परिवहन खर्च में उछाल और धीमी ठंड से अजमेर के कंबल बाजार पर दबाव अजमेर में पानीपत और लुधियाना से आए कंबलों के बाजार सज चुके हैं, लेकिन माल ढुलाई खर्च 15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये होने और देर से आ रही सर्दी ने स्थानीय कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अजमेर में सर्द मौसम की आहट के साथ ही गर्म कपड़ों और कंबलों की मौसमी दुकानें शहर के विभिन्न बाजारों और सड़क किनारे सज गई हैं। इन अस्थायी बाजारों में पानीपत और लुधियाना जैसे प्रमुख कपड़ा उत्पादन केंद्रों से लाए गए रंग-बिरंगे और अलग-अलग वैरायटी के कंबलों का बड़ा संग्रह ग्राहकों के लिए उतारा गया है। हालांकि इस बार व्यापार की शुरुआत दुकानदारों के लिए कुछ खास उत्साहजनक साबित नहीं हो रही है। कंबलों की थोक खरीद में लगी पूंजी बढ़ने के साथ ही परिवहन लागत में आए बड़े उछाल और धीमी शुरुआती बिक्री ने विक्रेताओं के सामने वित्तीय संतुलन बनाए रखने का संकट खड़ा कर दिया है। थोक खरीद और माल ढुलाई में भारी बढ़ोतरी व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष कंबलों की शुरुआती लागत में दोहरा दबाव देखने को मिल रहा है। कोटा से अजमेर में कारोबार करने पहुंचे व्यापारी नितेश ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वे अपना माल पानीपत और लुधियाना से सीधे खरीदकर अजमेर लाते हैं। पिछले सालों के मुकाबले न केवल निर्माण स्तर पर कंबलों की खरीद दर बढ़ी है, बल्कि माल ढोने वाले वाहनों का किराया भी काफी बढ़ चुका है। जिस गाड़ी से माल मंगाने के लिए पहले लगभग 15 हजार रुपये चुकाने पड़ते थे, अब उसी परिवहन के लिए 25 हजार रुपये तक का भुगतान करना पड़ रहा है। लागत में आई इस तीव्र वृद्धि के चलते खुदरा स्तर पर कंबलों के दाम बढ़ाना दुकानदारों की मजबूरी बन गया है। जब ग्राहक दुकानों पर आते हैं तो वे पुरानी दरों के आधार पर मोलभाव करते हैं और काफी कम कीमत की पेशकश करते हैं। कारोबारियों का कहना है कि ग्राहकों की मांग वाली घटी हुई कीमतों पर बिक्री करना उनके लिए सीधे नुकसान का सौदा साबित होता है, जिससे लेनदेन अटक रहे हैं। बजट के अनुसार वैरायटी और तकनीक बाजार में मौजूद एक अन्य दुकानदार सुल्तान बंजारा ने बताया कि फुटपाथ और सड़क किनारे सजी इन दुकानों पर हर वर्ग के बजट और जरूरत के हिसाब से कंबलों का विशाल संग्रह मौजूद है। इन कंबलों में हाई इंसुलेशन तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसके कारण कड़ाके की ठंड पड़ने पर भी शरीर को आवश्यक गर्माहट मिलती रहती है। यहां मिलने वाले उत्पादों की गुणवत्ता बड़े शोरूम में बिकने वाले कंबलों से कम नहीं है, लेकिन उनकी तुलना में यहां कीमतें काफी प्रतिस्पर्धी हैं। सुल्तान बंजारा के अनुसार सड़क किनारे दुकान लगाने से उन्हें बड़े शोरूमों की तरह भारी-भरकम दुकान किराया और भारी परिचालन खर्च नहीं उठाने पड़ते हैं। इस बचत का सीधा लाभ वे कंबलों के दाम कम रखकर अपने ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, जिससे आम खरीदारों को किफायती दाम पर बेहतर उत्पाद मिल पाते हैं। मौसम के रुख पर टिकी कारोबारियों की उम्मीदें कारोबारियों का मानना है कि इस बार स्थानीय मौसम का मिजाज भी बिक्री की रफ्तार को धीमा कर रहा है। पिछले वर्षों के दौरान इस समय तक वातावरण में अच्छी खासी ठंड महसूस होने लगती थी और लोग दैनिक जीवन में गर्म कपड़ों व कंबलों का उपयोग शुरू कर देते थे। इस बार अब तक उस तरह की तेज ठंड महसूस नहीं हो रही है। यद्यपि कंबलों का मौसमी बाजार पूरी तरह लग चुका है, लेकिन खुदरा मांग में उछाल आने के लिए पारे में तेज गिरावट का इंतजार किया जा रहा है। विक्रेताओं को उम्मीद है कि जैसे ही तापमान गिरेगा, बाजारों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ेगी और बिक्री गति पकड़ेगी। इसका आप पर असर इस खबर का सीधा असर अजमेर और आसपास के क्षेत्र में कंबल खरीदने वाले ग्राहकों की जेब और खरीद विकल्पों पर पड़ेगा। • अजमेर में: स्थानीय खरीदारों को इस बार कंबलों पर बढ़ी हुई कीमतें देखने को मिल सकती हैं क्योंकि दुकानदारों की ढुलाई और खरीद लागत बढ़ गई है। अगर आप बजट में कंबल खरीदना चाहते हैं, तो सड़क किनारे सजी दुकानों से शोरूम जैसी वैरायटी अपेक्षाकृत कम दाम पर मिल सकती है। • कीमतों पर असर: परिवहन खर्च 15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये होने के चलते खुदरा दरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्राहक अत्यधिक मोलभाव करने पर खरीदारी में देरी का सामना कर सकते हैं क्योंकि दुकानदार लागत से कम पर माल बेचने से बच रहे हैं। • खरीदारी का समय: अभी मौसम में अधिक ठंड न होने के कारण बाजारों में पर्याप्त स्टॉक और वैरायटी उपलब्ध है। तापमान में बड़ी गिरावट आने से पहले खरीदारी करने पर ग्राहकों को बिना भारी भीड़ के बेहतर विकल्प चुनने का मौका मिल सकता है। • गुणवत्ता और विकल्प: बाजार में हाई इंसुलेशन तकनीक वाले कंबल उपलब्ध हैं जो कड़ाके की ठंड में गर्माहट देते हैं। खरीदार अपनी जरूरत और बजट के अनुसार साधारण से लेकर प्रीमियम गुणवत्ता तक के कंबलों का चयन कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अजमेर के कंबल कारोबार में आई मंदी और बढ़ती कीमतों के पीछे परिवहन खर्च में भारी वृद्धि और देरी से पड़ रही ठंड मुख्य कारण हैं। • परिवहन लागत में भारी उछाल: पहले जिस वाहन से माल लाने में करीब 15 हजार रुपये खर्च होते थे, अब उसका भाड़ा बढ़कर 25 हजार रुपये हो चुका है। पानीपत और लुधियाना जैसे दूरस्थ केंद्रों से माल ढोने पर आए इस अतिरिक्त खर्च ने सीधे तौर पर उत्पाद की अंतिम लागत बढ़ा दी है। • थोक खरीद कीमतों में तेजी: कपड़ा विनिर्माण केंद्रों पर कंबलों के थोक मूल्य पिछले सालों की तुलना में काफी बढ़ गए हैं। इससे व्यापारियों को शुरुआती स्टॉक तैयार करने के लिए पहले से अधिक पूंजी लगानी पड़ी है। • विलंबित मौसमी ठंड: पिछले वर्षों में इस अवधि तक अच्छी ठंड पड़ने लगती थी, लेकिन इस बार तापमान अपेक्षाकृत सामान्य बना हुआ है। ठंड का असर देर से महसूस होने के कारण आम उपभोक्ता गर्म बिस्तरों की त्वरित खरीद से बच रहे हैं। सवाल-जवाब 1. अजमेर में कंबल मुख्य रूप से कहां से मंगाए जाते हैं? अजमेर के बाजारों में बिकने वाले कंबल मुख्य रूप से पानीपत और लुधियाना के वस्त्र निर्माण केंद्रों से मंगाए जाते हैं। 2. व्यापारियों के अनुसार माल परिवहन खर्च में कितनी बढ़ोतरी हुई है? पहले जिस गाड़ी से माल लाने का भाड़ा लगभग 15 हजार रुपये लगता था, अब उसके लिए व्यापारियों को 25 हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। 3. सड़क किनारे की दुकानों पर शोरूम के मुकाबले कंबल सस्ते क्यों मिलते हैं? सड़क किनारे दुकान लगाने वाले विक्रेताओं को शोरूम की तरह भारी किराया और अन्य परिचालन खर्च नहीं देने पड़ते, जिससे वे ग्राहकों को कम दामों पर माल बेच पाते हैं। 4. दुकानदार सुल्तान बंजारा के अनुसार इन कंबलों की क्या विशेषता है? इन कंबलों में हाई इंसुलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे अधिक ठंड पड़ने पर भी शरीर को पर्याप्त गर्माहट मिलती है। 5. सीजन की शुरुआत में कंबलों की बिक्री धीमी रहने की क्या वजह है? पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अभी तक वैसी तेज ठंड नहीं पड़ी है, इसलिए तापमान गिरने तक ग्राहक खरीदारी में देरी कर रहे हैं। https://trendkia.com/rajasthan/parivahana-kharcha-men-uchhala-aura-dhimi-thnda-se-ajmer-ke-knbala-bajara-para-dabava-54468 TrendKia — Har trend, sabse pehle.