राजस्थान के डाबरा से निकलकर बिहार के मुख्य सचिव बने अमृतलाल मीणा, अब NTA की परीक्षा व्यवस्था सुधारेंगे करौली जिले के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अमृतलाल मीणा को NTA की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित हाई पावर टास्क फोर्स में लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट के रूप में शामिल किया गया है। राजस्थान के करौली जिले के एक साधारण से गांव डाबरा से अपनी प्रशासनिक यात्रा शुरू करने वाले वरिष्ठ IAS अधिकारी अमृतलाल मीणा को अब देश की सबसे बड़ी परीक्षा संस्थाओं में सुधार की अहम कमान सौंपी गई है। बिहार के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बनाई गई एक विशेष उच्चाधिकार प्राप्त समिति में स्थान दिया गया है। NTA की व्यवस्था सुधारने के लिए हाई पावर टास्क फोर्स का गठन यह छह सदस्यीय टास्क फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के परीक्षा संचालन तंत्र को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद स्वरूप देने के लिए पुख्ता सिफारिशें तैयार करेगी। इस महत्वपूर्ण पैनल की कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी के हाथों में है, जो इसके अध्यक्ष हैं। इसी पैनल में करौली से ताल्लुक रखने वाले सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अमृतलाल मीणा को लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ के तौर पर जोड़ा गया है। लगभग चार दशक का लंबा प्रशासनिक सफर करीब चालीस साल तक देश और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाले अमृतलाल मीणा अब देश भर की प्रतियोगी परीक्षाओं के भविष्य को संवारने में अपना अनुभव साझा करेंगे। वे 1989 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अगस्त 2024 से अगस्त 2025 तक बिहार के मुख्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त वे केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय में सचिव तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़े तमाम अहम पदों पर भी सफलतापूर्वक कार्य कर चुके हैं। संघर्षों से भरा शुरुआती जीवन और शिक्षा अमृतलाल मीणा मूल रूप से करौली जिले के डाबरा गांव के रहने वाले हैं। उनके परिजनों के अनुसार, उनकी शुरुआती स्कूली शिक्षा गांव के ही एक सरकारी विद्यालय में पूरी हुई थी। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे गंगापुर सिटी चले गए। परिवार की वित्तीय स्थिति अधिक सुदृढ़ न होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को ही अपनी सबसे बड़ी ढाल बनाया। उनके छोटे भाई और पीडब्ल्यूडी विभाग में XEN शरद कुमार बताते हैं कि अमृतलाल बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत मेधावी रहे। पैसों की तंगी या आर्थिक बाधाएं कभी भी उनके बुलंद हौसलों और लक्ष्यों के आड़े नहीं आ पाईं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से लेकर UPSC में पहली बार में सफलता अपनी उच्च शिक्षा के लिए अमृतलाल मीणा ने जयपुर के MNIT से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा की कठिन तैयारी शुरू की और अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर IAS बनने का मुकाम हासिल कर लिया। वर्ष 1989 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में आए और उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया। इसके बाद उन्होंने बिहार के विभिन्न जिलों और प्रशासनिक विभागों में अहम पद संभाले और अंततः राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद यानी मुख्य सचिव की कुर्सी तक पहुंचे। सेवानिवृत्ति के बाद भी देश सेवा में निरंतर सक्रियता अगस्त 2025 में मुख्य सचिव के पद से रिटायर होने के बाद भी अमृतलाल मीणा का प्रशासनिक सफर थमा नहीं है। केंद्र सरकार ने अब उन्हें NTA की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टास्क फोर्स का हिस्सा बनाकर देश की संपूर्ण परीक्षा व्यवस्था में ढांचागत सुधार लाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। यह टास्क फोर्स परीक्षा के आयोजन से लेकर मूल्यांकन तक हर स्तर पर कमियों को दूर करने का रोडमैप तैयार कर रही है। पैतृक गांव और लोकदेवता से आज भी जुड़ी हैं जड़ें शीर्ष पदों तक पहुंचने के बाद भी अमृतलाल मीणा का अपने पैतृक गांव और जड़ों से गहरा जुड़ाव आज भी बना हुआ है। उनके परिवार के मुताबिक, करौली के डाबरा गांव स्थित लोकदेवता क्षेत्रपाल बाबा में उनकी अटूट आस्था है। जब भी वे अपने गांव आते हैं, तो क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर में माथा टेकना और दर्शन करना कभी नहीं भूलते। करौली जैसे छोटे से ग्रामीण इलाके से निकलकर पहले बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था के सर्वोच्च पद को संभालना और अब राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का अहम हिस्सा बनना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। इसका आप पर असर इस प्रशासनिक फेरबदल और राष्ट्रीय टास्क फोर्स के गठन का सीधा प्रभाव देश के लाखों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर पड़ेगा। • भारत में: NTA परीक्षा प्रणाली में लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा बेहतर होने से नीट, जेईई और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर रोक लगेगी, जिससे छात्रों का सिस्टम पर भरोसा मजबूत होगा। • राजस्थान और करौली में: करौली जिले के डाबरा गांव और आसपास के युवाओं के लिए अमृतलाल मीणा का यह मुकाम एक बड़ी प्रेरणा है, जो यह साबित करता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रशासनिक सेवा में शीर्ष स्थान पाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता और सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों और NTA की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग के चलते यह कदम उठाया गया है। • पेपर लीक और धांधली पर लगाम: पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों के बाद सरकार ने परीक्षा तंत्र को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाई है। • अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों का चयन: देश के विभिन्न हिस्सों से आए शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी दिग्गजों को शामिल करके सरकार एक मजबूत और त्रुटिहीन परीक्षा रोडमैप तैयार करना चाहती है। • लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञता की आवश्यकता: परीक्षा के सुरक्षित परिवहन, प्रश्नपत्रों के वितरण और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अमृतलाल मीणा जैसे अनुभवी नौकरशाहों के लॉजिस्टिक्स ज्ञान की जरूरत समझी गई। सवाल-जवाब 1. अमृतलाल मीणा कौन हैं? अमृतलाल मीणा 1989 बैच के बिहार कैडर के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं जो बिहार के मुख्य सचिव रह चुके हैं। 2. अमृतलाल मीणा मूल रूप से किस जगह के रहने वाले हैं? वे मूल रूप से राजस्थान के करौली जिले के छोटे से गांव डाबरा के रहने वाले हैं। 3. NTA टास्क फोर्स के अध्यक्ष कौन हैं? NTA की इस छह सदस्यीय टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी कर रहे हैं। 4. अमृतलाल मीणा को NTA टास्क फोर्स में क्या जिम्मेदारी मिली है? उन्हें इस टास्क फोर्स में लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया गया है। 5. अमृतलाल मीणा ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कहां से की थी? उन्होंने जयपुर के MNIT से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। 6. वे बिहार के मुख्य सचिव के पद पर कब से कब तक रहे? वे अगस्त 2024 से अगस्त 2025 तक बिहार के मुख्य सचिव रहे। प्रेरणा और सबक अमृतलाल मीणा का डाबरा गांव से लेकर देश की शीर्ष प्रशासनिक और सलाहकार भूमिकाओं तक का सफर हर छात्र और युवा के लिए सीखने योग्य है। • शिक्षा को बनाएं सबसे बड़ा हथियार: आर्थिक तंगी या संसाधनों की कमी कभी भी आपके बड़े सपनों के आड़े नहीं आ सकती, यदि आपकी पढ़ाई के प्रति सच्ची लगन हो। • पहले ही प्रयास में सफलता का लक्ष्य: कड़ी मेहनत और सही रणनीति के साथ तैयारी करने पर UPSC जैसी कठिन परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की जा सकती है। • जड़ों से जुड़ाव: जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी सफलता मिल जाए, अपने पैतृक गांव, संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों को कभी नहीं भूलना चाहिए। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-dabara-se-nikalakara-bihar-ke-mukhya-sachiva-bane-amrit-lal-meena-aba-nta-ki-pariksha-vyavastha-sudharenge-32526 TrendKia — Har trend, sabse pehle.