# राजस्थान के देशनोक में नवरात्रि पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, काबा के दीदार को तरसती हैं आंखें

> बीकानेर के प्रसिद्ध करणी माता मंदिर में नवरात्रि के पावन पर्व पर हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जहां बीस हजार से ज्यादा चूहों और दुर्लभ सफेद काबा के दर्शन को बेहद फलदायी माना जाता है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-deshnok-men-navratri-para-umari-bhakton-ki-bhari-bhira-kaba-ke-didara-ko-tarasati-hain-ankhen-46481 · **Language:** Hindi
**Tags:** करणी माता मंदिर, देशनोक, बीकानेर, नवरात्रि, राजस्थान पर्यटन, काबा चूहे, धार्मिक स्थल

शारदीय व चैत्र नवरात्र के पावन दिनों में राजस्थान के बीकानेर जिले का देशनोक कस्बा अटूट श्रद्धा और धार्मिक उल्लास से सराबोर नजर आ रहा है। बीकानेर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद विश्वप्रसिद्ध करणी माता मंदिर में इन दिनों देश के कोने-कोने से शीश नवाने वाले भक्तों का तांता लगा हुआ है। वैसे तो साल भर यहां श्रद्धालुओं की नियमित आवाजाही बनी रहती है, मगर नवरात्रि के नौ दिनों में भक्तों की तादाद कई गुना बढ़ जाती है। पूरे पश्चिमी राजस्थान और बीकानेर अंचल के बाशिंदों के लिए यह धाम अगाध आस्था और कुलदेवीय परंपरा का सबसे बड़ा केंद्र है। दुनिया भर में चूहों वाली देवी के नाम से पहचानी जाने वाली इस पावन पीठ की सबसे अनूठी पहचान मंदिर के भीतर स्वच्छंद घूमते हजारों चूहे हैं।

## बीस हजार से अधिक काबा और सफेद चूहे के दर्शन का विशेष महात्म्य
इस पावन तीर्थ की सबसे अद्भुत बात यह है कि समूचे मंदिर प्रांगण में 20 हजार से भी अधिक चूहे बिना किसी रोक-टोक के विचरण करते हैं। स्थानीय राजस्थानी बोली में इन चूहों को आदरपूर्वक ‘काबा’ कहकर पुकारा जाता है। मंदिर आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु जगदम्बा स्वरूपा करणी माता के चरणों में नमन करने के उपरांत इन चूहों को भी श्रद्धापूर्वक भोग और प्रसाद अर्पित करता है। मान्यता है कि यदि किसी श्रद्धालु को परिसर में विचरण करते दुर्लभ सफेद चूहों के दर्शन सुलभ हो जाएं, तो उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं और इसे माता का साक्षात आशीर्वाद माना जाता है। इसी अभिलाषा में भक्त घंटों तक टकटकी लगाए सफेद काबा की एक झलक पाने का इंतजार करते हैं।

सुबह और शाम के समय जब माता की भव्य आरती संपन्न होती है, तब एक साथ अनगिनत काबा गर्भगृह और प्रांगण में बाहर निकल आते हैं, जो देखने वालों को विस्मय में डाल देता है। इस परंपरा के पीछे एक अत्यंत मार्मिक और दृढ़ लोक मान्यता जुड़ी हुई है। जनश्रुति एवं धार्मिक आस्था के अनुसार, देपावत जाति के पूर्वज अथवा वंशज अपनी देहलीला पूर्ण होने के बाद यमपुरी जाने की बजाय सीधे इस धाम में काबा यानी चूहों का चोला धारण कर माता की सेवा में वास करते हैं।

## संगमरमर की नक्काशी, चांदी के विशाल किवाड़ और स्वर्णिम छत्र
काबा के अनूठे कौतुक के अलावा देशनोक मंदिर की भव्य वास्तुशिल्प भी आगंतुकों को गहरे तक प्रभावित करती है। मुख्य प्रवेश द्वार पर सफेद संगमरमर के पत्थरों पर अत्यंत बारीक और मनमोहक नक्काशी की गई है। मुख्य द्वार पर लगे भारी-भरकम चांदी के खूबसूरत किवाड़, गर्भगृह में सुशोभित माता का दिव्य स्वर्ण छत्र और चूहों को नैवेद्य परोसने के लिए रखी गई चांदी की विशालकाय परात इस मंदिर के वैभव को चार चांद लगाते हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में इन दिव्य प्रतीकों के दर्शन मात्र से भक्तजन भावविभोर हो उठते हैं।

## साढ़े छह सौ साल प्राचीन गुफा और बीकानेर रियासत की नींव
धार्मिक इतिहास के पन्नों में करणी माता को मां जगदम्बा का प्रत्यक्ष अवतार स्वीकार किया गया है। आज जहां यह गगनचुंबी और कलात्मक मंदिर विराजमान है, ठीक उसी स्थल पर करीब साढ़े छह सौ वर्ष पूर्व एक प्राकृतिक गुफा हुआ करती थी। उसी गुफा में एकांतवास करते हुए माता करणी अपने आराध्य देव की कठोर तपस्या और नित्य पूजा-अर्चना किया करती थीं।

यह ऐतिहासिक एवं पवित्र गुफा आज भी मंदिर परिसर के भीतर मूल स्वरूप में सुरक्षित है। लोकमान्यताओं के मुताबिक, जब मां करणी ज्योतिर्लीन हुईं, तब उनकी पूर्व इच्छा का सम्मान करते हुए इसी गुफा के भीतर उनकी पावन प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इसके अतिरिक्त यह ऐतिहासिक तथ्य भी जनमानस में गहरे रचा-बसा है कि बीकानेर राज्य की ऐतिहासिक स्थापना और उसके उत्थान में मां करणी का साक्षात वरदान और आशीर्वाद ही मूल आधार रहा था। यही अद्वितीय रीति-रिवाज, अटूट आस्था और ऐतिहासिक विरासत देशनोक के इस पावन धाम को संपूर्ण विश्व में बेमिसाल बनाते हैं, जिसकी जीवंत बानगी नवरात्रि के इन पावन दिनों में साफ झलकती है।

## इसका आप पर असर
नवरात्रि के दौरान देशनोक में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ बढ़ने से स्थानीय यात्रा व्यवस्था, कतार प्रबंधन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

- **राजस्थान में:** बीकानेर और देशनोक के बीच चलने वाली बसों, टैक्सियों और निजी वाहनों में भारी भीड़ देखी जा रही है। दर्शन के लिए जाने वाले यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में अतिरिक्त समय लेकर अपनी यात्रा योजना बनानी चाहिए।
- **देशभर के श्रद्धालुओं के लिए:** अन्य राज्यों से बीकानेर आने वाले तीर्थयात्रियों के चलते धर्मशालाओं और होटलों की बुकिंग तेजी से भर रही है। यात्रा से पहले रहने और वापसी के आवागमन की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करना सुविधाजनक रहेगा।
- **स्थानीय व्यापारियों के लिए:** प्रसाद, माला, पूजन सामग्री और खानपान के खुदरा बाजारों में त्योहारी बिक्री में भारी उछाल आया है। इससे देशनोक कस्बे के छोटे दुकानदारों और आजीविका चलाने वालों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
- **मंदिर दर्शनार्थियों के लिए:** सुबह और शाम की आरती के वक्त गर्भगृह के आसपास काबा की संख्या और भीड़ दोनों चरम पर रहती हैं। सफेद चूहे के दर्शन की चाह रखने वाले श्रद्धालुओं को कतारों में धीरज बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
नवरात्रि के अवसर पर शक्ति स्वरूपा देवी के दर्शन की पारंपरिक महत्ता और देशनोक मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं के कारण यहां भारी भीड़ उमड़ती है।

- **त्योहारी धार्मिक महत्व:** हिंदू पंचांग में नवरात्रि को देवी दुर्गा और उनके अवतारों की आराधना का सबसे पुण्यकाल माना जाता है। श्रद्धालु करणी माता को मां जगदम्बा का साक्षात रूप मानकर व्रत और अनुष्ठान के दौरान उनका आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
- **चूहों के दर्शन का अनूठा विश्वास:** मंदिर परिसर में मौजूद बीस हजार से अधिक काबा और विशेष रूप से सफेद चूहे के दर्शन को सौभाग्य का सूचक माना जाता है। इस दुर्लभ दृश्य का साक्षी बनने की लालसा दूर-दराज के भक्तों को यहां खींच लाती है।
- **देपावत कुल की मान्यता:** लोक परंपरा के अनुसार देपावत जाति के लोगों का देहांत के बाद काबा रूप में मंदिर में निवास करने का विश्वास इस स्थल को विशिष्ट कुलदेवीय निष्ठा प्रदान करता है। इसी आस्था के चलते पीढ़ियों से इस परंपरा का मान रखा जा रहा है।
- **बीकानेर रियासत का ऐतिहासिक जुड़ाव:** करीब साढ़े छह सौ साल पहले माता की तपोस्थली रही गुफा और बीकानेर राज्य की स्थापना से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग भक्तों के मन में इस धाम के प्रति गहरी श्रद्धा जाग्रत करते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. करणी माता मंदिर राजस्थान में कहां स्थित है?
यह प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित देशनोक कस्बे में है, जो बीकानेर शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है।

### 2. मंदिर परिसर में रहने वाले चूहों को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?
मंदिर परिसर में विचरण करने वाले 20 हजार से अधिक चूहों को स्थानीय भाषा में आदरपूर्वक ‘काबा’ कहा जाता है।

### 3. मंदिर में सफेद चूहों के दर्शन का क्या धार्मिक महत्व है?
मंदिर में सफेद चूहे का दिखना अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जाता है, तथा मान्यता है कि इसके दर्शन से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

### 4. काबा और देपावत जाति को लेकर क्या लोक मान्यता प्रचलित है?
मान्यता है कि देपावत जाति के लोग मृत्यु के उपरांत यमलोक जाने के बजाय चूहों के रूप में करणी माता के मंदिर में निवास करते हैं।

### 5. मंदिर की प्राचीन गुफा का क्या इतिहास है?
करीब साढ़े छह सौ वर्ष पहले इसी गुफा में रहकर मां करणी अपने इष्ट देव की तपस्या करती थीं, और बाद में उनकी इच्छानुसार इसी गुफा में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई।

### 6. करणी माता मंदिर की वास्तुकला की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
मंदिर के मुख्य द्वार पर संगमरमर की महीन नक्काशी, बड़े-बड़े चांदी के किवाड़, माता का स्वर्ण छत्र और चूहों के प्रसाद की विशाल चांदी की परात मुख्य आकर्षण हैं।

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