# राजस्थान के जोधपुर में लाल-पीले रक्षासूत्र से सजी गजानन की अनोखी प्रतिमा, 31 किलो मौली से तैयार हुआ बप्पा का भव्य रूप

> जोधपुर की लाल सिंह कॉलोनी में 31 किलो पवित्र मौली धागे से भगवान गणेश की एक अद्भुत और भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो इस उत्सव में श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-jodhpur-men-lala-pile-rakshasutra-se-saji-gajanand-ki-anokhi-pratima-31-kilo-mauli-se-taiyara-hua-bappa-ka-bhavya-rup-33209 · **Language:** Hindi
**Tags:** जोधपुर, गणेश उत्सव, मौली वाले गजानन, राजस्थान, गणेश चतुर्थी, घनश्याम वैष्णव, प्रकाश माली

राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में इस समय गणेश उत्सव की धूम है और हर जगह बप्पा की आराधना पूरे हर्षोल्लास के साथ की जा रही है। इसी भक्तिमय माहौल के बीच, जोधपुर शहर में स्थापित भगवान गणेश की एक बेहद अनोखी और भव्य प्रतिमा इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जोधपुर की लाल सिंह कॉलोनी में स्थापित गजानन महाराज की यह प्रतिमा किसी साधारण मिट्टी या प्लास्टर ऑफ पेरिस से नहीं, बल्कि पूरी तरह से पवित्र हिंदू धागे यानी मौली से तैयार की गई है। लाल और पीले रंग के पावन धागों से सुसज्जित बप्पा का यह अनुपम स्वरूप देखने में जितना मनमोहक है, श्रद्धालुओं की आस्था के लिहाज से भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस कलात्मक और अनोखे रूप को देखने के लिए शहर के कोने-कोने से लोग पंडाल में पहुंच रहे हैं।

## 31 किलो पवित्र मौली से तैयार हुई 300 किलो की भव्य प्रतिमा
हिंदू धर्म में मौली या रक्षासूत्र को बेहद पवित्र और हर मांगलिक कार्य का आधार माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले हाथ की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने की हमारी प्राचीन और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी पावन मौली का रचनात्मक उपयोग करके जोधपुर के समाजसेवी घनश्याम वैष्णव ने इस भव्य प्रतिमा को साकार किया है। इस अनोखे धार्मिक अनुष्ठान का यह लगातार चौथा वर्ष है। इस साल भगवान गणेश की इस अलौकिक प्रतिमा को बनाने में लगभग 31 किलोग्राम पवित्र मौली का इस्तेमाल किया गया है। अगर हम बप्पा की इस पूरी प्रतिमा के कुल वजन की बात करें, तो इसका भार करीब 250 से 300 किलोग्राम के बीच है। मौली के इन बारीक धागों को सहेजकर भगवान गणेश की सूंड, कान, मुकुट और उनके पूरे विग्रह को ढालना बेहद जटिल और धैर्य का काम था। अब स्थिति यह है कि गणेश उत्सव की शुरुआत होते ही जोधपुर के लोग खुद ही इस मौली वाले गजानन जी के पंडाल के बारे में पूछने लगते हैं, जिससे इस क्षेत्र को एक नई पहचान मिली है।

## पारिवारिक बैठक से निकला एक अनोखा और अभिनव विचार
इस कलात्मक प्रतिमा के निर्माण के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प और प्रेरणादायक है। समाजसेवी घनश्याम वैष्णव ने बताया कि मौली से गजानन जी की प्रतिमा बनाने का यह विचार किसी बाहरी योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच हुई एक आम बातचीत से उपजा था। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व से पहले उनके बेटों, बहुओं, बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों ने बैठकर चर्चा की कि इस बार कुछ ऐसा किया जाना चाहिए जो पारंपरिक होने के साथ-साथ बिल्कुल अनूठा हो। इसी विमर्श के दौरान पवित्र रक्षासूत्र का उपयोग करने का विचार सामने आया। चूंकि सनातन धर्म में कोई भी पूजा मौली, अक्षत और रोली के बिना अधूरी मानी जाती है और सबसे पहले विघ्नहर्ता गणेश जी का ही स्मरण किया जाता है, इसलिए मौली से बप्पा की प्रतिमा बनाना श्रद्धा और परंपरा का सबसे सुंदर संगम बन गया। परिवार के स्तर पर शुरू हुई यह छोटी सी पहल आज पूरे जोधपुर शहर में एक भव्य उत्सव का रूप ले चुकी है।

## 23 सितंबर को प्रकाश माली के भजनों से गूंजेगा पंडाल
इस धार्मिक उत्सव को और अधिक यादगार बनाने के लिए लाल सिंह कॉलोनी में विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। आयोजक घनश्याम वैष्णव ने जानकारी दी कि आगामी 23 सितंबर को यहां एक भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक प्रकाश माली अपनी प्रस्तुति देंगे। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर स्थानीय निवासियों और भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल मौली वाले गजानन जी की इस सुंदर प्रतिमा को जोधपुर शहर में अपनी कलात्मकता, सुंदरता और नवाचार के लिए दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था। हालांकि, इस साल चुनावी व्यस्तताओं और प्रशासनिक गतिविधियों के कारण आयोजन की तैयारियों को शुरू करने में थोड़ी देरी जरूर हुई थी, लेकिन अब स्थानीय लोगों और आयोजकों के अथक प्रयासों से तैयारियां पूरी गति से चल रही हैं ताकि इस उत्सव को ऐतिहासिक बनाया जा सके।

## इसका आप पर असर
यह अनोखा धार्मिक आयोजन न केवल सांस्कृतिक मूल्यों को संजोता है बल्कि समाज को नई दिशा भी देता है।

- **पर्यावरण-अनुकूल त्योहारों को बढ़ावा:** यह पहल देश भर के लोगों को प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करती है। इससे विसर्जन के दौरान जलाशयों में होने वाले प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- **जोधपुर में सांस्कृतिक जुड़ाव:** जोधपुर के स्थानीय निवासियों को इस भव्य और अनूठी कलाकृति के दर्शन करने के साथ-साथ 23 सितंबर को होने वाले प्रकाश माली के भजन कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिलेगा। यह निःशुल्क आयोजन स्थानीय समुदाय को एकजुट करने और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने का काम कर रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस अनूठी प्रतिमा का निर्माण पारंपरिक आस्था को नए रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से किया गया है।

- **पारिवारिक विमर्श:** समाजसेवी घनश्याम वैष्णव के परिवार के सदस्यों ने गणेश उत्सव के दौरान कुछ अलग और लीक से हटकर करने का निश्चय किया था। बच्चों और बहुओं की आपसी चर्चा के बाद इस रचनात्मक विचार को धरातल पर उतारा गया।
- **मौली का धार्मिक महत्व:** सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में मौली बांधने और प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा करने का विधान है। इसी पारंपरिक भावना को दर्शाने के लिए मौली के लाल और पीले धागों से गजानन का स्वरूप तैयार किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. मौली वाले गजानन जी की प्रतिमा कहाँ स्थापित की गई है?
यह अनोखी प्रतिमा राजस्थान के जोधपुर शहर की लाल सिंह कॉलोनी में स्थापित की गई है।

### 2. इस प्रतिमा को बनाने में कितने किलो मौली का उपयोग किया गया है?
इस भव्य प्रतिमा को तैयार करने में लगभग 31 किलोग्राम पवित्र मौली (रक्षासूत्र) का उपयोग किया गया है।

### 3. इस मौली वाले गणेश जी की प्रतिमा का कुल वजन कितना है?
इस प्रतिमा का कुल वजन करीब 250 से 300 किलोग्राम के बीच बताया जा रहा है।

### 4. इस अनोखे धार्मिक आयोजन के मुख्य सूत्रधार कौन हैं?
इस आयोजन की शुरुआत और देखरेख स्थानीय समाजसेवी घनश्याम वैष्णव और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा की जा रही है।

### 5. इस पंडाल में विशेष भजन संध्या का आयोजन कब किया गया है?
आगामी 23 सितंबर को इस पंडाल में राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक प्रकाश माली का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

### 6. क्या इस अनूठी प्रतिमा को पहले भी कोई पुरस्कार मिला है?
हाँ, पिछले वर्ष मौली वाले गजानन जी की प्रतिमा को जोधपुर शहर में अपनी सुंदरता और कलात्मकता के लिए द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ था।

## प्रेरणा और सबक
एक सामान्य परिवार की छोटी सी सोच कैसे एक बड़े सामुदायिक उत्सव में बदल सकती है, यह आयोजन इसका बेहतरीन उदाहरण है।

- **नवाचार और परंपरा का मेल:** पारंपरिक पूजा सामग्री का उपयोग करके एक नई कलाकृति का निर्माण करना सिखाता है कि हम पुरानी रूढ़ियों को तोड़े बिना भी नवाचार कर सकते हैं।
- **पारिवारिक एकता की शक्ति:** पूरा परिवार मिलकर जब किसी रचनात्मक विचार पर काम करता है, तो वह एक बड़े सामाजिक प्रभाव में बदल जाता है।
- **सतत निरंतरता:** शुरुआती सफलता के बाद पिछले चार वर्षों से इस आयोजन को लगातार जारी रखना यह साबित करता है कि प्रतिबद्धता से ही किसी पहचान को स्थापित किया जा सकता है।

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