# राजस्थान के चार और जिलों में मोबाइल ऐप से बुक होगी यूरिया और डीएपी, जानें नई डिजिटल प्रणाली के फायदे

> कृषि विभाग ने सिरोही और राजसमंद में सफल ट्रायल के बाद झुंझुनूं, सीकर, नागौर और डीडवाना कुचामन में मोबाइल ऐप से खाद बुकिंग शुरू करने का निर्णय लिया है। किसान दिवाली से गूगल प्ले स्टोर ऐप या आधार नंबर के जरिए यूरिया और डीएपी की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-08-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-chara-aura-jilon-men-mobaila-aipa-se-buka-hogi-yuriya-aura-diepi-janen-nai-dijitala-pranali-ke-phayade-18421 · **Language:** Hindi
**Tags:** खाद ऑनलाइन बुकिंग, यूरिया डीएपी ऐप, एफएफएस प्रोजेक्ट, राजस्थान कृषि विभाग, किसान डिजिटल सेवा, झुंझुनूं सीकर नागौर खाद

किसानों को यूरिया और डीएपी खाद की खरीदारी के लिए अब वितरण केंद्रों और दुकानों के बाहर घंटों तक लंबी कतारों में इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार फर्टिलाइजर वितरण प्रणाली को पूरी तरह से आधुनिक और पारदर्शी बनाने जा रही है। इसके तहत फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स (एफएफएस) प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। इस नई व्यवस्था के जरिए किसान अब अपने स्मार्टफोन में मौजूद एक मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे यूरिया और डीएपी खाद की अग्रिम बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसान अपनी सहूलियत के अनुसार नजदीकी तयशुदा खाद दुकान अथवा केंद्र पर जाकर अपनी खाद प्राप्त कर सकते हैं। यह पूरी व्यवस्था ठीक उसी तर्ज पर काम करेगी, जिस प्रकार उपभोक्ता रसोई गैस सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग करते हैं और उसके बाद अपनी सुविधा से उसकी डिलीवरी लेते हैं या निर्धारित केंद्र से प्राप्त करते हैं।

 

## पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद चार नए जिलों में विस्तार

फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स यानी एफएफएस व्यवस्था का सबसे पहले सिरोही और राजसमंद जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सफल परीक्षण किया गया था। वहां मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद अब कृषि विभाग ने इस डिजिटल पहल का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब झुंझुनूं, सीकर, नागौर तथा डीडवाना कुचामन जिलों में भी इस ऐप आधारित बुकिंग प्रणाली को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। कृषि विभाग की ओर से इस नई डिजिटल व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, निजी खाद विक्रेताओं और स्थानीय किसानों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक यह डिजिटल सेवा दिवाली तक जमीनी स्तर पर शुरू होने की पूरी संभावना है। इसके लागू हो जाने के बाद किसानों को खाद की उपलब्धता जांचने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

 

## गूगल प्ले स्टोर ऐप, फार्मर आईडी और ओटीपी से होगी बुकिंग

इस आधुनिक व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपने एंड्रॉइड स्मार्टफोन में गूगल प्ले स्टोर के जरिए एफएफएस ऐप डाउनलोड करना होगा। ऐप में लॉगिन और खाद बुकिंग के लिए किसान को अपनी फार्मर आईडी दर्ज करनी होगी। जिन किसानों के पास फिलहाल फार्मर आईडी मौजूद नहीं है, वे अपने आधार कार्ड नंबर का उपयोग करके भी इस प्रणाली में प्रवेश कर सकते हैं। आधार या फार्मर आईडी नंबर दर्ज करते ही किसान के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी प्राप्त होगा। ओटीपी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही ऐप की स्क्रीन पर राज्य, जिला, तहसील और गांव चुनने का विकल्प दिखाई देगा। इसके बाद किसान को अपनी कृषि आवश्यकता के अनुसार यूरिया या डीएपी खाद की सटीक मात्रा दर्ज करनी होगी। मात्रा भरते ही ऐप पर आसपास के सभी केंद्रों और दुकानों में उपलब्ध कुल खाद का वास्तविक स्टॉक दिखाई देने लगेगा। किसान अपनी इच्छा और दूरी के हिसाब से सुविधाजनक दुकान का चयन कर ऑनलाइन बुकिंग को अंतिम रूप दे सकता है।

 

## 48 घंटे तक मान्य रहेगा क्यूआर कोड, पॉस मशीन से होगी स्कैनिंग

जैसे ही किसान ऐप पर खाद की ऑनलाइन बुकिंग संपन्न करेगा, उसके मोबाइल पर एक विशिष्ट क्यूआर कोड जनरेट हो जाएगा। इस क्यूआर कोड की वैधता जारी होने के समय से लेकर 48 घंटे तक की होगी। किसान को इस तय समयावधि के भीतर अपने चुने हुए खाद बिक्री केंद्र या दुकान पर पहुंचना होगा। वहां मौजूद केंद्र संचालक पॉस (PoS) मशीन के जरिए किसान के मोबाइल में दिखे क्यूआर कोड को स्कैन करेगा और सत्यापन के पश्चात निर्धारित खाद का पैकेट सौंप देगा। इस पूरी डिजिटल तकनीक के लागू होने से खाद वितरण केंद्रों पर होने वाली अवांछित भगदड़ और लंबी कतारों में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही, किस किसान ने किस तारीख को कितनी खाद बुक की थी और उसे वास्तव में कितनी बोरी खाद सौंपी गई है, इसका पूरा लेखा-जोखा ऑनलाइन डिजिटल रिकॉर्ड में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा।

 

## कालाबाजारी और जबरन टैगिंग पर लगेगी प्रभावी रोक

फसल बुवाई के मुख्य सीजन के दौरान जब खाद की मांग काफी बढ़ जाती है, तब अक्सर किसानों को किल्लत का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कई विक्रेताओं द्वारा खाद के साथ अन्य गैर-जरूरी कृषि उत्पाद खरीदने के लिए किसानों पर दबाव बनाने यानी टैगिंग करने और कालाबाजारी की गंभीर शिकायतें सामने आती हैं। एफएफएस की नई डिजिटल व्यवस्था में खाद की प्रत्येक बोरी की बिक्री और वितरण का पूरा विवरण ऑनलाइन सर्वर पर उपलब्ध रहेगा। इससे विभाग के लिए किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धांधली पर रैंडम निगरानी रखना बेहद आसान हो जाएगा। सब्सिडी वाली सरकारी खाद के वितरण में पूर्ण पारदर्शिता स्थापित होगी। यदि किसी क्षेत्र से खाद वितरण में पक्षपात या अनियमितता की शिकायत आती है, तो कृषि विभाग ऑनलाइन डिजिटल डेटा के आधार पर त्वरित और प्रभावी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर सकेगा।

 

## सहकारी समितियों और विक्रेताओं को भी होगा बड़ा फायदा

डिजिटल एफएफएस व्यवस्था का लाभ केवल किसानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सहकारी समितियों, लैंप्स/पैक्स और निजी खाद विक्रेताओं के लिए भी काफी मददगार साबित होगी। गोदाम में रखे कुल स्टॉक, डिपो से दुकान तक पहुंची खाद की खेप, दैनिक बिक्री और किसानों को दी गई खाद की मात्रा का हर एक डेटा सिस्टम में खुद-ब-खुद अपडेट होता रहेगा। इससे कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों को राज्य भर में वास्तविक खाद उपलब्धता पर नजर रखने में आसानी होगी। इस डिजिटल डेटा के जरिए विभाग यह सटीक अनुमान लगा पाएगा कि किस तहसील या ब्लॉक में खाद की मांग अधिक है और कहां अतिरिक्त खेप भेजने की तुरंत आवश्यकता है। इसके अलावा कागजों में दर्ज फर्जी स्टॉक और गोदाम में मौजूद असल खाद के बीच के अंतर तथा हेराफेरी को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के प्रयोग से सब्सिडी वाली खाद के वितरण में पारदर्शिता आएगी और कालाबाजारी पर रोक लगेगी।
- **राजस्थान में:** सिरोही, राजसमंद, झुंझुनूं, सीकर, नागौर और डीडवाना कुचामन के किसानों को यूरिया व डीएपी के लिए दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और 48 घंटे में क्यूआर कोड स्कैन कराकर खाद मिल जाएगी।

## सवाल-जवाब

### 1. मोबाइल ऐप के माध्यम से यूरिया और डीएपी खाद की बुकिंग कैसे की जाएगी?
किसान गूगल प्ले स्टोर से एफएफएस ऐप डाउनलोड करेंगे। इसके बाद फार्मर आईडी या आधार नंबर दर्ज करके ओटीपी से लॉगिन करेंगे, अपना स्थान व आवश्यकतानुसार खाद की मात्रा चुनकर नजदीकी बिक्री केंद्र से ऑनलाइन बुकिंग करेंगे।

### 2. खाद बुकिंग ऐप में लॉगिन करने के लिए किन पहचान पत्रों का उपयोग किया जा सकता है?
किसान ऐप में लॉगिन करने के लिए अपनी फार्मर आईडी का उपयोग कर सकते हैं। यदि उनके पास फार्मर आईडी नहीं है, तो वे अपने आधार कार्ड नंबर का इस्तेमाल करके भी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

### 3. ऑनलाइन बुकिंग के बाद प्राप्त क्यूआर कोड कितने समय तक मान्य रहेगा?
ऐप पर खाद बुक करने के बाद जनरेट होने वाला क्यूआर कोड 48 घंटे तक मान्य रहेगा। किसान को इस समयावधि के भीतर निर्धारित दुकान पर पहुंचकर पॉस मशीन से कोड स्कैन कराकर खाद प्राप्त करनी होगी।

### 4. एफएफएस ऐप आधारित यह नई खाद बुकिंग व्यवस्था किन-किन जिलों में शुरू की जा रही है?
सिरोही और राजसमंद जिलों में सफल पायलट परीक्षण के बाद अब इस व्यवस्था को झुंझुनूं, सीकर, नागौर और डीडवाना कुचामन जिलों में लागू किया जा रहा है।

### 5. ऐप से खाद बुकिंग की यह डिजिटल सेवा किसानों के लिए कब से उपलब्ध होगी?
कृषि विभाग की ओर से अधिकारियों, खाद विक्रेताओं और किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और यह सेवा दिवाली तक शुरू होने की संभावना है।

### 6. नई डिजिटल प्रणाली से खाद वितरण में होने वाली धांधली और कालाबाजारी पर कैसे रोक लगेगी?
डिजिटल प्रणाली में प्रत्येक बोरी की बिक्री और किसान को दिए गए आवंटन का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा। इससे खाद के साथ अन्य सामान जबरन बेचने (टैगिंग) और कालाबाजारी पर सीधी निगरानी रखी जा सकेगी।

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