# पश्चिमी विक्षोभ के असर से राजस्थान के कई संभागों में बदलेगा मौसम, 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

> राजस्थान में मानसून वापसी के बीच नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभागों में तेज हवाओं संग बूंदाबांदी के आसार बने हैं. मौसम में 30 सितंबर से व्यापक शुष्कता आने का अनुमान है.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
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**Tags:** राजस्थान मौसम, पश्चिमी विक्षोभ, मौसम विभाग, मानसून वापसी, जयपुर मौसम, तेज हवाएं

राजस्थान के विभिन्न इलाकों में मानसून की विदाई की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन पूर्ण रूप से सूखा वातावरण बनने से ठीक पहले वातावरण में एक नया मौसमी बदलाव आकार ले रहा है. वायुमंडल के मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में तैयार हुए पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर मौजूद चक्रवाती परिसंचरण के संयुक्त प्रभाव के कारण 29 सितंबर को प्रदेश के कई जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बूंदाबांदी और तेज धूल भरी आंधियों का दौर देखने को मिल सकता है. इस दौरान वायु की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाने का अनुमान है, जिससे जनजीवन और कृषि गतिविधियों पर क्षणिक प्रभाव पड़ सकता है.

प्रदेश भर में बीते चौबीस घंटों के दौरान छिटपुट स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जबकि थार रेगिस्तान से सटे इलाकों में तेज धूप का असर बना रहा. पश्चिमी राजस्थान का फलोदी कस्बा सबसे गर्म दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. हालांकि वातावरण में बन रहे नए चक्रवाती प्रवाह और विक्षोभ की ट्रफ रेखा के कारण तापमान में कुछ नरमी आने की उम्मीद बंधने लगी है.

## मानसून वापसी रेखा और मौसमी हलचल
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा अब आगे खिसकते हुए राजस्थान में उदयपुर तक पहुंच चुकी है. देशव्यापी संदर्भ में यह रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से होकर गुजर रही है. इस निकासी रेखा के सक्रिय होने से राज्य में मानसूनी बारिश का भौगोलिक दायरा काफी सिमट गया है. मानसूनी नमी घटने के बावजूद उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा उसके आस-पास 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिसे पश्चिमी विक्षोभ की ट्रफ रेखा से अतिरिक्त गति मिल रही है.

इन मौसमी प्रणालियों के आपस में मिलने की वजह से विशेष रूप से जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभागों में स्थानीय स्तर पर घने बादल उमड़ने, मेघगर्जन होने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की झोंकेदार हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की अनुकूल परिस्थितियां निर्मित हुई हैं. शेखावाटी अंचल और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में भी स्थानीय स्तर पर अल्पकालिक मौसमी उथल-पुथल और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है.

## विभिन्न संभागों में वर्षा और चेतावनियों की स्थिति
दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर संभाग में आसमान में आंशिक से लेकर घने बादल छाए रह सकते हैं और कुछ इलाकों में छिटपुट हल्की वर्षा दर्ज हो सकती है, हालांकि प्रशासन अथवा मौसम विभाग की ओर से किसी प्रकार का बड़ा चेतावनी अलर्ट जारी नहीं किया गया है. हाड़ौती अंचल के कोटा संभाग में भी कुछ जगहों पर मेघगर्जन के साथ हल्की वर्षा की गतिविधियां संभव हैं, जहां के लिए भी कोई गंभीर चेतावनी नहीं रखी गई है.

पूर्वी द्वार कहे जाने वाले भरतपुर संभाग में कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी अथवा बहुत हल्की बारिश की उम्मीद है, लेकिन वहां किसी गंभीर आपात स्थिति की आशंका नहीं है. राजधानी जयपुर जिले की बात करें तो यहां मौसम में नमी और बादलों का आना-जाना रहेगा, हल्की फुहारें गिर सकती हैं, किंतु किसी तीव्र वर्षा की चेतावनी नहीं है. पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर संभाग में मानसून की विदाई के चलते मौसम मुख्यतः पूरी तरह शुष्क बना रहेगा और वहां वर्षा को लेकर कोई चेतावनी नहीं दी गई है.

## पश्चिमी राजस्थान में पारे की चाल और आगामी शुष्कता
पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश जिलों में मानसून के पीछे हटने के बाद से बारिश का दौर लगभग थम चुका है. पिछले दिनों यहां अधिकतम तापमान में असामान्य उछाल देखा गया था, जब पारा सामान्य औसत से 4 से 5 डिग्री सेल्सियस ऊपर चला गया था और कई नगरों में 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया था. अब उत्तरी और पश्चिमी हवाओं के असर से इस भीषण तपिश में गिरावट का रुख बनने लगा है. 29 सितंबर को राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का आकलन किया गया है.

मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि 29 सितंबर से ही पश्चिमी राजस्थान में वर्षा गतिविधियां पूरी तरह थमने लगेंगी, जबकि पूर्वी राजस्थान में यह ठहराव 30 सितंबर से स्पष्ट रूप से प्रभावी होगा. इसके पश्चात आने वाले दिनों में राजस्थान का अधिकांश भूभाग पूरी तरह शुष्क मौसम की चपेट में आ जाएगा. शुष्क हवाओं के चलने से दिन के तापमान में स्थिरता और रात के पारे में हल्की गुलाबी ठंडक की शुरुआत होने लगेगी.

## किसानों के लिए कृषि सुरक्षा परामर्श
वर्तमान समय में राजस्थान के खेतों में खरीफ फसलों की कटाई और थ्रेशिंग का कार्य जोर-शोर से चल रहा है. अचानक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली हवाएं और मेघगर्जन के साथ पड़ने वाली बौछारें खुले खलिहानों में रखी कटी उपज को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए कृषि विशेषज्ञों और मौसम केंद्र ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने का सुझाव दिया है.

काश्तकारों को परामर्श दिया गया है कि जिन इलाकों में तेज हवाओं और वर्षा की संभावना बनी हुई है, वहां खेतों अथवा खुले यार्ड में रखी गई कटी फसलों, कड़बी और कृषि उपज को तिरपाल से अच्छी तरह ढककर रखें अथवा सुरक्षित भंडारण कक्षों में स्थानांतरित कर लें, ताकि अनाज को भीगने और हवा में उड़ने से बचाया जा सके.

## इसका आप पर असर
राजस्थान में बदले मौसमी मिजाज और 50 किमी प्रति घंटे की हवाओं से जनजीवन तथा कृषि कार्य सीधे प्रभावित होंगे.

- **राजस्थान में:** खुले खेतों और मंडियों में रखी खरीफ की कटी फसलों को भीगने और उड़ने का खतरा पैदा हो गया है. किसान तुरंत अपनी उपज को तिरपाल से ढकें अथवा सुरक्षित गोदामों में रखें.
- **यातायात और दैनिक आवाजाही:** 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज झोंकेदार हवाओं के कारण दोपहिया वाहन चालकों और सड़क यात्रियों को सावधानी बरतनी होगी. पेड़ की कमजोर शाखाओं अथवा होर्डिंग्स के नीचे खड़े होने से बचें.
- **तापमान और उमस:** पूर्वी हिस्सों में हल्की बौछारों से उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिलेगी. वहीं पश्चिमी जिलों में तापमान में गिरावट से दिन की चुभन कम होने लगेगी.
- **सप्ताहांत योजनाएं:** जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभागों में बादलों की आवाजाही और बूंदाबांदी से दिन के समय मौसम सुहावना रहेगा. खुले में होने वाले आयोजनों में अचानक आने वाली तेज हवा का ध्यान रखना आवश्यक है.

## ऐसा क्यों हुआ
राजस्थान में यह आकस्मिक मौसमी बदलाव मानसून की वापसी के दौरान सक्रिय हुए एक पश्चिमी विक्षोभ और निचले वायुमंडलीय परिसंचरण के मेल से हुआ है.

- **पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता:** मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में पश्चिमी हवाओं के बीच एक विक्षोभ ट्रफ के रूप में सक्रिय हो गया है. इस मौसमी प्रणाली ने वातावरण में ऊपरी स्तर पर अस्थिरता पैदा कर दी है.
- **चक्रवाती परिसंचरण का बनना:** उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और निकटवर्ती अंचलों में जमीन से 0.9 किमी की ऊंचाई पर ऊपरी वायु चक्रवाती तंत्र बना हुआ है. यह तंत्र आसपास के क्षेत्रों से नम हवा खींचकर स्थानीय स्तर पर गरज वाले बादल विकसित कर रहा है.
- **मानसून वापसी रेखा का प्रभाव:** मानसून की निकासी रेखा उदयपुर तक खिसक चुकी है, जिससे मानसूनी बारिश सीमित हो गई है. इस बीच पश्चिमी विक्षोभ से मिले झटके ने छिटपुट इलाकों में तेज हवाओं और बौछारों को जन्म दिया है.
- **आगामी दिनों का रुख:** 29 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान और 30 सितंबर को पूर्वी राजस्थान से यह विक्षोभ कमजोर पड़ जाएगा. इसके उपरांत संपूर्ण प्रदेश में शुष्क हवाएं प्रभावी होकर मौसम को पूरी तरह साफ कर देंगी.

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान के किन संभागों में 29 सितंबर को बारिश की संभावना जताई गई है?
मौसम विभाग के अनुसार मुख्य रूप से जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभागों में मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है.

### 2. राज्य में हवाओं की रफ्तार कितनी रह सकती है?
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राज्य के प्रभावित हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं.

### 3. मानसून की वापसी रेखा राजस्थान में कहां तक पहुंच चुकी है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा राजस्थान के उदयपुर तक पहुंच चुकी है, जिससे बारिश का दायरा काफी सीमित हो गया है.

### 4. राज्य में सबसे अधिक तापमान कहां दर्ज किया गया?
पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 39.4 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान पश्चिमी राजस्थान के फलोदी में दर्ज किया गया.

### 5. किसानों को मौसम के मद्देनजर क्या सावधानी बरतने की सलाह दी गई है?
किसानों को सलाह दी गई है कि तेज हवा और बारिश की संभावना को देखते हुए खेतों में कटी फसलों और कृषि उपज को सुरक्षित व ढके स्थानों पर रखें.

### 6. राजस्थान में मौसम पूरी तरह शुष्क कब से होने की संभावना है?
पश्चिमी राजस्थान में 29 सितंबर से और पूर्वी राजस्थान में 30 सितंबर से बारिश थमने के बाद आगामी दिनों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क हो जाएगा.

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