# राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मीठे पानी के कछुओं की गणना शुरू, वन्यजीव संरक्षण में नया अध्याय

> भरतपुर के प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार मीठे पानी के कछुओं का व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना और प्रजातियों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-keoladeo-national-park-men-mithe-pani-ke-kachhuon-ki-ganana-shuru-vanyajiva-snrakshana-men-naya-adhyaya-26197 · **Language:** Hindi
**Tags:** केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर, कछुआ संरक्षण, मीठे पानी के कछुए, राजस्थान वन्यजीव, पर्यावरण

भरतपुर स्थित विश्वविख्यात केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में जलीय जीवों के संरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक पहल की गई है। पक्षियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले इस दलदली क्षेत्र में पहली बार मीठे पानी के कछुओं की वैज्ञानिक आधार पर विस्तृत गणना और अध्ययन शुरू किया गया है। उद्यान प्रबंधन द्वारा संचालित इस विशेष सर्वेक्षण के माध्यम से जलचर कछुओं की विभिन्न प्रजातियों, उनकी कुल आबादी, फैलाव और उनके प्राकृतिक आवास की भौतिक स्थितियों से संबंधित प्रमाणिक आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं।

## संरक्षण योजनाओं के लिए जुटाए जा रहे महत्वपूर्ण आंकड़े
इस वैज्ञानिक अध्ययन के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञ उद्यान के अलग-अलग जलाशयों तथा आर्द्रभूमि हिस्सों की गहन मैपिंग कर रहे हैं। अध्ययन का मुख्य ध्यान यह चिह्नित करने पर है कि उद्यान के कौन से हिस्से कछुओं के अनुकूल हैं और कहाँ उनकी सघनता अधिक पाई जाती है। इसके साथ ही शोधकर्ता कछुओं की आहार संबंधी प्राथमिकताओं, उनके प्रजनन चक्र, सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं और पानी की गुणवत्ता का भी बारीक मूल्यांकन कर रहे हैं। इन एकत्रित जानकारियों के आधार पर आने वाले वर्षों में कछुओं की सुरक्षा और उनके संवर्धन के लिए एक सुदृढ़ वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

## राजस्थान की जलीय जैव विविधता में केवलादेव का योगदान
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पूरे राजस्थान राज्य में मीठे पानी के कछुओं की कुल 11 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 7 प्रजातियां अकेले केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के पारिस्थितिकी तंत्र में दर्ज की जा चुकी हैं। राज्य में मौजूद कुल प्रजातियों में से लगभग दो-तिहाई की उपस्थिति इस राष्ट्रीय उद्यान को कछुआ संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण बनाती है। मीठे पानी के कछुए जलीय पर्यावरण में खाद्य श्रृंखला को संतुलित रखने और जैविक अपशिष्ट को साफ करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी आर्द्रभूमि में कछुओं की पर्याप्त संख्या वहां के संपूर्ण पर्यावरण के स्वस्थ होने का प्रत्यक्ष प्रमाण मानी जाती है।

## पक्षियों के साथ जलीय जीवों का एकीकृत संरक्षण
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की पहचान लंबे समय से हर साल आने वाले हजारों देशी और विदेशी प्रवासी पक्षियों के सुरक्षित ठिकाने के रूप में रही है। हालांकि कछुओं पर केंद्रित इस पहले वैज्ञानिक सर्वेक्षण से उद्यान की जैविक विविधता को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत हुआ है। इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों से न केवल कछुओं के प्राकृतिक आवास में सुधार होगा, बल्कि बदलते मौसम, तापमान और जलस्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव का जलीय आबादी पर पड़ने वाले असर को भी सटीकता से समझा जा सकेगा। इस पहल से केवलादेव अब पक्षी अभयारण्य के साथ-साथ जलीय वन्यजीवों के संरक्षण का भी एक बड़ा शोध केंद्र बनकर उभर रहा है।

## इसका आप पर असर
यह वैज्ञानिक सर्वेक्षण केवलादेव के आर्द्रभूमि तंत्र और क्षेत्रीय वन्यजीव प्रबंधन को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित करेगा।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर आर्द्रभूमि संरक्षण नीतियों को मजबूत डेटा मिलेगा, जिससे अन्य राज्यों के राष्ट्रीय उद्यानों में भी जलीय जीवों की गणना के लिए वैज्ञानिक मॉडल तैयार किए जा सकेंगे।
- **राजस्थान में:** राज्य में मौजूद मीठे पानी के कछुओं की 11 प्रजातियों में से दो-तिहाई की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे प्रदेश के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और जल स्रोतों की जैविक स्वच्छता बनी रहेगी।
- **पर्यटन और शोध के लिए:** भरतपुर आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव शोधकर्ताओं को अब पक्षियों के अलावा जलीय जीवों और कछुओं के व्यवहार पर भी नई जानकारियां और अध्ययन के अवसर मिलेंगे।
- **स्थानीय पर्यावरण के लिए:** केवलादेव दलदल में जलस्तर और खाद्य श्रृंखला संतुलित रहने से स्थानीय जलीय पर्यावरण लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में कौन सा नया सर्वेक्षण शुरू हुआ है?
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार मीठे पानी के कछुओं (फ्रेश वॉटर टर्टल) का व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू किया गया है।

### 2. इस राष्ट्रीय उद्यान में कछुओं की कितनी प्रजातियां पाई जाती हैं?
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मीठे पानी के कछुओं की 7 प्रजातियां दर्ज की गई हैं।

### 3. पूरे राजस्थान में मीठे पानी के कछुओं की कितनी प्रजातियां मौजूद हैं?
पूरे राजस्थान राज्य में मीठे पानी के कछुओं की लगभग 11 प्रजातियां पाई जाती हैं।

### 4. केवलादेव में कछुओं के वैज्ञानिक सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य कछुओं की प्रजातियों, आबादी, फैलाव और उनके प्राकृतिक आवास से जुड़े आंकड़े जुटाकर दीर्घकालिक संरक्षण योजनाएं तैयार करना है।

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