# पुष्कर में रेत पर उकेरी गई विघ्नहर्ता की भव्य मूरत, सैंड आर्टिस्ट अजय रावत की कला ने मोहा पर्यटकों का मन

> गणेश उत्सव के पावन अवसर पर पुष्कर में प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने रेत से भगवान गणेश की मनमोहक प्रतिमा बनाई है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/pushkar-men-reta-para-ukeri-gai-vighnaharta-ki-bhavya-murata-sainda-artista-ajay-rawat-ki-kala-ne-moha-paryatakon-ka-mana-33524 · **Language:** Hindi
**Tags:** अजय रावत, पुष्कर, गणेश उत्सव, सैंड आर्ट, अजमेर, भगवान गणेश, महाराणा सज्जन सिंह सम्मान

पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम है और गांव से लेकर शहरों तक विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित कर पंडालों को आकर्षक स्वरूप दिया गया है. राजस्थान के अजमेर जिले में भी पर्व को लेकर वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा है, जहां अलग-अलग इलाकों में सजे पूजा पंडालों में दर्शन के लिए लगातार श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. इसी धार्मिक उत्साह के बीच अजमेर से सटी तीर्थ नगरी पुष्कर से एक बेहद खूबसूरत कलात्मक तस्वीर सामने आई है, जिसने उत्सव की छटा में चार चांद लगा दिए हैं.

## रेत से गढ़ी गणपति की मनभावन छवि
पुष्कर में विख्यात सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने अपने पारंपरिक हुनर का नायाब प्रदर्शन करते हुए सुनहरी रेत पर भगवान गणेश की अत्यंत सुंदर और भव्य प्रतिमा तैयार की है. बालू के टीलों पर तराशी गई बप्पा की यह प्रतिमा इन दिनों पुष्कर आने वाले देशी और विदेशी सैलानियों के साथ-साथ स्थानीय श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुकी है. रेत के बारीक कणों से गढ़ी गई इस कलाकृति को देखने के लिए हर कोई रुक रहा है और शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है.

## सैलानियों में तस्वीरें लेने की मची होड़
धार्मिक नगरी घूमने आ रहे पर्यटक और श्रद्धालु इस कलात्मक प्रतिमा को देखकर दंग रह जाते हैं. लोग न केवल भगवान गणेश के इस अनूठे स्वरूप के दर्शन कर रहे हैं, बल्कि अपने मोबाइल कैमरों में प्रतिमा की तस्वीरें खींचते और वीडियो बनाते भी दिखाई दे रहे हैं. कई लोग इस मनमोहक सैंड आर्ट के साथ यादगार सेल्फी ले रहे हैं, जिससे यह कलाकृति पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.

## धार्मिक और सामाजिक विषयों पर पहले भी बिखेर चुके हैं रंग
अजय रावत इससे पूर्व भी रेत के जरिए कई हैरतअंगेज कलाकृतियों और धार्मिक स्वरूपों का निर्माण कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने रेत पर लोकदेवता बाबा रामदेव की सुंदर प्रतिमा उकेरी थी, जिसे लोगों ने काफी सराहा था. इसके अतिरिक्त देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में भी उन्होंने रेत से उनकी सजीव प्रतिमा बनाकर अपनी अद्भुत कला का लोहा मनवाया था.

## राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुकी है बड़ी पहचान
अजय रावत की इस अद्वितीय रचनात्मक प्रतिभा को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है. उनकी कला साधना के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें सम्मानित कर चुके हैं. इसके साथ ही उन्हें अजमेर जिले का यूथ आइकन अवॉर्ड भी प्रदान किया जा चुका है. फाइन आर्ट्स यानी ललित कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए उन्हें वर्ष 2026 में प्रतिष्ठित महाराणा सज्जन सिंह सम्मान से भी नवाजा गया है.

## इसका आप पर असर
पुष्कर आने वाले श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के लिए यह सैंड आर्ट उत्सव के दौरान एक विशेष आकर्षण बनकर उभरा है.

- **पुष्कर आने वाले पर्यटकों के लिए:** यदि आप इन दिनों धार्मिक नगरी पुष्कर के भ्रमण पर हैं, तो बालू पर उकेरी गई इस कलाकृति के दर्शन कर सकते हैं. यहां पहुंचकर आप भगवान गणेश की इस अस्थायी कला के साथ अपनी यादगार तस्वीरें और वीडियो बना सकते हैं.
- **स्थानीय कलाकारों के लिए:** पारंपरिक धार्मिक आयोजनों में आधुनिक सैंड आर्ट जैसी विधाओं का उपयोग नए कलाकारों को प्रेरणा देता है. इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला का प्रदर्शन कर पहचान बनाने का नया मंच मिलता है.
- **पर्यावरण की दृष्टि से:** रेत और प्राकृतिक तत्वों से बनाई गई कलाकृतियां किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाती हैं. उत्सव के दौरान इस तरह की पहल श्रद्धालुओं के बीच इको-फ्रेंडली उत्सव मनाने का सकारात्मक संदेश देती है.
- **सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा:** इस प्रकार के विशिष्ट कलात्मक प्रयोग तीर्थ स्थलों पर पर्यटन को नए आयाम प्रदान करते हैं. इससे पुष्कर आने वाले सैलानियों को धार्मिक दर्शन के साथ-साथ उत्कृष्ट भारतीय कला को नजदीक से देखने का अवसर मिलता है.

## ऐसा क्यों हुआ
गणेश उत्सव के पर्व पर श्रद्धालुओं के बीच उत्सव का उत्साह बढ़ाने और भारतीय सैंड आर्ट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस अनूठी प्रतिमा का निर्माण किया गया है.

- **उत्सव की शुरुआत:** देश भर में गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुए पर्व के माहौल में पुष्कर के भक्तिमय वातावरण को और आकर्षक बनाने के लिए इस प्रतिमा को गढ़ा गया. उत्सव के समय धार्मिक नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या इस तरह की कलाकृतियों के लिए अनुकूल अवसर प्रदान करती है.
- **कलात्मक निरंतरता:** सैंड आर्टिस्ट अजय रावत समय-समय पर महत्वपूर्ण अवसरों और पर्वों पर रेत से प्रतिमाएं बनाते रहे हैं. इससे पहले बाबा रामदेव की प्रतिमा और प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर बनाई गई कलाकृतियों को मिली सराहना ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.
- **सैंड आर्ट को सार्वजनिक मंच देना:** रेगिस्तानी क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर जनसामान्य और पर्यटकों के बीच फाइन आर्ट्स के प्रति रुचि पैदा करना भी इस तरह की कृतियों का प्रमुख आधार रहा है.

## सवाल-जवाब

### 1. पुष्कर में भगवान गणेश की रेत की प्रतिमा किसने बनाई है?
यह प्रतिमा प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट अजय रावत द्वारा तैयार की गई है.

### 2. यह सैंड आर्ट राजस्थान के किस स्थान पर बनाया गया है?
यह सुंदर कलाकृति अजमेर जिले की धार्मिक नगरी पुष्कर में बनाई गई है.

### 3. अजय रावत ने हाल ही में किस अन्य लोकदेवता की रेत की प्रतिमा बनाई थी?
उन्होंने कुछ ही दिन पहले रेत से बाबा रामदेव की भव्य प्रतिमा का निर्माण किया था.

### 4. अजय रावत को किस पूर्व राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है?
उन्हें देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित किया गया है.

### 5. वर्ष 2026 में अजय रावत को कौन सा प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ?
उन्हें वर्ष 2026 में ललित कला के क्षेत्र में महाराणा सज्जन सिंह सम्मान प्रदान किया गया है.

## प्रेरणा और सबक
अजय रावत की कला यात्रा यह सिखाती है कि सीमित और पारंपरिक संसाधनों से भी राष्ट्रीय स्तर की पहचान हासिल की जा सकती है.

- **साधनों से परे रचनात्मकता:** केवल साधारण रेत और पानी के बलबूते विश्वस्तरीय कृतियां बनाई जा सकती हैं. यह दर्शाता है कि महंगी सामग्री के बजाय अभ्यास और लगन ही कलाकार की असली पूंजी होती है.
- **सख्त मेहनत से पहचान:** अपनी कला के प्रति निरंतर समर्पण से किसी भी हुनरमंद को शीर्ष स्तर तक पहुंचा जा सकता है. पूर्व राष्ट्रपति द्वारा सम्मान और प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलना दृढ़ संकल्प का ही प्रमाण है.
- **संस्कृति से जुड़ाव:** अपनी कला को अपनी संस्कृति और लोक-आस्था से जोड़कर रखना समाज में गहरी स्वीकार्यता दिलाता है. लोकदेवताओं और पर्वों को अपनी कला का माध्यम बनाकर कलाकार ने जन-जन का दिल जीता है.

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