# राधिकराजे गायकवाड़ और कंगना रनौत को भाया कोटा का सोनचिरैया जरी वर्क, सोने-चांदी की साड़ियों को मिली नई पहचान

> कोटा की सदियों पुरानी पारंपरिक हस्तकरघा कला को नई पहचान मिल रही है, क्योंकि शाही घरानों से लेकर बॉलीवुड अभिनेत्रियां असली सोने और चांदी की जरी से तैयार साड़ियों को पसंद कर रही हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/radhikaraje-gaekwad-aura-kangana-ranaut-ko-bhaya-kota-ka-sonchiriya-jari-varka-sone-chandi-ki-sariyon-ko-mili-nai-pahachana-32480 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोटा डोरिया, सोनचिरैया साड़ी, हस्तकरघा कला, जरी बुनाई, प्रीति सिंह पारीक, पारंपरिक फैशन

कोटा की पारंपरिक हस्तकरघा कला आज देश के कला प्रेमियों के बीच एक बड़ा आकर्षण बनकर उभर रही है। देश के सबसे प्रतिष्ठित शाही घरानों, राजनीतिक हस्तियों और फिल्म जगत की मशहूर अभिनेत्रियों ने असली सोने और चांदी की जरी से तैयार कोटा की विशेष साड़ियों को अपनी पसंद बनाया है। बारीक हाथ की बुनाई और अमूल्य धातु के तारों से सजी ये साड़ियां न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए हुए हैं, बल्कि स्थानीय बुनकरों को भी एक बड़ा राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रही हैं।

## शाही परिवारों ने बढ़ाया कोटा की हस्तकरघा विरासत का मान
भारत के सम्मानित राजघरानों के सदस्य इस प्राचीन कला को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका भूमिका निभा रहे हैं। गुजरात के बड़ौदा की महारानी राधिकराजे गायकवाड़ कोटा की इस पारंपरिक असली सोने और चांदी की जरी वाली साड़ी की बड़ी प्रशंसक हैं। उन्होंने हाल ही में 'सोनचिरैया' संस्थान की एक खास जरी वाली साड़ी पहनी। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इन साड़ियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें असली सोने और चांदी की जरी का इस्तेमाल करके बेहद महीन हाथ की बुनाई की जाती है। महारानी राधिकराजे गायकवाड़ जैसी प्रतिष्ठित हस्ती के माध्यम से कोटा की इस सदियों पुरानी हस्तकरघा कला को पूरे देश में एक नई और गौरवशाली पहचान मिल रही है।

इसके साथ ही, उदयपुर की महारानी साहिबा निवृत्ति कुमारी मेवाड़ भी कोटा की इस अनुपम पारंपरिक कला की मुरीद हो चुकी हैं। उन्होंने भी कोटा की प्रसिद्ध 'सोनचिरैया' की खास जरी वाली साड़ी को अपने परिधान के रूप में चुना। संस्थापक प्रीति सिंह पारीक बताती हैं कि इस साड़ी की महीन हाथ की बुनाई में शुद्ध सोने और चांदी के तारों का उपयोग किया जाता है। उदयपुर के शाही परिवार के इस सराहनीय सहयोग से कोटा की इस विरासती बुनाई को एक नया मुकाम और सम्मानजनक स्थान मिल रहा है।

## राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में मिली नई पहचान
कोटा डोरिया और इसके पारंपरिक बुनाई पैटर्न की लोकप्रियता केवल राजघरानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इसे काफी पसंद किया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पोती-बहू चारु सिंह चौधरी भी इस कलात्मक बुनाई की बड़ी प्रशंसक हैं। उन्होंने भी 'सोनचिरैया' ब्रांड की असली सोने और चांदी की जरी से सजी एक खास साड़ी को अपनी पसंद बनाया। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक का कहना है कि साड़ी में असली सोने-चांदी के धागों से की गई बेहद बारीक हाथ की बुनाई ही इसे असाधारण बनाती है। चारु सिंह चौधरी के इस जुड़ाव से कोटा की इस ऐतिहासिक विरासत को समाज में एक नया दृष्टिकोण मिल रहा है।

वहीं दूसरी तरफ, कला जगत और राजनीति दोनों में सक्रिय रहने वाली प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री और लोकसभा सांसद कंगना रनौत भी कोटा की इस पारंपरिक बुनाई की बड़ी प्रशंसक हैं। कंगना रनौत ने 'सोनचिरैया' की खास जरी वाली साड़ी को पहनकर इस हस्तशिल्प के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित किया है। संस्थापक प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इस पारंपरिक डिजाइन वाली साड़ी में असली सोने और चांदी की जरी की महीन हाथ की बुनाई की गई है। कंगना रनौत के इस चयन से कोटा की इस पारंपरिक कलात्मक बुनाई को देश के कोने-कोने में रहने वाले लोगों के बीच एक नया और व्यापक मंच मिला है।

## हिंदी सिनेमा के जरिए स्थानीय बुनकरों को मिला नया प्रोत्साहन
देश के आधुनिक सिनेमा उद्योग की हस्तियां भी इस पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करने में अपना सहयोग दे रही हैं। बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री जाह्नवी कपूर भी कोटा की इस शानदार पारंपरिक कला की प्रशंसक बन गई हैं। उन्होंने विशेष रूप से कोटा की प्रसिद्ध असली सोने और चांदी की जरी से तैयार की गई एक खास साड़ी खरीदी है। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने जानकारी दी कि जाह्नवी कपूर की इस चुनी हुई साड़ी में महीन जरी की सुंदर बुनाई और पारंपरिक कलात्मक डिजाइनों का मेल है। जाह्नवी कपूर के इस निर्णय से कोटा के बुनकर समुदाय की सदियों पुरानी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके काम को नई दिशा मिलेगी।

## इसका आप पर असर
राष्ट्रीय हस्तियों के बीच पारंपरिक हस्तकरघा साड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता से देश भर के कारीगरों को बड़ा आर्थिक बढ़ावा मिल रहा है और टिकाऊ फैशन को बढ़ावा मिल रहा है।

- **भारत में:** उपभोक्ता अब मशीनों से बने सस्ते कपड़ों के मुकाबले असली हस्तकरघा उत्पादों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। यह बदलाव लोगों को ऐसी विरासत से जुड़े वस्त्रों में निवेश करने के लिए प्रेरित करता है जिनका सांस्कृतिक मूल्य अधिक होता है।
- **कोटा में:** कोटा क्षेत्र के स्थानीय बुनकरों को अपनी अनूठी कला के लिए सीधे तौर पर मांग और सम्मान में वृद्धि का लाभ मिल रहा है। इसका मतलब है कि उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर मिलेंगे और उनकी पीढ़ियों पुरानी बुनाई कला सुरक्षित रहेगी।
- **फैशन प्रेमियों के लिए:** बड़ी हस्तियों के समर्थन से पारंपरिक पहनावा आधुनिक त्योहारों और कार्यक्रमों के लिए एक बेहद स्टाइलिश विकल्प बन गया है। इससे खरीदार पूरे आत्मविश्वास के साथ इन विरासती डिज़ाइनों को अपने वॉर्डरोब का हिस्सा बना सकते हैं।
- **छोटे कारीगरों के लिए:** 'सोनचिरैया' जैसे ब्रांडों के सीधे जुड़ाव से स्थानीय बुनकरों को प्रीमियम राष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच मिल रही है। यह बिचौलियों पर उनकी निर्भरता को कम करता है और उनकी महीन बुनाई के काम का उचित मूल्य सुनिश्चित करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पुनरुद्धार इसलिए हुआ है क्योंकि कुछ खास विरासत ब्रांडों ने असली सोने और चांदी के तारों का उपयोग करके प्राचीन हस्तकरघा तकनीकों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है। सांस्कृतिक गौरव और टिकाऊ विलासिता के बढ़ते चलन ने इन विरासती शिल्पों के आगे बढ़ने के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार किया है।

- **असली सामग्रियों का उपयोग:** साड़ियों में असली सोने और चांदी की जरी का उपयोग करने के निर्णय ने इन्हें सामान्य हस्तकरघा से ऊपर उठाकर प्रीमियम लक्ज़री उत्पाद बना दिया है। यह अनूठा प्रयास उन शाही परिवारों और संपन्न लोगों को आकर्षित करता है जो शुद्ध शिल्प कौशल को महत्व देते हैं।
- **सेलिब्रिटी और शाही परिवारों का समर्थन:** 'सोनचिरैया' जैसे विरासती ब्रांडों का महारानी राधिकराजे गायकवाड़ और बॉलीवुड सितारों जैसी हस्तियों से जुड़ाव होने से इस कला को बड़ी जन-जागरूकता मिली है। उनके इस चयन से मुख्यधारा के फैशन ट्रेंड्स प्रभावित होते हैं और इस कला का मूल्य बढ़ता है।
- **विरासत का संरक्षण:** आज वैश्विक स्तर पर उन स्वदेशी शिल्पों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है जो मशीनी उत्पादों के कारण लुप्त हो रहे थे। स्थानीय बुनकरों को सहायता मिलने से उन्हें अपनी पारंपरिक हस्तकरघा तकनीकों को जारी रखने के लिए संसाधन और हौसला मिला है।

## सवाल-जवाब

### 1. 'सोनचिरैया' की कोटा साड़ियों की क्या विशेषता है?
'सोनचिरैया' की कोटा साड़ियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें असली सोने और चांदी की जरी का इस्तेमाल करके बेहद महीन हाथ की बुनाई की जाती है।

### 2. 'सोनचिरैया' ब्रांड की संस्थापक कौन हैं?
'सोनचिरैया' ब्रांड की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक हैं, जिन्होंने कोटा की इस पारंपरिक हस्तकरघा कला को राष्ट्रीय मंच पर लाने का प्रयास किया है।

### 3. किन शाही हस्तियों ने इस पारंपरिक साड़ी को पहना है?
बड़ौदा की महारानी राधिकराजे गायकवाड़ और उदयपुर की महारानी साहिबा निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने इन असली सोने-चांदी की जरी वाली साड़ियों को पहना है।

### 4. किन बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने कोटा की इस पारंपरिक जरी साड़ी को पसंद किया है?
बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर और अभिनेत्री व लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने इस शानदार हस्तकरघा साड़ी के प्रति अपना लगाव दिखाया है।

## प्रेरणा और सबक
कोटा के पारंपरिक बुनकरों और 'सोनचिरैया' जैसे ब्रांडों की यह यात्रा दर्शाती है कि कैसे प्राचीन शिल्प कौशल आधुनिक लक्ज़री बाजार में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है।

- **प्रामाणिकता पर ध्यान देना:** असली सोने और चांदी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली सामग्रियों के प्रति ईमानदार रहना एक अनूठा मूल्य बनाता है। गुणवत्ता से समझौता करने से भले ही कुछ समय के लिए बचत हो, लेकिन पूर्ण शुद्धता लंबे समय तक सम्मान दिलाती है।
- **प्रभावशाली लोगों से विरासत को जोड़ना:** सांस्कृतिक संरक्षकों, शाही परिवारों और आधुनिक सेलिब्रिटीज के साथ साझेदारी से कहानी को मजबूती मिलती है। जब प्रभावशाली लोग कला से जुड़ते हैं, तो वे एक स्थानीय शिल्प को देशव्यापी ट्रेंड में बदल सकते हैं।
- **जमीनी स्तर को सशक्त बनाना:** सफलता तभी स्थायी होती है जब इसका सीधा लाभ नींव में काम करने वाले बुनकरों को मिले। यह सुनिश्चित करना कि कलाकारों को उनका उचित श्रेय और पारिश्रमिक मिले, इस ऐतिहासिक शिल्प को आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवित रखता है।

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