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  "title": "राजस्थान के एक अस्पताल में छह दिन के भीतर पांच महिलाओं की डिलीवरी के बाद मौत, गहलोत ने उठाए सवाल",
  "summary": "भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में छह दिन के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन थिएटर बंद कर जांच कमेटी बनाई, वहीं अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।",
  "content": "भीलवाड़ा जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां बीते छह दिनों के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत हो गई, जिसने पूरे अस्पताल प्रशासन में खलबली मचा दी है। जानकारी के अनुसार इन सभी महिलाओं की डिलीवरी ऑपरेशन यानी सीजेरियन के जरिए हुई थी। मामला सामने आते ही अस्पताल की ओर से ऑपरेशन थिएटर यानी ओटी को बंद कर दिया गया, वहीं मौतों की वजह जानने के लिए अलग से जांच कमेटी बना दी गई।\n\nअस्पताल प्रशासन ने क्या कहा\nमहात्मा गांधी अस्पताल के पीएमओ डॉक्टर अरुण गौड ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ओटी को बंद कर दिया गया है। उनके मुताबिक पांचों प्रसूताओं की मौत की वजहें अलग अलग हैं। किसी महिला की मौत का कारण हीमोग्लोबिन का कम होना बताया गया तो किसी की मौत अन्य बीमारियों की वजह से हुई। डॉक्टर गौड ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है और टीम मामले की तह तक जाने में जुटी है।\n\n \n\nजांच के लिए बनी छह सदस्यीय टीम\nमृतक महिलाओं के परिजनों ने इन मौतों के लिए सीधे तौर पर अस्पताल के डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल ने छह सीनियर डॉक्टरों की एक जांच कमेटी बनाई, जो अभी इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। इसी बीच शुक्रवार को जिले के पोटला गांव की रहने वाली 32 वर्षीय संगीता जीनगर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तुरंत मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।\n\nअशोक गहलोत ने सरकार को घेरा\nइस पूरे मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्विटर पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में मात्र छह दिनों के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत हृदयविदारक और बेहद चिंताजनक है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति उन्होंने संवेदना जताई। अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बावजूद वहां लगातार सीजेरियन ऑपरेशन किए जाते रहे और तीस से चालीस ऑपरेशनों के बीच महज पांच सर्जिकल सेट होना सीधे तौर पर घोर लापरवाही और बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को उजागर करता है। उन्होंने कोटा, बीकानेर और जोधपुर में हुई पहले की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अब भीलवाड़ा की यह स्थिति भी बेहद विचलित करने वाली है। अशोक गहलोत ने सवाल उठाया कि क्या राजस्थान को भाजपा सरकार ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है, क्योंकि एक के बाद एक ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे लगता है कि सरकार को इससे कोई सरोकार ही नहीं है। उन्होंने मांग की कि राजस्थान के अलग अलग अस्पतालों में बन रही ऐसी स्थितियों के सही आकलन और निदान के लिए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को एक्सपर्ट टीम भेजकर जांच करवानी चाहिए, ताकि प्रसूताओं की जान बचाई जा सके।\n\nअस्पताल का गहलोत के आरोपों पर जवाब\nअशोक गहलोत के बयान के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से भी सफाई दी गई। पीएमओ डॉक्टर अरुण गौड ने कहा कि पांचों प्रसूताओं की मौत के मामले में संक्रमण की कोई पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि अस्पताल की ओटी तय नियमों के तहत ही संचालित होती है और इस मुद्दे पर सभी विभागाध्यक्षों की बैठक भी बुलाई जा चुकी है। डॉक्टर गौड के अनुसार ओटी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले नर्सिंग स्टाफ को भी नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाता है और संक्रमण से बचाव के लिए लगातार सैंपलिंग की जाती रहती है। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले ही मुख्यालय को सैंपल भेजे गए थे, जिसमें गायनिक ओटी का सैंपल फेल आने पर उस ओटी को तुरंत बंद कर दिया गया।\n\nजिला कलेक्टर की बैठक में सामने आए मौत के कारण\nशनिवार को भीलवाड़ा जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें उन्हें हर मौत की अलग अलग वजह बताई गई। बैठक में बताया गया कि दो प्रसूताओं की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई, जबकि तीसरी महिला की मौत फेफड़ों की समस्या यानी पल्मोनरी एंबॉलिज्म के कारण हुई। चौथी महिला के मामले में तो कोई ऑपरेशन हुआ ही नहीं था, वह एक गर्भवती महिला थी। वहीं पांचवीं महिला असल में प्रसूता थी ही नहीं, उसे सिर्फ गायनिक बीमारी थी और उसकी सर्जरी पहले से तय यानी प्लांड सर्जरी थी।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह मामला सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान सुरक्षा मानकों, ऑपरेशन थिएटर की सफाई और सर्जिकल उपकरणों की उपलब्धता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़ा करता है, जो देशभर के मरीजों के लिए चिंता का विषय है।\n• भीलवाड़ा/राजस्थान में: महात्मा गांधी अस्पताल की गायनिक ओटी बंद होने से भीलवाड़ा और आसपास के इलाकों से डिलीवरी के लिए इस अस्पताल पर निर्भर गर्भवती महिलाओं को जांच पूरी होने तक वैकल्पिक इंतजाम या दूसरे अस्पताल का रुख करना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह मामला किस अस्पताल से जुड़ा है?\nयह मामला भीलवाड़ा जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय से जुड़ा है।\n\n2. कितने दिनों में कितनी प्रसूताओं की मौत हुई?\nछह दिनों के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत हो गई और सभी की डिलीवरी ऑपरेशन (सीजेरियन) से हुई थी।\n\n3. अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाया?\nअस्पताल ने ऑपरेशन थिएटर बंद कर दिया और मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल ने छह सीनियर डॉक्टरों की जांच कमेटी बना दी।\n\n4. अशोक गहलोत ने क्या आरोप लगाए?\nअशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि ओटी में संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बावजूद सीजेरियन ऑपरेशन जारी रहे और तीस से चालीस ऑपरेशनों के बीच सिर्फ पांच सर्जिकल सेट थे।\n\n5. अस्पताल ने गहलोत के आरोपों पर क्या जवाब दिया?\nपीएमओ डॉक्टर अरुण गौड ने कहा कि संक्रमण की कोई पुष्टि नहीं हुई है और ओटी नियमों के तहत ही संचालित होती है, हालांकि गायनिक ओटी का सैंपल फेल आने पर उसे बंद कर दिया गया।\n\n6. जिला कलेक्टर की बैठक में मौत के क्या कारण बताए गए?\nदो प्रसूताओं की मौत कार्डियक अरेस्ट से, तीसरी की पल्मोनरी एंबॉलिज्म से हुई, चौथी महिला का ऑपरेशन ही नहीं हुआ था और पांचवीं महिला प्रसूता थी ही नहीं, उसकी प्लांड गायनिक सर्जरी थी।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-07-11",
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    "प्रसूता मौत",
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