राजस्थान के देसूरी की नाल मार्ग पर 19 सालों में गईं 150 से अधिक जानें, 2 हजार करोड़ का एलिवेटेड प्रोजेक्ट अब भी अटका राजस्थान में मारवाड़ और मेवाड़ को जोड़ने वाली संकरी देसूरी की नाल पर बीते 19 वर्षों में 150 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ₹2,000 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाले 9 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड स्काई-वे का प्रस्ताव तकनीकी खामियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते फाइलों में अटका पड़ा है। राजस्थान के मारवाड़ और मेवाड़ अंचल को आपस में जोड़ने वाला देसूरी की नाल मार्ग आज भी राहगीरों और वाहन चालकों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। अरावली की दुर्गम पहाड़ियों के बीच फैली यह संकरी सड़क वर्षों बीत जाने के बाद भी सुरक्षित नहीं हो सकी है। हर गुजरते दिन के साथ इस तीखे मोड़ वाले रास्ते पर जानलेवा हादसों की आशंका बनी रहती है, जबकि कागजों पर तैयार की गई 2 हजार करोड़ रुपए की एलिवेटेड रोड परियोजना प्रशासनिक प्रक्रियाओं और तकनीकी आपत्तियों के फेर में फंसी हुई है। स्थानीय निवासी और इस मार्ग से गुजरने वाले दैनिक यात्री लंबे समय से इस मार्ग के नवीनीकरण और स्काई-वे निर्माण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 19 साल पहले का वो खौफनाक हादसा और 150 से अधिक जानें इस मार्ग की भयावहता का इतिहास 7 सितंबर 2007 के उस काले दिन से जुड़ा है, जिसे राजस्थान आज तक नहीं भूल पाया है। उस शाम देसूरी की नाल से गुजर रहा एक अनियंत्रित ट्रक गहरी खाई में जा गिरा था। इस वाहन में रामदेवरा दर्शन के लिए जा रहे जातरू सवार थे। इस भीषण दुर्घटना में 86 से अधिक श्रद्धालुओं की मौके पर या उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। इस हादसे की विभीषिका इतनी तीव्र थी कि शेमल गांव में एक ही श्मशान घाट पर 30 से अधिक मासूमों और ग्रामीणों का एक साथ अंतिम संस्कार करना पड़ा था। उस घटना से शेमल, मादड़ी देवस्थान और भावा गांव के कई परिवार पूरी तरह तबाह हो गए थे। उस समय दुर्घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी दिनेश के अनुसार, हादसे का दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि राजसमंद के सरकारी अस्पताल में शवों को रखने के लिए जगह कम पड़ गई थी। दुर्घटनाग्रस्त ट्रक के मलबे के नीचे दबे एक 6 से 7 साल के मासूम बच्चे को बाहर निकालते समय उसका शरीर दो हिस्सों में विभाजित हो चुका था। बीते 19 सालों के दौरान जो बच्चे इस हादसे में अनाथ हुए थे, वे अब वयस्क हो चुके हैं, लेकिन देसूरी की नाल में हादसों का सिलसिला नहीं थमा है। इस समयावधि में इस खूनी मोड़ पर 150 से अधिक लोग अपनी जानें गंवा चुके हैं। अरावली की जटिल भौगोलिक संरचना और सड़क की तकनीकी कमियां पाली और राजसमंद जिलों की सीमा पर स्थित यह मार्ग अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण निर्माण और यातायात प्रबंधन के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। रास्ते में अत्यधिक ढलान के साथ-साथ अत्यंत तीखे मोड़ मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, पर्याप्त दृश्य दूरी न होने के कारण मोड़ पर सामने से आते वाहनों का अंदाजा लगाना चालकों के लिए असंभव सा हो जाता है। मार्ग के एक तरफ गहरी खाई और नदी बहती है, जबकि दूसरी ओर अरावली की ऊंची और सीधी चट्टानी पहाड़ियां खड़ी हैं। इस भौगोलिक बनावट के कारण सड़क का चौड़ीकरण करना या पारंपरिक तरीके से नया निर्माण करना लगभग असंभव है। भौगोलिक चुनौतियों के साथ-साथ इस मार्ग की वर्तमान अवसंरचना भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सड़क का ड्रेनेज सिस्टम बदहाल स्थिति में है, जिससे वर्षा ऋतु के दौरान पानी की निकासी सही ढंग से नहीं हो पाती और पानी सड़क पर जमा होकर डामर की सतह को नुकसान पहुंचाता है। पेवमेंट कई स्थानों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे वाहनों के फिसलने और अनियंत्रित होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इन सभी कारणों से पुलिस और परिवहन विभाग ने इस पूरे खिंचाव को डेंजर जोन घोषित कर रखा है। 2 हजार करोड़ रुपए के एलिवेटेड स्काई-वे का प्रस्ताव और वर्तमान स्थिति इस जानलेवा रास्ते का स्थायी समाधान निकालने के लिए 9 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड स्काई-वे का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। लगभग 2 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत नदी की दिशा में सिंगल पोल यानी एकल खंभों पर टिका हुआ एलिवेटेड रोड बनाने की योजना तैयार की गई है। इस विशिष्ट डिजाइन का मुख्य उद्देश्य वनों की कटाई को न्यूनतम रखना और अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता को समाप्त करना है। यह प्रस्तावित निर्माण पुराने स्टेट हाईवे-16 (SH-16) के किलोमीटर 281/500 से किलोमीटर 290/00 के मध्य किया जाना तय हुआ है। पाली से चारभुजा तक के कुल 83 किलोमीटर लंबे संपूर्ण मार्ग के कायाकल्प के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से सिफारिश की गई है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 1,800 से 2,000 करोड़ रुपए के बीच है। पाली के सांसद पीपी चौधरी ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है और इसमें देसूरी नाल का एलिवेटेड रोड प्रमुख घटक के रूप में शामिल है। उन्होंने केंद्र सरकार से जल्द से जल्द वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई है। दूसरी ओर, राजस्थान राज्य सड़क विकास और निर्माण निगम (आरएसआरडीसी) की अधीक्षण अभियंता अंजू चौधरी के अनुसार, देसूरी-चारभुजा एलिवेटेड रोड की तैयार की गई डीपीआर पर कुछ तकनीकी आपत्तियां दर्ज की गई थीं। वर्तमान में संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा उन आपत्तियों का निवारण करने और रिपोर्ट में आवश्यक सुधार व संशोधन करने की प्रक्रिया गति पर है, जिसके पूरा होने के बाद ही परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसका आप पर असर देसूरी की नाल मार्ग के सुरक्षित होने और एलिवेटेड स्काई-वे प्रोजेक्ट के पूरा होने से पाली, राजसमंद और पूरे राजस्थान के यात्रियों के लिए आवागमन में बड़ा बदलाव आएगा। • राजस्थान भर में: मारवाड़ और मेवाड़ को आपस में जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर हादसों में भारी कमी आएगी। अंतर-जिला व्यापार और पर्यटन के लिए परिवहन अधिक सुरक्षित और निर्बाध हो जाएगा। • पाली एवं राजसमंद में: स्थानीय ग्रामीणों और दैनिक यात्रियों को जानलेवा अंधे मोड़ों और संकरी सड़कों से मुक्ति मिलेगी। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए राजसमंद और पाली के अस्पतालों तक पहुंचना आसान और त्वरित हो जाएगा। • माल ढुलाई चालकों के लिए: भारी कमर्शियल वाहनों को चढ़ाई और ढलान वाले खतरनाक मोड़ों पर दुर्घटनाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। वाहन चालकों का समय और ईंधन दोनों बचेगा। • पर्यावरण एवं स्थानीय वन क्षेत्र: सिंगल पोल तकनीक से एलिवेटेड रोड बनने के कारण अरावली पहाड़ियों में कम से कम पेड़ काटे जाएंगे। वनों की कटाई और भूमि अधिग्रहण की जटिलताएं कम होंगी। ऐसा क्यों हुआ देसूरी की नाल में लगातार हादसे होने और एलिवेटेड रोड परियोजना में देरी के पीछे भौगोलिक और तकनीकी कारण जिम्मेदार हैं। • भौगोलिक संरचना: एक तरफ गहरी खाई और दूसरी तरफ ऊंची अरावली पहाड़ियां होने के कारण रास्ता अत्यधिक संकरा और तीखे मोड़ों से भरा है। कम दृश्यता और अत्यधिक ढलान के कारण वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं। • डीपीआर में तकनीकी आपत्तियां: आरएसआरडीसी द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर तकनीकी कमियां पाई गईं। इन कमियों में संशोधन और सुधार का कार्य जारी होने के कारण अंतिम स्वीकृति में देरी हो रही है। • पर्यावरण और भूमि अधिग्रहण की जटिलताएं: पहाड़ी और वन क्षेत्र होने के कारण पारंपरिक सड़क चौड़ीकरण संभव नहीं है। पेड़ों को बचाने के लिए 9 किमी सिंगल पोल एलिवेटेड रोड की विशेष इंजीनियरिंग डिजाइन बनानी पड़ी है। सवाल-जवाब 1. देसूरी की नाल में 7 सितंबर 2007 को क्या हुआ था? 7 सितंबर 2007 को रामदेवरा जा रहे श्रद्धालुओं से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया था, जिसमें 86 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। 2. देसूरी की नाल मार्ग पर पिछले 19 वर्षों में कितने हादसे और मौतें हुई हैं? बीते 19 वर्षों में इस खतरनाक मोड़ और संकरी सड़क पर हादसों के कारण 150 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 3. देसूरी की नाल के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना की लागत कितनी है? प्रस्तावित 9 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड स्काई-वे की अनुमानित लागत लगभग 2,000 करोड़ रुपए है। 4. एलिवेटेड रोड का निर्माण किस मार्ग पर प्रस्तावित है? यह निर्माण पुराने स्टेट हाईवे-16 (SH-16) के किलोमीटर 281/500 से 290/00 के बीच नदी की तरफ सिंगल पोल संरचना पर किया जाना प्रस्तावित है। 5. एलिवेटेड रोड परियोजना की फाइल फिलहाल क्यों अटकी हुई है? आरएसआरडीसी द्वारा तैयार डीपीआर (DPR) पर कुछ तकनीकी आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिनमें सुधार और संशोधन का कार्य वर्तमान में चल रहा है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-desuri-ki-nal-marg-par-19-saalon-me-gain-150-se-adhik-jaanen-2000-crore-ka-elevated-project-ab-bhi-atka-32899 TrendKia — Har trend, sabse pehle.