# राजस्थान के बांसवाड़ा में सोते हुए परिवार के पास पहुंचा छह फीट का विशाल मगरमच्छ, ग्रामीणों ने दिखाई सूझबूझ

> बांसवाड़ा जिले के बोरी गांव में आधी रात को घर में घुस रहे छह फीट लंबे मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों ने शोर मचाया और बाहर सो रहे परिवार को सुरक्षित बचाया.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-banswara-men-sote-hue-parivara-ke-pasa-pahuncha-chhaha-phita-ka-vishala-magaramachchha-graminon-ne-dikhai-sujhabujha-45835 · **Language:** Hindi
**Tags:** बांसवाड़ा, मगरमच्छ रेस्क्यू, राजस्थान समाचार, गढ़ी, परतापुर गौशाला, वन्यजीव

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में शुक्रवार की देर रात एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया, जब एक रिहायशी बस्ती में अचानक विशालकाय मगरमच्छ दाखिल हो गया. गढ़ी इलाके के अंतर्गत आने वाले आदर्श गांव बोरी के एक मोहल्ले में तड़के लगभग 3 बजे करीब 6 फीट लंबा मगरमच्छ रेंगता हुआ देखा गया. उस वक्त गांव के लोग गहरी नींद में थे और एक परिवार अपने मकान के बाहर खुले में खाट बिछाकर आराम कर रहा था. मगरमच्छ धीरे-धीरे उसी मकान के मुख्य द्वार की तरफ बढ़ रहा था, जिससे वहां सो रहे लोगों पर सीधा खतरा मंडराने लगा تھا.

## जागते युवाओं की नजर पड़ी तो टला अनहोनी का खतरा
रात के सन्नाटे में गांव की गली से गुजर रहे कुछ स्थानीय नौजवानों की नजर अचानक सड़क पर रेंगते हुए इस जलीय जीव पर पड़ी. छह फीट लंबे मगरमच्छ को मकान की चौखट के बेहद करीब और सोते हुए लोगों की तरफ बढ़ता देख युवकों ने तुरंत समझदारी दिखाई. उन्होंने बिना समय गंवाए तेज आवाज में चिल्लाकर खाट पर सो रहे परिवार के सदस्यों को जगाया और सुरक्षित दूरी बनाने को कहा. युवाओं के अलर्ट करने से परिवार के लोग फौरन सुरक्षित स्थान पर पहुंचे, जिससे एक बेहद भयानक हादसा होने से पहले ही टल गया. इसके बाद मोहल्ले में लोगों का जमावड़ा लग गया और पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया.

## परतापुर गौशाला टीम और पुलिस ने मिलकर चलाया बचाव अभियान
स्थिति की नजाकत को भांपते हुए ग्रामीणों ने तुरंत फोन के माध्यम से रेस्क्यू दल को मामले की सूचना दी. खबर मिलते ही परतापुर गौशाला की रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गई. घटना की जानकारी मिलने पर गढ़ी थाना पुलिस और अरथुना थाना पुलिस का जाब्ता भी मौके पर मुस्तैद हो गया. बस्ती के बीचों-बीच मगरमच्छ की मौजूदगी के कारण अभियान में अत्यधिक सावधानी बरती गई, ताकि न तो किसी नागरिक को चोट पहुंचे और न ही वन्यजीव को कोई नुकसान हो. रेस्क्यू दल ने काफी देर की कड़ी मशक्कत के बाद रस्सियों और जाल की सहायता से छह फीट लंबे मगरमच्छ को पूरी तरह काबू में कर लिया.

## नदी में छोड़ा गया मगरमच्छ, गांव वालों ने ली राहत
सफलतापूर्वक पकड़े जाने के बाद मगरमच्छ को बस्ती से दूर ले जाकर सुरक्षित रूप से नदी के प्राकृतिक जलक्षेत्र में छोड़ दिया गया. इस पूरे बचाव कार्य में राहुल पंचाल, परेश डिंडोर, कृष्णा खराड़ी, नयन डाबी, नितेश कलाल, रामा, गिरीश खांट के साथ ही स्थानीय पार्षद गायत्री खांट और पुलिस प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाई. बस्ती से मगरमच्छ के हटते ही गांव के लोगों ने सुकून महसूस किया. ग्रामीणों की सजगता और त्वरित राहत कार्य के कारण बिना किसी जनहानि के यह खतरनाक रेस्क्यू पूरा हो सका.

## इसका आप पर असर
रिहायशी बस्तियों में जलीय जीवों के अचानक घुस आने से ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता और सुरक्षा के नए नियम जरूरी हो जाते हैं.

- **राजस्थान में:** जल स्रोतों के नजदीकी गांवों में रात्रि के समय खुले में सोने से परहेज करने और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था रखने की सलाह दी जाती है. किसी भी जलीय या जंगली जीव के दिखने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन या रेस्क्यू दल को फोन करें.
- **आम नागरिकों के लिए:** रात में घर के बाहर सोते समय चारदीवारी और मुख्य द्वारों को बंद रखना सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक है. अनजान हलचल दिखने पर खुद जीव को छेड़ने के बजाय दूरी बनाकर शोर मचाएं और विशेषज्ञों को बुलाएं.
- **आपातकालीन संपर्क:** वन्यजीवों के आबादी क्षेत्र में घुसने पर नजदीकी पुलिस थाने या वन विभाग के नियंत्रण कक्ष से तत्काल संपर्क साधें. समय पर दी गई सूचना जनहानि और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है.
- **सामूहिक निगरानी:** ग्रामीण इलाकों में रात के समय युवाओं की गश्त और आपसी संवाद बड़े हादसों को टालने में सबसे प्रभावी साबित होता है. संकट के समय शांत रहकर एक-दूसरे को सतर्क करना जीवन बचा सकता है.

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना देर रात नदी से निकलकर मगरमच्छ के शिकार या नए जलक्षेत्र की तलाश में आबादी की तरफ चले आने के कारण हुई. आस-पास के जलस्रोतों से रिहायशी इलाकों का सीधा जुड़ाव ऐसे मामलों की मुख्य वजह बनता है.

- **जलस्रोतों से भटकाव:** नदी और जलस्रोतों में पानी के बहाव या रात के सन्नाटे में मगरमच्छ भोजन की तलाश में तटों से बाहर निकलकर सूखी जमीन पर चले आते हैं. आसपास कोई ठोस दीवार या रुकावट न होने से वे सीधे गांवों की गलियों में पहुंच जाते हैं.
- **प्राकृतिक आवास और मानवीय बस्तियों की निकटता:** बोरी और गढ़ी क्षेत्र के कई हिस्से प्राकृतिक जलस्रोतों के समीप स्थित हैं, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही अक्सर देखी जाती है. रात के समय शांति होने पर जंगली जीव बेरोकटोक बस्तियों तक बढ़ जाते हैं.
- **बचाव दल की त्वरित प्रतिक्रिया:** सूचना मिलते ही परतापुर गौशाला की टीम और दोनों थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला. प्रशिक्षित दल की मौजूदगी के कारण मगरमच्छ को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पकड़ा जा सका.

## सवाल-जवाब

### 1. बांसवाड़ा के किस गांव में मगरमच्छ घुस आया था?
यह घटना बांसवाड़ा जिले के गढ़ी क्षेत्र में स्थित आदर्श गांव बोरी के एक मोहल्ले में घटी.

### 2. मगरमच्छ की लंबाई कितनी थी और वह किस समय दिखाई दिया?
मगरमच्छ करीब 6 फीट लंबा था और वह शुक्रवार देर रात लगभग 3 बजे देखा गया.

### 3. मगरमच्छ से परिवार की जान कैसे बची?
स्थानीय युवाओं ने मगरमच्छ को घर की तरफ बढ़ते देख शोर मचाया और बाहर सो रहे परिवार को समय रहते जगा दिया.

### 4. रेस्क्यू अभियान में किन टीमों और थानों ने सहयोग किया?
परतापुर गौशाला की रेस्क्यू टीम के साथ गढ़ी और अरथुना थाना पुलिस तथा स्थानीय नागरिकों ने मिलकर रेस्क्यू अभियान चलाया.

### 5. पकड़े जाने के बाद मगरमच्छ का क्या किया गया?
मगरमच्छ को आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़ने के बाद पास की नदी में छोड़ दिया गया.

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