# राजस्थान के बंजर खेतों को संजीवनी देने जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय और सीएसआईआर भावनगर के बीच समझौता

> पश्चिमी राजस्थान में खारे पानी और मिट्टी की बढ़ती लवणता की समस्या को दूर करने के लिए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई भावनगर के साथ एमओयू किया है। इस समझौते से दलहनी फसलों की पैदावार सुधारने, नए जैव उत्पाद विकसित करने और पीएचडी शोधार्थियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-bnjara-kheton-ko-snjivani-dene-jodhpur-agriculture-university-aura-csir-bhavnagar-ke-bicha-samajhauta-30261 · **Language:** Hindi
**Tags:** कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर, सीएसआईआर भावनगर, राजस्थान कृषि, खारा पानी, मिट्टी लवणता, दलहनी फसलें, एमओयू, कृषि अनुसंधान

पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में भूमिगत जल के खारेपन और मिट्टी में बढ़ती लवणता के कारण कृषि उत्पादन लगातार प्रभावित हो रहा है। खेतों में लवण की मात्रा बढ़ने से जहां जमीन की प्राकृतिक उर्वरता क्षीण हो रही है, वहीं फसलों की पैदावार में भी निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। इस गंभीर कृषि समस्या का स्थाई और वैज्ञानिक समाधान तलाशने के लिए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने एक बेहद महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की ख्यातिप्राप्त प्रयोगशाला केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (CSMCRI), भावनगर (गुजरात) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। शनिवार को संपन्न हुए इस द्विपक्षीय समझौते के बाद पश्चिमी राजस्थान के खारे पानी और अत्यधिक लवणता से प्रभावित कृषि क्षेत्रों में फसलों के संरक्षण और भूमि सुधार को लेकर नए शोध कार्य शुरू किए जाएंगे।

 

## द्विपक्षीय समझौते की मुख्य शर्तें और दूरगामी लक्ष्य

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित औपचारिक कार्यक्रम के दौरान कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत तथा भावनगर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डूंगरराम चौधरी ने एमओयू दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत ने पश्चिमी राजस्थान के भू-भाग में लवणता की चुनौती को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका सबसे प्रतिकूल प्रभाव दलहनी फसलों की खेती और पैदावार पर पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों का यह संयुक्त प्रयास स्थानीय किसानों की समस्याओं को हल करने में मील का पत्थर साबित होगा। इस तकनीकी जुड़ाव से जोधपुर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को अनुसंधान एवं कृषि प्रसार गतिविधियों के लिए न केवल आधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता मिलेगी, बल्कि आवश्यक प्रयोगशाला संसाधनों का सहयोग भी प्राप्त होगा।

 

## खारे पानी के शोधन और प्राकृतिक जैव उत्पादों का विकास

अपनी संस्थागत गतिविधियों और उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डूंगरराम चौधरी ने बताया कि भावनगर प्रयोगशाला समुद्री रसायनों और नमक के विकास, खारे पानी को मीठा बनाने की तकनीकों, बायोडीजल निर्माण, अपशिष्ट जल शोधन तथा समुद्री संसाधनों से जैविक खाद तैयार करने के क्षेत्र में काम कर रही है। इसके साथ ही संस्थान द्वारा पर्यावरण अनुकूल जैव उत्पादों के निर्माण और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ी अनेक शोध परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के साथ इस साझेदारी से भावनगर संस्थान के वर्षों के अनुसंधान, व्यावहारिक अनुभव और उन्नत तकनीकों का सीधा लाभ राजस्थान के कृषि क्षेत्र और किसानों को मिल सकेगा।

 

## शोधार्थियों के लिए सह-मार्गदर्शन और वैज्ञानिक प्रसार

इस ऐतिहासिक समझौते का व्यापक शैक्षणिक लाभ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को भी मिलेगा। पीएचडी डिग्री कर रहे शोधार्थी अब केंद्रीय संस्थान के वैज्ञानिकों की देखरेख में सह-निर्देशक के रूप में शोध कार्य पूरा कर सकेंगे। इससे छात्रों को उच्चस्तरीय प्रयोगशाला अनुसंधान के साथ-साथ जमीनी स्तर पर व्यावहारिक तकनीकी ज्ञान अर्जित करने का अमूल्य अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के अनुप्रयोग, ग्रामीण विकास, युवाओं के कौशल संवर्धन और वैज्ञानिक सोच के प्रसार को नई दिशा मिलने की पूरी संभावना है। इस एमओयू हस्ताक्षर समारोह में कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. एम. सुंदरिया सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

## इसका आप पर असर
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय और सीएसआईआर भावनगर के इस समझौते से खारे पानी और लवणता की समस्या से जूझ रहे राजस्थान के किसानों को खेती के नए वैज्ञानिक विकल्प मिलेंगे।

- **भारत में:** देश के शुष्क और तटीय इलाकों में लवणता प्रभावित जमीनों को सुधारने के लिए भावनगर संस्थान की तकनीकों का विस्तार किया जाएगा। इससे दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

- **राजस्थान में:** जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के लवणता प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को खारे पानी के उपयोग और मिट्टी सुधार के प्रत्यक्ष समाधान मिलेंगे। इससे बंजर हो रही जमीनों पर भी बेहतर फसल पैदावार हासिल की जा सकेगी।

- **फसल पैदावार और लागत पर:** समुद्री संसाधनों से बनी प्राकृतिक खाद और जैव उत्पादों के इस्तेमाल से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। इससे किसानों की खेती की लागत घटेगी और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनी रहेगी।

- **विद्यार्थियों और शोध पर:** पीएचडी शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन और उन्नत लैब सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे कृषि क्षेत्र में नए स्टार्ट-अप और ग्रामीण कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पश्चिमी राजस्थान में भूजल के बढ़ते खारेपन और मिट्टी में लवण की अधिक मात्रा ने कृषि उत्पादन को गंभीर रूप से संकट में डाल दिया है। इस भूभौतिकीय चुनौती का सामना करने के लिए विश्वविद्यालय ने अनुसंधान प्रयोगशाला के साथ सहयोग का मार्ग चुना है।

- **लवणता की बढ़ती समस्या:** पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी अत्यधिक खारा है जिससे खेतों में नमक जमा हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर हो रही है और दलहनी फसलों की पैदावार गिर रही है।

- **तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता:** कृषि विश्वविद्यालय के पास स्थानीय भौगोलिक जानकारी है लेकिन समुद्री रसायनों और खारे पानी के शोधन की विशिष्ट तकनीक भावनगर संस्थान के पास उपलब्ध है। इस कारण दोनों अग्रणी संस्थानों ने अनुसंधान के लिए हाथ मिलाया है।

- **संस्थागत सहयोग का उद्देश्य:** पूर्व में पृथक रूप से चल रहे प्रयासों के स्थान पर अब समन्वित वैज्ञानिक शोध किया जाएगा। इससे प्रयोगशाला स्तर पर विकसित तकनीकों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा सकेगा।

- **आगामी कदम:** दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक अब संयुक्त अध्ययन शुरू करेंगे और लवण प्रभावित जमीनों पर परीक्षण फार्म स्थापित करेंगे। इसके साथ ही पीएचडी छात्रों के लिए सह-मार्गदर्शन प्रक्रिया भी तुरंत शुरू की जाएगी।

## सवाल-जवाब

### 1. यह समझौता किन दो संस्थानों के बीच हुआ है?
यह समझौता कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर और भावनगर (गुजरात) स्थित केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (CSIR-CSMCRI) के बीच हुआ है।

### 2. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान में खारे पानी और मिट्टी की बढ़ती लवणता की समस्या को दूर करने के लिए नए वैज्ञानिक शोध और तकनीकी समाधान विकसित करना है।

### 3. इस एमओयू से किसानों की किस फसल को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
लवणता के कारण सबसे अधिक प्रभावित होने वाली दलहनी फसलों की पैदावार में सुधार लाने और भूमि सुधार की तकनीक विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

### 4. विश्वविद्यालय के छात्रों और शोधार्थियों को इससे क्या लाभ मिलेगा?
पीएचडी कर रहे शोधार्थियों को सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई भावनगर के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में सह-निर्देशक के रूप में शोध करने और उन्नत प्रयोगशाला तकनीक सीखने का मौका मिलेगा।

### 5. भावनगर संस्थान किन-किन क्षेत्रों में अनुसंधान करता है?
यह संस्थान खारे पानी को मीठा बनाने, नमक व समुद्री रसायनों के विकास, बायोडीजल, अपशिष्ट जल प्रबंधन और समुद्री संसाधनों से प्राकृतिक खाद तैयार करने में महारत रखता है।

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