# राजस्थान निकाय चुनाव के पहले चरण के बाद सियासी दलों ने शुरू की पार्षदों की बाड़ेबंदी

> राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान खत्म होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस ने अपने पार्षदों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजना शुरू कर दिया है। क्रॉस वोटिंग के डर से बाड़मेर, अलवर और श्रीगंगानगर जैसे जिलों में जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/political-parties-start-moving-councilors-to-resorts-following-first-phase-of-rajasthan-local-body-elections-30905 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान निकाय चुनाव, बाड़ेबंदी, बीजेपी कांग्रेस, अलवर राजनीति, राजस्थान समाचार

जयपुर में स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण का मतदान पूरा होने के साथ ही राजनीतिक दलों की तरफ से सुगबुगाहट और जोड़-तोड़ का दौर तेज हो गया है। नतीजे सामने आने से पहले ही दोनों प्रमुख दलों ने अपने पार्षदों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है ताकि किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग से बचा जा सके। प्रदेश के तमाम जिलों से आ रही जानकारियों के मुताबिक, संभावित और विजेता पार्षदों को अज्ञात ठिकानों पर ले जाया जा रहा है और इस पूरी कवायद में अलवर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और भरतपुर जैसे इलाके सबसे आगे हैं जहां बड़े नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है।

## अलवर और भरतपुर में सियासी सरगर्मी
अलवर जिले में राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच चुका है जहां कांग्रेस पार्टी ने नगर निगम के साथ-साथ रामगढ़, नौगांवा, मालाखेड़ा और बहादुरपुर के उम्मीदवारों को मोती डूंगरी स्थित नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के कार्यालय पर एकत्र किया। इसके बाद सभी को बसों के जरिए अरण्य सरिस्का वाइल्डरनेस रिसॉर्ट के लिए रवाना कर दिया गया और गोपनीयता बनाए रखने के लिए उनके मोबाइल फोन भी बंद करवा दिए गए। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इन पार्षदों को जल्द ही जयपुर के किसी अन्य रिसॉर्ट में भी शिफ्ट किया जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कहना है कि नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनना तय है और कई निर्दलीय उम्मीदवार भी उनके संपर्क में बने हुए हैं। दूसरी तरफ, भरतपुर में नगर निगम की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए बीजेपी ने भी अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। पार्टी बागी और निर्दलीय पार्षदों को एकजुट करके जयपुर ले जाने की फिराक में है और स्थानीय संगठन का दावा है कि करीब 70 पार्षद उनके पाले में आ सकते हैं। यहाँ 14 सितंबर को मतगणना होनी है जिसके बाद 21 सितंबर को महापौर पद के लिए चुनाव कराया जाएगा।

## बाड़मेर और श्रीगंगानगर में भी जोड़-तोड़ का खेल
मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाड़मेर के सियासी गलियारों में पार्टी के भीतर की गुटबाजी भी सतह पर आ गई है। पूर्व विधायक मेवाराम जैन अपने समर्थित प्रत्याशियों की अलग से बाड़ेबंदी में जुटे हैं, जबकि दूसरी तरफ जिला कांग्रेस कमेटी अपने स्तर पर पार्षदों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। इस दौड़ में बीजेपी भी पीछे नहीं है और वह अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके अलावा श्रीगंगानगर जिले की रायसिंहनगर, अनूपगढ़, सूरतगढ़, श्रीविजयनगर और घड़साना नगर पालिकाओं में भी चुनाव संपन्न होने के बाद पार्षदों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने का सिलसिला शुरू हो चुका है। इन सभी जगहों पर भाजपा, कांग्रेस और कई निर्दलीय प्रत्याशियों को अज्ञात स्थानों पर पहुंचाया गया है, और राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा आम है कि जोड़-तोड़ के इस खेल में धनबल का भी जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है।

## नतीजों से तय होगा असली समीकरण
फिलहाल सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नजरें 14 सितंबर को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं। बोर्ड गठन के लिए जरूरी जादुई आंकड़े को छूने के लिए दोनों ही मुख्य दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं और असली जोड़-तोड़ का खेल अब खुलकर सामने आ गया है। इस पूरी प्रक्रिया में हर एक पार्षद और निर्दलीय उम्मीदवार का महत्व काफी ज्यादा बढ़ गया है। जनता ने किसके सिर पर ताज सजाया है और किस पार्टी का बोर्ड अस्तित्व में आएगा, यह तस्वीर 14 सितंबर को मतों की गिनती पूरी होने के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगी।

## इसका आप पर असर
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण के बाद शुरू हुई इस राजनीतिक हलचल का असर सीधे तौर पर स्थानीय शासन और विकास कार्यों पर पड़ेगा।

- **भारत में:** देश भर के शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव के बाद इस तरह की राजनीतिक उठापटक और जोड़-तोड़ अक्सर प्रशासनिक स्थिरता को प्रभावित करती है। इस प्रक्रिया से निर्वाचित प्रतिनिधियों का ध्यान जनता के विकास कार्यों से हटकर राजनीतिक सौदेबाजी पर केंद्रित हो जाता है।
- **राजस्थान में:** अलवर, भरतपुर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर जैसे जिलों के आम नागरिकों को अपने स्थानीय प्रतिनिधियों की उपलब्धता में देरी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि पार्षद फिलहाल रिसॉर्ट्स में बंद हैं। इसके अलावा, पार्षदों की बाड़ेबंदी और क्रॉस वोटिंग रोकने के इस दौर से स्थानीय बोर्ड के गठन में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे शहर के बुनियादी विकास कार्य और फाइलें अटक सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
राजनीतिक दलों द्वारा यह बाड़ेबंदी क्रॉस वोटिंग के डर और बहुमत के जादुई आंकड़े को हासिल करने की मजबूरी के कारण की जा रही है।

- **क्रॉस वोटिंग का डर:** चुनाव परिणाम आने से पहले अपने ही पार्षदों के पाला बदलने या विपक्षी दलों के संपर्क में जाने की आशंका ने दोनों प्रमुख दलों को यह कदम उठाने पर मजबूर किया है।
- **निर्दलियों और बागी उम्मीदवारों की भूमिका:** कई सीटों पर त्रिशंकु स्थिति या करीबी मुकाबले की संभावना के कारण निर्दलीय और बागी पार्षद निर्णायक स्थिति में पहुंच गए हैं, जिन्हें अपने पाले में रखना दलों के लिए जरूरी हो गया है।
- **बोर्ड गठन की होड़:** महापौर और अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े तक पहुंचने के वास्ते दलों को हर हाल में अपने सभी विजयी उम्मीदवारों को एकजुट रखना पड़ रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान निकाय चुनाव के पहले चरण के बाद दलों ने क्या कदम उठाया है?
बीजेपी और कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग के डर से अपने विजयी और संभावित पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है और उन्हें सुरक्षित रिसॉर्ट्स में भेजना शुरू कर दिया है।

### 2. अलवर में कांग्रेस के पार्षदों को कहाँ भेजा गया है?
अलवर में कांग्रेस उम्मीदवारों को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के कार्यालय से बसों में बिठाकर अरण्य सरिस्का वाइल्डरनेस रिसॉर्ट भेजा गया है।

### 3. भरतपुर में बीजेपी की क्या योजना है?
भरतपुर में बीजेपी बागी और निर्दलीय पार्षदों को एकजुट कर जयपुर ले जाने की तैयारी में है ताकि नगर निगम में बोर्ड बनाया जा सके।

### 4. चुनाव परिणाम कब घोषित किए जाएंगे?
राजस्थान के इन नगर निकाय चुनावों के नतीजे 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।

### 5. भरतपुर में महापौर का चुनाव कब होगा?
भरतपुर में 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद 21 सितंबर को महापौर का चुनाव कराया जाएगा।

### 6. बाड़मेर में कांग्रेस के भीतर क्या स्थिति है?
बाड़मेर में मतदान के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी सामने आई है जहाँ पूर्व विधायक मेवाराम जैन अपने समर्थित प्रत्याशियों की अलग से बाड़ेबंदी कर रहे हैं।

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