# पुष्कर मेले में रेत पर सजेगा राजस्थान का गौरव, भगवान देवनारायण की भव्य सैंड आर्ट बनाएंगे अजय रावत

> पुष्कर मेले में इस बार रेत पर भगवान देवनारायण और कई ऐतिहासिक नायकों की विशाल सैंड आर्ट तैयार की जाएगी। सैंड आर्टिस्ट अजय रावत पिछले एक साल से इस परियोजना की बारीक तैयारियों में जुटे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/pushkar-fair-men-banegi-lord-devnarayan-ki-vishala-sand-art-eka-sala-se-taiyari-men-jute-ajay-rawat-44499 · **Language:** Hindi
**Tags:** पुष्कर मेला, अजय रावत, सैंड आर्ट, भगवान देवनारायण, अजमेर, राजस्थान पर्यटन, महाराणा प्रताप

अजमेर स्थित पुष्कर का मेला केवल धार्मिक रीति-रिवाजों और आस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध विरासत, कला और परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का एक अहम माध्यम भी बन चुका है। मेले में हर वर्ष आने वाले अनगिनत देशी-विदेशी सैलानियों के स्वागत के लिए नए और आकर्षक सांस्कृतिक पहलू जोड़े जाते हैं। इसी कड़ी में आगामी आयोजन के दौरान रेत की आकृतियों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और गौरवशाली इतिहास की झलक पेश की जाएगी। सैंड आर्टिस्ट अजय रावत इस विशेष प्रस्तुति के लिए पिछले एक साल से योजना और बुनियादी काम में लगे हुए हैं।

## रेत पर जीवंत होंगे ऐतिहासिक नायक और लोक देवता
इस बार के मेले में मुख्य आकर्षण भगवान देवनारायण जी की एक बेहद विशाल रेत की कलाकृति होगी। इसके साथ ही राजस्थान के वीर योद्धाओं और पूज्य लोक नायकों की गाथाओं को भी रेत के माध्यम से उकेरा जाएगा। इनमें पाबूजी राठौड़, महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान जैसे पराक्रमी महापुरुषों की कलाकृतियां शामिल की जा रही हैं। इस पूरी पहल का मुख्य मकसद एक ही जगह पर राजस्थान के सांस्कृतिक ताने-बाने, ऐतिहासिक महत्व और धरोहर को एक साथ प्रस्तुत करना है, ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक प्रदेश के मूल स्वरूप को करीब से समझ सकें।

## समापन के तुरंत बाद शुरू होती है नए आयोजन की रूपरेखा
अपनी कला यात्रा को लेकर सैंड आर्टिस्ट अजय रावत का कहना है कि जब एक पुष्कर मेला समाप्त होता है, उसी समय से वे अगले साल के आयोजन की रूपरेखा बनाने में लग जाते हैं। पूरे वर्ष उनका यही प्रयास रहता है कि अगली बार अपनी रचनाओं को और अधिक निखारकर दर्शकों के सामने लाया जाए। उनका मुख्य ध्येय अधिक से अधिक कला प्रेमियों तक पहुंचना और उन्हें रेत शिल्प के जरिए राजस्थान की मिट्टी की खुशबू से परिचित कराना है। इसी रचनात्मक सोच के चलते वे हर बार कुछ अनूठा और अलग करने की योजना पर काम करते हैं।

## साल भर की गहरी योजना के बाद तैयार होगा रेत उत्सव
रावत के अनुसार आगामी सैंड आर्ट उत्सव अपने पुराने सभी आयोजनों की तुलना में काफी अलग स्तर पर आयोजित किया जाएगा। हालांकि वर्तमान समय में आयोजन स्थल पर कोई बड़ा ढांचा या प्रत्यक्ष काम दिखाई नहीं दे रहा है, क्योंकि सारा ध्यान अभी डिजाइन की बारीकियों, तकनीकी नियोजन और बुनियादी रूपरेखा को अंतिम रूप देने पर केंद्रित है। पिछले पूरे एक साल से चल रही इस कागजी और व्यावहारिक तैयारी के आधार पर ही रेत पर इन विशाल आकृतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

## विशाल कृतियों के पिछले अनुभव से मिलेगा संबल
भगवान देवनारायण जी की विशाल रेत आकृति को इस पूरे महोत्सव का केंद्र बिंदु बनाया जाएगा। इससे पहले के मेले में तेजाजी महाराज की एक बहुत बड़ी सैंड आर्ट बनाई गई थी। उस दौरान मिले अनुभव और बड़े आकार की कलाकृति गढ़ने की चुनौतियों ने रावत को काफी आत्मविश्वास दिया। उसी पिछले अनुभव और तकनीकी महारत का पूरा उपयोग करते हुए इस बार भगवान देवनारायण जी की उससे भी ज्यादा भव्य और विस्तृत कृति रेत पर उभारी जाएगी।

## इसका आप पर असर
पुष्कर मेले में जाने वाले पर्यटकों और कला प्रेमियों को इस बार राजस्थान की लोक संस्कृति और इतिहास की अनूठी सैंड आर्ट देखने को मिलेगी।

- **भारत में:** देश भर से आने वाले पर्यटकों को आधुनिक रेत शिल्प के माध्यम से राजस्थान के गौरवशाली इतिहास और लोक देवताओं के दर्शन एक ही जगह होंगे। इससे राज्य की पारंपरिक धरोहर को समझने में बाहरी पर्यटकों को आसानी होगी।
- **अजमेर में:** स्थानीय कारीगरों, सांस्कृतिक मंचों और पर्यटन व्यवसाय को इस विशेष कला प्रदर्शनी से नई ऊर्जा और सराहना मिलेगी। मेले के दौरान शहर में आने वाली भीड़ के लिए यह सैंड आर्ट मुख्य आकर्षणों में से एक बनेगी।
- **कला प्रेमियों के लिए:** रेत पर विशाल आकृतियां गढ़ने की तकनीक और कलात्मक प्रयोगों को प्रत्यक्ष देखने का दुर्लभ अवसर मिलेगा। आगंतुक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के खुले परिसर में इन कृतियों का अवलोकन कर सकेंगे।
- **सांस्कृतिक पहचान:** लोक देवताओं और ऐतिहासिक नायकों की गाथाएं युवा पीढ़ी और विदेशी मेहमानों तक सीधे पहुंच सकेंगी। यह आयोजन स्थानीय सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने का माध्यम बनेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पुष्कर मेले में इस बार सैंड आर्ट को विशाल स्तर पर तैयार किया जा रहा है ताकि राजस्थान के समृद्ध इतिहास और लोक नायकों की गाथाओं को विश्व स्तर के दर्शकों तक पहुंचाया जा सके।

- **तैयारी का लंबा दौर:** सैंड आर्टिस्ट अजय रावत पिछले एक पूरे साल से इस परियोजना के बुनियादी काम और बारीक योजना पर काम कर रहे हैं। जटिल आकृतियों को सटीक रूप देने के लिए लंबे समय की पूर्व तैयारी आवश्यक थी।
- **विगत अनुभव से प्रेरणा:** पिछले आयोजन में तेजाजी महाराज की विशाल सैंड आर्ट तैयार की गई थी, जिससे कलाकार को बड़े आकार की कृतियों को नियंत्रित करने का महत्वपूर्ण अनुभव मिला। उसी तकनीकी महारत का उपयोग अब भगवान देवनारायण की मूर्ति बनाने में किया जा रहा है।
- **सांस्कृतिक प्रचार का उद्देश्य:** पुष्कर मेला विश्व प्रसिद्ध मंच है, जहां केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व भी होता है। पाबूजी राठौड़, महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान की कलाकृतियों को जोड़कर प्रदेश के गौरव को प्रदर्शित करने का फैसला लिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. पुष्कर मेले में कौन सी मुख्य सैंड आर्ट बनाई जाएगी?
इस बार पुष्कर मेले में मुख्य आकर्षण भगवान देवनारायण जी की विशाल सैंड आर्ट होगी।

### 2. भगवान देवनारायण के अलावा किन ऐतिहासिक हस्तियों की कलाकृतियां बनेंगी?
कलाकृति में पाबूजी राठौड़, महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान जैसे ऐतिहासिक नायकों और लोक देवताओं को भी शामिल किया जाएगा।

### 3. इस सैंड आर्ट को कौन तैयार कर रहा है?
इस सैंड आर्ट को जाने-माने सैंड आर्टिस्ट अजय रावत तैयार कर रहे हैं।

### 4. इस कलाकृति की तैयारी में कितना समय लगा है?
सैंड आर्टिस्ट अजय रावत पिछले एक साल से इस प्रोजेक्ट की योजना और तैयारियों में जुटे हैं।

### 5. अजय रावत ने इससे पहले किस लोक देवता की बड़ी सैंड आर्ट बनाई थी?
उन्होंने पिछले मेले में तेजाजी महाराज की विशाल सैंड आर्ट बनाई थी, जिससे मिले अनुभव का उपयोग वे इस बार कर रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
अजय रावत का समर्पण यह दर्शाता है कि किसी भी बड़े रचनात्मक लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतरता और धैर्य बेहद जरूरी हैं।

- **सतत तैयारी:** एक आयोजन खत्म होते ही अगले साल के काम में जुट जाना सिखाता है कि सफलता अचानक नहीं मिलती, बल्कि साल भर की शांत मेहनत से जन्म लेती है।
- **पिछले अनुभवों से सीखना:** पिछली बार तेजाजी महाराज की कलाकृति से मिले व्यावहारिक अनुभवों का उपयोग अगली बड़ी कृति में करना यह बताता है कि अपनी पुरानी उपलब्धियों से सीख लेकर ही आगे बढ़ा जाता है।
- **संस्कृति के प्रति निष्ठा:** अपनी कला को केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन तक सीमित न रखकर अपने राज्य की लोक परंपरा और इतिहास को वैश्विक मंच पर पहुंचाना गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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