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  "title": "राजस्थान का यह अनोखा गांव है पर्यटकों की पसंद, मोबाइल नेटवर्क और सड़क न होने के बाद भी पहुंचते हैं लोग",
  "summary": "राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित उतरज गांव आधुनिक सुविधाओं से दूर होने के बावजूद अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ट्रैकिंग के रोमांच के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।",
  "content": "राजस्थान के सिरोही जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच एक ऐसा अनोखा और दुर्गम गांव बसा है, जहां आज के समय में भी मोबाइल नेटवर्क और पक्की सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है। इन तमाम कठिनाइयों के बावजूद इस स्थान की प्राकृतिक छटा पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है, जो पहाड़ों के बीच पैदल सफर तय करके यहां पहुंचते हैं। इस खूबसूरत जगह का नाम उतरज गांव है, जो समुद्र तल से लगभग 1400 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और किसी स्वर्ग से कम नजर नहीं आता है। इसके चारों तरफ फैली हरियाली और अरावली की पर्वत श्रृंखलाएं इस जगह को खास बनाती हैं, जहां शहर के प्रदूषण और शोर-शराबे का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं मिलता है। माउंट आबू के स्थानीय टूरिस्ट एंड ट्रेवल गाइड चिंटू यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि उतरज गांव माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य के बेहद करीब स्थित एक दुर्गम क्षेत्र है।\n\nदुर्गम रास्ते और पारंपरिक जीवनशैली\nइस गांव तक पहुंचने के लिए सैलानियों को राजस्थान और अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी गुरुशिखर से लगभग 5 किलोमीटर तक की पहाड़ी पगडंडी पर पैदल चलना पड़ता है और कठिन ट्रैकिंग करनी होती है। बारिश के मौसम में यहां का मौसम और भी ज्यादा सुहाना हो जाता है, जब चारों तरफ छाई धुंध और कलकल करते झरने पर्यटकों को कई स्थानों पर देखने को मिलते हैं। इस छोटे से गांव में लगभग 40 से 60 परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका का मुख्य साधन आज भी पारंपरिक पशुपालन और खेती-किसानी ही है। यहां के अधिकांश घर आज भी कच्चे और केलूपोशनुमा बने हुए हैं, जो ग्रामीण संस्कृति की याद दिलाते हैं।\n\nचुनौतियों से भरा हुआ है स्थानीय जीवन\nगुरुशिखर निवासी महेंद्र सिंह ने इस बारे में बताया कि प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर होने के बावजूद यहां के स्थानीय निवासियों का दैनिक जीवन भारी चुनौतियों के बीच गुजरता है। उतरज तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं बनाई जा सकी है, जिसके कारण कार या मोटरसाइकिल जैसे आधुनिक वाहन यहां तक नहीं लाए जा सकते हैं। इस गांव में आज से सिर्फ एक साल पहले पहला ट्रैक्टर पहुंचा था, जिसे लाने के लिए लोगों ने उसके अलग-अलग हिस्सों को अपने कंधों पर उठाकर यहां पहुंचाया था और फिर यहीं लाकर उसे असेंबल करवाया था। गांव के भीतर एक विद्यालय भी संचालित होता है, जहां स्थानीय बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक रोज गुरुशिखर से 5 किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करके आते हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई आपातकालीन स्थिति आने पर मरीजों को चारपाई पर लिटाकर 5 किलोमीटर दूर गुरुशिखर तक पैदल लाना पड़ता है।\n\nशाम ढलते ही बढ़ जाता है बड़ा खतरा\nइस गांव तक आने-जाने वाला मार्ग बेहद पथरीला, उबड़-खाबड़ और घने जंगलों के बीच से गुजरने वाली पगडंडियों पर आधारित है। ऐसे में सूरज ढलने के बाद इस रास्ते पर सफर करना अनजान लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि रास्ता भटकने की आशंका तो रहती ही है, साथ ही यह पूरा इलाका घना वन क्षेत्र होने के कारण भालू और लेपर्ड जैसे खतरनाक वन्यजीवों के हमले का डर भी बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पर्यटकों को हमेशा यह सलाह दी जाती है कि वे शाम के समय इस रास्ते पर आवाजाही करने से पूरी तरह बचें।\n\nऐतिहासिक महत्व से जुड़ा है शेरगांव\nइस गांव के पास दो बेहद प्रमुख मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ स्थित हैं, जिनके दर्शन करने के लिए पवित्र श्रावण मास के दौरान दूर-दराज के इलाकों से भक्त बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। उतरज गांव से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर एक और अत्यंत दुर्गम गांव शेरगांव बसा हुआ है। इतिहास के पन्नों में इस स्थान का विशेष महत्व है क्योंकि हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने अपना अज्ञातवास इसी दुर्गम क्षेत्र में बिताया था। यहां आज भी ईशान भेरू गुफा और प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं, जहां महान शासक महाराणा प्रताप ने अपने अज्ञातवास के समय में भक्ति और साधना की थी।\n\nइसका आप पर असर\nउतरज गांव की यह भौगोलिक स्थिति और चुनौतियां ग्रामीण इलाकों के बुनियादी ढांचे और पर्यटन के संतुलन पर सीधा प्रभाव डालती हैं।\n\n• भारत में: देश के कई दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में आज भी कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जो ग्रामीण विकास की जमीनी हकीकत को दर्शाता है।\n• सिरोही में: स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को 5 किलोमीटर की कठिन ट्रैकिंग, स्वास्थ्य आपातकाल में चारपाई का सहारा लेने और वन्यजीवों के जोखिम का सामना करना पड़ता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उतरज गांव कहां स्थित है?\nउतरज गांव राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य के पास अरावली की पहाड़ियों में बसा है।\n\n2. समुद्र तल से इस गांव की ऊंचाई कितनी है?\nयह गांव समुद्र तल से लगभग 1400 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।\n\n3. इस गांव तक पहुंचने के लिए कितना पैदल चलना पड़ता है?\nपर्यटकों और स्थानीय लोगों को गुरुशिखर से लगभग 5 किलोमीटर की पहाड़ी पगडंडी पर पैदल चलकर ट्रैकिंग करनी पड़ती है।\n\n4. उतरज गांव की आबादी और मुख्य आजीविका क्या है?\nइस गांव में लगभग 40 से 60 परिवार रहते हैं और उनकी आजीविका का मुख्य आधार पारंपरिक पशुपालन और खेती है।\n\n5. शेरगांव का ऐतिहासिक महत्व क्या है?\nहल्दीघाटी युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने उतरज के पास स्थित शेरगांव में अपना अज्ञातवास बिताया था।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-15",
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