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  "type": "article",
  "title": "पुष्कर पशु मेले में छोटे अश्वपालकों को ऑन-द-स्पॉट जमीन, खत्म हुआ जियो टैगिंग का झंझट",
  "summary": "अजमेर के अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले में प्रशासन ने नियमों को आसान बनाते हुए 5 से कम घोड़े लाने वालों को मौके पर ही सीधे प्लॉट देने और जियो टैगिंग की अनिवार्यता हटाने का फैसला किया है.",
  "content": "राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित विख्यात पुष्कर क्षेत्र में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय पशु मेले के प्रबंधन तंत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं. दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले किसानों, पशुपालकों और व्यापारियों के सफर तथा ठहराव को सुगम बनाने के मकसद से प्रशासन ने नियमों को बेहद लचीला और आधुनिक रूप दिया है. इस दफा मेला स्थल पर दाखिल होने वाले अश्वपालकों के पंजीकरण और जमीन आवंटन की प्रणाली को पहले के मुकाबले काफी पारदर्शी रखा गया है. इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों से कागजी औपचारिकताओं को घटाने के लिए एक खास ऑनलाइन पोर्टल भी सक्रिय किया गया है, जिससे मेले में आने वाले किसी भी व्यक्ति को सरकारी दफ्तरों या काउंटरों के बेवजह चक्कर न लगाने पड़ें.\n\nछोटे अश्वपालकों को सीधे ऑफलाइन मिलेगा प्लॉट\nमेले के समग्र प्रबंध की रूपरेखा साझा करते हुए मेला अधिकारी डॉक्टर नवीन परिहार ने स्पष्ट किया कि छोटे स्तर पर पशुपालन करने वालों को भारी राहत दी गई है. जिन पशुपालकों के पास 5 से कम घोड़े हैं, उन्हें किसी भी तरह की पेचीदा या वक्त लेने वाली प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा. ऐसे सभी छोटे पशुपालक जैसे ही मेला परिसर में अपने मवेशियों के साथ कदम रखेंगे, उन्हें बिना किसी ऑनलाइन पूर्व-पंजीकरण के सीधे ऑफलाइन माध्यम से तुरंत प्लॉट आवंटित कर दिया जाएगा. यह विशेष प्रबंध सीमांत व छोटे पशुपालकों को बेवजह की भागदौड़, तकनीकी उलझन और समय की बर्बादी से सुरक्षित रखने के लिए तय किया गया है, ताकि वे बिना किसी अड़चन के मेला प्रांगण में अपना डेरा जमा सकें.\n\nजियो टैगिंग खत्म, बड़े पशुपालकों के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट जरूरी\nव्यवस्था में दूसरा बड़ा बदलाव पूर्व में लागू अनिवार्य जियो टैगिंग को पूरी तरह समाप्त करके लाया गया है. पहले पशुपालकों को जियो टैगिंग की लंबी औपचारिकताओं में उलझना पड़ता था, जिसे अब प्रशासनिक स्तर पर हटा लिया गया है. डॉक्टर नवीन परिहार के अनुसार, जिन अश्वपालकों के पास 5 या उससे अधिक घोड़े हैं, उनके लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र यानी हेल्थ सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य रहेगा. पशुपालक अपने गृह क्षेत्र के किसी भी नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय से वहां मौजूद अधिकृत चिकित्सकों द्वारा यह प्रमाण पत्र तैयार करवा सकते हैं. इसके बाद वे अपने घोड़ों की संख्या के मुताबिक बने सर्टिफिकेट को सीधे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर अपनी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.\n\nडिजिटल पोर्टल पर सत्यापन और फोन पर सीधी मदद\nऑनलाइन पोर्टल के जरिए पंजीकरण की प्रक्रिया को भी बेहद सरल और सुलभ रखा गया है. पोर्टल पर आवेदन दर्ज करते वक्त पशुपालक को अपने मवेशी की एक साफ तस्वीर अपलोड करनी होती है, जिसका अधिकतम फाइल साइज 1 एमबी तक स्वीकृत किया जा रहा है. फोटो और पशु चिकित्सक से प्राप्त हेल्थ सर्टिफिकेट अपलोड होते ही रजिस्ट्रेशन का चरण पूरा मान लिया जाता है. इसके तत्काल बाद विभाग की एक विशेष तकनीकी टीम फोन के जरिए दर्ज विवरण और दस्तावेजों का सत्यापन करती है. अगर सारी जानकारियां दुरुस्त पाई जाती हैं तो आवेदन को तुरंत हरी झंडी दे दी जाती है. यदि फॉर्म में कोई खामी या दस्तावेज अधूरा दिखता है, तो विभागीय टीम उसी वक्त फोन पर संपर्क कर पशुपालक को सही मार्गदर्शन मुहैया कराती है.\n\nभैंस वंश और अन्य पशुओं के लिए खुला आरक्षित क्षेत्र\nअश्व वंश के अलावा भैंस वंश तथा अन्य प्रजातियों के मवेशियों को लाने वाले ग्रामीणों के लिए भी प्रशासन ने अलग से पुख्ता बंदोबस्त किए हैं. इन मवेशियों को लेकर आने वाले पशुपालकों पर किसी भी प्रकार के ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की शर्त नहीं थोपी गई है. उनके सुगम ठहराव के लिए मेला प्रांगण के भीतर ही एक विस्तृत और सुविधाजनक भूखंड को पूरी तरह आरक्षित रखा गया है. इस दूरगामी रणनीति से मेला क्षेत्र में मवेशियों के जमावड़े को नियंत्रित रखने, विभिन्न पशुपालकों को आसानी से जगह दिलाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस विशाल समागम को सुचारू ढंग से संचालित करने में काफी मदद मिलेगी.\n\nइसका आप पर असर\nपुष्कर मेले में जाने वाले पशुपालकों और व्यापारियों को अब जटिल प्रशासनिक नियमों और तकनीकी अड़चनों से सीधी मुक्ति मिल गई है.\n\n• राजस्थान में: राज्य के छोटे अश्वपालक बिना किसी पूर्व ऑनलाइन औपचारिकता के मेले में पहुंचकर तुरंत जमीन हासिल कर सकेंगे. इससे ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों का समय बचेगा और उन्हें बिचौलियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.\n• भारत में: देश भर से पांच या उससे अधिक घोड़े लाने वाले बड़े व्यापारियों को जियो टैगिंग की बाध्यता से छूट मिल गई है. उन्हें केवल स्थानीय सरकारी पशु अस्पताल से हेल्थ सर्टिफिकेट लेकर 1 एमबी साइज की फोटो के साथ पोर्टल पर अपलोड करना होगा.\n• भैंस व अन्य पशु पालकों के लिए: अन्य मवेशी लाने वाले किसानों को बिना किसी रजिस्ट्रेशन के आरक्षित क्षेत्र में सीधा प्रवेश और ठहराव मिलेगा. इसके लिए उन्हें किसी भी फॉर्म या अग्रिम स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी.\n• तकनीकी सहायता: ऑनलाइन फॉर्म में कोई भी गलती होने पर विभागीय तकनीकी टीम फोन कॉल पर सुधार करवाएगी. इस सुविधा से तकनीकी रूप से कम जानकार पशुपालक भी आसानी से अपनी स्वीकृति हासिल कर सकेंगे.\n\nऐसा क्यों हुआ\nप्रशासन ने मेले में आने वाले ग्रामीण व सीमांत पशुपालकों की व्यवहारिक परेशानियों को दूर करने और मेला संचालन को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया है. पूर्व में अनिवार्य प्रक्रियाओं के चलते मेला स्थल पर प्रवेश के समय भारी भीड़ और कागजी देरी देखने को मिलती थी.\n\n• छोटे पशुपालकों की तकनीकी परेशानी: दूरदराज के छोटे पशुपालक अक्सर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और डिजिटल फॉर्म भरने की जटिलताओं से जूझते थे. प्रशासन ने उनकी सुविधा को प्राथमिकता देते हुए 5 से कम घोड़े वालों को सीधे ऑफलाइन प्लॉट देने का रास्ता चुना.\n• जियो टैगिंग की जटिलता हटाना: पूर्व व्यवस्था में जियो टैगिंग की अनिवार्यता के कारण प्रशासनिक टीमों और पशुपालकों दोनों का काफी वक्त बर्बाद होता था. सत्यापन प्रक्रिया को आसान और तेज करने के लिए इस व्यवस्था को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया.\n• संक्रमण की रोकथाम और निगरानी: पांच या उससे ज्यादा घोड़े लाने वालों के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य रखा गया है ताकि किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को रोका जा सके. यह सुनिश्चित करता है कि बड़े झुंडों की जांच अधिकृत सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा की गई हो.\n• भीड़ प्रबंधन और सुगम ठहराव: भैंस वंश और अन्य मवेशियों के लिए बिना रजिस्ट्रेशन के अलग भूखंड आरक्षित करने से मेले में प्रवेश द्वारों पर जाम की स्थिति नहीं बनेगी और अलग-अलग प्रजातियों के पशु सुव्यवस्थित तरीके से रुक सकेंगे.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पुष्कर मेले में 5 से कम घोड़े लाने वाले पशुपालकों को प्लॉट कैसे मिलेगा?\nउन्हें किसी जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा, मेला क्षेत्र में पहुंचते ही ऑफलाइन माध्यम से सीधे प्लॉट आवंटित कर दिया जाएगा.\n\n2. किन पशुपालकों के लिए पशु स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है?\nजिन अश्वपालकों के पास 5 या उससे अधिक घोड़े हैं, उन्हें सरकारी पशु चिकित्सालय से बना हेल्थ सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा.\n\n3. क्या इस बार मेले में जियो टैगिंग करवाना जरूरी है?\nनहीं, प्रशासन ने कागजी औपचारिकताओं को घटाने के लिए जियो टैगिंग की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है.\n\n4. ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली पशु की फोटो का अधिकतम साइज कितना होना चाहिए?\nपोर्टल पर पशु की स्पष्ट फोटो अपलोड करते समय फाइल का अधिकतम साइज 1 एमबी तक स्वीकार किया जाता है.\n\n5. ऑनलाइन फॉर्म में कोई गलती होने पर पशुपालक की मदद कैसे होगी?\nविभाग की विशेष तकनीकी टीम फोन कॉल के माध्यम से डेटा सत्यापन करेगी और किसी भी कमी की स्थिति में सीधे फोन पर मार्गदर्शन देगी.\n\n6. भैंस वंश और अन्य मवेशियों के ठहराव के लिए क्या नियम तय किए गए हैं?\nउनके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की कोई बाध्यता नहीं है, मेला परिसर में उनके लिए एक विस्तृत क्षेत्र पहले से आरक्षित किया गया है.",
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