राजस्थान के भरतपुर में स्थित केवलादेव नेशनल पार्क की ऐचा घास का स्वाद लेने पहुंचते हैं विदेशी पक्षी भरतपुर का विश्व प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क अपनी अनूठी पारिस्थितिकी और दुर्लभ ऐचा घास के कारण सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों का मुख्य आकर्षण रहता है। राजस्थान के भरतपुर जिले में बसा हुआ केवलादेव नेशनल पार्क अपनी अद्भुत पक्षी विविधता, खूबसूरत प्राकृतिक नजारों और समृद्ध जैव विविधता के लिए दुनियाभर में एक अलग पहचान रखता है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही इस राष्ट्रीय उद्यान में दुनिया के अलग-अलग कोनों से कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। इन दूरदराज के इलाकों से आने वाले मेहमानों के लिए पार्क की झीलों और जलमग्न क्षेत्रों में उगने वाली दुर्लभ ऐचा घास सबसे बड़ा आकर्षण साबित होती है। यह विशेष वनस्पति न केवल इन मेहमानों को प्राकृतिक और पौष्टिक आहार देती है, बल्कि पूरे पार्क के पारिस्थितिकी संतुलन को भी मजबूती प्रदान करती है। प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा और प्राकृतिक आहार केवलादेव नेशनल पार्क की झीलों में कुदरती तौर पर उगने वाली ऐचा घास को यहां डेरा डालने वाले कई प्रमुख प्रवासी पक्षियों का सबसे प्रिय भोजन माना जाता है। साइबेरिया के अलावा अन्य ठंडे और ध्रुवीय क्षेत्रों से लंबी व कठिन यात्रा तय करके पहुंचने वाले पक्षी यहां अनुकूल आबोहवा, सुरक्षित ठिकाने और भरपूर भोजन की तलाश में आते हैं। पार्क में मौजूद प्राकृतिक खाद्य संसाधन इन विदेशी मेहमानों के प्रवास को आसान और आरामदायक बनाते हैं। जब हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय करके पक्षी भरतपुर पहुंचते हैं, तो यहां की झीलें और यह विशेष घास उनके लिए एक बेहतरीन ठिकाना बन जाती है। पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों के लिए खास आकर्षण इस राष्ट्रीय उद्यान में गूंजने वाली पक्षियों की कलरव और उनकी अनूठी गतिविधियां देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से आने वाले सैलानियों और बर्ड वॉचर्स को अपनी ओर खींचती हैं। सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक इन सुंदर प्रवासी मेहमानों का दीदार करने के लिए भरतपुर का रुख करते हैं। जैव विविधता के लिहाज से इस पार्क को अत्यंत समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। यहां के बड़े दलदली इलाके, झीलें, जलीय पौधे और अन्य प्राकृतिक संपदा विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को उनके जीवनयापन के लिए जरूरी हर मु मुमकिन सुविधा मुहैया कराती हैं। ऐचा घास जैसी स्थानीय और दुर्लभ वनस्पतियां इसी प्राकृतिक व्यवस्था का एक मुख्य हिस्सा हैं। वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का महत्व केवलादेव नेशनल पार्क की प्राकृतिक संपदा और वहां मौजूद वनस्पतियों की रक्षा करना वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से बेहद जरूरी है। झीलों में सालभर पानी का उचित स्तर बनाए रखना, जलीय पौधों की सुरक्षा करना और पक्षियों के अनुकूल शांत माहौल तैयार करना इन मेहमानों की निरंतर मौजूदगी के लिए आवश्यक है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध यह उद्यान आज भी भरतपुर की वैश्विक पहचान का प्रमुख आधार बना हुआ है और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी नेमत से कम नहीं है। इसका आप पर असर केवलादेव नेशनल पार्क में प्रवासी पक्षियों के आने और ऐचा घास की उपलब्धता से स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलता है। • भारत में: देश भर से आने वाले प्रकृति प्रेमी और शोधकर्ता सर्दियों के मौसम में इस अभयारण्य का दौरा करते हैं। इससे वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण अध्ययन को बढ़ावा मिलता है। • भरतपुर में: स्थानीय होटल व्यवसाय, गाइड सेवा और पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारियों को सर्दियों के सीजन में अच्छी आय प्राप्त होती है। इससे क्षेत्र के आर्थिक विकास में मदद मिलती है। ऐसा क्यों हुआ केवलादेव नेशनल पार्क में प्रवासी पक्षियों के आने का मुख्य कारण सर्दियों के दौरान अनुकूल मौसमी परिस्थितियां और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक भोजन है। • भौगोलिक अनुकूलन: साइबेरिया और ध्रुवीय क्षेत्रों के अत्यधिक ठंडे मौसम से बचने के लिए पक्षी हर साल हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं। • आहार की उपलब्धता: पार्क की झीलों में उगने वाली ऐचा घास और अन्य जलीय वनस्पतियां इन मेहमानों को भरपेट प्राकृतिक भोजन प्रदान करती हैं। • सुरक्षित आवास: दलदली क्षेत्र और पानी की उचित उपलब्धता पक्षियों को शिकारियों से सुरक्षा और शांत आश्रय प्रदान करते हैं। सवाल-जवाब 1. केवलादेव नेशनल पार्क कहाँ स्थित है? केवलादेव नेशनल पार्क राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है। 2. प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करने वाली मुख्य घास कौन सी है? पार्क की झीलों में पाई जाने वाली दुर्लभ ऐचा घास प्रवासी पक्षियों का मुख्य आकर्षण होती है। 3. पक्षी किन ठंडे इलाकों से यहाँ आते हैं? ये पक्षी साइबेरिया और अन्य ध्रुवीय व ठंडे इलाकों से लंबी यात्रा तय करके आते हैं। 4. केवलादेव नेशनल पार्क किसलिए प्रसिद्ध है? यह पार्क अपनी अनूठी पक्षी विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। 5. सर्दियों में यहाँ कौन लोग आते हैं? सर्दियों के सीजन में देश-विदेश के पर्यटक और बर्ड वॉचर्स बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-bharatpur-me-sthit-keoladeo-national-park-ki-aicha-ghaas-ka-swad-lene-pahunchte-hain-videshi-pakshi-50783 TrendKia — Har trend, sabse pehle.