# पश्चिमी राजस्थान में अकाल और पानी की किल्लत पर रविंद्र सिंह भाटी ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

> शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर और जैसलमेर में अकाल तथा पेयजल संकट को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने 10 अक्टूबर तक पशु शिविर और चारा डिपो शुरू न होने पर जिला कलेक्ट्रेट घेरने का अल्टीमेटम दिया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/pashchimi-rajasthan-men-akala-aura-pani-ki-killata-para-ravindra-singh-bhati-ne-di-bare-andolana-ki-chetavani-42684 · **Language:** Hindi
**Tags:** रविंद्र सिंह भाटी, बाड़मेर अकाल, जैसलमेर सूखा, भजनलाल शर्मा, पशु शिविर, पेयजल संकट, राजस्थान राजनीति

राजस्थान के पश्चिमी अंचल में सूखे और जल संकट की गंभीर परिस्थितियों के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में अकाल से जूझ रहे ग्रामीणों और पशुपालकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सत्तापक्ष के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बाड़मेर जिले के बाछड़ाऊ आगमन के बाद विधायक ने इस दौरे के नतीजों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंचायती राज चुनाव से ठीक पहले आयोजित इस सरकारी कार्यक्रम में करोड़ों रुपये का भारी-भरकम खर्च किया गया, लेकिन संकट झेल रहे आम लोगों और पशुपालकों के हाथ पूरी तरह खाली रहे। जनता को इस यात्रा से ठोस आर्थिक और प्रशासनिक मदद की आस थी, परंतु जमीनी स्तर पर राहत देने के लिए कोई प्रभावी कदम सामने नहीं आए।

## राहत घोषणाओं पर सवाल और 10 अक्टूबर का कड़ा अल्टीमेटम
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने साफ किया कि बाड़मेर और जैसलमेर के ग्रामीण इलाके इस वक्त भीषण अकाल के दौर से गुजर रहे हैं। बारिश की कमी से किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों के भरण-पोषण की विकट चुनौती पैदा हो गई है। ऐसे विकट समय में मुख्यमंत्री से व्यापक सूखा राहत पैकेज की उम्मीद की जा रही थी। इसके विपरीत, पूरे आयोजन पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद राहत कार्य के नाम पर केवल एक करोड़ रुपये की मामूली राशि की घोषणा की गई, जिसे उन्होंने नाकाफी और ऊंट के मुंह में जीरा करार दिया। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल कागजी घोषणाओं और आश्वासनों से लोगों का ध्यान भटका रहा है, जबकि धरातल पर किसी भी मदद की मौजूदगी नजर नहीं आ रही है।

पशुधन को बचाने के लिए शुरू की जाने वाली व्यवस्थाओं पर बात करते हुए विधायक ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पशु शिविरों के संचालन को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना या रूपरेखा अब तक सार्वजनिक नहीं की है। भाटी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने 10 अक्टूबर तक बाड़मेर जिले के भीतर पशु शिविर और चारा डिपो विधिवत रूप से शुरू नहीं किए, तो वे जनता के साथ मिलकर जिला कलेक्ट्रेट का विशाल घेराव करेंगे। उन्होंने मांग रखी कि बाड़मेर के साथ-साथ जैसलमेर में भी बिना समय गंवाए चारा डिपो चालू किए जाएं, ताकि भुखमरी की कगार पर खड़े बेजुबान पशुओं की जान बचाई जा सके।

## पेयजल आपूर्ति और चारागाह भूमि के आवंटन पर उठाए सवाल
जल संकट के मुद्दे पर चर्चा करते हुए शिव विधायक ने पानी की टंकियों की समय सीमा को 31 दिसंबर तक आगे बढ़ाने के प्रशासनिक निर्णय को सवालों के घेरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि बाड़मेर के कई ग्रामीण इलाकों में बनी पानी की टंकियों से अब तक नियमित जलापूर्ति की बुनियादी शुरुआत ही नहीं हो सकी है। ऐसे हालात में जलापूर्ति की समय सीमा बढ़ाने के दावे केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास हैं, क्योंकि जब पाइपलाइन और टंकियां सूखी पड़ी हैं, तब कागजों पर तारीखें बढ़ाने से प्यास नहीं बुझ सकती।

इसके साथ ही रविंद्र सिंह भाटी ने मवेशियों के लिए परंपरागत गोचर और चारागाह भूमि के उपयोग पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान की पहचान यहां के लाखों पशुधन से है, लेकिन उनके चरने के लिए सुरक्षित रखी गई चारागाह जमीन का एक बड़ा हिस्सा पहले ही बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा कंपनियों को सौंप दिया गया है। जब चारागाह ही छिन गए हैं, तो संकट के समय पशुओं को चराने की जगह तक नहीं बची है।

## पशुधन संरक्षण के दावों पर तीखा तंज
सत्ताधारी दल की नीतियों पर निशाना साधते हुए शिव विधायक ने कहा कि जो दल गाय और सनातन परंपराओं के नाम पर समर्थन जुटाकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचा है, वही आज मवेशियों पर आए सबसे बड़े संकट के समय खामोश खड़ा है। उन्होंने कहा कि जब गायों और अन्य पशुओं को भूख और प्यास से बचाने के लिए सीधी सरकारी सहायता की सबसे अधिक जरूरत है, तब शासन की ओर से कोई संजीदा पहल नहीं की जा रही है। भाटी ने आग्रह किया कि बाड़मेर और जैसलमेर के गंभीर अकाल को देखते हुए राज्य प्रशासन तत्काल पर्याप्त बजट जारी करे, चारा डिपो और पशु शिविर तुरंत स्थापित करे तथा ग्रामीण इलाकों में टैंकरों और टंकियों के जरिए सुचारु पेयजल उपलब्ध कराए।

## इसका आप पर असर
पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में अकाल और जल संकट के चलते आम जनता और पशुपालकों पर सीधा असर पड़ रहा है।

- **भारत में:** सीमावर्ती इलाकों में लगातार अकाल और जल संकट के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा पशुपालन पर गंभीर दबाव देखा जा रहा है। यदि राहत कार्य समय पर शुरू नहीं हुए तो इससे मवेशियों का विस्थापन और दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- **बाड़मेर और जैसलमेर में:** स्थानीय पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए 10 अक्टूबर से पहले चारा डिपो और पशु शिविर शुरू होने की दरकार है। इसके अलावा 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई पानी की टंकियों की समय सीमा के बीच ग्रामीण इलाकों में नियमित पेयजल आपूर्ति का इंतजार बना हुआ है।

## ऐसा क्यों हुआ
बाड़मेर और जैसलमेर में सूखे के हालात, पेयजल आपूर्ति की धीमी प्रगति और नाकाफी राहत बजट के कारण यह राजनीतिक और सामाजिक टकराव पैदा हुआ है।

- **सीमित राहत और प्रशासनिक देरी:** मुख्यमंत्री के बाछड़ाऊ दौरे में करोड़ों के खर्च के बावजूद राहत कार्यों के लिए केवल एक करोड़ रुपये की घोषणा की गई, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी निराशा फैली।
- **पशुधन सुरक्षा के बुनियादी इंतजामों की कमी:** गंभीर अकाल के बावजूद पशु शिविरों और चारा डिपो के संचालन को लेकर कोई स्पष्ट प्रशासनिक कार्ययोजना तय नहीं हो सकी।
- **पेयजल परियोजनाओं और गोचर भूमि का संकट:** जल टंकियों से कई जगहों पर जलापूर्ति शुरू न होना और पारंपरिक चारागाह भूमि का सौर ऊर्जा कंपनियों को आवंटन पशुपालकों के संकट को और बढ़ा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. रविंद्र सिंह भाटी ने राज्य सरकार को क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 10 अक्टूबर तक बाड़मेर में पशु शिविर और चारा डिपो शुरू नहीं किए गए, तो वे जिला कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।

### 2. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दौरे के बाद विधायक ने क्या आरोप लगाए?
विधायक ने आरोप लगाया कि बाछड़ाऊ दौरे पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन राहत के नाम पर महज एक करोड़ रुपये की अपर्याप्त घोषणा की गई।

### 3. पेयजल टंकियों को लेकर विधायक ने क्या सवाल उठाया?
भाटी ने कहा कि कई इलाकों में टंकियों से नियमित जलापूर्ति शुरू ही नहीं हुई है, ऐसे में समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ाना जनता को भ्रमित करना है।

### 4. पश्चिमी राजस्थान में चारागाह भूमि को लेकर क्या समस्या बताई गई?
विधायक के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में उपलब्ध पारंपरिक चारागाह भूमि का एक बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा कंपनियों को दे दिया गया है, जिससे मवेशियों के चारे का संकट गहरा गया है।

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