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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान के चूरू में पकड़े गए श्रीनगर जेल से फरार 2 आरोपी, ग्रामीणों की सूचना पर राजगढ़ पुलिस की कार्रवाई",
  "summary": "जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर सेंट्रल जेल की चारदीवारी फांदकर भागे दो आरोपी राजस्थान के चूरू जिले में खेतों में सोते पाए गए। ग्रामीणों की आशंका पर पहुंची राजगढ़ पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया।",
  "content": "राजस्थान के चूरू जिले के राजगढ़ थाना क्षेत्र में ग्रामीणों की सजगता से एक बड़ा मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर सेंट्रल जेल की सुरक्षा में सेंध लगाकर फरार हुए दो खतरनाक कैदियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी एक खेत में सो रहे थे, जब स्थानीय निवासियों को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं और उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचित कर दिया।\n\nजेल में दोस्ती के बाद स्वतंत्रता दिवस पर बनाई भागने की योजना\nपकड़े गए कैदियों की पहचान फरमान और मुख्तार गुर्जर के रूप में हुई है। फरमान मूल रूप से राजस्थान के चूरू जिले के राजगढ़ का निवासी है, जबकि मुख्तार गुर्जर जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है। दोनों आरोपी श्रीनगर की हाई सिक्योरिटी सेंट्रल जेल में संगीन मामलों के तहत बंद थे। उन पर दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हैं और वे न्यायिक हिरासत में थे।\n\nजेल के अंदर रहने के दौरान दोनों के बीच गहरी जान-पहचान हो गई। इसके बाद दोनों ने जेल तोड़कर भागने की साजिश रची। स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के दौरान जेल परिसर में चल रही चहल-पहल का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने एक रस्सी और बांस के पोल का इंतजाम किया। 23 अगस्त की सुबह लगभग 6 बजे, दोनों आरोपियों ने पोल और रस्सी की मदद से जेल की ऊंची दीवार को फांद लिया और वहां से रफूचक्कर हो गए।\n\nभागने के तुरंत बाद महिला से छीने आठ हजार रुपये\nश्रीनगर सेंट्रल जेल से फरार होने के बाद दोनों के पास आगे का सफर तय करने के लिए पैसे नहीं थे। भागते समय उन्होंने जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में ही एक महिला को निशाना बनाया और उससे 8,000 रुपये की लूटपाट की। इन पैसों का इस्तेमाल करके उन्होंने अंतरराज्यीय सीमाओं को पार किया और पुलिस की नजरों से बचते हुए राजस्थान पहुंचने का रास्ता चुना।\n\nचुंकी फरमान चूरू जिले के राजगढ़ का ही रहने वाला था, इसलिए दोनों ने सोचा कि वहां के ग्रामीण इलाकों में छिपना आसान होगा। वे कश्मीर से सीधा राजगढ़ पहुंचे और गांव के बाहरी इलाके में स्थित एक खेत में ठिकाना बना लिया।\n\nखेत में सो रहे थे आरोपी, ग्रामीणों ने चोर समझकर पुलिस बुलाई\n26 अगस्त की सुबह राजगढ़ थाने के थानाधिकारी (एसएचओ) को स्थानीय ग्रामीणों से सूचना प्राप्त हुई। ग्रामीणों ने बताया कि उनके खेतों में दो अनजान व्यक्ति सो रहे हैं, जिनकी हरकतें संदेहास्पद लग रही हैं और वे कोई चोर हो सकते हैं। इस सूचना पर राजगढ़ पुलिस स्टेशन से एक दल तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया।\n\nपुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लिया। प्राथमिक स्तर पर कोई ठोस दस्तावेज न मिलने और संदिग्ध लगने पर पुलिस ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लिया और थाने ले आई।\n\nपूछताछ में खुला राज, जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंपी जा रही कस्टडी\nथाने में जब पुलिस अधिकारियों ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की, तो उन्होंने अपनी असली पहचान उजागर की। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे वही कैदी हैं जो 23 अगस्त को श्रीनगर की अति सुरक्षित जेल से फरार हुए थे।\n\nराजगढ़ पुलिस ने तुरंत इस बात का सत्यापन करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क साधा। वहां से आए आधिकारिक संदेश में जेल ब्रेक की पुष्टि की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक विशेष टीम दोनों आरोपियों की कस्टडी लेने के लिए राजस्थान के लिए रवाना हो चुकी है। कानूनी औपचारिकताओं के बाद दोनों को वापस श्रीनगर ले जाया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना जेल सुरक्षा प्रोटोकॉल और पुलिस तंत्र के बीच अंतरराज्यीय समन्वय के महत्व को रेखांकित करती है।\n\n• भारत में: अति सुरक्षित जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा। इससे संवेदनशील मामलों में बंद आरोपियों की अचानक फरारी की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।\n• चूरू और राजस्थान में: स्थानीय ग्रामीणों की सतर्कता और तुरंत पुलिस सूचना देने का प्रत्यक्ष लाभ सुरक्षित माहौल के रूप में मिला है। इससे क्षेत्र में बाहरी संदिग्धों की तुरंत पहचान और धरपकड़ का मजबूत तंत्र बनेगा।\n• सुरक्षा समीक्षा: स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के दौरान जेल परिसरों के भीतर निर्माण और तैयारियों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। इससे कैदियों द्वारा वस्तुओं का दुरुपयोग करके भागने के रास्तों को बंद किया जाएगा।\n• अंतरराज्यीय पुलिसिंग: राज्यों की पुलिस एजेंसियों के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान से फरार अपराधियों को पकड़ना आसान होगा। इससे दूसरे राज्यों में शरण लेने वाले भगोड़ों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जा सकेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. श्रीनगर सेंट्रल जेल से कैदी कब और कैसे भागे थे?\nआरोपी 23 अगस्त की सुबह करीब 6 बजे स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के दौरान जुटाई गई रस्सी और पोल की मदद से जेल की चारदीवारी फांदकर भागे थे।\n\n2. पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान क्या है?\nपकड़े गए आरोपियों में से एक फरमान है जो राजगढ़ (चूरू, राजस्थान) का निवासी है, और दूसरा मुख्तार गुर्जर है जो जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है।\n\n3. कैदियों को राजस्थान के चूरू में कैसे पकड़ा गया?\nराजगढ़ के खेतों में दो अनजान व्यक्तियों को सोते देखकर ग्रामीणों ने चोर होने की आशंका में पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद राजगढ़ पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।\n\n4. दोनों कैदियों पर कौन से गंभीर आरोप दर्ज हैं?\nदोनों आरोपी पॉक्सो अधिनियम और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के तहत श्रीनगर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद थे।\n\n5. जेल से भागने के बाद कैदियों ने क्या अपराध किया था?\nभागने के बाद पैसे न होने के कारण आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर में ही एक महिला से 8,000 रुपये की लूटपाट की थी।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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    "चूरू पुलिस",
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