राजस्थान के धौलपुर का एकीकृत पार्क जहां 13 दिनों तक रखा गया था महात्मा गांधी का अस्थि कलश धौलपुर के राज निवास पैलेस के सामने स्थित ऐतिहासिक एकीकृत पार्क रियासती दौर की जलदार तोप और महात्मा गांधी से जुड़ी पावन स्मृतियों को समेटे हुए है। राजस्थान के धौलपुर में स्थित एकीकृत पार्क केवल रोजमर्रा की सैर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रियासतकालीन वैभव से लेकर स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था तक के ऐतिहासिक सफर की एक अनोखी दास्तान बयां करता है। राज निवास महल के ठीक सामने बना यह सार्वजनिक स्थल आज भी अपने भीतर गुजरे जमाने की कई महत्वपूर्ण निशानियां संजोए हुए है। परिसर में प्रवेश करते ही रियासतकाल की भव्य जलदार तोप नजर आती है, जो पुराने दौर की राजशाही व्यवस्था और तकनीकी कारीगरी का प्रतीक मानी जाती है। स्थानीय नागरिक और बाहर से आने वाले आगंतुक इस स्थल पर आकर इलाके के गौरवशाली इतिहास को महसूस करते हैं। हरियाली और जैव विविधता के मामले में भी यह परिसर बेहद समृद्ध माना जाता है। पार्क के भीतर लगभग 100 से अधिक अलग-अलग प्रजातियों के पेड़-पौधे मौजूद हैं, जो पूरे वातावरण को शुद्ध और प्राकृतिक छटा से भरपूर बनाते हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम के वक्त शहर के लोग यहां ताजी हवा में टहलने, दौड़ने और शारीरिक व्यायाम के लिए बड़ी तादाद में एकत्र होते हैं। इसके साथ ही, स्थानीय समाज में इस जगह का गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव भी है। आम सैर के अलावा आज भी धौलपुर के लोग गोद भराई जैसे पारंपरिक मांगलिक और पारिवारिक रस्में पूरी करने के लिए इस खुले और शांत परिसर को प्राथमिकता देते हैं। राजशाही से लोकतंत्र तक का अहम पड़ाव इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार, इस पार्क ने धौलपुर में राजतंत्र के खात्मे और लोकतांत्रिक शासन के आगमन के दौर को बेहद करीब से देखा है। धौलपुर रियासत के राजाओं ने अपने शासनकाल के दौरान यहां एक विशेष जलदार तोप स्थापित कराई थी। सदियां बीत जाने के बाद भी यह तोप आज पार्क के मुख्य आकर्षणों में शामिल है और इसे देखने के लिए दूरदराज से लोग पहुंचते हैं। यह हथियार न केवल उस दौर के ठाठ-बाट को दर्शाता है, बल्कि रियासतकालीन सुरक्षा व्यवस्था और कलात्मक बनावट का भी बेजोड़ नमूना है। देश में लोकतंत्र की स्थापना के बाद प्रशासनिक जरूरतों और जनसुविधाओं को देखते हुए इस जगह के स्वरूप में कई रूपांतरण किए गए। इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि शुरुआती दौर में यहां तीन स्वतंत्र पार्क बनाए गए थे, जिनके नाम जवाहर पार्क, गांधी पार्क और सुभाष पार्क रखे गए थे। ये तीनों हिस्से अलग-अलग ऐतिहासिक संदर्भों और राष्ट्रनायकों की स्मृतियों का प्रतिनिधित्व करते थे। कालांतर में नगर प्रशासन ने इन तीनों टुकड़ों को आपस में जोड़कर एक बड़ा एकीकृत पार्क तैयार कर दिया, ताकि धौलपुर शहर के निवासियों को एक विशाल, खुला और हरा-भरा केंद्र उपलब्ध कराया जा सके। राष्ट्रपिता की यादें और धरोहर के संरक्षण की मांग इस परिसर का सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक पहलू राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्मृतियों से जुड़ा है। पार्क के भीतर बने गांधी चबूतरे पर बापू की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जिसके निकट एक पुराना फव्वारा परिसर की सुंदरता को और निखारता है। इतिहासकार अरविंद शर्मा रेखांकित करते हैं कि महात्मा गांधी के निधन के बाद उनकी अस्थियों का एक कलश धौलपुर लाया गया था और उसे इसी स्थान पर पूरे 13 दिनों तक जनता के दर्शनार्थ रखा गया था। उन 13 दिनों तक समूचे शहर ने यहां शोक सभाएं आयोजित कर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। महात्मा गांधी से जुड़ी इस भावुक घटना की वजह से ही लोकमानस में इसे गांधी पार्क के रूप में एक मजबूत और अमिट पहचान मिली। वर्तमान समय में भी यह पार्क धौलपुर के विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हालांकि, स्थानीय इतिहासकारों का यह भी मानना है कि इस अनमोल धरोहर को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए प्रशासन की तरफ से और अधिक व्यवस्थित संरक्षण और सौंदर्यीकरण प्रयासों की आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इसके ऐतिहासिक महत्व को समझ सकें। इसका आप पर असर यह ऐतिहासिक पार्क धौलपुर के निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण सामुदायिक और पर्यावरणीय केंद्र बना हुआ है। • राजस्थान में: राज्य की रियासतकालीन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी विरासतों के दस्तावेजीकरण को नई पहचान मिलती है। इससे आने वाले समय में क्षेत्रीय धरोहर स्थलों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित होगा। • धौलपुर में: शहर के नागरिकों को 100 से अधिक वृक्ष प्रजातियों के बीच सैर, व्यायाम और पारिवारिक अनुष्ठानों के लिए एक समृद्ध सार्वजनिक स्थल उपलब्ध है। इतिहासकार इस स्थल के बेहतर संरक्षण और पर्यटन विकास की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ इस एकीकृत पार्क का निर्माण और इसका वर्तमान स्वरूप धौलपुर के राजनीतिक बदलावों और ऐतिहासिक घटनाओं का प्रत्यक्ष परिणाम है। • रियासती वैभव की स्थापना: धौलपुर रियासत के तत्कालीन शासकों ने राज निवास महल के सामने अपनी शान-ओ-शौकत और रक्षा कला के प्रतीक के तौर पर जलदार तोप स्थापित करवाई थी। • लोकतांत्रिक पुनर्गठन: आजादी और लोकतंत्र की शुरुआत के बाद पहले यहां जवाहर, गांधी और सुभाष नाम से तीन अलग पार्क बनाए गए, जिन्हें बाद में नागरिकों की सुविधा के लिए एक बड़े एकीकृत पार्क में बदल दिया गया। • गांधीजी का शोक काल: महात्मा गांधी के देहावसान के बाद उनके अस्थि कलश को 13 दिनों तक इसी परिसर में रखा गया था, जिसके चलते इसे गांधी पार्क के रूप में स्थायी पहचान मिली। सवाल-जवाब 1. धौलपुर का यह एकीकृत पार्क कहां स्थित है? यह ऐतिहासिक पार्क राजस्थान के धौलपुर शहर में राज निवास महल के ठीक सामने स्थित है। 2. इस पार्क में रियासतकाल की कौन सी प्रमुख निशानी मौजूद है? पार्क में रियासतकालीन राजाओं द्वारा तैयार करवाई गई विशेष जलदार तोप आज भी स्थापित है। 3. महात्मा गांधी का अस्थि कलश यहां कितने दिनों तक रखा गया था? महात्मा गांधी के निधन के बाद उनका अस्थि कलश इस पार्क में पूरे 13 दिनों तक दर्शनार्थ रखा गया था। 4. एकीकृत होने से पहले यहां कौन से तीन पार्क थे? प्रशासन द्वारा एक करने से पहले यहां जवाहर पार्क, गांधी पार्क और सुभाष पार्क नाम से तीन अलग-अलग मैदान थे। 5. पार्क में वनस्पतियों की क्या स्थिति है? इस पूरे परिसर में 100 से अधिक विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे लगे हुए हैं जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-dholpur-ka-ekikrita-parka-jahan-13-dinon-taka-rakha-gaya-tha-mahatma-gandhi-ka-asthi-kalasha-45148 TrendKia — Har trend, sabse pehle.