# पंचायतीराज चुनाव में 5 दिन के मतदान पहरे से घबराए कार्मिक, दौसा जिला परिषद में ड्यूटी रद्द कराने को लेकर उमड़ी भीड़

> दौसा में पंचायतीराज चुनाव और दिवाली के बीच 5 दिन की पोलिंग ड्यूटी से बचने के लिए कर्मचारियों ने जिला परिषद में अर्जी लगाई है, जिसकी पड़ताल के लिए जिला प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड बना दिया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/panchayat-chunav-men-5-dina-ke-matadana-pahare-se-ghabarae-karmika-dausa-zila-parishad-men-dyuti-radda-karane-ko-lekara-umari-bhir-47963 · **Language:** Hindi
**Tags:** दौसा, पंचायतीराज चुनाव, चुनाव ड्यूटी, सौम्या झा, जिला परिषद, राजस्थान चुनाव

पंचायतीराज चुनाव की सरगर्मियों के बीच दौसा में तैनात सरकारी कर्मचारियों के बीच चुनावी जिम्मेदारी से राहत पाने की होड़ मची हुई है। मतदान केंद्रों पर तैनाती से बचने के लिए कर्मचारी तरह-तरह की दलीलें दे रहे हैं, जिसके चलते जिला परिषद कार्यालय परिसर में आवेदकों की कतारें देखने को मिल रही हैं। हालात यह हैं कि जिला परिषद में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (ACEO) के कक्ष के बाहर से लेकर गलियारे तक कर्मचारी अपनी अर्जी लेकर खड़े हैं। कई कर्मचारी तो राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के जरिए भी ड्यूटी निरस्त कराने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके तहत मंत्रियों, विधायकों और उच्च अधिकारियों के सिफारिशी फोन भी आ रहे हैं।

## त्योहार की नजदीकी और 5 दिन का लंबा प्रवास बनी मुख्य वजह
इस बार चुनाव प्रक्रिया के संचालन के लिए गठित पोलिंग पार्टियों को लगातार पांच दिनों तक मतदान केंद्रों पर डेरा डालना होगा। इसके अतिरिक्त, दिवाली का प्रमुख पर्व भी बिल्कुल नजदीक आ चुका है। ऐसे में कई कर्मचारियों को चिंता सता रही है कि पांच दिनों तक दूर-दराज के मतदान केंद्रों पर रहने से उनका पारिवारिक माहौल और त्योहारी तैयारी प्रभावित होगी। इसी असुविधा और लंबे प्रवास से बचने के लिए कर्मचारी लगातार जिला परिषद पहुंच रहे हैं और चुनावी जिम्मेदारियों से नाम हटवाने के लिए औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंप रहे हैं।

## पारिवारिक जिम्मेदारियों और बीमारी के गिनाए जा रहे बहाने
जिला परिषद में जमा किए जा रहे छूट पत्रों में कर्मचारियों ने बेहद विविध और निजी कारण दर्ज कराए हैं। कई कर्मियों ने अपनी बुजुर्ग मां अथवा पिता के गंभीर रूप से बीमार होने का हवाला दिया है, तो कुछ कर्मचारियों ने घर में अपने छोटे बेटे या बेटी की देखरेख की मजबूरी बताई है। कुछ कर्मियों का तर्क है कि वे अपने माता-पिता के इकलौते संतान हैं और उनकी नियमित देखभाल के लिए घर पर मौजूद रहना अपरिहार्य है। इसके साथ ही, एक बड़ी तादाद ऐसे कर्मचारियों की भी है जिन्होंने खुद के गंभीर रूप से अस्वस्थ होने का दावा करते हुए चुनावी दायित्व से पूरी तरह मुक्त करने की गुहार लगाई है।

## फर्जी दावों को रोकने के लिए प्रशासन ने बैठाया मेडिकल बोर्ड
बड़ी संख्या में आ रहे बीमारी के आवेदनों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए गए हैं। दौसा की जिला कलेक्टर सौम्या झा ने इस पूरे मामले की सच्चाई परखने के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। इस मेडिकल बोर्ड का मुख्य कार्य उन सभी आवेदनों और मेडिकल दस्तावेजों की गहन चिकित्सकीय जांच करना है, जिनमें अस्वस्थता को आधार बनाकर ड्यूटी निरस्त करने की मांग की गई है। प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट किया गया है कि मात्र आवेदन दे देने भर से किसी को राहत नहीं मिलेगी, बल्कि चिकित्सकीय जांच में दावा प्रमाणित होने पर ही विचार किया जाएगा। फिलहाल परिषद कार्यालय में कर्मचारियों की आवाजाही निरंतर जारी है और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्र कर्मियों को आधिकारिक रूप से छूट प्रदान की जाएगी।

## इसका आप पर असर
कर्मचारियों की इस भागदौड़ और सख्त प्रशासनिक जांच का सीधा असर चुनाव की तैयारियों तथा आम नागरिकों के सरकारी कामकाज पर पड़ेगा।

- **भारत में:** चुनावी नियमों की निष्पक्षता और अधिकारियों की जवाबदेही पर सख्त निगरानी का संदेश देशभर के प्रशासनिक तंत्र को जाता है। फर्जी दावों पर रोक लगने से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनी रहती है।
- **दौसा में:** ब्लॉक और जिला स्तर के सरकारी विभागों में कई कर्मचारियों के अवकाश या चुनावी अर्जी में उलझने से दैनिक जनहित के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। मतदान दिवस के दौरान स्थानीय मतदाताओं को सुचारू व्यवस्था मिल सके, इसके लिए प्रशासन द्वारा वास्तविक बीमार कर्मियों की जगह तुरंत नए दल तैयार किए जाएंगे।
- **कर्मचारियों पर असर:** ड्यूटी से मनमाना छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे कर्मियों को अब मेडिकल बोर्ड के कड़े परीक्षण से गुजरना होगा। पकड़े जाने या गलत बहाना साबित होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का जोखिम भी बना रहेगा।
- **त्योहारी व्यवस्था:** दिवाली पर्व के आसपास तैनात होने वाले वास्तविक कर्मचारियों को लंबी चुनावी प्रक्रिया के बीच समय प्रबंधन करना होगा। राहत पाने वाले कुछ ही कर्मियों को परिवार के साथ त्योहार मनाने की छूट मिल सकेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित पांच दिवसीय मतदान ड्यूटी की समयावधि सीधे तौर पर दिवाली के पर्व के साथ टकरा रही है। इसके साथ ही कई कर्मियों द्वारा निजी और स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों के चलते जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास किया गया।

- **5 दिन का अनिवार्य ठहराव:** चुनाव संचालन के कड़े नियमों के तहत पोलिंग पार्टियों को लगातार पांच दिनों तक मतदान केंद्रों पर तैनात रहना अनिवार्य किया गया है। इतने लंबे समय तक गृह क्षेत्र से दूर रहने की मजबूरी ने कर्मचारियों में अनिच्छा पैदा की।
- **दिवाली पर्व की निकटता:** चुनाव की तारीखें दिवाली के त्योहार के बेहद करीब हैं, जिससे कर्मचारी अपने पारिवारिक त्योहारों के छूटने की आशंका से तनाव में आ गए। इसी कारण अधिकांश कर्मियों ने अवकाश या ड्यूटी निरस्त कराने का प्रयास शुरू कर दिया।
- **सिफारिशों का सहारा:** राहत पाने के लिए कई कर्मचारियों ने प्रशासनिक एवं राजनीतिक स्तर पर संपर्क साधा, जिसके चलते नेताओं और अधिकारियों की सिफारिशी कॉल आने लगीं।
- **सत्यता की जांच का अभाव:** पूर्व में सामान्य बहानों पर मिलने वाली छूट के विपरीत इस बार दावों की भरमार देखते हुए प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड बनाकर सत्यापन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की है।

## सवाल-जवाब

### 1. दौसा जिला परिषद में कर्मचारी किस बात को लेकर कतारों में खड़े हैं?
कर्मचारी पंचायतीराज चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर लगाई गई अपनी ड्यूटी को निरस्त कराने के लिए कतारों में खड़े हैं।

### 2. चुनाव ड्यूटी कितने दिनों के लिए निर्धारित की गई है?
इस बार चुनाव ड्यूटी में तैनात पोलिंग पार्टियों को लगातार पांच दिनों तक मतदान केंद्रों पर रहना तय किया गया है।

### 3. ड्यूटी निरस्त कराने के लिए कर्मचारियों ने मुख्य रूप से क्या कारण बताए हैं?
कर्मचारियों ने अपनी खुद की बीमारी, माता-पिता की देखभाल, अकेले कमाने वाले होने और छोटे बच्चों की जिम्मेदारी जैसे कारणों का हवाला दिया है।

### 4. कर्मचारियों के बीमारी से जुड़े दावों की जांच कौन करेगा?
दौसा जिला कलेक्टर सौम्या झा के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड इन दावों की सत्यता की जांच करेगा।

### 5. ड्यूटी हटवाने के लिए किन लोगों की सिफारिशें आ रही हैं?
अधिकारियों के अनुसार ड्यूटी से राहत दिलाने के लिए मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के फोन आ रहे हैं।

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