# राजस्थान के गांवों में सरपंची की होड़, भरतपुर में जमीन पर लेटकर दंडवत परिक्रमा करते दिखे दावेदार

> राजस्थान में ग्राम पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट शुरू होते ही भरतपुर के कई गांवों में सरपंच पद के दावेदार जमीन पर दंडवत लेटकर परिक्रमा करते हुए ग्रामीणों से वोट और आशीर्वाद मांग रहे हैं.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-ganvon-men-sarapnchi-ki-hora-bharatpur-men-jamina-para-letakara-dndavata-parikrama-karate-dikhe-davedara-56176 · **Language:** Hindi
**Tags:** भरतपुर, राजस्थान पंचायत चुनाव, सरपंच चुनाव, दंडवत परिक्रमा, सलाबाद, अवार, रूपवास

राजस्थान के देहाती इलाकों में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है, जिसके चलते गांवों में चुनावी रंग पूरी तरह चढ़ता नजर आ रहा है. मतदान की आधिकारिक तारीखें सामने आने से पहले ही सरपंची के भावी उम्मीदवारों ने जनसमर्थन जुटाने की खातिर बेहद असाधारण और चौंकाने वाले तौर-तरीके आजमाने शुरू कर दिए हैं. कई दावेदार जहां दशकों पुरानी रिवायत के अनुसार चौखट-चौखट जाकर मतदाताओं के बीच अपनी बात रख रहे हैं, वहीं कुछ प्रत्याशी समूचे गांव का चक्कर दंडवत परिक्रमा के जरिए लगाकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींच रहे हैं. भरतपुर और उसके नजदीकी ग्रामीण इलाकों में वोट हासिल करने की यह अनूठी शैली इन दिनों हर चौपाल पर बहस का सबब बन चुकी है.

## जमीन पर लेटकर चरणबद्ध तरीके से नाप रहे गांव की सीमाएं
पंचायत चुनाव में अपनी दावेदारी मजबूत करने उतरे कई लोग बस्तियों, प्रमुख रास्तों और संकरी गलियों में बाकायदा जमीन पर लेटकर परिक्रमा पूरी कर रहे हैं. इस कठिन कवायद के दौरान प्रत्याशी जमीन पर लेटकर दंडवत प्रणाम करते हैं, फिर उठकर उसी बिंदु से आगे बढ़कर दोबारा लेटते हैं और इसी क्रम को दोहराते हुए गांव की सीमाओं को नापते हैं. ग्रामीणों के लिए यह दृश्य कौतूहल और हैरानी का बड़ा केंद्र बना हुआ है. धूल भरी पगडंडियों, तंग गलियारों और सार्वजनिक चौराहों से इसी मुद्रा में गुजरते हुए ये दावेदार ग्रामीणों के हाथ जोड़कर अपने पक्ष में समर्थन और बड़े-बुजुर्गों से जीत का आशीर्वाद मांग रहे हैं.

## सलाबाद, अवार और रूपवास के दावेदारों का अनोखा प्रचार
भरतपुर जिले के तहत आने वाली ग्राम पंचायत सलाबाद और ग्राम पंचायत अवार के सरपंच पद के दावेदार अपनी इसी दंडवत परिक्रमा को लेकर इलाके भर में विशेष चर्चा बटोर रहे हैं. इन दोनों पंचायतों के अलावा सीमावर्ती कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी सरपंची के आकांक्षी इसी राह पर कदम बढ़ाते देखे जा रहे हैं. रूपवास इलाके में भी कई भावी उम्मीदवार पूरे गांव की परिक्रमा जमीन पर लेटकर करते दिखाई दे रहे हैं. इन प्रत्याशियों का मुख्य उद्देश्य इस अनोखे कदम के सहारे गांव के दूरदराज स्थित हर मजरे, टोले और नुक्कड़ तक पहुंचना है, ताकि आम वोटरों के जेहन में अपनी अलग और अमिट छवि बनाई जा सके.

## धार्मिक निष्ठा या सियासी दांव, मतदाताओं के बीच बंटी राय
मतदान से पहले प्रत्याशियों के इस अनूठे तेवर को देखकर ग्रामीण समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. बस्ती के बुजुर्ग इस तरह के प्रयास को उम्मीदवार की गहरी धार्मिक आस्था, समर्पण और लोक मर्यादा से जोड़कर आंक रहे हैं. इसके विपरीत, युवा वर्ग इसे मतदाताओं को आकर्षित करने की एक सोची-समझी और लीक से हटकर की गई प्रचार रणनीति मान रहा है. पंचायत चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पहले गांवों में चल रही यह सांस्कृतिक और सियासी गहमागहमी अब जनमानस का मुख्य विषय बन चुकी है. अब आने वाला वक्त ही बताएगा कि जमीन पर लेटकर वोट मांगने का यह तरीका प्रत्याशियों को मतपेटी में कितनी बढ़त दिला पाता है और ग्रामीण किसे अपनी पंचायत का नेतृत्व सौंपते हैं.

## इसका आप पर असर
इस अनूठी चुनावी शैली का सीधा असर ग्रामीण मतदाता व्यवहार और स्थानीय चुनावी समीकरणों पर पड़ रहा है.

- **राजस्थान में:** आगामी पंचायत चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही ग्रामीण स्तर पर राजनीतिक लामबंदी चरम पर पहुंच गई है. आम ग्रामीणों को मतदान की तारीखों से पहले ही अपने क्षेत्र के दावेदारों के इरादों और उनके जनसंपर्क के तरीकों को करीब से परखने का अवसर मिल रहा है.
- **भरतपुर में:** सलाबाद, अवार और रूपवास जैसी ग्राम पंचायतों में पारंपरिक प्रचार की जगह भावनात्मक और सांस्कृतिक तौर-तरीकों ने ले ली है. स्थानीय निवासियों को यह तय करना होगा कि वे इस तरह के प्रतीकात्मक प्रदर्शनों से प्रभावित होंगे या फिर बुनियादी विकास और स्थानीय मुद्दों के आधार पर सरपंच का चयन करेंगे.
- **मतदाताओं की जागरूकता:** घर-घर दस्तक देने के बजाय पूरे गांव की परिक्रमा करने से छोटे मजरों के वोटरों से भी सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है. इससे दूरदराज बस्तियों के लोग भी चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने और अपने सवाल उठाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं.
- **प्रत्याशियों की रणनीति:** सामान्य प्रचार की तुलना में दंडवत परिक्रमा जैसे कदम अन्य प्रतिद्वंद्वियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना रहे हैं. इसके चलते आने वाले दिनों में अन्य दावेदार भी मतदाताओं को रिझाने के लिए नए और अप्रत्याशित तरीके आजमाते नजर आ सकते हैं.

## ऐसा क्यों हुआ
भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में सरपंच पद के प्रत्याशियों द्वारा दंडवत परिक्रमा करने के पीछे मुख्य रूप से अपनी पहचान स्थापित करने और मतदाताओं का ध्यान खींचने की चाहत है.

- **अनोखे प्रचार की तलाश:** सामान्य बैठकों और पर्चे बांटने के बजाय लीक से हटकर किया गया यह प्रयास प्रत्याशी को तुरंत चर्चा में ला देता है. पारंपरिक चुनावी हथकंडों के बीच खुद को अलग दिखाने के लिए उम्मीदवारों ने यह तरीका अपनाया है.
- **धार्मिक आस्था और समर्पण का प्रदर्शन:** ग्रामीण समाज में दंडवत परिक्रमा को घोर तपस्या और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है. प्रत्याशी इसके जरिए ग्रामीणों के दिलों में अपनी विनम्र, निष्ठावान और जमीन से जुड़ी छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं.
- **सभी मजरों तक पहुंचने की कवायद:** कई पंचायतों में दूरदराज के छोटे टोले उपेक्षित रह जाते हैं. सीमावर्ती गलियों से लेकर गांव के हर कोने तक दंडवत यात्रा निकालने से प्रत्याशी हर एक वोटर के दरवाजे तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा पा रहे हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. भरतपुर के गांवों में सरपंच प्रत्याशी किस अनोखे तरीके से प्रचार कर रहे हैं?
प्रत्याशी जमीन पर लेटकर पूरे गांव की दंडवत परिक्रमा कर रहे हैं और मतदाताओं से समर्थन मांग रहे हैं.

### 2. यह अनोखा प्रचार किन प्रमुख ग्राम पंचायतों में देखने को मिला है?
भरतपुर जिले की सलाबाद, अवार और रूपवास क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में यह तरीका प्रमुख रूप से देखा गया है.

### 3. दंडवत परिक्रमा की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की जाती है?
प्रत्याशी जमीन पर लेटकर प्रणाम करते हैं और फिर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ते हुए गांव की सीमा नापते हैं.

### 4. ग्रामीणों और बुजुर्गों की इस अनूठे प्रचार पर क्या राय है?
बुजुर्ग इसे उम्मीदवार की धार्मिक निष्ठा और आस्था मान रहे हैं, जबकि युवा इसे प्रभावी चुनावी रणनीति देख रहे हैं.

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