# पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में चमकीं मोना अग्रवाल, सिल्वर और गोल्ड जीतने के साथ 2028 पैरालंपिक का टिकट किया पक्का

> भारतीय पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने दक्षिण कोरिया में आयोजित पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्टैंडिंग स्पर्धा में रजत पदक और टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही वह 2028 पैरालंपिक खेलों के लिए कोटा हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज बन गई हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/para-shooting-championship-mein-chamkeen-mona-agarwal-silver-aur-gold-jeetne-ke-sath-2028-paralympic-ka-ticket-kiya-pakka-33211 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोना अग्रवाल, पैरा शूटिंग, पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप, 2028 पैरालंपिक कोटा, योगेश शेखावत, भारतीय निशानेबाज

भारतीय पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा का परिचय देते हुए पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में दो पदक अपने नाम किए हैं। दक्षिण कोरिया के चांगवोन शहर में खेली जा रही इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्टैंडिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत रजत पदक (सिल्वर मेडल) जीता। इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय टीम के साथ मिलकर देश के लिए स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) भी हासिल किया। उनकी इस दोहरी जीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है।

## 2028 पैरालंपिक के लिए हासिल किया देश का पहला कोटा
चांगवोन में मिली इस बड़ी सफलता के साथ ही मोना अग्रवाल ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। वह साल 2028 में आयोजित होने वाले अगले पैरालंपिक खेलों के लिए भारत को पहला शूटिंग कोटा दिलाने वाली देश की पहली महिला निशानेबाज बन गई हैं। पैरालंपिक खेलों में कोटा हासिल करना बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि इसके लिए दुनिया भर के चुनिंदा एथलीटों के बीच कड़ा मुकाबला होता है। मोना की इस उपलब्धि ने भारतीय खेल जगत को एक बड़ी राहत दी है और 2028 की तैयारियों के लिए एक मजबूत शुरुआत प्रदान की है।

## SH1 कैटेगरी की बारीकियां और कड़ी स्पर्धा
पैरा-निशानेबाजी में खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमताओं के आधार पर विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की जाती हैं। मोना अग्रवाल SH1 कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करती हैं, जो उन निशानेबाजों के लिए होती है जिन्हें अपने पैरों में कोई समस्या होती है लेकिन उनके हाथों की कार्यप्रणाली पूरी तरह से सामान्य होती है। इस वर्ग में निशानेबाज बिना किसी मैकेनिकल स्टैंड के अपनी राइफल का वजन खुद उठाते हैं। 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग स्पर्धा में स्थिरता, ध्यान और शारीरिक संतुलन की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। हवा के मामूली झोंके या दिल की धड़कन के जरा से उतार-चढ़ाव से भी निशाना चूक सकता है। ऐसी परिस्थिति में भी मोना ने अपने अनुभव और गजब के संतुलन का प्रदर्शन करते हुए पदक जीते।

## निशानेबाजी में नया सफर और पेरिस में सफलता
मोना अग्रवाल के खेल सफर की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने साल 2021 के अंत में ही इस खेल को अपनाया था। बेहद कम समय में इस स्तर पर पहुंचना उनकी असाधारण प्रतिभा और अटूट संकल्प को दर्शाता है। खेल की शुरुआत करने के बाद, उन्होंने अपनी फिटनेस की चुनौतियों को दूर करने और शूटिंग की आधुनिक तकनीकों को सीखने में दिन-रात एक कर दिया। उनकी इस मेहनत का पहला बड़ा परिणाम पेरिस पैरालंपिक 2024 में दिखा, जहां उन्होंने कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) जीतकर इतिहास रचा था। उनकी इस शानदार सफलता के लिए भारत सरकार ने उन्हें खेल के प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया है।

## जयपुर की एकेडमी और कोच योगेश शेखावत का सहयोग
मोना की इस सफलता की नींव राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी में रखी गई थी। वहां उनके कोच योगेश शेखावत ने उनके खेल को एक नया आयाम दिया। योगेश शेखावत ने न केवल मोना की तकनीक को सुधारा, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी बेहद मजबूत बनाया ताकि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के तनावपूर्ण माहौल में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें। कोच योगेश शेखावत के अनुसार, मोना की सबसे बड़ी ताकत उनकी मेहनत करने की क्षमता है। वह किसी भी शॉट की प्रक्रिया को तब तक दोहराती रहती हैं जब तक कि वह पूरी तरह से परिपूर्ण न हो जाए। पेरिस में ब्रॉन्ज और अब चांगवोन में सिल्वर जीतने के बाद, मोना का अंतिम लक्ष्य आगामी पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है।

## इसका आप पर असर
मोना अग्रवाल की इस ऐतिहासिक जीत का प्रभाव भारतीय खेल जगत और युवा एथलीटों पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** भारत को 2028 पैरालंपिक के लिए पहला महिला शूटिंग कोटा मिलने से खेल बजट और प्रशिक्षण सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। इससे आने वाले समय में अन्य महिला एथलीटों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिलेंगे।
- **युवा खिलाड़ियों के लिए:** मात्र कुछ वर्षों के अभ्यास से पैरालंपिक मेडल और कोटा हासिल करने की मोना की कहानी से नए खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। वे कम उम्र या देर से खेल शुरू करने के बावजूद बड़ा मुकाम हासिल करने का साहस जुटा पाएंगे।
- **पैरा स्पोर्ट्स को बढ़ावा:** इस तरह की वैश्विक सफलताओं से भारत में पैरा-स्पोर्ट्स के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आएगा। कॉर्पोरेट प्रायोजक और सरकार पैरा-एथलीटों को अधिक वित्तीय सहायता देने के लिए प्रेरित होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
मोना अग्रवाल की इस शानदार कामयाबी के पीछे उनकी अद्वितीय कार्यशैली, तकनीकी सुधार और कोच का सही मार्गदर्शन रहा है।

- **कड़ा तकनीकी अभ्यास:** मोना ने अपनी शारीरिक सीमाओं को समझते हुए जयपुर की एकेडमी में दिन-रात शूटिंग तकनीकों पर काम किया। उन्होंने हवा के दबाव और शूटिंग के दौरान शरीर के संतुलन को बनाए रखने की कला में महारत हासिल की।
- **मानसिक सुदृढ़ता:** कोच योगेश शेखावत के मार्गदर्शन में उन्होंने खेल के मानसिक तनाव को नियंत्रित करना सीखा। दबाव के क्षणों में खुद को शांत रखना ही चांगवोन में उनकी सफलता की मुख्य वजह बना।
- **लक्ष्य के प्रति समर्पण:** पेरिस पैरालंपिक में कांस्य जीतने के बाद भी मोना ने अभ्यास में कोई ढिलाई नहीं बरती। उनका एकमात्र लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है, जिसने उन्हें इस चैंपियनशिप में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. मोना अग्रवाल ने पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में कौन से पदक जीते?
मोना अग्रवाल ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्टैंडिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल (रजत पदक) जीता और टीम इवेंट में गोल्ड मेडल (स्वर्ण पदक) अपने नाम किया।

### 2. मोना अग्रवाल ने 2028 पैरालंपिक के लिए क्या उपलब्धि हासिल की है?
उन्होंने चांगवोन में शानदार प्रदर्शन के साथ ही 2028 के पैरालंपिक खेलों के लिए भारत का पहला महिला शूटिंग कोटा पक्का कर लिया है।

### 3. मोना अग्रवाल के कोच कौन हैं और वह कहां प्रशिक्षण लेती हैं?
मोना अग्रवाल जयपुर स्थित एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग एकेडमी में कोच योगेश शेखावत के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती हैं।

### 4. मोना अग्रवाल ने अपने शूटिंग करियर की शुरुआत कब की थी?
मोना अग्रवाल ने अपने पेशेवर शूटिंग करियर की शुरुआत साल 2021 के अंत में की थी।

### 5. मोना अग्रवाल को कौन सा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है?
उनके बेहतरीन प्रदर्शन और पेरिस पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया है।

## प्रेरणा और सबक
मोना अग्रवाल की सफलता की कहानी देश के लाखों लोगों के लिए एक बड़ी सीख और प्रेरणा है।

- **दृढ़ संकल्प की शक्ति:** शारीरिक बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद कभी हार न मानना और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना ही सफलता की कुंजी है।
- **उम्र और समय की कोई सीमा नहीं:** साल 2021 के अंत में, यानी काफी बाद में शूटिंग शुरू करने के बाद भी मोना ने दुनिया में शीर्ष स्थान हासिल किया। यह दिखाता है कि सीखने और सफल होने की कोई उम्र या समय सीमा नहीं होती।
- **मार्गदर्शन का महत्व:** एक अच्छे कोच और सही एकेडमी का चुनाव खिलाड़ी की प्रतिभा को सही दिशा दे सकता है। योगेश शेखावत के सटीक मार्गदर्शन ने मोना की प्रतिभा को पदक में बदल दिया।

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