# प्रसिद्ध कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय ने किए खाटूश्यामजी के दर्शन, जीण भवानी मंदिर में भी टेका माथा

> देश के जाने-माने कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय ने सीकर के खाटूश्यामजी मंदिर में विधिवत पूजा कर आशीर्वाद लिया और फिर जीण भवानी सिद्ध पीठ के दर्शन किए.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/prasiddha-kathavachaka-indresh-upadhyay-ne-kie-khatu-shyam-ji-ke-darshana-jeen-bhawani-mndira-men-bhi-teka-matha-42714 · **Language:** Hindi
**Tags:** खाटूश्यामजी, इन्द्रेश उपाध्याय, सीकर, जीण माता, श्रीमद्भागवत कथा, धार्मिक समाचार

सीकर जिले में स्थित विश्व विख्यात खाटूश्यामजी मंदिर में नियमित रूप से देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. आम भक्तों के अलावा धार्मिक, राजनीतिक, खेल और सिनेमा जगत की जानी-मानी हस्तियां भी लगातार बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाने आती हैं. इसी क्रम में देश के लोकप्रिय कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय खाटूधाम पहुंचे. उन्होंने मंदिर परिसर में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की और शीश नवाकर बाबा श्याम का आशीर्वाद प्राप्त किया. मंदिर परिसर में आगमन के दौरान श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से उनका आदरपूर्वक स्वागत और अभिनंदन किया गया.

## मंदिर कमेटी ने किया स्वागत और सम्मान
खाटूश्यामजी पहुंचने पर मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने इन्द्रेश उपाध्याय की अगवानी की. उन्होंने कथावाचक को बाबा श्याम का पवित्र दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया और स्मृति स्वरूप प्रतीक चिह्न भेंट किया. इस औपचारिक सम्मान के पश्चात इन्द्रेश उपाध्याय ने मुख्य गर्भगृह के सामने उपस्थित होकर दर्शन किए और विशेष अनुष्ठान संपन्न किया. युवाओं के बीच श्रीमद्भागवत कथा और सनातन संस्कृति के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल शैली में पहुंचाने के लिए इन्द्रेश उपाध्याय विशेष पहचान रखते हैं. खाटूधाम में दर्शन करने के उपरांत वे क्षेत्र की प्रसिद्ध सिद्ध पीठ मां जीण भवानी के दरबार में भी पहुंचे. जीण माता मंदिर में मुख्य पुजारी ने उनका स्वागत सत्कार किया, जहां उन्होंने देवी के सम्मुख माथा टेककर मंगलकामना की.

## सीकर की पावन धरा और बाबा श्याम की वैश्विक महिमा
दर्शन के बाद अपने विचार साझा करते हुए इन्द्रेश उपाध्याय ने कहा कि बाबा श्याम वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण का ही साक्षात स्वरूप हैं. उन्होंने कहा कि जिस भी भक्त पर बाबा श्याम की कृपा दृष्टि पड़ जाती है, वह अपने जीवन में कभी पराजित नहीं होता. इसी कारण उन्हें भक्तों के बीच हारे का सहारा माना जाता है. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बाबा श्याम की आस्था केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी उनके अनगिनत भक्त मौजूद हैं. उन्होंने साझा किया कि जब भी वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथा वाचन के लिए प्रवास करते हैं, तो वहां बड़ी संख्या में बाबा श्याम के निष्ठावान अनुयायी मिलते हैं.

धार्मिक पर्यटन और आस्था के परिदृश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सीकर जिला पूरे विश्व में अपना एक विशिष्ट और पावन स्थान रखता है. इस जिले में स्वयं खाटूश्याम जी का धाम स्थित है, जबकि पास ही सालासर बालाजी का पवित्र केंद्र है. इसके साथ-साथ इसी पावन क्षेत्र में मां जीण भवानी का सिद्ध पीठ और रैवासा धाम भी स्थित हैं, जो श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के केंद्र हैं.

## महाभारत काल से जुड़ी शीश दान की पावन कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा श्याम को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है और उन्हें हारे का सहारा कहा जाता है. इसके पीछे महाभारत काल की एक अत्यंत प्रेरक गाथा जुड़ी हुई है. महाभारत के महायुद्ध के समय पांडु पुत्र भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों के पक्ष से युद्ध भूमि में उतरने की तैयारी कर रहे थे. उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनके समक्ष शीश दान की याचना की. वीर बर्बरीक ने बिना किसी संकोच अथवा हिचकिचाहट के अपना शीश काटकर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया. इस अद्वितीय बलिदान और भक्ति से अत्यंत प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उनकी पूजा श्याम नाम से की जाएगी. इसके साथ ही भगवान ने उन्हें यह आशीर्वाद भी दिया कि वे संकट में घिरे और हारे हुए प्राणियों का मुख्य सहारा बनेंगे. इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम के बाद से श्रद्धालु उन्हें हारे के सहारे के रूप में पूजते हैं.

## इसका आप पर असर
इस यात्रा से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं के प्रवाह को नई प्रेरणा मिलती है.

- **भारत में:** देश भर के कृष्ण भक्तों और सनातन धर्म में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए खाटूधाम और जीण माता जैसे तीर्थों की प्रासंगिकता और प्रतिष्ठा पुनः रेखांकित होती है. इससे अंतरराज्यीय धार्मिक यात्राओं और वार्षिक दर्शन योजनाओं को प्रोत्साहन मिलता है.
- **सीकर में:** जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे खाटूधाम, सालासर बालाजी, जीण माता और रैवासा धाम के प्रति श्रद्धालुओं का आकर्षण और स्थानीय पर्यटन बढ़ता है. इससे स्थानीय परिवहन, धर्मशालाओं और पूजा सामग्री से जुड़े व्यापारियों के रोजगार को सीधा संबल मिलता है.

## ऐसा क्यों हुआ
कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय की खाटूधाम यात्रा व्यक्तिगत श्रद्धा और धार्मिक अनुष्ठान के तहत संपन्न हुई. देश भर के प्रमुख संत और आध्यात्मिक वक्ता समय-समय पर प्रमुख शक्तिपीठों और कृष्ण मंदिरों में शीश नवाने पहुंचते हैं.

- **आध्यात्मिक अनुष्ठान:** सनातन परंपरा में कथावाचकों द्वारा प्रवचन श्रृंखलाओं के बीच प्रमुख तीर्थों पर जाकर आशीर्वाद प्राप्त करने की स्थापित परंपरा रही है. इन्द्रेश उपाध्याय ने अपनी नियमित यात्राओं के अंतर्गत खाटूश्यामजी और मां जीण भवानी के दरबार में हाजिरी लगाई.
- **मंदिर सम्मान की परंपरा:** श्री श्याम मंदिर कमेटी की यह स्थापित परिपाटी है कि वह धाम पधारने वाले प्रतिष्ठित संतों और गणमान्य अतिथियों का दुपट्टा और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत करती है. इसी व्यवस्था के तहत मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने उनकी अगवानी की.
- **सीकर का धार्मिक महत्व:** सीकर जिला कई परस्पर जुड़े प्राचीन तीर्थों का केंद्र है, जिसके चलते एक धाम के दर्शन के बाद समीपवर्ती जीण माता मंदिर जाने का स्वाभाविक मार्ग चुना जाता है.

## सवाल-जवाब

### 1. कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय ने सीकर में किन प्रमुख मंदिरों के दर्शन किए?
उन्होंने सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद सिद्ध पीठ मां जीण भवानी के दरबार में माथा टेका.

### 2. खाटूश्यामजी मंदिर में इन्द्रेश उपाध्याय का स्वागत किसने किया?
श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने उन्हें बाबा श्याम का दुपट्टा ओढ़ाकर और प्रतीक चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया.

### 3. इन्द्रेश उपाध्याय किस कार्यशैली के लिए युवाओं में लोकप्रिय हैं?
वे युवाओं के बीच श्रीमद्भागवत कथा और सनातन धर्म के विषयों को सरल और सहज अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं.

### 4. बाबा श्याम को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?
महाभारत काल में बर्बरीक द्वारा श्रीकृष्ण को शीश दान करने पर प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने और पराजितों का संबल बनने का वरदान दिया था.

### 5. कथावाचक ने सीकर जिले के किन अन्य धार्मिक स्थलों का उल्लेख किया?
उन्होंने खाटूश्याम जी के अलावा सालासर बालाजी, मां जीण भवानी और रैवासा धाम का उल्लेख करते हुए सीकर के धार्मिक महत्व को रेखांकित किया.

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