समय निकालना बेहद आवश्यक है। • अतीत की सादगी का सम्मान: जीवन में चाहे जितनी तरक्की मिल जाए, अपने शुरुआती दिनों और स्कूल की सीख को हमेशा संजोकर रखना चाहिए। https://trendkia.com/rajasthan/pali-men-jaba-doktara-aura-injiniyara-bhula-gae-karoron-ka-paikeja-skula-ke-maidana-men-daurate-dikhe-purane-dosta-48937 TrendKia — Har trend, sabse pehle.