# पर्युषण पर राजस्थान के सिरोही में उमड़ी भीड़, जानिए भगवान महावीर स्वामी के इन ऐतिहासिक जैन तीर्थों की गाथा

> पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर सिरोही जिले के बामनवाड़, पावापुरी और नांदिया जैसे प्रसिद्ध जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। भगवान महावीर स्वामी के भ्रमण और चमत्कारी प्रसंगों से जुड़े इन प्राचीन तीर्थों में आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ जीव दया की अनूठी झलक देखने को मिलती है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/paryushana-para-rajasthan-ke-sirohi-men-umari-bhira-janie-bhagavana-mahavir-swami-ke-ina-aitihasika-jaina-tirthon-ki-gatha-32148 · **Language:** Hindi
**Tags:** सिरोही, पावापुरी जैन मंदिर, भगवान महावीर स्वामी, पर्युषण पर्व, बामनवाड़ जैन तीर्थ, राजस्थान पर्यटन

जैन संप्रदाय के सबसे पवित्र पर्युषण पर्व के दौरान राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित प्राचीन जैन देवालयों में धर्मप्रेमी जनता की भारी चहल-पहल देखी जा रही है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने अपने जीवनकाल में इस क्षेत्र में भ्रमण किया था। सिरोही की पावन धरा पर उनके चरण पड़ने की वजह से यह पूरा इलाका कई शताब्दियों से जैन धर्मावलंबियों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस क्षेत्र में बिखरे कई सिद्धपीठ न केवल स्थापत्य कला की दृष्टि से अद्वितीय हैं, बल्कि उनके साथ अनेक पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं।

## पावापुरी तीर्थ: स्थापत्य कला और जीव दया का संगम
सिरोही जिले की रेवदर तहसील के अंतर्गत आने वाला पावापुरी जैन तीर्थ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जैन समाज के प्रतिनिधि महावीर जैन के अनुसार यह स्थल संपूर्ण भारत में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। पावापुरी का मुख्य मंदिर भगवान शंकेश्वर पार्श्वनाथ तथा भगवान महावीर स्वामी को समर्पित किया गया है। मंदिर परिसर की उत्कृष्ट बनावट, दीवारों पर उकेरी गई प्राचीन कलाकृतियां और स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई गई मनमोहक चित्रकारी बरबस ही दर्शनार्थियों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं।

इस विशाल परिसर के भीतर भगवान श्री महावीर स्वामी का चौमुखा जल मंदिर, श्री अजीतनाथ भगवान केंद्र, सरस्वती मंदिर और पक्षीघर जैसे कई दर्शनीय स्थल बने हुए हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान जीव दया और करुणा के लिए भी जाना जाता है। यहां बहुत बड़े पैमाने पर पशु कल्याण केंद्र संचालित होता है, जहां हजारों की संख्या में असहाय, बीमार और लावारिस गायों व मवेशियों की निरंतर देखभाल की जाती है।

## बामनवाड़ जैन तीर्थ: 'कण कीलन उपसर्ग' और जीवित स्वामी की महिमा
पिंडवाड़ा तहसील के वीरवाड़ा गांव के निकट स्थापित बामनवाड़ जैन तीर्थ का धार्मिक ग्रंथों में विशेष उल्लेख है। जैन परंपरा के अनुसार इस मंदिर का निर्माण भगवान महावीर स्वामी के ज्येष्ठ भ्राता राजा नंदीवर्धन द्वारा करवाया गया था। जनश्रुति और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान महावीर के कानों में कीलें ठोकने की अत्यंत पीड़ादायक घटना, जिसे 'कण कीलन उपसर्ग' कहा जाता है, इसी भूमि पर घटित हुई थी।

प्राचीन जैन साहित्यों में इस पावन स्थान का नाम 'ब्राह्मण वाटक' दर्ज है, जो समय बीतने के साथ परिवर्तित होकर बामनवाड़ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इस मंदिर में भगवान महावीर स्वामी की मूंगे के समान लाल रंग की पद्मासन मुद्रा में विराजमान लगभग 60 सेंटीमीटर ऊंची अत्यंत प्रभावक प्रतिमा स्थापित है, जिसे श्रद्धालु 'जीवित स्वामी' के नाम से पूजते हैं। दूर-दराज से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में सुसज्जित धर्मशाला और विशाल भोजनशाला की व्यवस्था उपलब्ध है।

## नांदिया तीर्थ और चंडकौशिक की प्रसिद्ध कथा
सिरोही की पिंडवाड़ा तहसील में स्थित नांदिया गांव का जैन मंदिर भी एक बेहद पवित्र धरोहर माना जाता है। यहां स्थापित मूलनायक प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि यह भगवान महावीर स्वामी के जीवनकाल में ही उनके भाई नंदीवर्धन ने निर्मित करवाई थी। इसी कारण इसे भगवान महावीर का सजीव स्वरूप माना जाता है।

मंदिर के समीप स्थित एक छोटी पहाड़ी का संबंध भगवान महावीर और विषधर सर्प 'चंडकौशिक' के प्रसिद्ध प्रसंग से जोड़ा जाता है। इसके अलावा, मंदिर की अद्भुत निर्माण शैली और परिसर में बने 52 देवकुलिकाओं के जिनालय भक्तों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करते हैं।

## वीरवाड़ा और अजारी तीर्थ का सांस्कृतिक महत्व
जिले के अजारी और वीरवाड़ा गांव में स्थित प्राचीन मंदिर भी जैन संस्कृति के मुख्य स्तंभ हैं। अजारी तीर्थ में श्वेत संगमरमर से निर्मित भगवान महावीर स्वामी की अति सुंदर प्रतिमा मूलनायक के रूप में स्थापित है, और यह देवालय भी 52 जिनालयों से सुशोभित है। वहीं दूसरी ओर, प्राचीन काल में 'वीर कुलिका' या 'वीर वटक' नाम से जाने जाने वाले वीरवाड़ा क्षेत्र का महावीर मंदिर अपनी स्थापत्य कला और प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है।

## इसका आप पर असर
पर्युषण पर्व के दौरान सिरोही जिले के इन ऐतिहासिक तीर्थों में दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए यह जानकारी अत्यंत उपयोगी है।

- **भारत में:** देश भर से राजस्थान के तीर्थ स्थलों पर आने वाले श्रद्धालु पर्युषण पर्व के दौरान सुव्यवस्थित आवास और भोजन सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
- **सिरोही में:** स्थानीय धार्मिक पर्यटन, हस्तशिल्प बाजार और पावापुरी स्थित विशाल गौशाला व पशु रक्षा केंद्र को श्रद्धालुओं के आने से बड़ा समर्थन मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पर्युषण पर्व के आगमन के साथ ही सिरोही के ऐतिहासिक जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, जिसका मुख्य कारण भगवान महावीर स्वामी से जुड़ी पौराणिक परंपराएं हैं।

- **धार्मिक महत्व:** पर्युषण जैन धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व है, जिसमें लोग जप, तप और तीर्थाटन को प्राथमिकता देते हैं।
- **ऐतिहासिक संबंध:** सिरोही के बामनवाड़, पावापुरी और नांदिया जैसे स्थलों का इतिहास भगवान महावीर के भ्रमण और उनके भ्राता नंदीवर्धन के काल से जुड़ा माना जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. पर्युषण के दौरान सिरोही के कौन से जैन मंदिर सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं?
रेवदर का पावापुरी तीर्थ, पिंडवाड़ा का बामनवाड़ तीर्थ, नांदिया तीर्थ, अजारी और वीरवाड़ा के प्राचीन जैन मंदिर सिरोही के सबसे प्रमुख स्थलों में शामिल हैं।

### 2. पावापुरी जैन तीर्थ की मुख्य खासियत क्या है?
पावापुरी मंदिर अपनी चित्रकारी, चौमुखा जल मंदिर और हजारों बीमार व बेसहारा गायों की सेवा करने वाले विशाल पशु कल्याण केंद्र के लिए प्रसिद्ध है।

### 3. बामनवाड़ जैन तीर्थ का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि बामनवाड़ मंदिर का निर्माण भगवान महावीर के बड़े भाई राजा नंदीवर्धन ने करवाया था, और यहां 'कण कीलन उपसर्ग' की घटना हुई थी।

### 4. बामनवाड़ में स्थापित भगवान महावीर की प्रतिमा की क्या विशेषता है?
यहां भगवान महावीर स्वामी की मूंगे जैसी लाल रंग की 60 सेंटीमीटर ऊंची पद्मासन प्रतिमा विराजमान है, जिसे 'जीवित स्वामी' माना जाता है।

### 5. नांदिया जैन तीर्थ किस पौराणिक घटना से जुड़ा हुआ है?
नांदिया तीर्थ के पास स्थित पहाड़ी भगवान महावीर और भयानक चंडकौशिक सर्प के प्रसंग से जुड़ी मानी जाती है।

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