राजस्थान के नोहर में सिर्फ दो पार्षदों वाली भाजपा ने बनाई पालिका, बिसाऊ में एक वोट से जीती कांग्रेस राजस्थान के निकाय चुनाव में नोहर में लॉटरी से भाजपा ने कांग्रेस को मात देकर पालिकाध्यक्ष पद जीता, जबकि बिसाऊ में कांग्रेस की सलमा बानो ने एक वोट से विजय पाई। राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में अप्रत्याशित सियासी घटनाक्रम देखने को मिला है, जहाँ दो अलग-अलग निकायों में मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर जाकर खत्म हुआ। झुंझुनूं जिले के बिसाऊ में कांग्रेस उम्मीदवार ने एक वोट के बेहद करीबी अंतर से बाजी मारी। वहीं दूसरी ओर, हनुमानगढ़ जिले की नोहर नगरपालिका में महज दो पार्षदों के दम पर चुनाव में उतरी भारतीय जनता पार्टी ने पूरा समीकरण पलटते हुए पालिकाध्यक्ष की कुर्सी अपने नाम कर ली। बिसाऊ में एक वोट के अंतर से कांग्रेस की जीत झुंझुनूं जिले की बिसाऊ नगरपालिका में चेयरमैन पद के चुनाव में कांग्रेस की सलमा बानो और भाजपा की सोनम देवी आमने-सामने थीं। मतदान से पहले के संख्या बल पर नजर डालें तो भाजपा खेमे में 13 पार्षद बताए जा रहे थे, जबकि कांग्रेस के पास 12 पार्षदों का समर्थन दिखाई दे रहा था। इस तरह मुकाबला कागजों पर भाजपा के पक्ष में झुका हुआ माना जा रहा था। मतगणना पूरी होने पर नतीजों ने सभी को चौंका दिया। क्रॉस वोटिंग या पाला बदलने के चलते कांग्रेस की सलमा बानो ने सोनम देवी को ठीक एक मत से शिकस्त दे दी। एक वोट के इस बेहद मामूली अंतर से मिली जीत ने बिसाऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जश्न मनाने का मौका दिया, जबकि भाजपा को अपनी मजबूत स्थिति के बावजूद अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। नोहर में 40 वार्डों की नगरपालिका का रोचक गणित हनुमानगढ़ जिले के नोहर में स्थानीय निकाय की जंग इससे भी कहीं अधिक नाटकीय साबित हुई। नोहर नगरपालिका कुल 40 वार्डों में बंटी हुई है। आम चुनाव के परिणाम सामने आए तो कांग्रेस ने अकेले दम पर 20 वार्डों में जीत हासिल की थी, जो बहुमत के आंकड़े से सिर्फ एक कदम दूर थी। वहीं भाजपा के खाते में मात्र 2 सीटें आई थीं। शेष 18 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इस पूरे मुकाबले में 18 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे अहम बन गई थी। कांग्रेस को अपना बोर्ड बनाने के लिए सिर्फ एक और वोट की दरकार थी, जबकि भाजपा को 18 में से सभी निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने की कड़ी चुनौती थी। टाई होने के बाद लॉटरी से हुआ पालिकाध्यक्ष का फैसला पालिकाध्यक्ष पद के लिए भाजपा की ओर से हाजन खातून टाक चुनावी मैदान में थीं, जबकि कांग्रेस ने सुमित चाचाण को अपना प्रत्याशी बनाया था। सुमित चाचाण नोहर के स्थानीय कांग्रेस विधायक अमित चाचाण के भाई हैं, जिससे यह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई थी। मतदान के बाद जब मतों की गिनती हुई, तो दोनों ही प्रत्याशियों को 20-20 वोट मिले। वोटों के इस गणित से साफ हो गया कि 2 पार्षदों वाली भाजपा सभी 18 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रही और उसका आंकड़ा 20 तक पहुंच गया। इसके विपरीत, 20 पार्षदों वाली कांग्रेस एक भी निर्दलीय पार्षद को अपने साथ नहीं जोड़ पाई और अपने मूल 20 वोटों पर ही सिमट गई। दोनों पक्षों को बराबर मत मिलने की स्थिति में नियमों के अनुसार परिणाम तय करने के लिए लॉटरी निकाली गई। लॉटरी की इस प्रक्रिया में भाग्य ने भाजपा का साथ दिया और हाजन खातून टाक की पर्ची निकली। इस तरह भाजपा प्रत्याशी को पालिकाध्यक्ष घोषित किया गया और कांग्रेस को हाथ में आई बाजी गंवानी पड़ी। इसका आप पर असर स्थानीय निकायों में अध्यक्ष पद के इन चुनावी परिणामों का सीधा असर दोनों क्षेत्रों के प्रशासनिक कामकाज और स्थानीय विकास योजनाओं पर पड़ेगा। • राजस्थान में: राज्य भर में स्थानीय निकायों के समीकरणों में निर्दलीयों की अहमियत एक बार फिर रेखांकित हुई है। प्रमुख राजनीतिक दल अब अपने बागी और निर्दलीय पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर फिर से विचार करेंगे। • नोहर में: भाजपा अध्यक्ष बनने से पालिका बोर्ड में निर्दलीयों का प्रभाव काफी अधिक रहेगा। विकास कार्यों और बजट प्रस्तावों को पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को लगातार 18 निर्दलीय पार्षदों की सहमति पर निर्भर रहना पड़ेगा। • बिसाऊ में: कांग्रेस को महज एक वोट की बढ़त के साथ बोर्ड का संचालन करना होगा। किसी भी नीतिगत फैसले पर पालिका प्रशासन को अपने सभी पार्षदों की शत-प्रतिशत मौजूदगी और समर्थन की आवश्यकता बनी रहेगी। • स्थानीय नागरिकों के लिए: दोनों ही पालिकाओं में कड़ा मुकाबला रहने के कारण विपक्षी खेमा हर फैसले पर कड़ी निगरानी रखेगा। इससे नगर पालिका की नागरिक सेवाओं, साफ-सफाई और बुनियादी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की मांग बढ़ेगी। ऐसा क्यों हुआ यह उलटफेर मुख्य रूप से निर्दलीय पार्षदों के अप्रत्याशित ध्रुवीकरण और दलीय खेमों में क्रॉस वोटिंग के कारण संभव हुआ। दोनों ही स्थानों पर शुरुआती संख्या बल मतदान के दिन टिक नहीं सका। • नोहर में निर्दलीयों की लामबंदी: नोहर में चुनाव जीते सभी 18 निर्दलीय पार्षदों ने मिलकर केवल दो पार्षदों वाली भाजपा के पक्ष में मतदान कर दिया। कांग्रेस अपने 20 पार्षदों के अलावा किसी भी निर्दलीय को अपने पक्ष में नहीं ला सकी, जिससे 20-20 का टाई बना और नतीजा लॉटरी से तय हुआ। • बिसाऊ में संभावित क्रॉस वोटिंग: बिसाऊ में भाजपा के पास कागजों पर 13 पार्षद थे जबकि कांग्रेस के पास 12 पार्षद बताए जा रहे थे। चुनाव के दौरान भाजपा खेमे से कम से कम एक मत कांग्रेस प्रत्याशी सलमा बानो के पक्ष में गया, जिससे परिणाम पलट गया। • स्थानीय राजनीतिक खींचतान: नोहर में स्थानीय विधायक के भाई के प्रत्याशी होने के चलते मुकाबला बेहद प्रतिष्ठापूर्ण था। इसके चलते निर्दलीय गुटों ने एकजुट होकर कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देने का फैसला किया। सवाल-जवाब 1. नोहर नगरपालिका में पालिकाध्यक्ष का चुनाव किसने जीता? नोहर में भाजपा उम्मीदवार हाजन खातून टाक ने लॉटरी के जरिए पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव जीता। 2. नोहर में कुल कितने वार्ड हैं और शुरुआती नतीजे क्या रहे थे? नोहर में कुल 40 वार्ड हैं, जिनमें कांग्रेस को 20, भाजपा को 2 और निर्दलीयों को 18 सीटें मिली थीं। 3. नोहर में फैसला लॉटरी से क्यों करना पड़ा? भाजपा की हाजन खातून टाक और कांग्रेस के सुमित चाचाण दोनों को बराबर 20-20 वोट मिले थे, इसलिए टाई होने पर लॉटरी निकाली गई। 4. बिसाऊ नगरपालिका में चेयरमैन पद पर किसकी जीत हुई? झुंझुनूं के बिसाऊ में कांग्रेस की सलमा बानो ने भाजपा की सोनम देवी को एक वोट से हराकर जीत दर्ज की। 5. बिसाऊ में मतदान से पहले दोनों दलों के पास कितने पार्षद बताए जा रहे थे? मतदान से पहले भाजपा खेमे में 13 और कांग्रेस खेमे में 12 पार्षद बताए जा रहे थे। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-nohar-men-sirpha-do-parshadon-vali-bjp-ne-banai-palika-bisau-men-eka-vota-se-jiti-congress-35624 TrendKia — Har trend, sabse pehle.