# रद्दी समझकर न फेंकें पुराना अखबार, किचन गार्डन में इन 3 तरीकों से लाएं बेहद काम

> घर में पड़े पुराने अखबारों को रद्दी में फेंकने के बजाय आप उनका इस्तेमाल किचन गार्डन में मल्चिंग, बायोडिग्रेडेबल सीडिंग पॉट और सफाई बनाए रखने के लिए कर सकते हैं। यह आसान और पर्यावरण के अनुकूल तरीका पौधों की बेहतर ग्रोथ में मदद करता है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/raddi-samajhakara-na-phenken-purana-akhabara-kitchen-garden-men-ina-3-tarikon-se-laen-behada-kama-32246 · **Language:** Hindi
**Tags:** किचन गार्डन, बागवानी टिप्स, पुराना अखबार, मल्चिंग, बायोडिग्रेडेबल पॉट, होम गार्डनिंग

घर में रोजाना आने वाले अखबार को अक्सर लोग पढ़ने के बाद रद्दी समझकर फेंक देते हैं। लेकिन अगर आपको बागवानी का शौक है, तो यह पुराना अखबार आपके किचन गार्डन के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है। पौधों की सिंचाई से लेकर उनकी सुरक्षा तक, अखबार का इस्तेमाल कई तरह के छोटे-बड़े कामों में बेहद आसानी से किया जा सकता है।

## नमी बनाए रखने के लिए प्राकृतिक मल्चिंग
पुराने समाचार पत्रों का सबसे बेहतरीन और आसान उपयोग मिट्टी की मल्चिंग करने में किया जा सकता है। इसके लिए आपको पौधे के चारों तरफ की मिट्टी पर अखबार की चार से पांच परतें बिछानी होंगी। ध्यान रखें कि अखबार बिछाते समय पौधे के मुख्य तने को पूरी तरह से न ढकें, क्योंकि इससे तने में सड़न पैदा हो सकती है। अखबार की परतों को अपनी जगह पर स्थिर रखने के लिए आप उसके ऊपर थोड़ी सूखी पत्तियां या बगीचे की मिट्टी डाल सकते हैं। यह प्राकृतिक परत मिट्टी से पानी के वाष्पीकरण को रोकती है, जिससे बार-बार पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती और साथ ही यह अनचाही घास या खरपतवार को उगने से भी रोकती है।

## घर पर बनाएं बायोडिग्रेडेबल सीडिंग पॉट
यदि आप अपने किचन गार्डन के लिए बीजों से नए पौधे तैयार करते हैं, तो पुराने अखबार की मदद से छोटे सीडिंग पॉट तैयार किए जा सकते हैं। अखबार को मोड़कर छोटे कप या ग्लास का आकार दें, उसमें मिट्टी भरें और बीज बो दें। इस तरीके का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब पौधा थोड़ा बड़ा और मजबूत हो जाए, तो आप उसे अखबार के इस कप सहित सीधे बड़ी मिट्टी या गमले में रोप सकते हैं। समय के साथ अखबार मिट्टी में खुद ही गल जाता है, जिससे पौधे की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता। इससे नर्सरी में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की थैलियों या प्लास्टिक कप का इस्तेमाल भी काफी कम हो जाता है।

## गमलों के नीचे रखें और सफाई बनाए रखें
अखबारों का उपयोग गमलों के नीचे की जगह को साफ-सुथरा रखने के लिए भी किया जा सकता है। जब हम पौधों में पानी डालते हैं, तो गमले के नीचे के छिद्र से निकलने वाला गंदा पानी फर्श को खराब कर देता है। इस गंदगी से बचने के लिए गमलों के नीचे अखबार की कुछ परतें बिछाई जा सकती हैं। हालांकि, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गीले अखबार को लंबे समय तक वैसे ही न छोड़ें, बल्कि समय-समय पर उसे बदलते रहें ताकि वहां फंगस न पनपे। इसके साथ ही, चमकीले, प्लास्टिक कोटेड या बहुत ज्यादा रंगीन प्रिंट वाले विज्ञापनों के बजाय केवल साधारण न्यूज़प्रिंट वाले अखबार का ही इस्तेमाल करना पौधों के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होता है।

## पर्यावरण के अनुकूल बागवानी की ओर एक कदम
रोज के कचरे को फेंकने के बजाय उसे इस तरह से दोबारा उपयोग में लाना एक बेहद समझदारी भरा कदम है। इससे न केवल घर से निकलने वाले सूखे कचरे की मात्रा कम होती है, बल्कि पौधों की देखभाल भी काफी व्यवस्थित हो जाती है। थोड़ी सी समझदारी और रचनात्मकता के साथ, आप अपने घर के छोटे से किचन गार्डन को पर्यावरण के अनुकूल और अधिक सुंदर बना सकते हैं।

## इसका आप पर असर
घर में पड़े पुराने अखबारों का बागवानी में उपयोग करने से बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पौधों का स्वास्थ्य सुधरता है और घर का प्लास्टिक कचरा कम होता है।

- **पानी और पैसे की बचत:** अखबार की मल्चिंग परत मिट्टी से पानी के वाष्पीकरण को काफी कम कर देती है। इसका मतलब है कि आपको पौधों में बार-बार पानी नहीं देना पड़ेगा, जिससे पानी और समय दोनों की बचत होगी।
- **प्लास्टिक कप से छुटकारा:** अखबार से सीडिंग कप बनाने से नर्सरी वाले सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के थैलों की जरूरत खत्म हो जाती है। यह आपके किचन गार्डन को पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद करता है।
- **देखभाल का झंझट खत्म:** मिट्टी पर बिछी अखबार की परत धूप को रोककर खरपतवार को उगने नहीं देती। इससे आपको अपने बगीचे से बार-बार जंगली घास साफ करने की थकाऊ मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।
- **फर्श पर नहीं लगेंगे दाग:** गमलों के नीचे अखबार रखने से सिंचाई के बाद बहने वाला गंदा पानी उसमें सोख जाता है। इससे आपकी बालकनी या छत के फर्श पर मिट्टी के जिद्दी दाग नहीं लगते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
घरेलू कचरे को बागवानी में दोबारा इस्तेमाल करने का चलन वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे पर्यावरण संरक्षण और शहरी खेती के आंदोलन का हिस्सा है।

- **सेल्युलोज का प्राकृतिक अपघटन:** समाचार पत्र मुख्य रूप से लकड़ी की लुगदी और सेल्युलोज से बने होते हैं, जो मिट्टी में आसानी से मिल जाते हैं। सही तरीके से उपयोग किए जाने पर यह एक बेहतरीन जैविक पदार्थ बन जाता है जो केंचुओं या मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाता।
- **शहरी बागवानी का बढ़ता क्रेज:** सब्जियों की बढ़ती कीमतों और कीटनाशकों के प्रति जागरूकता के कारण लोग घरों में सब्जियां उगाने लगे हैं। इसने छोटे बालकनी गार्डन को बनाए रखने के लिए किफायती और प्राकृतिक तरीकों की मांग बढ़ा दी है।
- **माइक्रोप्लास्टिक पर लगाम:** पारंपरिक बागवानी में प्लास्टिक की थैलियों और ट्रे का बहुत अधिक उपयोग होता है। अखबार का उपयोग इस समस्या का समाधान करता है क्योंकि यह एक मुफ्त और पूरी तरह से मिट्टी में घुल जाने वाला विकल्प देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या पुराने अखबारों की स्याही मिट्टी और पौधों के लिए सुरक्षित है?
हां, अधिकांश आधुनिक अखबारों में सोया-आधारित जैविक स्याही का उपयोग होता है, जो पूरी तरह से सुरक्षित है और मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाती।

### 2. गमलों के नीचे बिछाई गई अखबार की परतों को कितने दिनों में बदलना चाहिए?
जैसे ही अखबार की परतें पूरी तरह से गीली हो जाएं या गलने लगें, उन्हें तुरंत बदल देना चाहिए ताकि वहां फंगस न पनपे।

### 3. क्या बागवानी में रंगीन मैगजीन या चमकीले कागजों का इस्तेमाल किया जा सकता है?
नहीं, चमकीले और बहुत रंगीन विज्ञापनों वाले कागजों से बचना चाहिए क्योंकि उनमें भारी धातु वाली स्याही और प्लास्टिक कोटिंग होती है जो मिट्टी को नुकसान पहुंचा सकती है।

### 4. मिट्टी पर अखबार बिछाने से खरपतवार का विकास कैसे रुकता है?
अखबार की परतें मिट्टी तक सूरज की रोशनी को पहुंचने से रोकती हैं, जिससे खरपतवार के बीज अंकुरित नहीं हो पाते और उनका विकास रुक जाता है।

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