राजस्थान के बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस का धमाका, बीजेपी के दस साल पुराने किले को ढहाकर हासिल किया बहुमत राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में बीकानेर नगर निगम की 80 में से 42 सीटों पर जीत दर्ज कर कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के गढ़ में बीजेपी को 25 सीटें ही मिल सकीं। राजस्थान के नगर निकाय चुनावी नतीजों में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जहां बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल करते हुए सत्ता हासिल कर ली है। 80 सीटों वाले बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे पिछले एक दशक से चला आ रहा भारतीय जनता पार्टी का कब्जा खत्म हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का गृह क्षेत्र और संसदीय इलाका होने के कारण बीकानेर का यह चुनावी परिणाम बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। बीकानेर नगर निगम में सीटों का चुनावी गणित और कांग्रेस का बहुमत बीकानेर नगर निगम के चुनाव में कुल 80 सीटें हैं, जिनमें से 79 सीटों पर मतदान हुआ था। एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। मतगणना के दौरान कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 42 सीटों पर जीत दर्ज की, जो कि स्पष्ट बहुमत के लिए पर्याप्त है। दूसरी ओर, सत्ता में काबिज रही भारतीय जनता पार्टी महज 25 सीटों पर सिमट कर रह गई। बीकानेर में मिली इस हार को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हो रही है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अपने संसदीय क्षेत्र में पार्टी के इस प्रदर्शन के बाद बीजेपी संगठन के स्तर पर आत्ममंथन और गहन समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। बीकानेर शहर में पिछले 10 सालों से बीजेपी का बोर्ड काबिज था, लेकिन इस बार स्थानीय नागरिकों ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया। स्थानीय समस्याएं और सत्ता विरोधी लहर का दिखा असर स्थानीय राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि बीकानेर में लंबे समय से एक ही दल का शासन होने की वजह से मजबूत सत्ता विरोधी लहर काम कर रही थी। शहर के निवासी लंबे समय से पीने के पानी की किल्लत, सीवरेज की अव्यवस्था और जर्जर सड़कों की समस्या से जूझ रहे थे। नगर निगम प्रशासन की ओर से इन मूलभूत सुविधाओं के त्वरित समाधान न मिलने के कारण आम जनता में भारी असंतोष व्याप्त था। चुनावी माहौल में इन बुनियादी नागरिक मुद्दों ने बड़ा असर दिखाया। कांग्रेस ने इन समस्याओं को जोर-शोर से उठाया और मतदाताओं को बेहतर नागरिक सुविधाएं देने का भरोसा दिलाया। नतीजतन, मतदाताओं ने बीजेपी के 10 साल के शासन को नकारते हुए कांग्रेस को स्पष्ट जनादेश सौंप दिया। राजस्थान के अन्य स्थानीय निकायों के चुनावी परिणाम बीकानेर के अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में हुए निकाय चुनावों में मिला-जुला जनमत सामने आया है। अजमेर सहित कई अन्य क्षेत्रों में कड़े मुकाबले की स्थिति बनी रही। वहीं जैसलमेर में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए अपनी स्थिति मजबूत रखी है। हालांकि, राज्य के कई वीवीआईपी चुनावी क्षेत्रों में बीजेपी को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा या फिर हार का स्वाद चखना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस ने बढ़त बनाई है और वहां अपना बोर्ड बनाने की मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। इसी तरह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के प्रभाव क्षेत्र पाली में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा है और पार्टी वहां सत्ता में आने की ओर अग्रसर है। बागी प्रत्याशियों का बिगाड़ा खेल और कुल वार्डों का आंकड़ा इस निकाय चुनाव में कई स्थानों पर बागी उम्मीदवारों की भूमिका भी निर्णायक साबित हुई। बीजेपी के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में ताल ठोंकी। इन बागी प्रत्याशियों द्वारा वोट काटे जाने के कारण बीजेपी का चुनावी गणित कई सीटों पर उलझ गया, जिसका सीधा लाभ कांग्रेस और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों को प्राप्त हुआ। प्रदेश भर के कुल 10,242 वार्डों के सामने आए नतीजों में बीजेपी को 1,914 वार्डों में विजय प्राप्त हुई है। वहीं कांग्रेस के प्रत्याशियों ने 1,622 वार्डों पर अपना परचम लहराया है। इसके अलावा 1,020 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार जीत दर्ज करने में सफल रहे हैं। अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों की बात करें तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) को 40 सीटें, भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) को 8 सीटें, आम आदमी पार्टी (आप) को 5 सीटें मिली हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) को 6-6 वार्डों में सफलता हासिल हुई है। जयपुर के वार्ड 25 में फंसा पेंच और बाड़ेबंदी की कवायद नगर निकाय नतीजों के बीच राजधानी जयपुर से एक अनोखा मामला सामने आया। जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 25 में मतगणना के दौरान अंतिम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) खुलने से ठीक पहले उसमें तकनीकी खराबी आ गई। इस वजह से अंतिम नतीजे की घोषणा रोकनी पड़ी। इस वार्ड में कांग्रेस और बीजेपी के बीच बेहद करीबी मुकाबला था, जहां कांग्रेस प्रत्याशी अपने निकटतम बीजेपी प्रतिद्वंद्वी से केवल 70 वोटों की मामूली बढ़त बनाए हुए थे। ईवीएम में आई इस तकनीकी गड़बड़ी की प्रशासनिक स्तर पर जांच चल रही है। चुनावी परिणाम स्पष्ट होने के साथ ही प्रदेश भर के निकायों में जोड़-तोड़ और सत्ता समीकरण साधने की राजनीति तेज हो गई है। बीकानेर में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुकी है, लेकिन जिन निकायों में त्रिशंकु परिणाम आए हैं, वहां अपने विजयी प्रत्याशियों को क्रॉस वोटिंग और सेंधमारी से बचाने के लिए राजनीतिक दलों ने घेराबंदी शुरू कर दी है। इसके तहत प्रत्याशियों को बसों में बैठाकर सुरक्षित स्थानों पर भेजने यानी 'बाड़ेबंदी' की तैयारी की जा रही है। साथ ही बीजेपी और कांग्रेस दोनों प्रमुख दल निर्दलीय विजयी उम्मीदवारों से लगातार संपर्क बनाकर उन्हें अपने पाले में लाने के प्रयासों में जुट गए हैं। इसका आप पर असर राजस्थान के नगर निगम और निकाय चुनावों के इस परिणाम का सीधा असर आम नागरिकों की रोजाना की सुविधाओं और स्थानीय प्रशासन पर पड़ने वाला है। • भारत में प्रभाव: स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक रुझानों का संकेत देते हैं। यह परिणाम दिखाता है कि मतदाता स्थानीय बुनियादी मुद्दों पर केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी से ज्यादा तवज्जो देते हैं। • बीकानेर में नागरिक सुविधाएं: बीकानेर में सत्ता परिवर्तन के बाद नई परिषद के सामने सबसे पहली चुनौती पेयजल और सड़क की समस्याओं को हल करने की होगी। स्थानीय नागरिकों को अब नई नगर सरकार से बुनियादी विकास कार्यों की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। • स्थानीय बजट और योजनाएं: निकाय में बहुमत मिलने से कांग्रेस अब बीकानेर में अपनी प्राथमिकता के आधार पर विकास योजनाएं और बजट पास करा सकेगी। इससे शहर में साफ-सफाई और बुनियादी ढांचे से जुड़ी रुकी हुई परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं। • जयपुर और अन्य निकायों में स्थिति: जिन वार्डों और निकायों में परिणाम अटके हैं या त्रिशंकु स्थिति है, वहां प्रशासनिक फैसले और विकास कार्य कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकते हैं। जोड़-तोड़ की राजनीति के दौरान स्थानीय मुद्दों का समाधान पिछड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ बीकानेर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की पराजय और कांग्रेस की जीत के पीछे कई महत्वपूर्ण स्थानीय और राजनीतिक कारण जिम्मेदार रहे हैं। • दस साल की सत्ता विरोधी लहर: बीकानेर में पिछले एक दशक से बीजेपी का बोर्ड काबिज था। लंबे समय तक शासन में रहने के कारण जनता में नगर निगम के कामकाज को लेकर गहरी नाराजगी और सत्ता विरोधी माहौल बन चुका था। • बुनियादी नागरिक समस्याओं का समाधान न होना: शहर में पीने के पानी की किल्लत और खस्ताहाल सड़कों जैसे जमीनी मुद्दों को लेकर मतदाताओं में काफी असंतोष था। प्रशासनिक स्तर पर इन समस्याओं का समय पर समाधान न होना बीजेपी के खिलाफ गया। • बागी उम्मीदवारों का प्रभाव: राज्य भर में बीजेपी के कई असंतुष्ट कार्यकर्ताओं ने बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इन बागियों के मैदान में उतरने से पार्टी का वोट बैंक बंटा, जिसका सीधा लाभ कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों को मिला। सवाल-जवाब 1. बीकानेर नगर निगम चुनाव में किस पार्टी को बहुमत मिला है? बीकानेर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 80 में से 42 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है। 2. बीकानेर में भारतीय जनता पार्टी को कुल कितनी सीटें मिलीं? भारतीय जनता पार्टी को बीकानेर नगर निगम में 25 सीटों पर ही जीत मिल सकी। 3. जयपुर के वार्ड 25 का परिणाम क्यों रोका गया? जयपुर नगर निगम के वार्ड 25 में अंतिम ईवीएम में तकनीकी खराबी आने के कारण मतगणना रोक दी गई और प्रशासनिक जांच शुरू की गई। 4. राजस्थान भर के कुल 10,242 वार्डों में किस दल का प्रदर्शन कैसा रहा? राज्य स्तर पर बीजेपी ने 1,914 वार्डों और कांग्रेस ने 1,622 वार्डों पर जीत दर्ज की, जबकि 1,020 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-bikaner-nagar-nigam-men-congress-ka-dhamaka-bjp-ke-dasa-sala-purane-kile-ko-dhahakara-hasila-kiya-bahumata-32139 TrendKia — Har trend, sabse pehle.