राजस्थान के ऐतिहासिक कोटगेट को डाक विभाग ने दिया राष्ट्रीय सम्मान, 500 रुपये के विशेष डाक टिकट पर मिली जगह डाक विभाग ने देश के आठ प्रमुख ऐतिहासिक द्वारों की विशेष श्रृंखला में बीकानेर के प्रसिद्ध कोटगेट को 500 रुपये के डाक टिकट पर स्थान दिया है. राजस्थान के बीकानेर शहर का प्रतीक माने जाने वाले भव्य कोटगेट को अब राष्ट्रीय फलक पर एक विशिष्ट पहचान प्राप्त हुई है. भारतीय डाक विभाग ने देश के चुनिंदा ऐतिहासिक द्वारों पर आधारित एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया है, जिसका अंकित मूल्य 500 रुपये रखा गया है. इस संग्रहणीय श्रृंखला के तहत देश के कुल आठ विख्यात द्वारों के स्थापत्य को दर्शाया गया है, जिनमें बीकानेर के इस गौरवशाली प्रवेश द्वार को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है. धरोहरों से जुड़े संग्रहकर्ता भारत भूषण गुप्ता के अनुसार, यह सम्मान स्थानीय स्थापत्य कला और समृद्ध इतिहास को पूरे देश में नई पहचान दिलाने वाला गौरवशाली क्षण है. आठ ऐतिहासिक द्वारों की विशेष स्मारक श्रृंखला डाक विभाग द्वारा तैयार की गई इस विशेष श्रृंखला में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित बेहद चर्चित और स्थापत्य के दृष्टिकोण से अनूठे द्वारों को चुना गया है. इस सूची में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी स्थित विशाल बुलंद दरवाजा और लखनऊ का प्रसिद्ध रूमी दरवाजा शामिल हैं. इसके अलावा राजस्थान से तीन प्रमुख द्वारों को इसमें जगह मिली है, जिनमें बीकानेर का कोटगेट, जयपुर का जोरावर सिंह गेट और जोधपुर का सरदार मार्केट गेट सम्मिलित हैं. वहीं राजस्थान के अजमेर स्थित मैगजीन गेट को भी इसमें स्थान दिया गया है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से दिल्ली गेट तथा कश्मीरी गेट को इस विशेष संग्रह का हिस्सा बनाया गया है. यह सभी संरचनाएं अपने विशिष्ट इतिहास और तत्कालीन वास्तुकला की अनूठी दास्तान बयां करती हैं. सुरक्षा का अभेद्य पहरेदार और परकोटे की पुरानी व्यवस्था बीकानेर का यह विख्यात द्वार केवल एक स्थापत्य संरचना नहीं, बल्कि सदियों तक शहर की चाक-चौबंद सुरक्षा प्रणाली का मुख्य केंद्र रहा है. पुराने दौर में जब पूरा बीकानेर परकोटे की चारदीवारी के भीतर आबाद था, तब यह द्वार नगर का मुख्य प्रवेश बिंदु हुआ करता था. संग्रहकर्ता भारत भूषण गुप्ता ने पुराने दिनों को याद करते हुए साझा किया कि रात करीब 10 बजते ही कोटगेट के भारी कपाट पूरी तरह बंद कर दिए जाते थे. इसके बाद रात के समय परकोटे के अंदर जाने की अनुमति हर किसी को नहीं होती थी. यदि किसी व्यक्ति को आपात स्थिति में भीतर जाना पड़ता, तो उसे अपनी विशेष पहचान साबित करनी होती थी अथवा नगर प्रशासन से औपचारिक अनुमति लेनी पड़ती थी. उस समय शहर की सीमाएं परकोटे तक सीमित थीं और आने-जाने के लिए अन्य दरवाजों की तुलना में कोटगेट का महत्व सबसे अधिक था. परकोटे से बाहर विस्तार और शहर का धड़कता केंद्र दशकों के दौरान आबादी बढ़ने के साथ ही शहर का विस्तार चारदीवारी से बाहर दूर-दराज के इलाकों तक होता चला गया. आधुनिक बदलावों के साथ पुरानी सुरक्षा चौकियां और रात में कपाट बंद करने की व्यवस्था समाप्त हो गई, किंतु कोटगेट की ऐतिहासिक अहमियत और आकर्षण में कोई कमी नहीं आई. आज यह स्थल बीकानेर का सबसे प्रमुख, व्यस्त और जीवंत व्यावसायिक केंद्र बन चुका है, जिसे स्थानीय लोग शहर का हृदय स्थल मानते हैं. वास्तुकला की दृष्टि से यह द्वार लाल बलुआ पत्थर की भव्य नक्काशी से सजा हुआ है, जो बीकानेर की पारम्परिक स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है. पत्थरों की तराशी और इसका विशाल ढांचा आज भी यहां आने वाले पर्यटकों तथा राहगीरों को सम्मोहित करता है. धरोहर संरक्षण और नई पीढ़ी के लिए संदेश पांच सौ रुपये मूल्य वर्ग के इस डाक टिकट पर कोटगेट का अंकन केवल एक चित्र का प्रकाशन नहीं है, बल्कि देश की साझा ऐतिहासिक धरोहरों की सूची में बीकानेर के गौरव को विधिवत दर्ज करना है. इस तरह के राष्ट्रीय सम्मान से युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों द्वारा निर्मित स्थापत्य कला, नगर नियोजन और सुरक्षा व्यवस्था के ऐतिहासिक महत्व को समझने की प्रेरणा मिलती है. बुलंद दरवाजे और रूमी दरवाजे जैसी राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इमारतों के समकक्ष बीकानेर के कोटगेट का सम्मान पाना शहर के निवासियों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक अत्यंत प्रेरणादायक उपलब्धि है. इसका आप पर असर बीकानेर के ऐतिहासिक कोटगेट को राष्ट्रीय डाक टिकट पर स्थान मिलने से शहर के पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और संग्रहकर्ताओं के बीच इसकी प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. • भारत में: देश भर के डाक टिकट संग्रहकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों को भारत के प्रमुख ऐतिहासिक द्वारों के स्थापत्य को एक नए परिप्रेक्ष्य में देखने का अवसर मिलेगा. 500 रुपये मूल्य वर्ग का यह विशेष टिकट विभिन्न डाकघरों और संग्रह केंद्रों के माध्यम से धरोहर प्रेमियों तक पहुंचेगा. • बीकानेर में: स्थानीय निवासियों और पर्यटन व्यवसायियों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर शहर की समृद्ध पहचान को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम बनेगा. इससे परकोटे के भीतरी बाजारों और कोटगेट क्षेत्र में सांस्कृतिक पर्यटन को अतिरिक्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. • धरोहर संरक्षण: ऐतिहासिक द्वारों को डाक टिकट पर स्थान मिलने से पुरानी इमारतों के संरक्षण के प्रति जनचेतना में वृद्धि होगी. इससे भावी पीढ़ी राजस्थान की पारम्परिक लाल बलुआ पत्थर की वास्तुकला से सीधे परिचित हो सकेगी. • फिलेटली संग्रह: डाक टिकट का संग्रह करने वाले शौकीनों के लिए यह विशेष मूल्य वर्ग का टिकट एक दुर्लभ और मूल्यवान दस्तावेज साबित होगा. संग्रहकर्ता इसे भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्ट श्रृंखला के तौर पर अपने संग्रह में सहेज सकेंगे. ऐसा क्यों हुआ डाक विभाग ने भारत के विविध और समृद्ध स्थापत्य इतिहास को सम्मानित करने के उद्देश्य से देश के चुनिंदा आठ ऐतिहासिक द्वारों पर आधारित स्मारक डाक टिकट श्रृंखला जारी की है. • स्थापत्य सम्मान: देश के विभिन्न प्रांतों में स्थित प्राचीन द्वारों की अनूठी वास्तुकला और उनके ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करने के लिए इस संग्रह का चयन किया गया. कोटगेट अपनी उत्कृष्ट लाल बलुआ पत्थर की बनावट के कारण इस चयन में शामिल हुआ. • सुरक्षा विरासत का दस्तावेजीकरण: पुराने समय में बीकानेर के परकोटे की सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य आधार रहे कोटगेट का ऐतिहासिक महत्व रहा है, जहां रात 10 बजे के बाद आवाजाही पर कड़ी निगरानी रहती थी. इस अनूठी नगर-नियोजन परंपरा को ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में मान्यता दी गई है. • धरोहर का प्रसार: डाक टिकटों के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के साथ-साथ क्षेत्रीय महत्व की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना डाक विभाग की एक स्थापित सांस्कृतिक पहल है. इसी कड़ी के तहत बीकानेर के इस केंद्र को फतेहपुर सीकरी और लखनऊ जैसी विख्यात संरचनाओं के साथ जोड़ा गया. सवाल-जवाब 1. डाक विभाग द्वारा जारी किए गए कोटगेट डाक टिकट का मूल्य कितना है? इस विशेष स्मारक डाक टिकट का मूल्य 500 रुपये निर्धारित किया गया है. 2. कोटगेट के साथ इस डाक टिकट श्रृंखला में कुल कितने ऐतिहासिक द्वार शामिल हैं? इस श्रृंखला में बीकानेर के कोटगेट सहित देश भर के कुल आठ ऐतिहासिक द्वारों को शामिल किया गया है. 3. इस श्रृंखला में राजस्थान के कौन-कौन से अन्य द्वार सम्मिलित किए गए हैं? इसमें बीकानेर के कोटगेट के अलावा जयपुर का जोरावर सिंह गेट, जोधपुर का सरदार मार्केट गेट और अजमेर का मैगजीन गेट शामिल हैं. 4. ऐतिहासिक समय में रात 10 बजे के बाद कोटगेट में प्रवेश के क्या नियम थे? रात करीब 10 बजे कोटगेट बंद होने के बाद भीतर जाने के लिए विशेष पहचान या औपचारिक अनुमति की आवश्यकता होती थी. 5. कोटगेट के निर्माण में मुख्य रूप से किस पत्थर का उपयोग किया गया है? कोटगेट का निर्माण पारंपरिक स्थापत्य शैली में लाल बलुआ पत्थर से किया गया है. 6. इस डाक टिकट के बारे में जानकारी किस संग्रहकर्ता ने साझा की है? यह ऐतिहासिक जानकारी धरोहर और डाक टिकट संग्रहकर्ता भारत भूषण गुप्ता ने साझा की है. https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-aitihasika-kotgate-ko-daka-vibhaga-ne-diya-rashtriya-sammana-500-rupaye-ke-vishesha-daka-tikata-para-mili-jagaha-40991 TrendKia — Har trend, sabse pehle.