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  "type": "article",
  "title": "प्रॉपर्टी और क्रिप्टो में भारी मुनाफे का लालच देकर 100 करोड़ हड़पने वाले दो जालसाज दबोचे गए",
  "summary": "जयपुर पुलिस ने फर्जी वेबसाइट और रियल एस्टेट योजनाओं के जरिए 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने लग्जरी गाड़ियां जब्त करने के साथ एक करोड़ रुपये की एफडी भी फ्रीज कर दी है।",
  "content": "निवेश पर अवास्तविक रिटर्न का सपना दिखाकर निवेशकों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जयपुर में संपत्ति और डिजिटल मुद्रा में निवेश कराने का झांसा देकर तकरीबन 100 करोड़ रुपये ऐंठने के आरोप में दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जहां एक करोड़ रुपये मूल्य की बैंक एफडी को फ्रीज करा दिया है, वहीं आरोपियों के पास से लगभग 1.25 करोड़ रुपये की मर्सिडीज कार और ट्रायम्फ मोटरसाइकिल भी बरामद कर जब्त कर ली है।\n\nगुड़गांव से मुख्य सरगना और जयपुर ग्रामीण से दूसरा साथी पकड़ाया\nजांच अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए व्यक्तियों के नाम मोहित कालोया और घनश्याम कान्देल हैं। इस वित्तीय धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड मोहित कालोया को गुड़गांव से दबोचा गया, जिसके बाद उससे मिली सूचनाओं के आधार पर दूसरे अभियुक्त घनश्याम को जयपुर ग्रामीण के इलाके से धर दबोचा गया। दोनों आरोपियों को पकड़ने के लिए सोडाला थाना पुलिस ने सघन अभियान चलाया, जिसके चलते यह महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है।\n\nईजी वे होम्स और फर्जी क्रिप्टो पोर्टल्स का बनाया जाल\nपूछताछ और प्रारंभिक तफ्तीश में सामने आया कि गिरोह 'ईजी वे होम्स' नाम से रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी निवेश की लुभावनी योजनाएं पेश करता था। भारी लाभ का दावा कर लोगों से मोटी रकम जमा कराई जाती थी। इसके साथ ही डिजिटल परिसंपत्तियों के प्रति लोगों के आकर्षण का फायदा उठाने के लिए USDT और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर नकली वेबसाइट्स तैयार की गई थीं। तकनीकी जांच के दौरान फ्लिंटी-आईओ और फ्लिंटी-लाइव नामक फर्जी डिजिटल कॉइन प्लेटफॉर्म्स उजागर हुए हैं, जिनके जरिए निवेशकों को विश्वास में लेकर पूंजी फंसाई जाती थी।\n\nचार थानों में मामले दर्ज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की छानबीन\nइस बड़े घोटाले को लेकर जयपुर के चार अलग-अलग पुलिस थानों में लगभग 100 करोड़ रुपये के गबन की प्राथमिकियां दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस दल ने आरोपियों के ठिकानों से कंप्यूटर सिस्टम, लैपटॉप और कई मोबाइल हैंडसेट बरामद किए हैं। फॉरेंसिक और साइबर विशेषज्ञ इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि निवेशकों के डेटा, वित्तीय लेन-देन और गिरोह के अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा सके। पुलिस दोनों आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ कर पूरे सिंडिकेट और ठगी गई धनराशि के प्रवाह की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।\n\nइसका आप पर असर\nयह मामला स्पष्ट करता है कि बिना प्रामाणिकता वाले निवेश और क्रिप्टोकरेंसी योजनाओं में जमाकर्ताओं की पूरी पूंजी डूबने का भारी जोखिम रहता है।\n\n• भारत में: किसी भी अनजान ऑनलाइन पोर्टल या असामान्य मुनाफा देने वाली क्रिप्टोकरेंसी और प्रॉपर्टी योजनाओं में पैसा लगाने से पहले विनियामक मंजूरी अवश्य जांचें। सेबी या आरबीआई से अपंजीकृत संस्थाओं में निवेश करने पर कानूनी सुरक्षा और पैसे की वापसी बेहद मुश्किल हो जाती है।\n• जयपुर में: जयपुर और आसपास के इलाकों में यदि किसी ने ईजी वे होम्स या फ्लिंटी प्लेटफॉर्म्स में पैसा लगाया है, तो वे तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। चार थानों में दर्ज मामलों में अपनी शिकायत जोड़कर पीड़ित अपनी डूबी रकम की कानूनी पैरवी कर सकते हैं।\n• निवेशकों के लिए: आकर्षक विज्ञापनों और लग्जरी लाइफस्टाइल देखकर निवेश का फैसला करने से बचना जरूरी है। किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले अधिकृत बैंक खातों और पंजीकृत दस्तावेजों का सत्यापन खुद करें।\n• डिजिटल सुरक्षा: किसी भी अनाधिकृत डिजिटल टोकन या अज्ञात वेबसाइट पर वॉलेट और बैंक खाते की जानकारी साझा न करें। साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दर्ज कराएं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह बड़ा वित्तीय घोटाला तेजी से धन कमाने के लालच और रियल एस्टेट व डिजिटल परिसंपत्तियों में बढ़ती जनता की रुचि का अनुचित फायदा उठाकर रचा गया था।\n\n• असामान्य मुनाफे का प्रलोभन: आरोपियों ने निवेशकों को लुभाने के लिए पारंपरिक निवेश से कहीं अधिक और अवास्तविक रिटर्न का वादा किया था। आम लोग ज्यादा कमाई के चक्कर में बिना जांच-पड़ताल किए जालसाजों के दावों पर भरोसा कर बैठे।\n• फर्जी प्लेटफॉर्म्स और संस्थाओं का उपयोग: जालसाजों ने लोगों को विश्वास में लेने के लिए ईजी वे होम्स नामक संस्था और फ्लिंटी-आईओ जैसी वेबसाइट्स तैयार की थीं। पेशेवर दिखने वाले इन डिजिटल मंचों के कारण निवेशकों को धोखाधड़ी का शीघ्र अंदेशा नहीं हुआ।\n• गुड़गांव और जयपुर के बीच नेटवर्क: मुख्य आरोपी ने राजस्थान से बाहर हरियाणा के गुड़गांव में अपना ठिकाना बनाकर वहां से गतिविधियां संचालित की थीं। विभिन्न शहरों से नेटवर्क चलाने और सहयोगियों की मदद से धन के हस्तांतरण को जटिल बनाया गया था।\n• पुलिस की तकनीकी निगरानी: पीड़ितों की बढ़ती शिकायतों के आधार पर जयपुर के चार थानों में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने साइबर ट्रैकिंग शुरू की। डिजिटल साक्ष्यों और लोकेशन ट्रेसिंग की मदद से मुख्य सरगना को गुड़गांव से पकड़ा जा सका।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जयपुर में 100 करोड़ की ठगी के मामले में किन लोगों को गिरफ्तार किया गया है?\nपुलिस ने मुख्य आरोपी मोहित कालोया को गुड़गांव से और उसके साथी घनश्याम कान्देल को जयपुर ग्रामीण से गिरफ्तार किया है।\n\n2. आरोपियों से क्या-क्या संपत्तियां और सामान जब्त किए गए हैं?\nपुलिस ने आरोपियों की एक करोड़ रुपये की बैंक एफडी फ्रीज करवाई है और 1.25 करोड़ रुपये मूल्य की मर्सिडीज कार, ट्रायम्फ बाइक तथा लैपटॉप और मोबाइल बरामद किए हैं।\n\n3. जालसाज निवेशकों को किस तरह झांसा देते थे?\nआरोपी ईजी वे होम्स के जरिए प्रॉपर्टी में बड़े रिटर्न और फ्लिंटी-आईओ तथा फ्लिंटी-लाइव जैसी फर्जी वेबसाइट्स के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का लालच देते थे।\n\n4. इस मामले में कितनी प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं?\nजयपुर के चार अलग-अलग थानों में इस 100 करोड़ रुपये की ठगी से संबंधित एफआईआर दर्ज की गई हैं।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-02",
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    "जयपुर क्राइम",
    "क्रिप्टो फ्रॉड",
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  "site": "TrendKia"
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