# पुष्कर पशु मेले से पहले सजे बाजार, ऊंट और घोड़ियों के पारंपरिक श्रृंगार पर 40 हजार रुपये तक का खर्च

> राजस्थान के पुष्कर पशु मेले की तैयारी के बीच पशुओं के पारंपरिक आभूषणों और सजावटी सामानों से बाजार गुलजार हैं, जहां एक ऊंट के पूरे श्रृंगार पर 40 हजार रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/pushkar-pashu-mele-se-pahale-saje-bajara-unta-aura-ghoriyon-ke-parnparika-shrringara-para-40-hajara-rupaye-taka-ka-kharcha-54896 · **Language:** Hindi
**Tags:** पुष्कर मेला, अजमेर, पशु मेला, ऊंट श्रृंगार, राजस्थान पर्यटन, गोरबंद

राजस्थान के अजमेर जिले में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले की औपचारिक शुरुआत से पहले ही समूचे इलाके में रौनक छाने लगी है। पुष्कर के स्थानीय बाजारों में पशुओं को सजाने वाले आभूषणों और पारंपरिक वस्त्रों की दुकानें पूरी तरह सज चुकी हैं। इस सालाना आयोजन का मुख्य आकर्षण ऊंटों की अनूठी साज-सज्जा रहती है, जहां पशुपालक अपने मवेशियों को सिर से लेकर पैर तक रंगीन सामानों, पारंपरिक जेवरों और फूलों से तैयार करते हैं।

## आभूषणों और सजावट पर आने वाला खर्च
पुष्कर मेले के दौरान पशुओं को सजाने की मांग तेजी से बढ़ती है। स्थानीय स्तर पर पशुओं के श्रृंगार का कारोबार करने वाले राजेंद्र प्रताप के अनुसार, एक ऊंट की सामान्य सजावट तैयार कराने में लगभग 20 से 22 हजार रुपये की लागत आती है। यदि कोई पशुपालक विशेष गुणवत्ता वाले और फूलों से लदे भारी श्रृंगार का विकल्प चुनता है, तो इसका बजट 25 से 30 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। यह पूरा खर्च सामग्री की बनावट, कारीगरी और खरीदार की पसंद पर तय होता है।

## पारंपरिक जेवरों से तैयार होता है ऊंट का शाही रूप
ऊंट की सजावट में कई प्रकार की पारंपरिक राजस्थानी वस्तुएं उपयोग में लाई जाती हैं। पशुपालक अपने ऊंट के अलग-अलग हिस्सों को सजाने के लिए प्लान, परची, गोरबंद, जाली, ताल पेटी, नेवरी, गलामी, घुंघरू और ताजे फूलों के गजरों का इस्तेमाल करते हैं। जब यह पूरा पारंपरिक साजो-सामान ऊंट पर चढ़ाया जाता है, तो वह मेले के विशाल मैदान में आने वाले पर्यटकों और खरीदारों के बीच आकर्षण का बड़ा केंद्र बन जाता है। इन आभूषणों की चमक और भव्यता के आगे आम पारंपरिक सजावट भी फीकी लगने लगती है।

## घोड़ों और घोड़ियों की साज-सज्जा के विकल्प और बजट
बाजारों में केवल ऊंट ही नहीं, बल्कि घोड़ों और घोड़ियों की सजावट के लिए भी विस्तृत वैरायटी मौजूद है। राजेंद्र प्रताप बताते हैं कि घोड़ी के लिए साधारण स्तर का सजावटी सामान 8 से 10 हजार रुपये के बीच मिल जाता है। दूसरी तरफ, उत्कृष्ट गुणवत्ता, बारीक कढ़ाई और आकर्षक डिजाइन वाले श्रृंगार सेट की कीमत 20 से 25 हजार रुपये तक जाती है।

## देशभर से खरीदारी करने पहुंच रहे व्यापारी और पशुपालक
पुष्कर में उपलब्ध इस विशेष पारंपरिक शिल्प की मांग सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है। मेले में गुजरात, महाराष्ट्र और बिहार समेत देश के तमाम हिस्सों से पशु व्यापारी और चरवाहे डेरा डालते हैं। यहां आने वाले खरीदार न केवल मवेशियों के सौदे करते हैं, बल्कि अपनी पसंद के अनुसार ऊंटों और घोड़ियों के पारंपरिक आभूषण खरीदकर अपने गृह राज्यों में भी ले जाते हैं।

## इसका आप पर असर
पुष्कर मेले के चलते स्थानीय अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प बाजार और पशु व्यापार से जुड़े लोगों को सीधा वित्तीय अवसर मिल रहा है।

- **भारत में:** देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले पशुपालकों और व्यापारियों को पारंपरिक आभूषणों और साज-सज्जा के सामान की सीधी उपलब्धता मिलती है। इससे अंतरराज्यीय पशु व्यापार और ग्रामीण हस्तशिल्प के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।
- **अजमेर में:** स्थानीय कारीगरों और दुकानदारों की आमदनी में मेले के दौरान बड़ा उछाल आता है। पशुओं के श्रृंगार से जुड़े सामान की बिक्री 8 हजार से लेकर 40 हजार रुपये प्रति पशु तक होने से पुष्कर के खुदरा व्यापार को भारी समर्थन मिलता है।
- **पशुपालकों के लिए:** मवेशियों को आकर्षक ढंग से सजाने से मेले में उनकी दृश्यता और व्यापारिक साख बेहतर होती है। बेहतर श्रृंगार वाले पशु खरीदारों और पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं, जिससे सौदों की संभावना बढ़ती है।
- **पर्यटकों के लिए:** मेले में आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक लोककला और पारंपरिक पशु श्रृंगार को करीब से देखने का अवसर मिलता है। वे स्थानीय बाजारों में इन पारंपरिक कलाकृतियों की खरीदारी भी कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पुष्कर मेले में पशुओं के विशेष श्रृंगार की परंपरा सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान और व्यापारिक रणनीति दोनों से जुड़ी हुई है।

- **मेले की नजदीकी:** पुष्कर पशु मेले की औपचारिक तिथियां निकट आने के कारण पशुपालक अपने मवेशियों की तैयारी समय से पूरी कर रहे हैं। इसी वजह से बाजारों में सजावटी सामान की आपूर्ति और मांग में अचानक तेजी आई है।
- **व्यापारिक आकर्षण:** बड़े पशु मेलों में मवेशी की शारीरिक बनावट के साथ-साथ उसकी साज-सज्जा खरीदारों को आकर्षित करने का अहम जरिया होती है। सिर से पैर तक सजा हुआ ऊंट भीड़ में अलग नजर आता है, जिससे पशु की कीमत और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ती हैं।
- **विभिन्न राज्यों से आवाजाही:** महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार जैसे राज्यों से आने वाले खरीदार स्थानीय कारीगरी का बना सामान पसंद करते हैं। इस बाहरी मांग के चलते पुष्कर के व्यापारी बड़े पैमाने पर विविध आभूषणों का स्टॉक तैयार रखते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. पुष्कर मेले में एक ऊंट को सजाने में कितना खर्च आता है?
एक ऊंट के सामान्य श्रृंगार पर करीब 20 से 22 हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि विशेष और उच्च गुणवत्ता वाले पूरे श्रृंगार का खर्च 25 से 30 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक पहुंच सकता है।

### 2. घोड़ी के श्रृंगार के सामान की कीमत क्या है?
घोड़ी का सामान्य सजावटी सामान 8 से 10 हजार रुपये में मिल जाता है, जबकि बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइन वाले सामान पर 20 से 25 हजार रुपये खर्च होते हैं।

### 3. ऊंट के श्रृंगार में कौन-कौन से मुख्य आभूषण इस्तेमाल किए जाते हैं?
ऊंट की सजावट में प्लान, परची, गोरबंद, जाली, ताल पेटी, नेवरी, गलामी, घुंघरू और ताजे फूलों के गजरे मुख्य रूप से उपयोग किए जाते हैं।

### 4. पुष्कर मेले में किन-किन राज्यों से व्यापारी और पशुपालक आते हैं?
मेले में राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार समेत देश के विभिन्न राज्यों से पशुपालक और व्यापारी पहुंचते हैं।

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