राजसमंद में कुमावत समाज का फूटा गुस्सा, मुकदमे वापस न हुए तो 30 सितंबर से जेल भरो आंदोलन की चेतावनी राजसमंद में निकाय चुनाव के दौरान हुए प्रदर्शनों के बाद 19 लोगों पर केस दर्ज होने से कुमावत समाज में भारी नाराजगी है। समाज ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि 30 सितंबर तक मुकदमे वापस न लिए जाने पर बच्चों और पशुधन के साथ कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान किए गए प्रदर्शनों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया के सिलसिले में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में कुमावत समाज के 19 व्यक्तियों के खिलाफ राजनगर थाने में मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के सामने आने के बाद से ही समाज के भीतर तीव्र असंतोष और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। नाराज लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा यानी 30 सितंबर तक ये मुकदमे पूरी तरह से वापस नहीं लिए जाते हैं, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। इसके बाद वे अपने परिवारों के बच्चों और मवेशियों को साथ लेकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे और वहां अनिश्चितकाल के लिए जेल भरो आंदोलन का आगाज करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं, क्योंकि समुदाय का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि अन्य मामलों में पुलिस ने नरमी बरती है। पार्षदों की बाड़ेबंदी और एसपी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन की पूरी कहानी सामने आई जानकारियों के अनुसार, जब निकाय चुनावों के परिणाम आए तो कुमावत समाज से कई पार्षद विजयी हुए। लेकिन जीत के तुरंत बाद उन पार्षदों का अपने परिवारों से दो से तीन दिनों तक कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। उस दौरान समाज ने भारतीय जनता पार्टी पर यह गंभीर आरोप लगाया था कि उनके पार्षदों की कथित तौर पर बाड़ेबंदी की जा रही है। इसी बात का विरोध जताने के लिए समाज के सैकड़ों लोग एकजुट होकर राजसमंद पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। समुदाय की एक बड़ी मांग यह भी थी कि पहली बार उनके समाज से इतनी भारी संख्या में पार्षद जीतकर आए हैं, इसलिए राजसमंद नगर परिषद के नए सभापति पद की कमान कुमावत समाज के ही किसी व्यक्ति को सौंपी जानी चाहिए। उस वक्त प्रदर्शनकारियों ने एसपी दफ्तर के बाहर लंबा धरना दिया, स्थानीय विधायक दीप्ति माहेश्वरी के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और रात का भोजन भी सड़क पर ही बैठकर किया। इस घटना के लगभग चार से पांच दिन बीत जाने के बाद राजनगर पुलिस ने 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। अब समुदाय का तर्क है कि यह कानूनी कार्रवाई केवल उन 19 व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज पर हमला है जिसे कतई सहन नहीं किया जाएगा। कांग्रेस के प्रदर्शन और पुलिस की दोहरी कार्यप्रणाली पर सवाल कुमावत समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का गंभीर आरोप लगाते हुए यह तीखा सवाल उठाया है कि क्या आचार संहिता के नियम केवल उनके ही समुदाय के लिए बनाए गए हैं। समाज का कहना है कि चुनाव के दौर में ही विपक्षी दल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी राजसमंद एसपी कार्यालय के बाहर रात के समय आक्रामक प्रदर्शन किया था। कांग्रेस का उस समय यह आरोप था कि उनके एक उम्मीदवार के साथ कथित रूप से भाजपा से जुड़े लोगों ने मारपीट की है और पुलिस मामले में एकतरफा रवैया अपना रही है। कुमावत समाज का सीधा और स्पष्ट सवाल यह है कि उस रात एसपी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने वाले लोगों पर आचार संहिता उल्लंघन के नियम क्यों नहीं लागू किए गए। इस प्रकरण पर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का यह पक्ष सामने आया है कि कांग्रेस से जुड़े मामले में दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और इस मामले की गहनता से जांच की जा रही है। अनंता हॉस्पिटल के हाईवे जाम मामले को लेकर जनता में चर्चा इन चुनावी विवादों के बीच जिले में एक अन्य घटना भी चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। कुछ दिन पहले देलवाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले निजी अनंता हॉस्पिटल में एक मरीज की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद मृतक के परिजन उचित मुआवजे की मांग को लेकर पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। लेकिन परिजनों पर दबाव बनाने और उन्हें भयभीत करने के उद्देश्य से अस्पताल प्रबंधन ने कथित तौर पर अपने स्टाफ के सदस्यों और मेडिकल छात्रों को सड़क पर उतार दिया। इसकी वजह से अत्यधिक व्यस्त रहने वाला उदयपुर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग कई घंटों तक पूरी तरह से अवरुद्ध रहा। बाद में मौके पर पहुंची पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद इस रास्ते को खुलवाया और यातायात सुचारू किया। इस अत्यंत गंभीर प्रकरण में पुलिस ने कथित तौर पर केवल अस्पताल प्रबंधन को एक अल्टीमेटम देकर ही छोड़ दिया। अब आम नागरिकों और कुमावत समाज के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या हाईवे को जाम करने जैसे गंभीर और संज्ञेय अपराध के मामले में केवल मौखिक समझाइश ही पर्याप्त है। फिलहाल इन सभी मामलों के चलते राजसमंद पुलिस की कार्यप्रणाली लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन चुकी है और आगामी 30 सितंबर को होने वाले संभावित जेल भरो आंदोलन को लेकर पूरा प्रशासन हाई अलर्ट पर आ गया है। इसका आप पर असर राजसमंद में कुमावत समाज के आंदोलन की चेतावनी और तीन अलग-अलग विवादों के चलते स्थानीय स्तर पर तनाव और प्रशासनिक सरगर्मी बढ़ गई है। • भारत में: देशभर में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान राजनीतिक प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के ऐसे विवाद अक्सर प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव का कारण बनते हैं। ऐसे मामलों से यह संदेश जाता है कि स्थानीय प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए सभी पक्षों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए ताकि जनता का भरोसा कायम रहे। • राजसमंद में: राजसमंद के स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और यात्रियों को 30 सितंबर को संभावित जेल भरो आंदोलन के दौरान कलेक्ट्रेट के आसपास यातायात और सुरक्षा प्रबंधों में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। हाईवे जाम और विरोध प्रदर्शनों से आम जनजीवन प्रभावित होने की पूरी आशंका है, जिससे जिला प्रशासन और पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। ऐसा क्यों हुआ राजसमंद में उपजे इस बड़े विवाद की जड़ें निकाय चुनावों के दौरान राजनीतिक तनाव और पुलिस की एकतरफा कार्रवाई के आरोपों में छिपी हैं। • चुनावी विवाद: स्थानीय निकाय चुनाव के परिणामों के बाद कुमावत समाज के विजयी पार्षदों के कथित तौर पर संपर्क से बाहर होने और बाड़ेबंदी की आशंका ने समाज को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया। • कार्रवाई में असमानता: समाज का आक्रोश इस बात से भड़का कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने 19 लोगों पर आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कर दिया, जबकि विपक्षी दलों के उग्र प्रदर्शनों पर वैसी कार्रवाई नहीं हुई। • प्रशासनिक सुस्ती: अनंता हॉस्पिटल के मामले में हाईवे जाम करने जैसे गंभीर अपराध पर पुलिस द्वारा केवल अल्टीमेटम देकर छोड़ने से जनता और समाज में पुलिस की कार्यप्रणाली के प्रति गहरा असंतोष फैल गया। सवाल-जवाब 1. राजसमंद में कुमावत समाज क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहा है? निकाय चुनाव के दौरान जीते हुए पार्षदों की कथित बाड़ेबंदी के विरोध में एसपी ऑफिस पर प्रदर्शन करने वाले 19 लोगों पर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के कारण समाज में आक्रोश है। 2. कुमावत समाज ने प्रशासन को क्या अल्टीमेटम दिया है? समाज ने चेतावनी दी है कि यदि 30 सितंबर तक उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो वे बच्चों और पशुधन के साथ कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन जेल भरो आंदोलन करेंगे। 3. पुलिस ने किन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है? राजनगर थाने में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में कुमावत समाज के 19 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 4. अनंता हॉस्पिटल से जुड़ा मामला क्या है? अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद परिजनों के मुआवजे के धरने के दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्टाफ को सड़क पर उतारने से उदयपुर-जयपुर हाईवे जाम हो गया था। 5. कांग्रेस के धरने पर समाज ने क्या सवाल उठाया है? समाज ने पूछा है कि चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा एसपी ऑफिस के बाहर किए गए उग्र प्रदर्शन पर आचार संहिता का नियम लागू क्यों नहीं किया गया। https://trendkia.com/rajasthan/rajasamnda-men-kumawat-samaja-ka-phuta-gussa-mukadame-vapasa-na-hue-to-30-sitnbara-se-jail-bharo-andolana-ki-chetavani-39913 TrendKia — Har trend, sabse pehle.